संदर्भ:
हाल ही में जारी 16वीं शेर जनसंख्या अनुमान रिपोर्ट (2025) के अनुसार, भारत में एशियाई शेरों की संख्या 2020 में 674 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है, जो 32.2% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। यह संरक्षण सफलता गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य में आवास प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है, जो विश्व में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
मुख्य विशेषताएँ:
• जनसंख्या वृद्धि: पिछले एक दशक में एशियाई शेरों की आबादी में 70.36% की वृद्धि हुई है, जो 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है।
• क्षेत्र विस्तार: इसी अवधि के दौरान क्षेत्र में 59.09% की वृद्धि हुई है।
• वयस्क मादाओं की संख्या में वृद्धि: वयस्क मादाओं की संख्या 260 से बढ़कर 330 हो गई है, जो 26.9% की वृद्धि है, जिससे इस प्रजाति की प्रजनन क्षमता में वृद्धि हुई है।
क्षेत्रीय वितरण:
· अमरेली ज़िला: वर्तमान में यहाँ शेरों की संख्या सबसे अधिक है, जिसमें 82 वयस्क नर, 117 वयस्क मादा और 79 शावक हैं।
· मिटियाला वन्यजीव अभयारण्य: शेरों की आबादी में 100% की वृद्धि के साथ सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।
· भावनगर मुख्यभूमि: 84% की वृद्धि देखी गई, जबकि दक्षिण-पूर्वी तट पर 40% की वृद्धि दर्ज की गई।
· गिरावट वाले क्षेत्र: गिरनार वन्यजीव अभयारण्य (-4%) और भावनगर तट (-12%) में मामूली गिरावट देखी गई है, जो मानव-वन्यजीव संपर्कों से उत्पन्न संभावित तनाव को दर्शाती है।
चुनौतियाँ:
· इस वृद्धि के बावजूद, विशेषज्ञ मानव बस्तियों से बढ़ती निकटता के कारण शेरों के व्यवहार में बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हैं। गिर के 258 वर्ग किलोमीटर के मुख्य क्षेत्र में अब केवल 20% शेर ही रहते हैं, जबकि अधिकांश बफ़र ज़ोन और आसपास के इलाकों में रहते हैं, जहाँ वे पशुओं का शिकार करते हैं या विघटित शवों को खाते हैं।
· भारतीय वन्यजीव संस्थान, गुजरात वन विभाग और उनके सहयोगियों द्वारा 2025 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि पशुओं पर शेरों के हमले प्रति वर्ष 10% की दर से बढ़े हैं, और प्रति गाँव पशुधन की हानि में प्रति वर्ष 15% की वृद्धि हुई है।
एशियाई शेर के बारे में:
· एशियाई शेर एक विशिष्ट उप-प्रजाति है, जो विशेष रूप से गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है। अफ्रीकी शेर की तुलना में आकार में छोटा, यह अपने विशिष्ट पेट की तह और कम उभरे अयाल के लिए जाना जाता है। यह विश्व में इस प्रजाति की एकमात्र जंगली आबादी है, जिससे इसका संरक्षण वैश्विक प्राथमिकता बन गया है।
संरक्षण स्थिति और कानूनी संरक्षण:
· एशियाई शेर IUCN की लाल सूची में ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में वर्गीकृत हैं, CITES परिशिष्ट-I में सूचीबद्ध हैं और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित हैं। ये सभी वर्गीकरण उनकी संवेदनशीलता और सख्त संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
संरक्षण प्रयास और आवास विस्तार:
· प्रोजेक्ट लायन एवं एशियाई शेर संरक्षण परियोजना के तहत भारत सरकार के केंद्रित प्रयासों का मुख्य उद्देश्य आवास का सुदृढ़ीकरण, रोगों की रोकथाम एवं जनसंख्या के विस्तार को सुनिश्चित करना है। शेर अब गिर राष्ट्रीय उद्यान से बाहर निकलकर बर्दा वन्यजीव अभयारण्य एवं आसपास के क्षेत्रों में फैल चुके हैं, जहाँ उनकी जनसंख्या की नियमित जनगणना एवं निगरानी की जाती है।
निष्कर्ष:
भारत में एशियाई शेरों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि वन्यजीव संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। प्रोजेक्ट लायन एवं गुजरात सरकार के नेतृत्व में निरंतर प्रयासों से इस राजसी प्रजाति का भविष्य आशाजनक दिखाई देता है। हालांकि, मानव-शेर संघर्ष जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान और इनके साथ स्थायी सह-अस्तित्व स्थापित करना एशियाई शेरों के दीर्घकालिक अस्तित्व और समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।