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Daily-mcqs 18 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 18 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

छोटे करदाताओं की विदेशी परिसंपत्तियों के लिए प्रकटीकरण योजना (FAST-DS), 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह वित्त अधिनियम, 2026 के अध्याय IV में निहित एक वैधानिक स्वैच्छिक प्रकटीकरण तंत्र है।

2.   यह योजना सभी प्रकार के घोषणापत्रों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या प्रभार के 30% की एक समान कर दर प्रदान करती है।

3.   इस योजना के तहत वैध घोषणा करने वाले पात्र करदाताओं को काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियाँ) एवं कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत अभियोजन और दंड से प्रतिरक्षा प्राप्त होती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
FAST-DS, 2026
को वित्त अधिनियम, 2026 के अध्याय IV (धारा 130 से 144) के तहत कानूनी आधार प्राप्त है। यह अधिसूचित FAST-DS नियम, 2026 के साथ मिलकर लागू होता है।


कथन 2 गलत है:
इस योजना में एक समान कर दर नहीं है। इसमें घोषणाओं को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है:



  • ₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों/आय पर 30% कर + 30% अतिरिक्त राशि देय है, अर्थात कुल प्रभावी भार 60% है।

  • वहीं, ₹5 करोड़ तक की निर्दिष्ट विदेशी परिसंपत्तियाँ, जो पहले से कर-भुगतान की गई आय से प्राप्त हुई हों या करदाता द्वारा गैर-निवासी स्थिति के दौरान अर्जित की गई हों, उन पर 30% कर के बजाय ₹1 लाख का एकमुश्त शुल्क लगाया जाता है।


कथन 3 सही है:
आवश्यक भुगतान के साथ सफल और वैध घोषणा करने पर, घोषित की गई निर्दिष्ट परिसंपत्तियों के संबंध में करदाता को काला धन अधिनियम, 2015 के तहत भविष्य की पूछताछ, दंड और अभियोजन से प्रतिरक्षा प्राप्त होती है।


                            

Q2:

FAST-DS 2026 योजना के तहत परिचालन संबंधी सीमाओं (Thresholds) और मूल्यांकन मानदंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   घोषित विदेशी परिसंपत्तियों के उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value—FMV) की गणना के लिए 31 मार्च, 2026 को आधार तिथि माना जाएगा।

2.   करदाता इस योजना के तहत 60% प्रभावी कर दर वाले प्रावधान का उपयोग करके कुल मिलाकर ₹10 करोड़ तक की अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों या आय को नियमित (Regularise) कर सकते हैं।

3.   यह योजना मुख्य रूप से छोटे करदाताओं, जैसे छात्रों, युवा पेशेवरों और स्थानांतरित होकर भारत लौटे अनिवासी भारतीयों (NRIs) को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिन्हें आयकर रिटर्न की अनुसूचियों में अनजाने में रिपोर्टिंग संबंधी चूक का सामना करना पड़ा है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
घोषणा के अंतर्गत परिसंपत्तियों के उचित बाजार मूल्य (FMV) की गणना के लिए निर्धारित कट-ऑफ तिथि 31 मार्च, 2026 है।


कथन 2 गलत है:
30%
कर + 30% अतिरिक्त दंड वाले प्रावधान के अंतर्गत अघोषित/अकरित विदेशी आय या परिसंपत्तियों की कुल मौद्रिक सीमा ₹1 करोड़ तक सीमित है, कि10 करोड़।


वहीं, पहले से कर-भुगतान की गई आय से प्राप्त या गैर-निवासी अवधि के दौरान अर्जित परिसंपत्तियों, जिनकी रिपोर्टिंग नहीं की गई थी, उनके लिए दूसरी श्रेणी में अधिकतम सीमा ₹5 करोड़ है।


कथन 3 सही है:
इस नीति का ढांचा मुख्य रूप से छोटे स्तर की विदेशी परिसंपत्तियों वाले करदाताओं के लिए अनुपालन सुधारने के उपाय के रूप में तैयार किया गया है। इसमें उदाहरण के तौर पर:



  • विदेशी ESOPs/RSUs रखने वाले तकनीकी कर्मचारी,

  • पुराने/विरासत में मिले विदेशी बैंक खातों वाले छात्र,

  • विदेश से वापस लौटे NRIs,


जैसे लोग शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने अपनी विदेशी परिसंपत्तियों की अनुसूची में छोटी परिसंपत्तियों की जानकारी अनजाने में दर्ज नहीं की।


                            

Q3:

अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (Next Generation Offshore Patrol Vessel—NGOPV) ‘श्रुतिके संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित और लॉन्च किया गया है।

2.   श्रुति नाम भारत की प्राचीन सभ्यतागत विरासत से लिया गया है और यह चारों वेदों को संदर्भित करता है।

