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Daily-mcqs 14 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 14 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य का नाम बदलने की संसद की शक्ति से संबंधित हैं:

1.   किसी राज्य का नाम बदलने संबंधी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

2.   विधेयक की सिफारिश करने से पहले राष्ट्रपति को संबंधित राज्य की विधानमंडल की सकारात्मक (बाध्यकारी) सहमति प्राप्त करनी होती है।

3.   किसी राज्य का नाम बदलने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिए।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में परिवर्तन से संबंधित विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही प्रस्तुत किया जा सकता है।


कथन 2 गलत है:
राष्ट्रपति विधेयक को संबंधित राज्य की विधानमंडल के पास उसके विचार/मत व्यक्त करने के लिए भेजते हैं और इसके लिए एक निश्चित अवधि निर्धारित की जाती है। लेकिन राज्य विधानमंडल की राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती संसद उस राय को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है और विधेयक पर आगे कार्यवाही कर सकती है।


कथन 3 गलत है:
अनुच्छेद 3 के तहत राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में परिवर्तन करना अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संवैधानिक संशोधन नहीं माना जाता इसलिए इसके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं होती। ऐसा विधेयक संसद के प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है।


                            

Q2:

निम्नलिखित कथनों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 187 के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के 2026 के निर्णय के संदर्भ में विचार कीजिए:

1.   BNSS ने गंभीर अपराधों के लिए पुलिस हिरासत की अधिकतम कुल अवधि को मूल रूप से बढ़ाकर 60 दिन कर दिया है।

2.   BNSS के तहत पुलिस हिरासत का अनुरोध कुल हिरासत अवधि के पहले 40 या 60 दिनों के दौरान अलग-अलग चरणों (स्पेल) या खंडों में किया जा सकता है।

3.   यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 के तहत पूर्ववर्ती न्यायिक स्थिति से अलग है, जिसमें पुलिस हिरासत को रिमांड के शुरुआती 15 दिनों तक ही सख्ती से सीमित रखा गया था।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि BNSS ने पुलिस हिरासत की अधिकतम कुल अवधि में वृद्धि नहीं की है। इसकी अधिकतम सीमा अभी भी कुल 15 दिन ही है।


कथन 2 सही है:
BNSS
की धारा 187(2) के तहत मुख्य बदलाव पुलिस हिरासत लेने की समय-सीमा में लचीलापन है। अब जांच एजेंसियां कुल अनुमत हिरासत अवधि के पहले 40 या 60 दिनों के दौरान 15 दिनों की पुलिस हिरासत को अलग-अलग चरणों/अवधियों (spells) में मांग सकती हैं।


कथन 3 सही है:
पुरानी CrPC, 1973 की धारा 167 के तहत न्यायिक दृष्टांत, विशेष रूप से CBI बनाम अनुपम जे. कुलकर्णी (Anupam J. Kulkarni) मामले में स्थापित सिद्धांत के अनुसार, पुलिस हिरासत केवल रिमांड के शुरुआती 15 दिनों के भीतर ही दी जा सकती थी।


यदि किसी आरोपी को पहले ही दिन न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, तो 15वें दिन के बाद पुलिस के पास पुलिस हिरासत मांगने का अवसर समाप्त हो जाता था। BNSS ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है, ताकि जांच के दौरान बाद में नए सुराग मिलने पर भी जांच एजेंसियां पुलिस हिरासत का अनुरोध कर सकें।


                            

Q3:

सर्वोच्च न्यायालय के State of Andhra Pradesh बनाम Suda Suresh Veera Venkata Naga Raju (2026) के निर्देशों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   व्यक्तिगत नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मजिस्ट्रेटों को पुलिस हिरासत की ऐसी पूर्ण और गैर-विस्तार योग्य अधिकतम सीमा निर्धारित करने का अधिकार है, जिसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

2.   BNSS के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को प्रत्येक पूछताछ सत्र की पूरी अवधि के दौरान वकील की भौतिक उपस्थिति का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

3.   पुलिस हिरासत के दौरान की गई वास्तविक पूछताछ और उससे होने वाली बरामदगी को सक्रिय रूप से रिकॉर्ड किया जाना आवश्यक है, हालांकि पूरी हिरासत अवधि की लगातार रिकॉर्डिंग अनिवार्य नहीं है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायालय और मजिस्ट्रेट प्रारंभिक चरण में पुलिस हिरासत की ऐसी पूर्ण और गैर-विस्तार योग्य अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं कर सकते, जिसे आगे बढ़ाया ही जा सके। ऐसा करना BNSS के तहत जांच एजेंसी के उस वैधानिक अधिकार को अनुचित रूप से समाप्त कर देगा, जिसके तहत बाद में नए साक्ष्य या तथ्य सामने आने पर, कुल 15 दिनों की सीमा के भीतर, पुलिस हिरासत के अतिरिक्त चरणों की मांग की जा सकती है।


