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Blog / 16 Apr 2026

9वां हिंद महासागर सम्मेलन (IOC 2026)

संदर्भ:

हाल ही में 9वां हिंद महासागर सम्मेलन (IOC 2026) मॉरीशस के पोर्ट लुई में हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक उत्तरदायित्व” (Collective Stewardship for Indian Ocean Governance) विषय के तहत आयोजित किया गया। यह सम्मेलन भारत फाउंडेशन द्वारा मॉरीशस सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसमें हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सतत विकास के लिए साझा जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।

हिंद महासागर सम्मेलन के बारे में:

IOC की शुरुआत 2016 में भारत फाउंडेशन द्वारा की गई थी। यह मंच हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय और द्वीपीय देशों के साथ-साथ साझेदार देशों और संगठनों को एक साथ लाता है। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सतत विकास पर संवाद को बढ़ावा देना है।

IOC 2026 के प्रमुख विषय:

      • समुद्री सुरक्षा (Maritime Security): सम्मेलन में सुरक्षित और संरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। समुद्री डकैती, भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता से समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
      • ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में संघर्षों और चोकपॉइंट बाधाओं के कारण उत्पन्न कमजोरियों को उजागर किया गया। विविधीकृत और लचीली आपूर्ति प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
      • क्षेत्रीय सहयोग: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मजबूत बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसमें क्षेत्रीय संपर्क सुधार, आपदा प्रतिक्रिया तंत्र और समुद्री देशों के बीच विश्वास निर्माण पर चर्चा हुई।
      • ब्लू इकोनॉमी और सततता: महासागर संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। मत्स्य प्रबंधन, समुद्री जैव विविधता संरक्षण और तटीय अर्थव्यवस्थाओं में जलवायु सहनशीलता पर बल दिया गया।

9th Indian Ocean Conference (IOC 2026)

भारत की भूमिका:

      • भारत ने क्षेत्र में प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता (First Responder) और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में अपनी भूमिका को दोहराया।
      • सागर (Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण के तहत भारत ने समुद्री सुरक्षा, समावेशी विकास और सहयोगात्मक सुरक्षा पर जोर दिया। भारत ने वैश्विक व्यापार के लिए स्थिर समुद्री मार्गों और तनाव कम करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

IOC 2026 का महत्व:

इस सम्मेलन ने हिंद महासागर के बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व को और मजबूत किया। इसने वैश्विक अनिश्चितता के समय में सहयोगात्मक समुद्री शासन की आवश्यकता को उजागर किया। भारत के लिए यह सम्मेलन उसे एक प्रमुख समुद्री शक्ति और इंडो-पैसिफिक स्थिरता के महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में मजबूत करता है।

हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) का महत्व:

हिंद महासागर क्षेत्र का अत्यधिक रणनीतिक और आर्थिक महत्व है:

      • यह एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्गों को जोड़ता है 
      • लगभग 50% वैश्विक कंटेनर यातायात और प्रमुख तेल आपूर्ति इसी से होकर गुजरती है 
      • इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य, बाब-अल-मंदेब और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट शामिल हैं 
      • यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता का केंद्र है। 
      • इस प्रकार, हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष:

9वां हिंद महासागर सम्मेलन 2026 ने यह स्पष्ट किया कि हिंद महासागर अब केवल एक व्यापार मार्ग नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्र बन चुका है। तटीय देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना समुद्री सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।