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Daily-mcqs 17 Aug 2026
Q1:
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्र (खंड-I) नामक रिपोर्ट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह रिपोर्ट नीति आयोग ने क्रिसिल इंटेलिजेंस के सहयोग से तैयार की है। 2. इस रिपोर्ट के खंड-I में सभी 12 प्राथमिकता वाले विनिर्माण क्षेत्रों को एक साथ सीधे सूचीबद्ध किया गया है। 3. भारत में वस्त्र एवं परिधान उद्योग देश में रोजगार प्रदान करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है और इस मामले में कृषि क्षेत्र से भी आगे है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
यह रिपोर्ट नीति आयोग और क्रिसिल इंटेलिजेंस के सहयोग से तैयार की गई एक संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए विकास की रणनीतियाँ तैयार करना है।
कथन 2 गलत है:
रिपोर्ट के खंड-I में केवल चार प्रमुख आधारभूत क्षेत्रों को शामिल किया गया है:
शेष आठ क्षेत्रों की समीक्षा रिपोर्ट के आगामी खंडों में की जाएगी।
कथन 3 गलत है:
भारत में वस्त्र क्षेत्र रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसके बाद कृषि क्षेत्र आता है। यह क्षेत्र 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
Q2:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो हाल ही में खोजे गए कैस्केड मेंढकों के संबंध में हैं: 1. कैस्केड मेंढक Amolops वंश से संबंधित होते हैं और सामान्यतः तेज़ बहाव वाली वन धाराओं तथा चट्टानी जलप्रपातों के अनुकूलित होते हैं। 2. अम्माची का कैस्केड मेंढक (Amolops ammachi) त्रिपुरा की जाम्पुई पहाड़ियों में खोजा गया था और इसका नाम केरल की एक समाजसेवी के सम्मान में रखा गया है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: 1 व 2 दोनों
D: कोई नहीं
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
कैस्केड मेंढक Amolops वंश से संबंधित होते हैं। इस वंश में ऐसी मेंढक प्रजातियाँ शामिल हैं जो तेज़ बहाव वाली पहाड़ी धाराओं, जलप्रपातों और चट्टानी जलधाराओं के आसपास रहने के लिए अनुकूलित होती हैं।
कथन 2 सही है:
अम्माची का कैस्केड मेंढक (Amolops ammachi) त्रिपुरा की जाम्पुई पहाड़ियों में पाया गया था। इसका नाम केरल की दिवंगत समाजसेवी पद्मिनी वार्की के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘अम्माची’ कहा जाता था।
Q3:
भारत की आरक्षण व्यवस्था में “क्रीमी लेयर” के सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्रीमी लेयर की अवधारणा को पहली बार औपचारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक इंद्रा साहनी वाद (1992) में प्रस्तुत और लागू किया गया था। 2. अनुच्छेद 341 और 342 के अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में किसी समुदाय को शामिल करने या हटाने का अधिकार संसद के पास है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: 1 व 2 दोनों
D: कोई नहीं
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
क्रीमी लेयर के बहिष्करण का सिद्धांत वर्ष 1992 में इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के माध्यम से विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य आर्थिक या सामाजिक रूप से उन्नत व्यक्तियों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखना था।
कथन 2 सही है:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में समुदायों को अधिसूचित करने, शामिल करने या हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है। इन सूचियों में परिवर्तन करने का अंतिम विधायी अधिकार संसद के पास है; केवल कार्यपालिका या न्यायपालिका अपने स्तर पर इन सूचियों में परिवर्तन नहीं कर सकती।
Q4:
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर से संबंधित हालिया बहस के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: अभिकथन (A): केंद्र सरकार ने अपने शपथपत्र में तर्क दिया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लिए आरक्षण का मूल आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि सामाजिक बहिष्कार और ऐतिहासिक अन्याय में निहित है। कारण (R): आर्थिक उन्नति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा झेले जाने वाले सामाजिक कलंक, जाति-आधारित बहिष्कार और पारंपरिक वंचनाओं को पूरी तरह समाप्त कर देती है। उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
A: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
B: A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
C: A सही है लेकिन R गलत है
D: A गलत है लेकिन R सही है
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
अभिकथन (A) सही है:
केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपने पक्ष में यह स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण) का संवैधानिक उद्देश्य सदियों से चले आ रहे संरचनात्मक एवं ऐतिहासिक हाशियाकरण, भौगोलिक अलगाव और छुआछूत जैसी स्थितियों का समाधान करना है। इन वंचनाओं को केवल आय के आधार पर मापा या समाप्त नहीं किया जा सकता।
