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Daily-mcqs 17 Sep 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 17 Sep 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

अंतरिक्ष से संबंधित कानूनी ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) अंतरिक्ष में सभी पारंपरिक तथा प्रति-अंतरिक्ष (Counter-Space) हथियारों की तैनाती पर व्यापक प्रतिबंध लगाती है।

2.   अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की रोकथाम संधि (Prevention of the Placement of Weapons in Outer Space – PPWT) रूस और चीन द्वारा प्रस्तावित एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो पृथ्वी से अंतरिक्ष में मार करने वाले हथियारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाती है।

3.   आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) शांतिपूर्ण और जिम्मेदार अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा देते हैं, लेकिन ये व्यापक हथियार प्रतिबंध (Weapons Ban) के रूप में कार्य नहीं करते हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 की व्याख्या: गलत


बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967) पारंपरिक हथियारों, प्रति-अंतरिक्ष क्षमताओं (Counter-Space Capabilities) या सभी पृथ्वी-से-अंतरिक्ष हथियारों पर व्यापक रूप से प्रतिबंध नहीं लगाती है। यह विशेष रूप से परमाणु हथियारों तथा अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction – WMDs) को कक्षा (Orbit) में रखने या बाह्य अंतरिक्ष में तैनात करने पर प्रतिबंध लगाती है। इसलिए, कानूनी स्थिति पूर्ण प्रतिबंध के बजाय अस्पष्ट (Ambiguous) है।


कथन 2 की व्याख्या: गलत


अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की रोकथाम संधि (PPWT) एक अंतरराष्ट्रीय संधि के रूप में लागू नहीं हुई; यह अभी भी रूस और चीन द्वारा प्रस्तावित एक मसौदा/प्रस्ताव है। इसके अलावा, इसमें पृथ्वी से अंतरिक्ष में मार करने वाले हथियारों को व्यापक रूप से शामिल नहीं किया गया था।


कथन 3 की व्याख्या: सही


आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) शांतिपूर्ण और जिम्मेदार अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा देते हैं। भारत भी इसका एक हस्ताक्षरकर्ता है। हालांकि, ये समझौते व्यापक हथियार प्रतिबंध (Comprehensive Weapons Ban) का गठन नहीं करते हैं।


                            

Q2:

बाह्य अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और शस्त्रीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   अंतरिक्ष का सैन्यीकरण सख्ती से उन प्रणालियों को तैनात करने तक सीमित है, जिन्हें अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का उपयोग करके जमीन-आधारित लक्ष्यों पर हमला करने या उन्हें नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

2.   वह घटना जिसमें ASAT हमलों के कारण उत्पन्न कक्षीय मलबा टकरावों की एक श्रृंखलाबद्ध प्रक्रिया को जन्म देता है, जिससे अंतरिक्ष का उपयोग करना असंभव हो जाता है, केसलर सिंड्रोम (Kessler Syndrome) कहलाती है।

3.   भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीनइन सभी ने एंटी-सैटेलाइट (ASAT) क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 की व्याख्या: गलत। यह कथन "शस्त्रीकरण" (Weaponisation) का वर्णन करता है, कि सैन्यीकरण (Militarisation) का। सैन्यीकरण का तात्पर्य संचार, नेविगेशन, निगरानी और टोही जैसे सहायक सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों और अंतरिक्ष परिसंपत्तियों के उपयोग से है। शस्त्रीकरण में ऐसी प्रणालियों की तैनाती शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से अंतरिक्ष या जमीन पर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने, उन्हें बाधित करने या नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया हो।


कथन 2 की व्याख्या: सही।
केसलर सिंड्रोम एक प्रमुख चिंता है, जिसमें ASAT हमलों या टक्करों से उत्पन्न अंतरिक्ष मलबा आगे होने वाली टक्करों की एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया को जन्म देता है, जिससे कक्षीय क्षेत्र खतरनाक और अनुपयोगी हो जाते हैं।


कथन 3 की व्याख्या: सही।
पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अमेरिका, रूस, चीन और भारतइन सभी ने सफलतापूर्वक एंटी-सैटेलाइट (ASAT) क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।


 


                            

Q3:

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।

2.   यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित है।

3.   केंद्र सरकार परियोजना के लिए विशेष रूप से आवंटित जल घटक की लागत का 90% वहन करती है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: D

