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Blog / 26 Sep 2026

मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में अफस्पा का विस्तार

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम (AFSPA), 1958 को मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के निर्दिष्ट क्षेत्रों में 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। स्थिति को देखते हुए यदि आवश्यकता नहीं होगी तो इस अवधि को कम भी किया जा सकता है। यह निर्णय इन राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है।

अफस्पा (AFSPA) क्या है?

AFSPA, 1958 एक विशेष सुरक्षा कानून है, जो सशस्त्र बलों को “अशांत क्षेत्र” (Disturbed Areas) घोषित किए गए क्षेत्रों में कुछ विशेष अभियान चलाने की शक्तियाँ प्रदान करता है। इसका उद्देश्य उग्रवाद, सशस्त्र हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरों से निपटने में सुरक्षा बलों की सहायता करना है।

वर्तमान स्थिति:

वर्तमान में AFSPA अधिनियम केवल तीन राज्यों में लागू है, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर शामिल हैं।

मणिपुर

  • मणिपुर में AFSPA को पूरे राज्य में बढ़ाया गया है।
  • हालांकि, पाँच जिलों के 13 पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र वाले क्षेत्रों को अशांत क्षेत्र की अधिसूचना से बाहर रखा गया है।
  • यह सुरक्षा स्थिति के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है।

नागालैंड

नागालैंड के नौ जिलों में AFSPA को बढ़ाया गया है:

  • दीमापुर
  • निउलैंड
  • चुमौकेदिमा
  • मोन
  • किफिरे
  • नोकलाक
  • फेक
  • पेरेन
  • मेलुरी

अरुणाचल प्रदेश

  • अरुणाचल प्रदेश के निर्दिष्ट क्षेत्रों में भी AFSPA को बढ़ाया गया है।

AFSPA के प्रमुख प्रावधान

1. अशांत क्षेत्र की घोषणा

धारा 3 के तहत, जब किसी क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाएँ जिनमें असाधारण सुरक्षा शक्तियों का प्रयोग आवश्यक हो, तो निर्दिष्ट क्षेत्रों को “अशांत क्षेत्र” घोषित किया जा सकता है।

2. बल प्रयोग की शक्ति

अधिकृत सुरक्षा कर्मी निर्धारित परिस्थितियों में बल का प्रयोग, जिसमें कुछ परिस्थितियों में घातक बल का प्रयोग भी शामिल है, कर सकते हैं। यह शक्ति अधिनियम में निर्धारित सुरक्षा उपायों के अधीन होती है।

3. गिरफ्तारी और तलाशी

सुरक्षा कर्मियों को निर्धारित परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी करने तथा बिना वारंट तलाशी लेने की शक्तियाँ प्राप्त हैं।

4. संरचनाओं को नष्ट करने की शक्ति

सशस्त्र समूहों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुछ ठिकानों, आश्रयों या किलेबंद संरचनाओं को अधिनियम के तहत नष्ट किया जा सकता है।

5. कानूनी संरक्षण

अधिनियम के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए किए गए कार्यों के संबंध में सुरक्षा कर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।

6. गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस को सौंपना

AFSPA के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यथासंभव कम से कम देरी के साथ निकटतम पुलिस थाने को सौंपना आवश्यक है।

चिंताएँ:

AFSPA विवादास्पद बना हुआ है क्योंकि इससे संबंधित प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं:

  • मानवाधिकारों का उल्लंघन और बल के अत्यधिक प्रयोग की आशंका
  • पूर्व अनुमति की आवश्यकता के कारण जवाबदेही से जुड़ी सीमाएँ
  • सुरक्षा संस्थानों में जनविश्वास के कमजोर होने की संभावना
  • असाधारण सुरक्षा कानून पर लंबे समय तक निर्भरता

इसके साथ ही, समर्थकों का तर्क है कि AFSPA अशांत क्षेत्रों में उग्रवाद और सशस्त्र समूहों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को आवश्यक परिचालनात्मक लचीलापन प्रदान करता है।

संवैधानिक और न्यायिक दृष्टिकोण:

AFSPA का मूल्यांकन संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के संदर्भ में किया जाना चाहिए। नागा पीपुल्स मूवमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स बनाम भारत संघ (1997) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने AFSPA की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, लेकिन इसके प्रयोग को नियंत्रित करने वाले सुरक्षा उपायों पर जोर दिया।

आगे की राह:

एक संतुलित दृष्टिकोण में राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • अशांत क्षेत्र की अधिसूचनाओं की नियमित समीक्षा
  • नागरिक पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना
  • जवाबदेही के तंत्र को मजबूत करना
  • स्थानीय हितधारकों के साथ संवाद
  • जहाँ सामान्य कानून-व्यवस्था की व्यवस्था पर्याप्त हो जाए, वहाँ AFSPA की चरणबद्ध वापसी

निष्कर्ष:

AFSPA का विस्तार सुरक्षा बनाए रखने और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के बीच संतुलन की निरंतर चुनौती को उजागर करता है। इसलिए इसका प्रयोग क्षेत्र-विशिष्ट, समय-समय पर समीक्षा आधारित तथा मजबूत जवाबदेही और शांति-निर्माण उपायों के साथ किया जाना चाहिए। 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj