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Daily-mcqs 27 Aug 2026
Q1:
INS निपुण और निस्तार श्रेणी के पोतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. INS निपुण भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी रूप से अभिकल्पित और निर्मित गोताखोरी सहायता पोत (DSV) है। 2. इन पोतों का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम द्वारा किया गया है। 3. गहरे समुद्र में बचाव यान (DSRV) से सुसज्जित होने पर ये गोताखोरी सहायता पोत संकटग्रस्त पनडुब्बियों से नौसैनिक कर्मियों को बचाने के लिए मातृ-पोत के रूप में कार्य कर सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
INS निपुण निस्तार श्रेणी का दूसरा स्वदेशी रूप से अभिकल्पित और निर्मित गोताखोरी सहायता पोत है। इस श्रेणी का पहला पोत INS निस्तार था, जिसे जुलाई 2025 में भारतीय नौसेना में सम्मिलित किया गया था। INS निपुण को 31 अगस्त 2026 को नौसेना में सम्मिलित किया जाना निर्धारित है।
कथन 2 सही है:
INS निस्तार और INS निपुण, दोनों का स्वदेशी रूप से अभिकल्पन एवं निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम द्वारा किया गया है।
कथन 3 सही है:
निस्तार श्रेणी के गोताखोरी सहायता पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी तथा पनडुब्बी बचाव कार्यों के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं। गहरे समुद्र में बचाव यान (DSRV) से सुसज्जित होने पर ये पोत समुद्र में संकटग्रस्त पनडुब्बियों से नौसैनिक कर्मियों को सुरक्षित रूप से बचाने और बाहर निकालने के लिए मातृ-पोत के रूप में कार्य करते हैं।
Q2:
डाइविंग सपोर्ट पोतों (DSVs) और भारतीय नौसेना में उनकी सामरिक भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ये विशेषीकृत पोत केवल सतही युद्ध और समुद्री डकैती-रोधी गश्ती कार्यों तक ही सीमित होते हैं। 2. इनमें उन्नत प्रणालियाँ होती हैं, जो गहरे समुद्र में संतृप्ति गोताखोरी तथा दूरस्थ रूप से संचालित जलयान (ROVs) के संचालन में सहायता करती हैं। 3. इन पोतों का उच्च स्वदेशी सामग्री के साथ निर्माण रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सीधे बढ़ावा देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
डाइविंग सपोर्ट पोत सतही युद्ध या नियमित समुद्री डकैती-रोधी गश्त के लिए बनाए गए सतही युद्धपोत नहीं हैं। इसके बजाय, ये विशेषीकृत नौसैनिक पोत हैं, जिन्हें जटिल जलमग्न अभियानों, समुद्र से क्षतिग्रस्त वस्तुओं को निकालने, गहरे समुद्र में गोताखोरी तथा जलमग्न संरचनाओं के निरीक्षण में सहायता के लिए तैयार किया जाता है।
कथन 2 सही है:
INS निपुण तथा अन्य आधुनिक डाइविंग सपोर्ट पोत अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियों, पार्श्व गोताखोरी मंचों और दूरस्थ रूप से संचालित जलयानों (ROVs) से सुसज्जित होते हैं। ये प्रणालियाँ जलमग्न निगरानी, गोताखोरों की निगरानी तथा भारी वस्तुओं को समुद्र से निकालने जैसे कार्यों में सहायता करती हैं।
कथन 3 सही है:
INS निपुण में लगभग 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है तथा इसके निर्माण में 120 से अधिक भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ व्यापक सहयोग किया गया है। यह घरेलू तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करता है तथा नौसैनिक पोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाता है।
Q3:
भारत में आवश्यक धार्मिक प्रथाओं (Essential Religious Practices - ERP) के सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आवश्यक धार्मिक प्रथाओं (ERP) का सिद्धांत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से परिभाषित और विस्तृत किया गया है। 2. आवश्यक धार्मिक प्रथाओं के सिद्धांत की उत्पत्ति सामान्यतः उच्चतम न्यायालय के शिरूर मठ मामले (1954) के निर्णय से मानी जाती है। 3. इस सिद्धांत का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कौन-सी धार्मिक प्रथाएँ संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
आवश्यक धार्मिक प्रथाओं (ERP) का सिद्धांत भारतीय संविधान या अनुच्छेद 25 में कहीं भी स्पष्ट रूप से उल्लिखित अथवा परिभाषित नहीं है। यह न्यायालयों द्वारा विकसित सिद्धांत है, जिसे धार्मिक प्रथाओं को आवश्यक और अनावश्यक के रूप में अलग करने के लिए न्यायपालिका द्वारा विकसित किया गया है।
