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Daily-mcqs 19 Aug 2026
Q1:
खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 तथा महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) जैसे राज्य नियामकों द्वारा हाल ही में तंबाकू युक्त उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को जनस्वास्थ्य के हित में किसी भी खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का स्पष्ट अधिकार देता है। 2. FSS अधिनियम के तहत राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा जारी किया गया ऐसा कोई भी प्रतिबंध आदेश प्रारंभिक अधिसूचना के समय स्थायी बनाया जा सकता है। 3. केंद्रीय नियम चांदी के वर्क (चांदी-वर्ख) या इलायची (इलायची) जैसे मानक खाद्य पदार्थों/योजकों को पूरी तरह से जांच से छूट देते हैं, यदि उन पर किसी पान मसाला कंपनी की ब्रांडिंग का भी उपयोग किया गया हो। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत किसी राज्य का खाद्य सुरक्षा आयुक्त जनस्वास्थ्य के हित में किसी खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है। यही प्रावधान महाराष्ट्र जैसे राज्यों द्वारा गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध लगाने का वैधानिक आधार प्रदान करता है।
कथन 2 गलत है:
FSS अधिनियम की धारा 30(2)(a) के अनुसार, खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा लगाया गया ऐसा प्रतिबंध एक बार में अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए ही लगाया जा सकता है। प्रतिबंध को जारी रखने या बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों को समय-समय पर नई निषेधात्मक अधिसूचनाएँ जारी करनी होती हैं। इसे प्रारंभिक अधिसूचना में स्थायी नहीं बनाया जा सकता।
कथन 3 गलत है:
खाद्य नियामकों के पास ऐसे उत्पादों की जांच करने का कानूनी अधिकार है, जिनकी ब्रांडिंग, प्रस्तुति या बाजार में स्थिति अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रतिबंधित उत्पाद का प्रचार करती हो। केवल इसलिए कि कोई उत्पाद, जैसे इलायची, स्वयं अनुमत है, उसे नियामकीय जांच से स्वतः छूट नहीं मिल जाती। यदि उसकी ब्रांडिंग किसी प्रतिबंधित उत्पाद से जुड़ी पहचान को बनाए रखती, मजबूत करती या बढ़ावा देती है, तो उस पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।
Q2:
"सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising)" और भारत में सेलिब्रिटी द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों से संबंधित कानूनी ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरोगेट विज्ञापन का अर्थ है किसी प्रतिबंधित उत्पाद या सेवा का प्रचार इस प्रकार करना कि उसे किसी अनुमत उत्पाद या सेवा के विज्ञापन के रूप में प्रस्तुत किया जाए। 2. वर्तमान उपभोक्ता संरक्षण मानदंडों के तहत, ब्रांड एंडोर्सर (जिसमें सेलिब्रिटी भी शामिल हैं) को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है और जिन विज्ञापनों में वे दिखाई देते हैं, उनमें किए गए दावों के संबंध में उन्हें उचित सावधानी (due diligence) बरतना आवश्यक है। 3. खाद्य पदार्थों के सरोगेट विज्ञापनों के संबंध में नोटिस जारी करने या कार्रवाई करने का अधिकार केवल केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास है और इससे राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) पूरी तरह बाहर हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा जारी भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के लिए एंडोर्समेंट संबंधी दिशा-निर्देश, 2022 के अनुसार, सरोगेट विज्ञापन वह विज्ञापन है जिसमें किसी ऐसे उत्पाद/सेवा का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार किया जाता है, जिसके विज्ञापन पर कानून द्वारा प्रतिबंध या रोक लगी हो, और उसे किसी अनुमत उत्पाद/सेवा के विज्ञापन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
