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Daily-mcqs 27 Jul 2026
Q1:
भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में हाल ही में किए गए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति परिवर्तनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ई-कॉमर्स के इन्वेंटरी-आधारित मॉडल में अब घरेलू खुदरा तथा निर्यात बाजार दोनों के लिए 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है। 2. ई-कॉमर्स के मार्केटप्लेस मॉडल के अंतर्गत प्लेटफ़ॉर्म खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ने वाले डिजिटल मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है तथा वह स्वयं इन्वेंटरी का स्वामित्व नहीं रखता। 3. इन्वेंटरी-आधारित मॉडल में FDI की अनुमति में दी गई ढील को स्पष्ट रूप से भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं के निर्यात तक सीमित रखा गया है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: डीपीआईआईटी (DPIIT) द्वारा दी गई ढील के अनुसार, इन्वेंटरी-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में FDI की अनुमति केवल निर्यात गतिविधियों के लिए दी गई है। घरेलू खुदरा बाजार में विदेशी निवेशित कंपनियों द्वारा इन्वेंटरी रखने पर पहले से लागू प्रतिबंध यथावत हैं, ताकि स्थानीय किराना दुकानों तथा छोटे घरेलू खुदरा विक्रेताओं के हितों की रक्षा की जा सके।
कथन 2 सही है: मार्केटप्लेस मॉडल में ई-कॉमर्स कंपनी केवल एक डिजिटल सुविधा प्रदाता (facilitator) या मध्यस्थ के रूप में कार्य करती है, जो स्वतंत्र खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ती है। उसे अपने प्लेटफ़ॉर्म पर बिक्री के लिए सूचीबद्ध वस्तुओं का स्वामित्व रखने की अनुमति नहीं होती।
कथन 3 सही है: यह नीति परिवर्तन विशेष रूप से भारत में निर्मित वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म स्थानीय उत्पादकों के लिए वेयरहाउसिंग तथा सीमा शुल्क (customs) अनुपालन जैसी प्रक्रियाओं को अधिक सुगमता से संभाल सकें।
Q2:
भारत में वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों (Virtual Digital Assets - VDAs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. VDA लेनदेन पर 30% आयकर तथा 1% टीडीएस (TDS) लगाए जाने से उन्हें भारत में वैध मुद्रा (Legal Tender) या आधिकारिक फिएट मुद्रा (Official Fiat Currency) का दर्जा प्राप्त हो जाता है। 2. भारत में VDA प्लेटफ़ॉर्म तथा क्रिप्टो एक्सचेंज धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act - PMLA) के अंतर्गत रिपोर्टिंग इकाइयों (Reporting Entities) के रूप में कार्य करते हैं। 3. पारंपरिक शेयरों या बॉण्ड्स के विपरीत, VDA विकेंद्रीकृत वितरित लेजर (Decentralized Distributed Ledger) प्रौद्योगिकी पर आधारित होते हैं तथा किसी कंपनी की ऋण (Debt) या स्वामित्व हिस्सेदारी (Equity) पर कानूनी दावा प्रस्तुत नहीं करते। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
आयकर अधिनियम की धारा 2(47A) के अंतर्गत VDA पर 30% कर तथा 1% TDS लगाया जाना केवल वित्तीय निगरानी (Financial Oversight) और कराधान का प्रावधान है। इससे क्रिप्टोकरेंसी या अन्य VDA को कानूनी मान्यता (Legal Recognition), वैधता (Legality) अथवा वैध मुद्रा (Legal Tender) का दर्जा प्राप्त नहीं होता।
VDA ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म, क्रिप्टो एक्सचेंज तथा अन्य संबंधित मध्यस्थों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत रिपोर्टिंग इकाइयों (Reporting Entities) के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन्हें वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (Financial Intelligence Unit–India: FIU-IND) द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होता है, ताकि अवैध वित्तीय लेनदेन और धन शोधन पर रोक लगाई जा सके।
VDA, पारंपरिक परिसंपत्तियों जैसे शेयर (Shares) या बॉण्ड्स (Bonds) से मूलभूत रूप से भिन्न हैं। ये किसी कंपनी में स्वामित्व (Equity), ऋण (Debt) अथवा किसी भौतिक परिसंपत्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इनका संचालन मुख्यतः विकेंद्रीकृत वितरित लेजर (Decentralized Distributed Ledger) अथवा ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक पर आधारित होता है।
Q3:
वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों (Virtual Digital Assets - VDAs) के संबंध में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की हालिया सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समिति ने प्रवर्तन (Enforcement) को सरल बनाने के लिए VDA को सीधे प्रस्तावित प्रतिभूति बाज़ार संहिता (Securities Market Code - SMC) में सम्मिलित करने की सिफारिश की। 2. समिति ने तत्काल बाज़ार संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठनों (Self-Regulatory Organisations - SROs) को एक अंतरिम संस्थागत व्यवस्था के रूप में उपयोग करने का सुझाव दिया। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: 1 व 2 दोनों
D: कोई नहीं
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
