संदर्भ:
2024-25 के लिए उपलब्ध हालिया सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा वांछित कुल 71 भगोड़े विभिन्न विदेशी देशों में पाए गए, जो पिछले 12 वर्षों में अब तक की सबसे अधिक संख्या है। इसके बावजूद, इसी अवधि में केवल 27 भगोड़ों को ही भारत वापस लाया जा सका। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कानून से बचकर विदेश भागे व्यक्तियों को स्वदेश वापस लाना एक जटिल प्रक्रिया है। साथ ही, यह तथ्य मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा प्रभावी कानूनी तंत्र की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
प्रत्यर्पण और कानूनी ढांचा:
भारत ने अब तक 48 देशों के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण संधियाँ की हैं, जबकि 12 अन्य देशों के साथ विशेष प्रत्यर्पण व्यवस्थाएँ लागू हैं। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक सम्मेलन जैसे बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय समझौते भी विदेशों में छिपे भगोड़ों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
पिछले पाँच वर्षों में:
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- भारत द्वारा कुल 137 प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे गए।
- इनमें से 134 अनुरोध स्वीकार किए गए, किंतु 125 मामले अब भी लंबित हैं।
- भारत द्वारा कुल 137 प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे गए।
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इस पूरी अवधि में केवल 25 भगोड़ों को ही सफलतापूर्वक भारत लाया जा सका, जिससे अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं में व्याप्त गंभीर देरी स्पष्ट होती है।
सीबीआई और वैश्विक संचालन की भूमिका:
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- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अपने वैश्विक संचालन केंद्र के माध्यम से इंटरपोल चैनलों का उपयोग करते हुए भगोड़ों की भौगोलिक स्थिति का पता लगाता है और संबंधित विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करता है।
- वर्ष 2024-25 के दौरान, विदेशों को कुल 74 न्यायिक अनुरोध भेजे गए, जिन्हें लेटर रोगेटरी कहा जाता है। इनमें से 47 अनुरोधों का पूर्ण रूप से पालन किया गया। हालांकि, 31 मार्च 2025 तक कुल 533 लेटर रोगेटरी लंबित रहे, जिनमें सीबीआई से संबंधित 276 मामले तथा विभिन्न राज्य एवं केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े 257 मामले शामिल हैं।
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अपने वैश्विक संचालन केंद्र के माध्यम से इंटरपोल चैनलों का उपयोग करते हुए भगोड़ों की भौगोलिक स्थिति का पता लगाता है और संबंधित विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करता है।
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भगोड़ा आर्थिक अपराधी:
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 का उद्देश्य उन व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है, जो ₹100 करोड़ या उससे अधिक के आर्थिक अपराध करके कानूनी कार्यवाही से बचने हेतु भारत छोड़कर विदेश भाग जाते हैं।
इस अधिनियम की प्रमुख व्यवस्थाएँ:
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- संपत्ति की जब्ती: इसमें भारत तथा विदेशों में स्थित संपत्तियों के साथ-साथ बेनामी संपत्तियाँ भी शामिल हैं।
- कानूनी दावों पर रोक: ऐसे घोषित अपराधियों को भारतीय न्यायालयों में किसी भी प्रकार के दीवानी मुकदमे दायर करने या उनका प्रतिरक्षण करने की अनुमति नहीं होती।
- विशेष न्यायालय: इन मामलों की सुनवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत गठित विशेष न्यायालयों में की जाती है।
- अस्थायी कुर्की: न्यायिक कार्यवाही पूरी होने से पहले ही अपराध से संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया जा सकता है।
- संपत्ति की जब्ती: इसमें भारत तथा विदेशों में स्थित संपत्तियों के साथ-साथ बेनामी संपत्तियाँ भी शामिल हैं।
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इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आर्थिक अपराधियों को कानूनी खामियों का लाभ उठाने से रोकना तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना है।
चुनौतियाँ और आगे की राह:
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- यद्यपि रिकॉर्ड संख्या में भगोड़ों का पता लगाया गया है, फिर भी प्रक्रियागत देरी, विभिन्न देशों की अलग-अलग कानूनी प्रणालियाँ तथा लंबित न्यायिक अनुरोधों की अधिकता भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भगोड़ों की शीघ्र और प्रभावी वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि:
- द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधियों को और अधिक मजबूत किया जाए।
- इंटरपोल के माध्यम से वास्तविक समय में समन्वय को सुदृढ़ किया जाए।
- घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए।
- द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधियों को और अधिक मजबूत किया जाए।
- इसके साथ ही, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के प्रति जन-सामान्य और संस्थागत स्तर पर जागरूकता बढ़ाने से उच्च मूल्य के आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई संभव हो सकेगी।
- यद्यपि रिकॉर्ड संख्या में भगोड़ों का पता लगाया गया है, फिर भी प्रक्रियागत देरी, विभिन्न देशों की अलग-अलग कानूनी प्रणालियाँ तथा लंबित न्यायिक अनुरोधों की अधिकता भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भगोड़ों की शीघ्र और प्रभावी वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि:
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निष्कर्ष:
विदेशों में पाए गए भगोड़ों की बढ़ती संख्या एक ओर भारत की जांच और अन्वेषण क्षमताओं में हुई प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह प्रभावी और त्वरित प्रत्यर्पण तंत्र की गंभीर आवश्यकता को भी उजागर करती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करना तथा भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम जैसे कानूनी औजारों का पूर्ण और प्रभावी उपयोग करना राष्ट्रीय हितों की रक्षा तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

