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Blog / 10 Jul 2026

नेशनल कैम्पा (CAMPA) की 7वीं शासी निकाय बैठक

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 10 जुलाई 2026 को कोयंबटूर स्थित CASFOS में राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (National CAMPA) की 7वीं शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक के प्रमुख निर्णय:

      • बैठक में मिष्टी (MISHTI- Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) योजना को वर्ष 2029 तक तीन वर्षों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी गई। इसके लिए ₹500 करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई, जिससे इस योजना का कुल परिव्यय बढ़कर ₹600 करोड़ हो गया। इस राशि का उपयोग मैंग्रोव वनों के पुनर्स्थापन तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए किया जाएगा।
      • बैठक में आस्था वन संरक्षण योजना को भी मंजूरी दी गई। इस योजना के लिए वर्ष 2026–31 की अवधि हेतु ₹3,000 करोड़ की प्रारंभिक निधि (Corpus) स्वीकृत की गई है। इसका उद्देश्य देशभर के लगभग 15,000 पवित्र उपवनों (आस्था वनों) का संरक्षण करना है। इसके अतिरिक्त, भूमि क्षरण (Land Degradation) एवं जैव विविधता ह्रास (Biodiversity Loss) से निपटने के लिए लैंडस्केप पुनर्स्थापन (Landscape Restoration) संबंधी एक नई योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

Chaired the 7th meeting of the Governing Body of National CAMPA today at  CASFOS, Coimbatore. Reviewed several new proposals and initiatives aimed at  strengthening compensatory afforestation, forest conservation and wildlife  protection across

वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएँ:

शासी निकाय ने चार प्रमुख वन्यजीव संरक्षण पहलों को मंजूरी दी-

      • रिवर डॉल्फिन संरक्षण एवं पुनर्प्राप्ति कार्य योजना (Conservation and Recovery Action Plan for River Dolphins)
      • प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard) चरण-II, जिसमें देशव्यापी दूसरी जनसंख्या गणना भी शामिल है।
      • भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros) संरक्षण कार्य योजना
      • जंगली जल भैंसा (Wild Water Buffalo) के लिए अखिल भारतीय संरक्षण रणनीति (Pan-India Conservation Strategy)

इसके अतिरिक्त, मणिपुर के संगाई (भौंह-सींग वाले हिरण/Brow-antlered Deer) के संरक्षण हेतु चल रहे कार्यक्रम को भी निरंतर समर्थन देने की स्वीकृति प्रदान की गई।

कैम्पा (CAMPA) के बारे में:

      • कैम्पा (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) एक वैधानिक प्राधिकरण है, जिसकी स्थापना प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम (CAF Act), 2016 के अंतर्गत की गई है। इसका उद्देश्य उन निधियों का प्रबंधन करना है, जो वन भूमि को गैर-वन प्रयोजनों के लिए परिवर्तित किए जाने पर एकत्रित की जाती हैं।
      • CAMPA का गठन प्रारंभिक रूप से वर्ष 2002 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टी. एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में किया गया था। बाद में 30 सितंबर 2018 को CAF अधिनियम लागू होने के पश्चात इसे वैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।
      • इसका प्रमुख उद्देश्य प्रतिपूरक वनीकरण, वन पुनर्जनन, वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर पारिस्थितिकीय क्षतिपूर्ति (Ecological Compensation) सुनिश्चित करना है।
      • CAMPA की निधि प्रतिपूरक वनीकरण (CA), वनों के नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) तथा वन भूमि परिवर्तन से संबंधित अन्य शुल्कों के रूप में उपयोगकर्ता एजेंसियों द्वारा किए गए भुगतानों से प्राप्त होती है।
      • CAF अधिनियम के अनुसार, 90% निधि राज्य CAMPA को हस्तांतरित की जाती है, जबकि 10% निधि राष्ट्रीय CAMPA के पास राष्ट्रीय स्तर की संरक्षण पहलों के लिए सुरक्षित रखी जाती है।
      • CAMPA निधि का उपयोग वनीकरण, सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन, वन एवं वन्यजीव प्रबंधन, मृदा एवं जल संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों से गाँवों के पुनर्वास तथा क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों में किया जाता है।
      • यह प्राधिकरण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन कार्य करता है तथा सतत वन प्रबंधन, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु अनुकूलता (Climate Resilience) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष:

राष्ट्रीय CAMPA की 7वीं शासी निकाय बैठक में लिए गए निर्णय भारत में प्रौद्योगिकी आधारित वन शासन, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन तथा वन्यजीव संरक्षण पर बढ़ते बल को दर्शाते हैं। प्रतिपूरक वनीकरण को सुदृढ़ बनाने, वैज्ञानिक निगरानी को प्रोत्साहित करने तथा नई संरक्षण पहलों के शुभारंभ के माध्यम से CAMPA देश में पारिस्थितिकीय सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु सहनशीलता को मजबूत करने के साथ-साथ सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

 

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