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है: किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है और गढ़वाल क्षेत्र से निकलती है।


कथन 2 सही है: भौगोलिक रूप से, बाँध स्थल हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले और उत्तराखंड के देहरादून जिले के बीच सीमा पर स्थित है।


कथन 3 सही है: किशाऊ बाँध परियोजना में शामिल हितधारकों द्वारा अंतिम रूप दिए गए वित्तपोषण ढाँचे के तहत, केंद्र सरकार जल घटक की लागत का लगभग 90% वहन करती है, जबकि शेष 10% राशि का वहन 1994 के यमुना जल समझौते के अनुरूप बेसिन राज्यों के बीच वितरित किया जाता है।


                            

Q4:

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के संदर्भ में हालिया समझौते के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   इस समझौते में यमुना बेसिन के छह राज्य शामिल हैं, जिसका उद्देश्य जल भंडारण और बिजली के बँटवारे को लेकर आठ वर्षों से चले रहे गतिरोध को समाप्त करना है।

2.   भारतीय संविधान के तहत, जल को मुख्य रूप से संघ सूची का विषय माना गया है और राज्यों के पास जल संसाधनों के संबंध में कोई विधायी अधिकार नहीं है।

3.   इस परियोजना को विशेष रूप से दिल्ली के लिए, शुष्क मौसम में पर्यावरणीय जल प्रवाह को बढ़ाने और निचले क्षेत्रों में पेयजल की कमी को कम करने में सहायता करने के लिए तैयार किया गया है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है: लंबे समय से लंबित समझौते पर यमुना बेसिन के छह राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान) ने हस्ताक्षर किए हैं, जिससे क्षेत्रीय जल सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए आठ वर्षों से चले रहे गतिरोध को सफलतापूर्वक दूर किया गया है।


कथन 2 गलत है: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत जल मुख्य रूप से राज्य सूची का विषय है (सूची II की प्रविष्टि 17) हालाँकि, अनुच्छेद 262 के तहत अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों पर कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है।


कथन 3 सही है: भंडारण सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य मानसूनी जल प्रवाह को नियंत्रित करना और यमुना में शुष्क मौसम के जल प्रवाह में सुधार करना है। यमुना निचले क्षेत्रों में गंभीर प्रदूषण और कम पारिस्थितिक जल प्रवाह से प्रभावित होती है, जिससे दिल्ली जैसे स्थानों में नगरपालिका जल आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।


                            

Q5:

15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन के लिए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन, लेनदेन की राशि चाहे कितनी भी हो, MDR से पूरी तरह मुक्त हैं।

2.   ₹2,000 तक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर व्यापारी से मानक 0.4% MDR शुल्क लिया जाता है।

3.   छोटे P2PM व्यापारी, जो UPI QR कोड के माध्यम से प्रति माह1 लाख तक प्राप्त करते हैं, MDR से पूरी तरह मुक्त रहते हैं।

4.   भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सीधे UPI नेटवर्क के तकनीकी बुनियादी ढाँचे का संचालन और प्रबंधन करता है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) केवल एक नीति नियामक के रूप में कार्य करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 1,2 और 3

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा घोषित संशोधित ढाँचे के तहत, सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहते हैं और हस्तांतरित राशि की परवाह किए बिना MDR से मुक्त हैं।


कथन 2 गलत है: P2M (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन ₹2,000 तक पूरी तरह शुल्क-मुक्त हैं। केवल ₹2,000 से अधिक के P2M लेनदेन पर सामान्यतः 0.4% MDR लागू होता है।


कथन 3 सही है: अनौपचारिक व्यवसायों और सड़क किनारे के विक्रेताओं की सुरक्षा के लिए, UPI QR कोड के माध्यम से प्रति माह1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे P2PM व्यापारियों को उन लेनदेन पर MDR का भुगतान करने से छूट दी गई है।


कथन 4 गलत है: दोनों संस्थाओं की भूमिकाएँ इसके विपरीत हैं। NPCI UPI प्लेटफॉर्म का संचालन करता है और तकनीकी बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराता है, जबकि RBI केंद्रीय बैंकिंग और भुगतान प्रणाली नियामक के रूप में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत व्यापक नियामक निगरानी प्रदान करता है।


                            
Aliganj Gomti Nagar Prayagraj