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Daily-mcqs 21 Oct 2026
Q1:
श्वेत बौनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. श्वेत बौने तारकीय अवशेष होते हैं, जो कम या मध्यम द्रव्यमान वाले तारों के परमाणु ईंधन समाप्त होने और अपनी बाहरी परतों को त्यागने के बाद बनते हैं। 2. इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब (Electron Degeneracy Pressure) श्वेत बौने को गुरुत्वीय पतन के विरुद्ध सहारा प्रदान करता है। 3. श्वेत बौना अपने क्रोड में निरंतर नाभिकीय संलयन के माध्यम से मुख्य रूप से ऊर्जा उत्पन्न करता रहता है। 4. चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) सूर्य के द्रव्यमान की लगभग 1.4 गुना होती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 — सही: एक सामान्य श्वेत बौना तब बनता है, जब कम या मध्यम द्रव्यमान वाला तारा विकसित होकर लाल दानव बन जाता है और अपनी बाहरी परतों को बाहर निकाल देता है, जिससे उसका गर्म और सघन क्रोड पीछे रह जाता है।
कथन 2 — सही: इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब, जो पाउली अपवर्जन सिद्धांत (Pauli Exclusion Principle) से संबंधित क्वांटम यांत्रिक सिद्धांतों के कारण उत्पन्न होता है, गुरुत्वाकर्षण का प्रतिरोध करता है।
कथन 3 — गलत: श्वेत बौना सामान्यतः अब नाभिकीय संलयन को जारी नहीं रखता है। यह अपनी संचित ऊष्मीय ऊर्जा का विकिरण करता है और धीरे-धीरे ठंडा होता जाता है।
कथन 4 — सही: चंद्रशेखर सीमा सौर द्रव्यमान की लगभग 1.4 गुना होती है। इस सीमा से अधिक द्रव्यमान होने पर, एक सामान्य श्वेत बौना केवल इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब के सहारे स्थिर नहीं रह सकता।
Q2:
केरल में हाल ही में किए गए वन्यजीव सर्वेक्षण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह सर्वेक्षण केरल वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा त्रावणकोर नेचर हिस्ट्री सोसाइटी के सहयोग से आयोजित किया गया था। 2. इस सर्वेक्षण में विज्ञान के लिए पहली बार खोजी गई 36 प्रजातियों को दर्ज किया गया। 3. पश्चिमी घाट को उच्च स्थानिकता वाली प्रजातियों के साथ वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त है। 4. तितलियाँ और ओडोनेट्स पारिस्थितिक निगरानी तथा पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के आकलन में योगदान दे सकते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 — सही: यह सर्वेक्षण केरल वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा त्रावणकोर नेचर हिस्ट्री सोसाइटी (TNHS) के सहयोग से आयोजित किया गया था।
कथन 2 — गलत: ये 36 अभिलेख मौजूदा क्षेत्रीय प्रजाति-सूचियों में की गई वृद्धि हैं, न कि आवश्यक रूप से विज्ञान द्वारा पहली बार खोजी गई प्रजातियाँ।
कथन 3 — सही: पश्चिमी घाट वैश्विक स्तर पर महत्त्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, जो अपनी उच्च स्थानिकता के लिए जाने जाते हैं।
कथन 4 — सही: तितलियाँ महत्त्वपूर्ण परागणकर्ता हैं, जबकि ड्रैगनफ्लाई और डैम्सेलफ्लाई (ओडोनेट्स) कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं और मीठे पानी के आवासों की गुणवत्ता के संकेतक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
Q3:
भारत में वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: संवैधानिक/कानूनी प्रावधान विषय 1. अनुच्छेद 48A पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का राज्य का कर्तव्य 2. अनुच्छेद 51A(g) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करने का नागरिकों का मौलिक कर्तव्य 3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 वन्यजीव संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों के लिए कानूनी ढाँचा 4. जैव विविधता अधिनियम, 2002 जैव विविधता का संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों का न्यायसंगत बँटवारा ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
युग्म 1 — सही: अनुच्छेद 48A, जो राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांतों का हिस्सा है, राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने का निर्देश देता है।
युग्म 2 — सही: अनुच्छेद 51A(g), जो एक मौलिक कर्तव्य है, नागरिकों से वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखने की अपेक्षा करता है।
युग्म 3 — सही: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, वन्यजीव संरक्षण, शिकार पर प्रतिबंध और संरक्षित क्षेत्रों के विनियमन के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। इसके 2022 के संशोधन में CITES से संबंधित अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आक्रामक विदेशी प्रजातियों जैसे विषयों को भी शामिल किया गया।
युग्म 4 — सही: जैव विविधता अधिनियम, 2002, जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग और जैविक संसाधनों से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे को बढ़ावा देता है। इसमें 2023 में संशोधन किया गया था।
Q4:
भारत में इथेनॉल के फीडस्टॉक (कच्चे माल) के वर्गीकरण और विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम पीढ़ी (1G) का इथेनॉल गन्ना और मक्का जैसी खाद्य एवं चीनी फसलों से उत्पादित किया जाता है। 2. द्वितीय पीढ़ी (2G) का इथेनॉल कृषि अवशेषों और खोई (बैगास) जैसे गैर-खाद्य लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास का उपयोग करता है। 3. B-हैवी शीरे में C-हैवी शीरे की तुलना में अधिक चीनी की मात्रा शेष रहती है, जिससे वर्तमान प्रतिबंधों से पहले यह चीनी से इथेनॉल रूपांतरण के लिए एक पसंदीदा विकल्प बन गया था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: 1G जैव-इथेनॉल सीधे खाद्य/खाने योग्य या नकदी फसलों में मौजूद स्टार्च और शर्करा पर निर्भर करता है, जैसे गन्ने का रस, शीरा, मक्का और टूटे हुए चावल।
कथन 2 सही है: 2G इथेनॉल गैर-खाद्य पौधों के रेशेदार अपशिष्ट (लिग्नोसेल्यूलोज) से निर्मित किया जाता है, जैसे धान का पुआल, गेहूँ का पुआल और बाँस। इससे "खाद्य बनाम ईंधन" की दुविधा को कम करने में मदद मिलती है।
कथन 3 सही है: B-हैवी शीरा चीनी के क्रिस्टल निकालने की प्रक्रिया का एक मध्यवर्ती उप-उत्पाद है, जिसमें अभी भी किण्वन योग्य शर्करा की पर्याप्त मात्रा मौजूद रहती है। इससे C-हैवी शीरे की तुलना में प्रति टन काफी अधिक इथेनॉल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे सीधे इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से व्यावसायिक चीनी उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
Q5:
MAHASAGAR दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. MAHASAGAR का पूर्ण रूप Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) है। 2. यह समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारियों पर भारत के ज़ोर को दर्शाता है। 3. इसका उद्देश्य विशेष रूप से केवल हिंद महासागर के तटीय देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, जिसमें अन्य क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: MAHASAGAR का पूर्ण रूप Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions है।
कथन 2 सही है: समुद्री साझेदारियाँ और सहयोगात्मक सहभागिता इस दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
कथन 3 गलत है: इस दृष्टिकोण को केवल हिंद महासागर के तटीय देशों तक सीमित एक विशिष्ट ढाँचे के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है। इसका घोषित ज़ोर व्यापक क्षेत्रीय सहयोग पर है।