होम > Daily-mcqs
Daily-mcqs 20 Mar 2026
Q1:
"आईओएस सागर" पहल को “सॉफ्ट बैलेंसिंग स्ट्रैटेजी” क्यों कहा जा सकता है?
A: क्योंकि यह केवल व्यापार समझौते करता है
B: क्योंकि यह चीन के विरुद्ध प्रत्यक्ष सैन्य गठबंधन है
C: क्योंकि यह सहयोग और क्षमता निर्माण के माध्यम से प्रभाव बढ़ाता है
D: क्योंकि यह केवल मानवीय सहायता तक सीमित है
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
आईओएस सागर पहल के तहत भारत प्रत्यक्ष सैन्य टकराव या गठबंधन के बजाय सहयोग, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा जैसे उपायों के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाता है। इसी कारण इसे “सॉफ्ट बैलेंसिंग स्ट्रैटेजी” कहा जाता है।
हालिया समाचार (2026) के अनुसार, भारतीय नौसेना ने "आईओएस सागर" के नए चरण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 देशों के नौसैनिक कर्मियों को शामिल किया है, जिन्हें भारत में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, भारतीय नौसैनिक जहाजों पर संयुक्त समुद्री अभ्यास कराया जा रहा है, तथा पोर्ट विज़िट और इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को बढ़ाया जा रहा है।
यह स्पष्ट करता है कि भारत प्रत्यक्ष सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने के बजाय विश्वास निर्माण (trust-building) और साझेदारी आधारित सुरक्षा को बढ़ावा दे रहा है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से भारत स्वयं को “Net Security Provider” और “Preferred Security Partner” के रूप में स्थापित कर रहा है, विशेष रूप से उस समय जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।
Q2:
निम्नलिखित में से कौन-सा/से लद्दाख ज्वालामुखीय चाप के निर्माण से सीधे संबंधित है/हैं? 1. नियो-टैथिस महासागर 2. भारतीय प्लेट का अवसादन (सबडक्शन) 3. यूरेशियाई प्लेट का अवसादन (सबडक्शन) सही विकल्प चुनिए:
A: केवल 1
B: केवल 1 और 3
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2 और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
लद्दाख ज्वालामुखीय चाप का निर्माण सीधे तौर पर नियो-टैथिस महासागर की महासागरीय प्लेट के अवसादन (सबडक्शन) से हुआ था । इस प्रक्रिया में नियो-टैथिस महासागर की महासागरीय स्थलमंडल (ओशैनिक लिथोस्फियर), यूरेशियाई प्लेट के नीचे धँसी, जिससे मैग्मा का निर्माण हुआ और ज्वालामुखीय चाप विकसित हुआ।
जबकि:
अतः केवल नियो-टैथिस महासागर ही इस प्रक्रिया से सीधे संबंधित है।
Q3:
कथन (A): भव्य योजना व्यवसाय करने की सुगमता को बढ़ावा देती है। कारण (R): इसमें पूर्व-अनुमोदित भूमि एकल-खिड़की स्वीकृति प्रणाली और तैयार अवसंरचना प्रदान किया जाता है। सही विकल्प चुनिए:
A: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
B: A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
C: A सही है, R गलत है
D: A गलत है, R सही
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
भव्य योजना का उद्देश्य उद्योगों के लिए व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाना है, जिससे निवेश आकर्षित होता है और औद्योगिक विकास को गति मिलती है। इस योजना के अंतर्गत पूर्व-अनुमोदित भूमि, एकल-खिड़की स्वीकृति प्रणाली तथा तैयार अवसंरचना जैसी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे अनुमति प्रक्रिया आसान होती है तथा उद्योग स्थापित करने में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, ये सभी प्रावधान सीधे तौर पर व्यवसाय करने की सुगमता को बढ़ावा देते हैं।
Q4:
यदि कृषि सखी पहल प्रभावी रूप से लागू होती है, तो निम्नलिखित में से क्या परिणाम हो सकते हैं? 1. महिला किसानों की आर्थिक सशक्तता 2. फसल बीमा कवरेज में वृद्धि 3. ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता सही विकल्प चुनिए:
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2 और 3
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2 और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कृषि सखी पहल के प्रभावी क्रियान्वयन से महिला किसानों की आर्थिक सशक्तता बढ़ती है, क्योंकि उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और आय के नए अवसर प्राप्त होते हैं। साथ ही, कृषि सखी किसानों को विभिन्न योजनाओं, विशेषकर फसल बीमा के प्रति जागरूक करती हैं, जिससे बीमा कवरेज और नामांकन में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, यह पहल कृषि तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य, पोषण और सामुदायिक मुद्दों पर भी जागरूकता बढ़ाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र सामाजिक जागरूकता का विकास होता है।
Q5:
कावेह मदनी के “जल दिवालियापन” सिद्धांत का क्या अर्थ है?
A: अल्पकालिक जल संकट
B: दीर्घकालिक जल संसाधनों का अस्थिर उपयोग
C: केवल भूजल की कमी
D: जल कर प्रणाली
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
“जल दिवालियापन” का अर्थ ऐसी स्थिति से है, जिसमें कोई क्षेत्र अपने जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर लेता है, जिससे भविष्य में जल की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। यह केवल अल्पकालिक संकट नहीं, बल्कि दीर्घकालिक असंतुलन को दर्शाता है, जहाँ जल की मांग लगातार आपूर्ति से अधिक बनी रहती है। इसमें विशेष रूप से भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रभावी जल प्रबंधन की कमी तथा पुनर्भरण की तुलना में अधिक उपयोग शामिल होता है। परिणामस्वरूप, यह स्थिति आर्थिक दिवालियापन के समान हो जाती है, जहाँ संसाधनों का व्यय अधिक और पुनर्भरण कम होता है, जिससे सतत विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।