3.   NGOPV बेड़े का निर्माण विशेष रूप से भारत के पूर्वी तट पर स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों को सौंपा गया है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
यार्ड 3037, अर्थात श्रुति, स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत (NGOPV) है। इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।


कथन 2 सही है:
इस पोत का नाम भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से प्रेरित है। श्रुतिविशेष रूप से चारों वेदों को संदर्भित करता है। इसके प्रतीक-चिह्न (Crest) में उर्सा मेजर (सप्तऋषि) तारामंडल तथा लाल और सफेद प्रकाशस्तंभ (Lighthouse) दर्शाया गया है।


कथन 3 गलत है:
11
पोतों वाली NGOPV परियोजना केवल किसी एक तट या एक शिपयार्ड तक सीमित नहीं है। इसका निर्माण एक साथ दो निर्धारित शिपयार्डों में किया जा रहा है:



  • गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL)भारत का पश्चिमी तट

  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE)पूर्वी तट/कोलकाता स्थित नदी क्षेत्र


                            

Q4:

नव-लॉन्च किए गए NGOPV ‘श्रुतितथा अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (Next Generation Offshore Patrol Vessels—NGOPVs) वर्ग की परिचालन भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कार्यों पर विचार कीजिए:

1.   समुद्री निगरानी और समुद्री डकैती-रोधी अभियान

2.   अपतटीय आर्थिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा

3.   मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief—HADR)

4.   रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक गश्त (Strategic Nuclear Deterrence Patrols)

उपर्युक्त में से कितनी भूमिकाएँ NGOPV वर्ग के लिए प्राथमिक/द्वितीयक मिशन के रूप में निर्धारित हैं?

A: केवल एक

B: केवल दो

C: केवल तीन

D: सभी चार

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1, 2 और 3 सही हैं:
NGOPV
को विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इनके प्रमुख मिशनों में व्यापक समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव (SAR), समुद्री डकैती-रोधी अभियान, महत्वपूर्ण अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रदान करना शामिल है।


कथन 4 गलत है:
रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक गश्त का कार्य विशेष रूप से परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBNs) द्वारा किया जाता है, जैसे अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियाँ। यह कार्य अपतटीय गश्ती पोतों (OPVs) का नहीं है।


OPVs मुख्य रूप से विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी, कानून-व्यवस्था/तटरक्षक प्रकृति के कार्यों तथा तटीय और अपतटीय सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते हैं।


                            

Q5:

ओडिशा के हालिया तटरेखा परिवर्तन आकलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   ओडिशा की कुल तटरेखा का आधे से अधिक हिस्सा वर्तमान में अभिवृद्धि (Accretion—भूमि का बढ़ना/विस्तार) का सामना कर रहा है, कि समान रूप से तटीय क्षरण (Erosion) का।

2.   राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (National Centre for Coastal Research—NCCR) बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन एक संबद्ध या संलग्न कार्यालय के रूप में कार्य करता है।

3.   भारत के पूर्वी तट पर तटीय क्षरण केवल प्राकृतिक घटनाओं, जैसे तूफानी ज्वार (Storm Surges), के कारण होता है और इसमें स्थानीय मानवीय हस्तक्षेप की कोई भूमिका नहीं है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
राज्यसभा में प्रस्तुत NCCR के 1990–2022 के आकलन के अनुसार, ओडिशा की लगभग 28.3% तटरेखा तटीय क्षरण (Erosion) से प्रभावित है, 17.6% स्थिर है, जबकि 54.1% तटरेखा अभिवृद्धि (Accretion) का अनुभव कर रही है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य में समुद्र की सीमा समान रूप से पीछे नहीं हट रही है, बल्कि रेत और तलछट (Sediment) का जटिल पुनर्वितरण हो रहा है।


कथन 2 गलत है:
राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (NCCR), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences—MoES) का एक संबद्ध संस्थान है, कि बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का। हालांकि, इसके शोध एवं निष्कर्ष विभिन्न मंत्रालयों के साथ साझा किए जाते हैं।


कथन 3 गलत है:
तटीय क्षरण के पीछे प्राकृतिक और मानवजनित (Anthropogenic), दोनों प्रकार के कारक जिम्मेदार हैं।


प्राकृतिक कारकों में शामिल हैं:



  • समुद्र-स्तर में वृद्धि

  • चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति

  • लहरों की गतिविधि


वहीं, मानवजनित कारकों में शामिल हैं:



  • बंदरगाह/हार्बर का निर्माण

  • ऐसे ब्रेकवाटर (Breakwaters) का निर्माण जो तलछट के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करते हैं

  • अवैज्ञानिक तरीके से रेत का खनन


                            
Aliganj Gomti Nagar Prayagraj