कथन 2 सही है:
भारत में वर्तमान नियामकीय ढांचे—जिसमें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (FSS) अधिनियम, 2006 शामिल हैं—के तहत सेलिब्रिटी एंडोर्सर पर किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उचित सावधानी (due diligence) बरतने का कानूनी दायित्व हो सकता है। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि ब्रांड की पहचान उपभोक्ताओं को गुमराह न करे या किसी अवैध/प्रतिबंधित पदार्थ के अप्रत्यक्ष प्रचार के रूप में कार्य न करे। जांच के दौरान नियामक अक्सर उचित सावधानी बरतने के प्रमाण और एंडोर्समेंट से संबंधित अनुबंधों की मांग कर सकते हैं।
कथन 3 गलत है:
हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और Advertising Standards Council of India (ASCI) प्रसारण एवं विज्ञापन सामग्री की निगरानी करते हैं, लेकिन राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास भी FSS अधिनियम, 2006 के तहत वैधानिक अधिकार होते हैं। यदि किसी सरोगेट विज्ञापन अभियान में किसी अनुमत खाद्य उत्पाद (जैसे माउथ फ्रेशनर/इलायची) का इस्तेमाल किसी प्रतिबंधित खाद्य उत्पाद (जैसे पान मसाला) को अप्रत्यक्ष रूप से प्रचारित करने के लिए किया जाता है, तो राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के पास कारण बताओ नोटिस जारी करने और कानूनी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार हो सकता है।
Q3:
भूकंप झुंड (Earthquake Swarm)" के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह किसी स्थानीय क्षेत्र में कम समय के भीतर होने वाली भूकंपीय घटनाओं की एक श्रृंखला है, जिसमें किसी एक स्पष्ट रूप से बड़े भूकंप (मुख्य भूकंप/Mainshock) की पहचान नहीं होती। 2. ये भूकंपीय झुंड सामान्यतः पृथ्वी के निचले मेंटल (Lower Mantle) में बहुत अधिक गहराई, अर्थात 70 किमी से अधिक, पर उत्पन्न होते हैं। 3. इनका संबंध सामान्यतः बड़े टेक्टोनिक भ्रंशों (Tectonic Faults) के टूटने के बजाय ज्वालामुखीय गतिविधि, भू-तापीय प्रणालियों या भूमिगत द्रवों के इंजेक्शन से होता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
भूकंप झुंड (Earthquake Swarm) छोटे भूकंपों का एक समूह होता है—कभी-कभी इनकी संख्या दर्जनों या सैकड़ों तक हो सकती है—जो कम समय के भीतर किसी विशेष क्षेत्र में आते हैं। सामान्य भूकंपीय श्रृंखलाओं के विपरीत, इनमें कोई स्पष्ट "मुख्य भूकंप (Mainshock)" नहीं होता, जो बाकी भूकंपों की तुलना में काफी बड़ा हो।
कथन 2 गलत है:
भूकंप झुंड सामान्यतः उथली गहराई पर आते हैं। ये अक्सर पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में लगभग 5 से 10 किमी या उससे भी कम गहराई पर होते हैं, न कि पृथ्वी के निचले मेंटल में बहुत अधिक गहराई पर।
कथन 3 सही है:
भूकंप झुंड अक्सर ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं (मैग्मा की गति), हाइड्रोथर्मल या भू-तापीय गतिविधियों, अथवा भूमिगत द्रवों के कारण स्थानीय पोर-प्रेशर (Pore Pressure) में होने वाले बदलावों से जुड़े होते हैं। ये सामान्यतः किसी बड़े टेक्टोनिक भ्रंश या प्लेट सीमा पर अचानक तनाव मुक्त होने के कारण होने वाले बड़े भूकंपों से अलग होते हैं।
Q4:
