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Daily-mcqs 28 Jul 2026
Q1:
हाल ही में सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सारनाथ भारत का 45वाँ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है तथा उत्तर प्रदेश का दूसरा ऐसा स्थल है। 2. भगवान बुद्ध द्वारा सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को दिया गया प्रथम उपदेश ऐतिहासिक रूप से 'धर्मचक्रप्रवर्तन (Dharmachakrapravartana)' कहलाता है। 3. सारनाथ, लुंबिनी, बोधगया और कुशीनगर के साथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
सारनाथ के यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बना, दूसरा नहीं। राज्य के अन्य तीन विश्व धरोहर स्थल हैं:
कथन 2 सही है:
गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद सारनाथ में अपने पाँच पूर्व साथियों (पंचवर्गीय भिक्षुओं) को प्रथम उपदेश दिया। इस ऐतिहासिक घटना को धर्मचक्रप्रवर्तन (Dharmachakrapravartana) अथवा "धर्म के चक्र को प्रवर्तित करना" कहा जाता है।
कथन 3 सही है:
सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। अन्य तीन हैं:
Q2:
यूनेस्को विश्व धरोहर शासन व्यवस्था तथा सारनाथ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विश्व धरोहर सूची में किसी संपत्ति को शामिल करने का अंतिम निर्णय विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee - WHC) द्वारा लिया जाता है, जिसमें 21 निर्वाचित सदस्य देश शामिल होते हैं। 2. सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष (Lion Capital) भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया है। 3. मानवता के लिए सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों की मान्यता प्रदान करने वाला विश्व धरोहर अभिसमय (World Heritage Convention) यूनेस्को की स्थापना के तुरंत बाद वर्ष 1945 में अपनाया गया था। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee - WHC) 21 निर्वाचित सदस्य देशों से मिलकर बनी होती है। यह समिति विश्व धरोहर नामांकनों का मूल्यांकन करती है तथा किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का अंतिम निर्णय लेती है।
कथन 2 सही है:
सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष (Lion Capital) भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रतीकों में से एक है। इसे भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) के रूप में अपनाया गया है।
कथन 3 गलत है:
विश्व सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अभिसमय (Convention Concerning the Protection of the World Cultural and Natural Heritage) को यूनेस्को के महासम्मेलन द्वारा वर्ष 1972 में अपनाया गया था तथा यह 1975 में प्रभावी हुआ। इसलिए इसे 1945 में अपनाया जाना गलत है।
Q3:
भारत में मध्यस्थ (Intermediary) दायित्व एवं सामग्री प्रतिबंध (Content Restriction) से संबंधित कानूनी ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 सरकार को सार्वजनिक रूप से किसी एप्लिकेशन तक पहुँच को अवरुद्ध (Blocking) करने के लिए आदेश जारी करने की स्पष्ट शक्ति प्रदान करती है। 2. यदि कोई मध्यस्थ (Intermediary) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत जारी आधिकारिक सामग्री हटाने (Content Removal) के नोटिस का पालन नहीं करता है, तो वह अपने "सेफ हार्बर (Safe Harbour)" संरक्षण को खो सकता है। 3. अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि डिजिटल संचार पर लगाया गया कोई भी प्रतिबंध आनुपातिकता (Proportionality) और आवश्यकता (Necessity) की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 सरकार को सामग्री को ब्लॉक (Block) करने या हटाने (Take Down) की स्पष्ट शक्ति प्रदान नहीं करती है।
वास्तव में, सार्वजनिक रूप से किसी वेबसाइट, ऐप या अन्य ऑनलाइन सामग्री तक पहुँच को अवरुद्ध करने की वैधानिक शक्ति धारा 69A तथा सूचना प्रौद्योगिकी (सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 (Blocking Rules, 2009) से प्राप्त होती है।
धारा 79 का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थों (Intermediaries) को "सेफ हार्बर (Safe Harbour)" अर्थात् सीमित दायित्व से कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, न कि सामग्री को अवरुद्ध करने का अधिकार देना।
धारा 79(3)(b) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 [IT Rules, 2021] के अनुसार, GitHub, Facebook, X (पूर्व में Twitter), YouTube आदि जैसे मध्यस्थों को तीसरे पक्ष द्वारा प्रकाशित सामग्री के लिए सेफ हार्बर संरक्षण प्राप्त होता है।