संसदीय समिति ने स्पष्ट रूप से सलाह दी कि वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों (VDAs) को प्रस्तावित प्रतिभूति बाज़ार संहिता (Securities Market Code - SMC) में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसका कारण यह है कि पारंपरिक प्रतिभूति विनियमन केंद्रीकृत क्लियरिंग हाउस (Centralized Clearing Houses) तथा पहचाने जा सकने वाले कॉर्पोरेट जारीकर्ताओं (Identifiable Corporate Issuers) पर आधारित होता है, जबकि VDA सीमाहीन (Borderless) और विकेंद्रीकृत (Decentralized) प्रोटोकॉल पर आधारित होते हैं। इसलिए दोनों की प्रकृति और नियामकीय आवश्यकताएँ भिन्न हैं।
समिति ने यह सुझाव दिया कि जब तक VDA के लिए एक व्यापक एवं स्वतंत्र कानून (Comprehensive Standalone Law) नहीं बन जाता, तब तक वर्तमान नियामकीय शून्य (Regulatory Vacuum) को भरने तथा बाज़ार की विश्वसनीयता एवं अखंडता (Market Integrity) से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठनों (Self-Regulatory Organisations - SROs) के माध्यम से एक अंतरिम नियामकीय ढाँचा (Interim Regulatory Framework) लागू किया जाए।
Q4:
भारत में फास्ट ट्रैक न्यायालयों (Fast Track Courts - FTCs) के विकास एवं स्थापना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फास्ट ट्रैक न्यायालय (FTCs) की अवधारणा का सर्वप्रथम वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग (11th Finance Commission) द्वारा लंबित विचाराधीन (Undertrial) मामलों एवं पुराने लंबित सत्र मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुझाव दिया गया था। 2. केंद्र सरकार इन न्यायालयों की स्थापना एवं संचालन विशेष केंद्रीय कानून के माध्यम से सीधे करती है, जिसमें राज्य सरकारों या उच्च न्यायालयों से परामर्श नहीं लिया जाता। 3. बलात्कार (Rape) एवं POCSO अधिनियम से संबंधित मामलों के विशेष एवं त्वरित निपटारे के लिए स्थापित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (Fast Track Special Courts - FTSCs) को आंशिक रूप से निर्भया निधि (Nirbhaya Fund) से वित्तपोषित किया जाता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
फास्ट ट्रैक न्यायालय (FTCs) की अवधारणा को औपचारिक रूप से वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग द्वारा प्रस्तुत किया गया था। आयोग ने लंबे समय से लंबित सत्र मामलों (Sessions Cases) तथा विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अनुदान (Grants) प्रदान करने की अनुशंसा की थी।
फास्ट ट्रैक न्यायालयों की स्थापना केवल केंद्रीय कानून के माध्यम से सीधे नहीं की जाती। इनकी स्थापना राज्य सरकारें, अपने-अपने उच्च न्यायालयों (High Courts) से परामर्श करके करती हैं। ये न्यायालय वर्तमान न्यायिक व्यवस्था (Existing Judicial Hierarchy) का ही हिस्सा होते हैं। केंद्र सरकार मुख्यतः नीतिगत दिशा-निर्देश (Policy Guidelines) और वित्तीय सहायता (Financial Support) प्रदान करती है।
वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के अंतर्गत फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (Fast Track Special Courts - FTSCs) की स्थापना की। इन न्यायालयों का उद्देश्य बलात्कार तथा POCSO अधिनियम से संबंधित मामलों का त्वरित एवं विशेष रूप से निपटारा करना है। इस योजना को आंशिक रूप से निर्भया निधि (Nirbhaya Fund) से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
Q5:
प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (Surface-to-Air Missile - SAM) प्रणाली है, जिसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (Extended Range Air Defence System - ERADS) के नाम से भी जाना जाता है। 2. इसे विशेष रूप से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को अवरोधित (Intercept) और निष्क्रिय (Neutralize) करने के लिए विकसित किया गया है, जिससे अलग बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (Ballistic Missile Defence - BMD) कार्यक्रम की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। 3. इस प्रणाली में तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी परिचालन क्षमता (Operational Range) अलग-अलग है और अधिकतम 400 किमी तक की दूरी तक मार कर सकती हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha), जिसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) भी कहा जाता है, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation - DRDO) द्वारा विकसित की जा रही एक स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है। इसका उद्देश्य भारत की दीर्घ दूरी की वायु रक्षा (Long-Range Air Defence) क्षमता को सुदृढ़ करना है।
प्रोजेक्ट कुशा का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमान (Fighter Aircraft), स्टेल्थ विमान (Stealth Aircraft), क्रूज़ मिसाइलें (Cruise Missiles), ड्रोन (Drones) तथा एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एवं कंट्रोल (AEW&C) प्रणालियों जैसे हवाई खतरों को निष्क्रिय करना है।
बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा का दायित्व भारत के समर्पित बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (Ballistic Missile Defence - BMD) कार्यक्रम के अंतर्गत आता है। दोनों प्रणालियाँ परस्पर समन्वय (Integration) के साथ कार्य करती हैं।
इस प्रणाली में तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जो बहु-स्तरीय (Multi-layered) वायु रक्षा कवच प्रदान करती हैं—
इन तीनों इंटरसेप्टरों के माध्यम से विभिन्न दूरी पर मौजूद हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।