घूर्णनशील विस्फोट इंजन (Rotating Detonation Engines - RDEs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पारंपरिक जेट इंजनों के विपरीत, जो धीमी डीफ्लैग्रेशन (Deflagration) प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं, RDEs निरंतर सुपरसोनिक विस्फोट तरंगों (Supersonic Detonation Waves) का उपयोग करके थ्रस्ट उत्पन्न करते हैं। 2. RDE के डिजाइन में तरंग को बनाए रखने के लिए दहन कक्ष के अंदर भारी घूमने वाले टर्बाइन ब्लेड और जटिल यांत्रिक शाफ्ट बेयरिंग की आवश्यकता होती है। 3. ये अधिक तापीय दक्षता (Thermal Efficiency) प्रदान करते हैं और इनका संभावित उपयोग हाइपरसोनिक मिसाइलों तथा डीप-स्पेस प्रणोदन (Deep-Space Propulsion) में किया जा सकता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
पारंपरिक रॉकेट और जेट इंजन सामान्यतः सब्सोनिक दहन (Deflagration) का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, RDE में एक वलयाकार (Annular) दहन कक्ष के चारों ओर निरंतर सुपरसोनिक विस्फोट तरंगें (Detonation Waves) घूमती रहती हैं, जिससे ईंधन से ऊर्जा का अधिक प्रभावी उपयोग करते हुए थ्रस्ट उत्पन्न किया जाता है।
कथन 2 गलत है:
RDE की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसकी यांत्रिक सरलता और कम गतिशील भाग (Moving Parts) हैं। पारंपरिक गैस टर्बाइन इंजनों के विपरीत, RDE के मुख्य विस्फोट चक्र में जटिल टर्बाइन ब्लेड या शाफ्ट बेयरिंग की आवश्यकता नहीं होती। यह मुख्य रूप से दहन कक्ष की ज्यामिति तथा निरंतर ईंधन-वायु इंजेक्शन और विस्फोट तरंगों की भौतिकी पर निर्भर करता है।
कथन 3 सही है:
ईंधन से ऊर्जा के बेहतर उपयोग और अधिक तापीय दक्षता के कारण RDEs पर दुनिया भर में व्यापक शोध किया जा रहा है। इनके संभावित अनुप्रयोगों में हाइपरसोनिक क्रूज़ हथियार, पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicles) और अंतरिक्ष यान प्रणोदन (Spacecraft Propulsion) शामिल हैं।
Q5:
भारत में स्वदेशी 5 kN घूर्णनशील विस्फोट इंजन (Rotating Detonation Engine - RDE) के हालिया सफल हॉट-फायर परीक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस इंजन का परीक्षण एक भारतीय निजी स्टार्ट-अप द्वारा DRDO की परीक्षण सुविधा के सहयोग से किया गया था। 2. सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए विन्यास (Configuration) में अलग-अलग ऊंचाइयों पर थ्रस्ट प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एयरोस्पाइक नोजल (Aerospike Nozzle) भी शामिल किया गया था। 3. वर्तमान में परिचालन में तैनात RDE मॉडल का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है और वे दुनिया भर में अग्रिम पंक्ति के सैन्य लड़ाकू विमानों को सक्रिय रूप से शक्ति प्रदान कर रहे हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
यह महत्वपूर्ण परीक्षण रक्षा क्षेत्र के स्टार्ट-अप D-Propulse द्वारा हैदराबाद स्थित DRDO की एक परीक्षण सुविधा में किया गया था। यह भारत में रक्षा क्षेत्र की डीप-टेक तकनीकों के विकास में निजी क्षेत्र और सरकारी संस्थानों के बीच सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
कथन 2 सही है:
इस प्रणाली में RDE सेटअप के साथ एक उन्नत एयरोस्पाइक नोजल (Aerospike Nozzle) को सफलतापूर्वक जोड़ा गया था। यह नोजल बाहरी/परिवेशीय दबाव में होने वाले बदलावों के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर सकता है और विभिन्न ऊंचाई वाले वातावरणों में थ्रस्ट दक्षता को बेहतर बनाने में सहायता करता है।
कथन 3 गलत है:
अंतरिक्ष एजेंसियों और रक्षा कंपनियों द्वारा RDE तकनीक पर व्यापक स्तर पर परीक्षण किए जा रहे हैं, लेकिन यह तकनीक अभी भी विकास और परिपक्वता (Maturation) के चरण में है। अभी तक किसी भी देश ने पूरी तरह कार्यात्मक RDE को सक्रिय युद्धक या वाणिज्यिक उड़ान के लिए बड़े पैमाने पर परिचालन रूप से तैनात नहीं किया है।