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Blog / 05 May 2026

आधार जारी करना और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: सुप्रीम कोर्ट में बहस

आधार जारीकरण और सुरक्षा संबंधी चिंताएं

संदर्भ:

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर विचार करने को कहा है, जिसमें मांग की गई है कि आधार कार्ड केवल बच्चों को ही जारी किया जाए। साथ ही, न्यायालय ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को वयस्कों और किशोरों के लिए आधार जारी करने हेतु कड़े दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया है। इस याचिका में अवैध पहचान बनाने और घुसपैठ के लिए आधार के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:

      • आधार तक आसान पहुंच गैर-नागरिकों या घुसपैठियोंको भारतीय पहचान दस्तावेज प्राप्त करने में दुरुपयोग का अवसर दे सकती है।
      • किराया समझौता और 182 दिन का निवास जैसी बुनियादी शर्तें किसी व्यक्ति को आधार के लिए पात्र बना सकती हैं।
      • आधार का उपयोग अन्य पहचान पत्र प्राप्त करने के लिए गेटवेके रूप में हो सकता है, जैसे:
        • राशन कार्ड
        • पासपोर्ट
        • बैंक खाते
      • बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप, जिनमें मुंबई में 87,000 फर्जी दस्तावेज मिलने का मामला शामिल है।
      • सब्सिडी वाले राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर चिंता।
      • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि घुसपैठ एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसका उद्देश्य भारत के कल्याणकारी संसाधनों का दुरुपयोग करना है।

आधार के बारे में:

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किया जाने वाला आधार एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जो बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा पर आधारित होती है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • डेटा का प्रकार: बायोमेट्रिक (आईरिस, फिंगरप्रिंट, चेहरा) + जनसांख्यिकीय (नाम, जन्मतिथि, पता)
      • कानूनी स्थिति: आधार अधिनियम, 2016 के तहत एक वैधानिक निकाय
      • उद्देश्य: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), वित्तीय समावेशन और डिजिटल प्रमाणीकरण में उपयोग

आधार की कानूनी स्थिति:

      • न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (2018) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आधार को संवैधानिक रूप से वैध माना।
      • प्रमुख निर्णय सिद्धांत:
        • आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है
        • यह केवल पहचान/निवास का प्रमाण है
        • गोपनीयता सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए

नीतिगत ढांचा:

      • JAM ट्रिनिटी  (जन धनआधारमोबाइल) कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी में सुधार और लीकेज कम करती है।
      • आधार केवल भारत की संचित निधि से वित्तपोषित सब्सिडी (धारा 7) के लिए अनिवार्य है।
      • निजी संस्थाएँ आधार को अनिवार्य नहीं बना सकतीं।
      • बैंकिंग और दूरसंचार जैसी सेवाओं में नियंत्रित शर्तों के तहत आधार लिंकिंग की अनुमति है।

बहस के मुख्य मुद्दे:

      • आधार के लाभ:

        • कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी
        • डुप्लीकेशन और लीकेज में कमी
        • वित्तीय समावेशन और डिजिटल शासन को बढ़ावा
      • चिंताएँ:

        • गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़े जोखिम
        • पहचान के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की आशंका
        • आधार के अनिवार्य उपयोग के विस्तार पर बहस

निष्कर्ष:

सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और समावेशी डिजिटल शासन के बीच चल रहे संतुलन को दर्शाता है। आधार भारत की कल्याणकारी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सत्यापन व्यवस्था, संतुलित नियमन और प्रभावी डेटा सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है, ताकि इसकी पहुंच प्रभावित न हो।

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