कथन 2 सही है:
आवश्यक धार्मिक प्रथाओं के सिद्धांत की उत्पत्ति सामान्यतः उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक आयुक्त, हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती, मद्रास बनाम लक्ष्मिंद्र तीर्थ स्वामीरायार, शिरूर मठ मामला (1954) के निर्णय से मानी जाती है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 25(1) के अंतर्गत संरक्षण केवल धार्मिक सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन प्रथाओं को भी प्राप्त है जिन्हें संबंधित धार्मिक समुदाय अपने धर्म का अभिन्न और आवश्यक अंग मानता है।
कथन 3 सही है:
न्यायालय इस सिद्धांत का प्रयोग यह निर्धारित करने के लिए करते हैं कि कोई विशेष धार्मिक प्रथा अनुच्छेद 25 के अंतर्गत संरक्षण का दावा कर सकती है या नहीं। अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
Q4:
भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारण एवं सीमा प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सीमा निर्धारण (Delimitation) का अर्थ सहमत सीमा को भूमि पर स्तंभों तथा मानचित्रण के माध्यम से भौतिक रूप से निर्धारित और चिह्नित करना है। 2. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) एक पारस्परिक रूप से सहमत, कानूनी रूप से निर्धारित अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसे दोनों देशों ने औपचारिक संधियों के माध्यम से मान्यता प्रदान की है। 3. 2005 का राजनीतिक मानदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों संबंधी समझौता अंतिम सीमा समझौते के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य, पैकेज-आधारित समाधान की परिकल्पना करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
सीमा निर्धारण (Delimitation) का अर्थ मानचित्र पर सीमा की सामान्य दिशा या स्थिति के संबंध में संधि तैयार करना अथवा आपसी सहमति प्राप्त करना है। इसके विपरीत, सीमा सीमांकन (Demarcation) में सीमा को भूमि पर वास्तविक रूप से निर्धारित एवं चिह्नित किया जाता है, जिसमें सीमा-चिह्न, स्तंभ आदि लगाए जाते हैं।
कथन 2 गलत है:
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) कोई पारस्परिक रूप से सहमत और कानूनी रूप से निर्धारित अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है। यह एक वस्तुतः विद्यमान (de facto) रेखा है, जो उन क्षेत्रों को दर्शाती है जहाँ किसी विशेष समय पर दोनों पक्षों के सैनिक वास्तविक रूप से नियंत्रण रखते थे। इसी कारण दोनों देशों की ओर से इसके स्थान और विस्तार की अलग-अलग धारणाएँ हैं।
कथन 3 सही है:
भारत-चीन सीमा प्रश्न के समाधान के लिए 2005 का राजनीतिक मानदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों संबंधी समझौता एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करता है। इसमें कहा गया है कि दोनों पक्ष सीमा प्रश्न के समाधान के लिए निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य पैकेज-आधारित समाधान की दिशा में प्रयास करेंगे।
Q5:
कीटनाशक कार्बोसुल्फान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह ऑर्गेनोफॉस्फेट रासायनिक समूह से संबंधित है। 2. यह विघटित होकर कार्बोफ्यूरान में बदल जाता है, जो एक अत्यधिक खतरनाक पदार्थ है। 3. चिकित्सा विज्ञान ने इसके विषाक्त प्रभाव को समाप्त करने के लिए एक विशिष्ट प्रतिविष (एंटीडोट) की खोज कर ली है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: कार्बोसुल्फान कार्बामेट समूह का कीटनाशक है, न कि ऑर्गेनोफॉस्फेट समूह का। इसका उपयोग धान, कपास और बागवानी जैसी फसलों में कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
कथन 2 सही है: पंजीकरण समिति (RC) ने उल्लेख किया है कि कार्बोसुल्फान तेजी से विघटित होकर कार्बोफ्यूरान में बदल जाता है। कार्बोफ्यूरान अत्यधिक विषैला होता है और मानव स्वास्थ्य, पक्षियों तथा जलीय जीवों को नुकसान पहुँचा सकता है।
कथन 3 गलत है: चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बोसुल्फान विषाक्तता के प्रभाव को समाप्त करने के लिए कोई विशिष्ट प्रतिविष उपलब्ध नहीं है। प्रतिविष की यह अनुपलब्धता प्रस्तावित पूर्ण प्रतिबंध के प्रमुख कारणों में से एक है।