संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय बजट 2026–2027 में उत्तर भारत में दूसरे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS-2) की स्थापना की घोषणा की गई है। एनआईएमएएनएचएस-2 को बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान के मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य तंत्रिका विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली उपचार सेवाएं, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देना है, ताकि देशभर में उन्नत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके।
मानसिक स्वास्थ्य के बारे में:
-
-
-
- मानसिक स्वास्थ्य ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति जीवन के सामान्य तनावों का संतुलित ढंग से सामना कर सके, प्रभावी रूप से कार्य कर सके, निरंतर सीख सके और समाज में सकारात्मक योगदान दे सके। इसमें भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है।
- कमज़ोर मानसिक स्वास्थ्य चिंता, अवसाद, सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) जैसे विकारों और अन्य गंभीर मानसिक स्थितियों के रूप में प्रकट हो सकता है। ये समस्याएँ व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, सामाजिक जीवन और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। भारत में बढ़ते तनाव, तेज़ शहरीकरण और महामारी के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के कारण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। समय पर परामर्श और उपचार उपलब्ध होने से गंभीर संकटों को रोका जा सकता है, जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा सामाजिक और आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।
- मानसिक स्वास्थ्य ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति जीवन के सामान्य तनावों का संतुलित ढंग से सामना कर सके, प्रभावी रूप से कार्य कर सके, निरंतर सीख सके और समाज में सकारात्मक योगदान दे सके। इसमें भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है।
-
-
केंद्रीय बजट 2026–2027 की प्रमुख पहलें:
-
-
-
- NIMHANS का विस्तार:
- उत्तरी भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान-2 की स्थापना।
- बेंगलुरु स्थित संस्थान के मॉडल पर आधारित उच्च स्तरीय उपचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण व्यवस्था।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और तृतीयक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास।
- उत्तरी भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान-2 की स्थापना।
- मौजूदा संस्थानों का उन्नयन:
- रांची स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) और तेजपुर स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई क्षेत्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (LGBRIMH) को क्षेत्रीय सर्वोच्च संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।
- इससे विशेष उपचार सुविधाएँ, शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भारत में आघात सहायता सेवाएँ सुदृढ़ होंगी।
- रांची स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) और तेजपुर स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई क्षेत्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (LGBRIMH) को क्षेत्रीय सर्वोच्च संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।
- आपातकालीन और आघात देखभाल केंद्रों की स्थापना:
- देश के सभी जिला अस्पतालों में आपातकालीन और आघात देखभाल केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- ये केंद्र सस्ती, सुलभ और 24×7 चिकित्सा एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।
- यह पहल दुर्घटना पीड़ितों, हिंसा से प्रभावित लोगों और तीव्र मानसिक तनाव झेल रहे व्यक्तियों के लिए प्रभावी संकट प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।
- इन सभी उपायों का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को घटाना, सेवाओं को अधिक किफायती बनाना और समाज के कमजोर वर्गों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को मजबूत करना है।
- देश के सभी जिला अस्पतालों में आपातकालीन और आघात देखभाल केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- NIMHANS का विस्तार:
-
-
भारत की मानसिक स्वास्थ्य यात्रा:
भारत ने विधायी सुधारों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और डिजिटल पहलों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को लगातार मजबूत किया है।
-
-
-
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017:
- इस अधिनियम ने 1987 के मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का स्थान लिया।
- यह अधिनियम सस्ती और गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार सुनिश्चित करता है।
- विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों संबंधी संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD) के अनुरूप गरिमा और अधिकारों की रक्षा करता है।
- आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से बाहर कर पुनर्वास पर बल देता है।
- इस अधिनियम ने 1987 के मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का स्थान लिया।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017:
- मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्वीकार करती है।
- विशेषज्ञों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर जोर देती है।
- प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाती है।
- मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्वीकार करती है।
- आयुष्मान भारत के माध्यम से एकीकरण:
- 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल हैं।
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के अंतर्गत 22 मानसिक स्वास्थ्य उपचार प्रक्रियाएं कैशलेस सुविधा के साथ उपलब्ध हैं।
- 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल हैं।
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम:
- 1982 में शुरू किया गया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मानसिक स्वास्थ्य को जोड़ने का प्रयास करता है। 1996 में आरंभ किया गया जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अब 767 जिलों में लागू है। इसके अंतर्गत बाह्य रोगी सेवाएं, आंतरिक रोगी सुविधाएं, आत्महत्या रोकथाम पहल और जागरूकता अभियान समर्पित मानसिक स्वास्थ्य टीमों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
- 1982 में शुरू किया गया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मानसिक स्वास्थ्य को जोड़ने का प्रयास करता है। 1996 में आरंभ किया गया जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अब 767 जिलों में लागू है। इसके अंतर्गत बाह्य रोगी सेवाएं, आंतरिक रोगी सुविधाएं, आत्महत्या रोकथाम पहल और जागरूकता अभियान समर्पित मानसिक स्वास्थ्य टीमों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
- राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (2022):
- वर्ष 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी का लक्ष्य।
- स्कूलों और कार्यस्थलों में नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच को प्रोत्साहन।
- संकट हेल्पलाइन और उच्च जोखिम समूहों के लिए विशेष सहायता व्यवस्था।
- वर्ष 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी का लक्ष्य।
- राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (टेली-MANAS):
- 2022 में शुरू किया गया टेली-MANAS, 20 भाषाओं में 24×7 टोल-फ्री परामर्श सेवा प्रदान करता है। इसके तहत अब तक 33 लाख से अधिक कॉलों का समाधान किया जा चुका है। इसमें मोबाइल ऐप, “अस्मि” नामक एआई चैटबॉट तथा देशव्यापी वीडियो परामर्श सेवाएं शामिल हैं। यह जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का डिजिटल विस्तार है।
- 2022 में शुरू किया गया टेली-MANAS, 20 भाषाओं में 24×7 टोल-फ्री परामर्श सेवा प्रदान करता है। इसके तहत अब तक 33 लाख से अधिक कॉलों का समाधान किया जा चुका है। इसमें मोबाइल ऐप, “अस्मि” नामक एआई चैटबॉट तथा देशव्यापी वीडियो परामर्श सेवाएं शामिल हैं। यह जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का डिजिटल विस्तार है।
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017:
-
-
इन सभी पहलों के माध्यम से भारत एक समावेशी, सुलभ, किफायती और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है, जिससे प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