कारण (R) गलत है:
आर्थिक प्रगति या उच्च आय होने से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के प्रति मौजूद गहरे सामाजिक पूर्वाग्रह, जातिगत पहचान और सामाजिक कलंक अपने आप समाप्त नहीं हो जाते। पदानुक्रमित सामाजिक व्यवस्था में जाति-आधारित भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार आर्थिक स्थिति में सुधार के बावजूद बने रह सकते हैं।
Q5:
राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) और इससे संबंधित राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कविता ‘वंदे मातरम्’ के पूरे पाठ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था। 2. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 ने प्रारंभ में केवल राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान को संरक्षण प्रदान किया था, लेकिन बाद में किए गए विधायी संशोधनों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को भी वैधानिक कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया। 3. राष्ट्रगान के विपरीत, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत ऐसा कोई स्पष्ट मौलिक कर्तव्य नहीं है, जिसमें राष्ट्रीय गीत का उल्लेख किया गया हो। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाना चाहिए। हालाँकि, संविधान सभा ने कविता के केवल पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। शेष अंतरों को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उनमें धार्मिक भाव-चित्रण अधिक होने के कारण ऐतिहासिक आपत्तियाँ थीं।
कथन 2 सही है:
परंपरागत रूप से राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान या अनादर को दंडनीय बनाया गया था। बाद में किए गए विधायी संशोधनों, जिनमें हालिया राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026 भी शामिल है, के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को भी वैधानिक आपराधिक संरक्षण प्रदान किया गया। इसके परिणामस्वरूप ‘वंदे मातरम्’ का जानबूझकर अपमान दंडनीय अपराध बनाया गया।
कथन 3 सही है:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A(क) प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह “संविधान का पालन करे तथा उसके आदर्शों और संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे।”
इस प्रावधान में राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने पूर्व के निर्णयों में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय गीत को समान सम्मान प्राप्त है, लेकिन अनुच्छेद 51A(क) में राष्ट्रगान के लिए जो स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान है, वह राष्ट्रीय गीत के लिए स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
Q6:
हाल ही में केरल में केंद्र और राज्य के बीच प्रोटोकॉल से संबंधित विवाद का कारण बना ‘वंदे मातरम्’ गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। निम्नलिखित ऐतिहासिक कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह कविता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत में रची गई थी और बाद में उनके राजनीतिक उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल की गई। 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1896 के अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने पहली बार किसी राजनीतिक मंच पर इस गीत को गाया था। 3. 1905 में बंगाल विभाजन के बाद शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ राजनीतिक प्रतिरोध का प्रमुख उद्घोष बन गया। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी। यह मुख्यतः संस्कृत भाषा में रची गई थी, जिसमें कुछ बांग्ला शब्दों और वाक्यांशों का भी प्रयोग किया गया था। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध 1882 में प्रकाशित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। उपन्यास की पृष्ठभूमि संन्यासी विद्रोह से संबंधित थी।
कथन 2 सही है:
वर्ष 1896 में यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय राजनीतिक क्षेत्र में आया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने कविता को संगीतबद्ध किया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे सार्वजनिक रूप से गाया।
कथन 3 सही है:
1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ एक शक्तिशाली राष्ट्रीय प्रतिरोध के उद्घोष में बदल गया। इस आंदोलन की शुरुआत लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल के विभाजन के निर्णय के विरोध में हुई थी। ‘वंदे मातरम्’ पूरे भारत में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया। इसकी लोकप्रियता और व्यापक सार्वजनिक उद्घोष के कारण ब्रिटिश अधिकारियों ने अंततः सार्वजनिक रूप से इसके उद्घोष पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया।