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Daily-mcqs 26 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 26 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

भारतीय श्रम विधि के अंतर्गत "उद्योग" की परिभाषा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   ऐतिहासिक बैंगलोर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा (1978) मामले में सात न्यायाधीशों की पीठ ने माना कि किसी संस्था को "उद्योग" की श्रेणी में रखने के लिए लाभ कमाने का उद्देश्य अनिवार्य है।

2.   वर्ष 1978 के निर्णय में विकसित "त्रिस्तरीय परीक्षण" में व्यवस्थित गतिविधि, नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संगठित सहयोग तथा मानव की आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन अथवा वितरण शामिल है।

3.   हाल ही में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने निर्णय दिया कि वर्ष 1978 के निर्णय द्वारा स्थापित व्यापक व्याख्या भविष्य में औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले विवादों पर लागू नहीं होगी।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
बैंगलोर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा (1978) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी गतिविधि को "उद्योग" मानने के लिए लाभ कमाने का उद्देश्य आवश्यक नहीं है यदि कोई संस्था निर्धारित कसौटियों को पूरा करती है, तो धर्मार्थ, परोपकारी और गैर-लाभकारी संस्थाएँ भी "उद्योग" की परिधि में सकती हैं।


कथन 2 सही है:
वर्ष 1978 के निर्णय में प्रसिद्ध "त्रिस्तरीय परीक्षण" प्रतिपादित किया गया। इसके अंतर्गत निम्नलिखित तीन तत्व आवश्यक हैं:


1.   व्यवस्थित गतिविधि;


2.   नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संगठित सहयोग; तथा


3.   मानव की आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन अथवा वितरण।


कथन 3 सही है:
सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने माना कि वर्ष 1978 के निर्णय में स्थापित व्यापक व्याख्या नई औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को नियंत्रित नहीं करेगी।


                            

Q2:

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 2(p) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह "उद्योग" को ऐसी व्यवस्थित गतिविधि के रूप में परिभाषित करती है, जो नियोक्ता और श्रमिकों के बीच सहयोग के माध्यम से संचालित होती है तथा जिसमें पूंजी निवेश या लाभ कमाने के उद्देश्य का कोई महत्व नहीं है।

2.   यह सभी धर्मार्थ, सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से "उद्योग" की परिभाषा में शामिल करती है।

3.   यह रक्षा अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित कुछ निर्दिष्ट सरकारी गतिविधियों को "उद्योग" की परिभाषा से बाहर रखती है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 2(p) में "उद्योग" को ऐसी व्यवस्थित गतिविधि के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन अथवा वितरण के लिए नियोक्ता और श्रमिकों के बीच सहयोग होता है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पूंजी निवेश या लाभ कमाने का उद्देश्य प्रासंगिक नहीं है।


कथन 2 गलत है:
धारा 2() में कुछ धर्मार्थ, सामाजिक और परोपकारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से उद्योग की परिभाषा से बाहर रखा गया है। यह वर्ष 1978 के बैंगलोर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा निर्णय की अपेक्षाकृत व्यापक व्याख्या से अलग दृष्टिकोण को दर्शाता है।


कथन 3 सही है:
धारा 2(p) के अंतर्गत कुछ संप्रभु एवं सामरिक सरकारी गतिविधियों को उद्योग की परिभाषा से बाहर रखा गया है। इनमें विशेष रूप से रक्षा अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित गतिविधियाँ शामिल हैं।


 


                            

Q3:

प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फण्ड) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह संसद के अधिनियम के अंतर्गत सीधे स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटना है।

2.   प्रधानमंत्री इस कोष के पदेन अध्यक्ष होते हैं तथा रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री पदेन न्यासी के रूप में कार्य करते हैं।

3.   पीएम केयर्स कोष में किया गया योगदान कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के रूप में मान्य है।

4.   पीएम केयर्स फण्ड के माध्यम से एकत्र और वितरित की जाने वाली धनराशि भारत की संचित निधि का हिस्सा होती है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
पीएम केयर्स फण्ड सांविधिक निकाय नहीं है यह पंजीकरण अधिनियम, 1908 के अंतर्गत एक लोक धर्मार्थ न्यास के रूप में पंजीकृत है।


कथन 2 सही है:
प्रधानमंत्री न्यास के पदेन अध्यक्ष होते हैं। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री पदेन न्यासी के रूप में कार्य करते हैं।


कथन 3 सही है:
कंपनियों द्वारा पीएम केयर्स फण्ड में किए गए दान और योगदान को कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII के अंतर्गत पात्र निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय माना जाता है।


कथन 4 गलत है:
पीएम केयर्स फण्ड एक बजट से बाहर की वित्तीय व्यवस्था के रूप में कार्य करता है और इसकी धनराशि भारत की संचित निधि में शामिल नहीं होती यह मुख्यतः व्यक्तियों और संगठनों से प्राप्त स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर करता है और इसे सरकारी बजटीय सहायता से संचालित नहीं किया जाता है।


                            

Q4:

पीएम केयर्स फण्ड और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   जहाँ पीएम केयर्स फण्ड का प्रबंधन एक स्वतंत्र लेखा-परीक्षण व्यवस्था के माध्यम से किया जाता है, वहीं राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा-परीक्षण व्यवस्था के अंतर्गत आता है।

2.   राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित एक सांविधिक कोष है, जबकि पीएम केयर्स फण्ड एक लोक धर्मार्थ न्यास के रूप में गठित किया गया है।

3.   कोविड-19 से संबंधित न्यायिक कार्यवाही के दौरान भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पीएम केयर्स फण्ड में शेष बची पूरी धनराशि को स्वतः NDRF में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? 

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
पीएम केयर्स फण्ड के खातों का लेखा-परीक्षण न्यास द्वारा नियुक्त स्वतंत्र लेखा-परीक्षक द्वारा किया जाता है, जबकि NDRF जैसे सांविधिक कोष भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा-परीक्षण निगरानी के अधीन होते हैं।


कथन 2 सही है:
राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 के अंतर्गत की गई है। इसका उद्देश्य गंभीर आपदाओं के दौरान प्रतिक्रिया एवं राहत कार्यों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। दूसरी ओर, पीएम केयर्स फण्ड का गठन मार्च 2020 में एक लोक धर्मार्थ न्यास के रूप में किया गया था।


कथन 3 गलत है:
वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने पीएम केयर्स फण्ड की धनराशि को NDRF में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था न्यायालय ने माना कि दोनों अलग-अलग कोष हैं तथा उनकी कानूनी संरचना, उद्देश्य और लेखा-परीक्षण की व्यवस्थाएँ अलग-अलग हैं।


                            

Q5:

भारतीय आरक्षण में "क्रीमी लेयर" की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   क्रीमी लेयर की अवधारणा को पहली बार औपचारिक रूप से ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) निर्णय के बाद लागू किया गया।

2.   क्रीमी लेयर से संबंधित अपवर्जन (बहिष्करण) के मानदंड अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) पर समान रूप से लागू होते हैं।

3.   क्रीमी लेयर से बाहर रखने का आधार केवल माता-पिता की वार्षिक आय है तथा इसमें माता-पिता की सामाजिक या व्यावसायिक स्थिति को ध्यान में नहीं रखा जाता।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
पिछड़े वर्गों में से "क्रीमी लेयर" (अर्थात् अपेक्षाकृत उन्नत वर्गों) की पहचान करके उन्हें आरक्षण के लाभ से बाहर रखने की अवधारणा को सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी निर्णय में अनिवार्य किया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरक्षण का लाभ वास्तव में सबसे जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुँच सके।


कथन 2 गलत है:
क्रीमी लेयर का परीक्षण मुख्य रूप से OBC आरक्षण पर लागू होता है। सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न न्यायिक निर्णयों, जैसे अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ, ने बार-बार स्पष्ट किया है कि क्रीमी लेयर की अवधारणा SC और ST पर लागू नहीं होती SC और ST का पिछड़ापन केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका संबंध ऐतिहासिक सामाजिक बहिष्कार और अस्पृश्यता से भी है।


कथन 3 गलत है:
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल माता-पिता की आय को क्रीमी लेयर निर्धारित करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। क्रीमी लेयर से बहिष्करण के लिए सामाजिक स्थिति, संवैधानिक पद, सरकारी सेवा में रैंक तथा व्यवसाय/पेशे की श्रेणी जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है। इन मानदंडों का उल्लेख मूल 1993 के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के दिशा-निर्देशों में किया गया था।


                            
Aliganj Gomti Nagar Prayagraj