लेकिन यह संरक्षण सशर्त (Conditional) है। यदि किसी मध्यस्थ को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध आदेश के माध्यम से किसी अवैध सामग्री को हटाने या उसकी पहुँच रोकने का निर्देश दिया जाता है और वह समयबद्ध तरीके से उसका पालन नहीं करता, तो वह अपना सेफ हार्बर संरक्षण खो सकता है।
अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) के ऐतिहासिक निर्णय में, जो जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंदी (Internet Shutdown) से संबंधित था, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि:
Q4:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो "BitChat" जैसे विकेंद्रीकृत (Decentralized) मेश मैसेजिंग एप्लिकेशन के संबंध में हैं: 1. ये पारंपरिक इंटरनेट कनेक्टिविटी या केंद्रीकृत सर्वरों के बिना पूरी तरह कार्य करते हैं तथा डेटा के आदान-प्रदान के लिए पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer) रिले प्रणाली पर निर्भर रहते हैं। 2. ब्लूटूथ मेश नेटवर्क में प्रत्येक डिवाइस केवल प्रेषक (Sender) या केवल प्राप्तकर्ता (Receiver) के रूप में कार्य करता है, जिससे किसी तीसरे डिवाइस के मध्यस्थ (Intermediate Relay) के रूप में कार्य करने की संभावना समाप्त हो जाती है। 3. इस ऐप को चिन्हित करने वाला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre - I4C), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन एक संलग्न कार्यालय (Attached Office) है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
BitChat तथा इसी प्रकार के अन्य ब्लूटूथ मेश एप्लिकेशन पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer) नेटवर्क का उपयोग करते हैं। ये केंद्रीकृत वेब सर्वर, दूरसंचार टावर तथा सक्रिय इंटरनेट प्रोटोकॉल पर निर्भर नहीं होते। इसके स्थान पर, निकटवर्ती डिवाइस आपस में जुड़कर एक एड-हॉक (Ad-hoc) मेश नेटवर्क बनाते हैं, जिसके माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान होता है।
कथन 2 गलत है:
विकेंद्रीकृत मेश नेटवर्क में कोई भी डिवाइस केवल अंतिम बिंदु (Endpoint) नहीं होता। प्रत्येक डिवाइस प्रेषक (Sender), प्राप्तकर्ता (Receiver) तथा रिले नोड (Relay Node)—तीनों की भूमिका निभा सकता है। इसी व्यवस्था के कारण संदेश ब्लूटूथ लो एनर्जी (Bluetooth Low Energy - BLE) जैसे अल्प-दूरी रेडियो संकेतों के माध्यम से एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक "हॉप" (Hop) करते हुए लंबी दूरी तक पहुँच सकते हैं।
कथन 3 गलत है:
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs - MHA) के अधीन कार्य करता है, न कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत। यह भारत में साइबर अपराधों से निपटने तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहायता प्रदान करने के लिए स्थापित एक केंद्रीय नोडल तंत्र है।
Q5:
हाल ही में समाचारों में रहे PRAXIS (Planetary Rings Autonomous EXploration with In-situ Sampling) मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक पूर्णतः स्वीकृत एवं वित्तपोषित (Funded) परिचालन (Operational) गहन-अंतरिक्ष (Deep-Space) मिशन है, जिसके वर्ष 2026 के अंत तक शनि (Saturn) पर उतरने का कार्यक्रम निर्धारित है। 2. यह ग्रहों के वलयों (Planetary Rings) के कणों का विश्व का पहला प्रत्यक्ष इन-सीटू (In-situ) भौतिक नमूना (Physical Sampling) एकत्र करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। 3. अंतरिक्षयान कणों के नमूने एकत्र करने के लिए वलयों के सबसे सघन (Densest) भागों के बीच से सीधे होकर गुजरेगा। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
PRAXIS वर्तमान में NASA के Innovative Advanced Concepts (NIAC) 2026 कार्यक्रम के अंतर्गत Phase-I वित्तपोषण के लिए चयनित एक प्रारंभिक (Early-stage) मिशन अवधारणा (Mission Concept) है। इसे अभी तक आधिकारिक रूप से स्वीकृति नहीं मिली है और न ही इसके प्रक्षेपण (Launch) या शनि तक पहुँचने का कोई निश्चित कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
कथन 2 सही है:
पूर्ववर्ती मिशनों (जैसे Cassini) ने ग्रहों के वलयों का अध्ययन मुख्यतः रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing), फोटोग्राफी तथा फ्लाईबाई (Flyby) के माध्यम से किया था। इसके विपरीत, PRAXIS ग्रहों के वलयों के कणों का विश्व का पहला प्रत्यक्ष इन-सीटू (In-situ) भौतिक नमूना संग्रह (Physical Sampling) करने का प्रस्ताव रखता है।
कथन 3 गलत है:
गतिशील (Dynamic) वलय वातावरण में टक्कर (Collision) के जोखिम को कम करने के लिए अंतरिक्षयान वलयों के सबसे सघन भागों से सीधे होकर नहीं गुजरेगा। इसके बजाय, यह सुरक्षित दूरी बनाए रखेगा तथा "टच-एंड-गो" (Touch-and-Go) शैली में नमूना एकत्र करने के लिए एक लंबा एवं लचीला बूम (Flexible Boom) तैनात करेगा।