कथन 2 गलत है:
हालांकि BNSS की धारा 38 आरोपी को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार देती है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि वकील को प्रत्येक पूछताछ सत्र की पूरी अवधि में लगातार शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का अधिकार है। वकील आरोपी को दिखाई देने की सीमा के भीतर रह सकता है, लेकिन वह पूछताछ में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप नहीं कर सकता और ही पूरे सत्र में बैठकर उपस्थित रह सकता है।


कथन 3 सही है:
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि वास्तविक पूछताछ और उसके बाद की गई बरामदगी को उचित रूप से रिकॉर्ड किया जाना चाहिए, ताकि आरोपी को थर्ड-डिग्री तरीकों और जबरदस्ती से सुरक्षा मिल सके। हालांकि, न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि पूरी पुलिस हिरासत अवधि की लगातार, 24 घंटे रिकॉर्डिंग करना आवश्यक नहीं है।


                            

Q4:

हाल ही में पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह MMDR अधिनियम, 1957 में एक नई धारा 9D जोड़ता है, जो राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर (cess) या शुल्क लगाने से सख्ती से रोकती है।

2.   विधेयक स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य करता है कि खनिज अधिकारों पर पहले से वसूले गए सभी राज्य करों या शुल्कों को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा पूरी तरह वापस किया जाए।

3.   यह केंद्र सरकार के नियामक अधिकार क्षेत्र का विस्तार करते हुए उसे निर्धारित मानकों के आधार पर "खनिज-युक्त भूमि" (mineral-bearing lands) की पहचान और विनियमन करने का अधिकार देता है।

उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

A: केवल एक

B: केवल दो

C: सभी तीनो

D: कोई नहीं

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
विधेयक MMDR अधिनियम, 1957 में धारा 9D जोड़ता है। यह प्रावधान राज्य सरकारों की मनमानी राजकोषीय शक्तियों को सीमित करता है और उन्हें खनिज अधिकारों तथा खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर (cess) या शुल्क लगाने से रोकता है।


यह कानून जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद उत्पन्न अनिश्चित वित्तीय व्यवस्था को संबोधित करता है, जिसमें राज्यों के खनिजों के निष्कर्षण पर स्वतंत्र रूप से कर लगाने के अधिकार को बरकरार रखा गया था।


कथन 2 गलत है:
विधेयक भविष्य में राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले ऐसे शुल्कों को रोकता है और चल रही पूर्वव्यापी कर कार्रवाइयों को अमान्य करता है, लेकिन पहले से वसूले गए राज्य करों को वापस करने का प्रावधान नहीं करता। राज्यों को पिछले नियमों के तहत पहले से वसूली गई राशि अपने पास रखने की अनुमति है।


कथन 3 सही है:
पहले "खनिज-युक्त भूमि" (mineral-bearing lands) केंद्र सरकार के कड़े नियामक दायरे से बाहर मानी जाती थी। 2026 का संशोधन केंद्र सरकार को अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के आधार पर ऐसी भूमि को विनियमित करने का स्पष्ट अधिकार देता है। इससे प्रशासनिक नियंत्रण का एक बड़ा हिस्सा राज्यों से केंद्र सरकार की ओर स्थानांतरित होता है।


                            

Q5:

MMDR संशोधन विधेयक, 2026 द्वारा किए गए संरचनात्मक और परिचालन संबंधी खनन सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यदि मौजूदा खनन पट्टा क्षेत्र के भीतर किसी अन्य खनिज का भंडार खोजा जाता है, तो खनन पट्टाधारकों को उस खनिज के लिए शुरू से नया खनन पट्टा प्राप्त करना होगा।

2.   लिथियम, ग्रेफाइट, कोबाल्ट और निकेल जैसे कुछ महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को मौजूदा खनन पट्टे में शामिल करने के लिए पट्टाधारकों को कोई अतिरिक्त राशि नहीं देनी होगी।

3.   विधेयक कैप्टिव खानों (Captive Mines) से उत्पादित खनिजों की घरेलू खुले बाजार में बिक्री पर लगे प्रतिबंधात्मक नियामक सीमा को समाप्त करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
2026
का विधेयक कारोबार में सुगमता (Ease of Doing Business) बढ़ाने के लिए इसी बाधा को दूर करता है। अब एक ही खनन पट्टे में कई खनिजों को शामिल किया जा सकता है। मौजूदा पट्टाधारक अपने पट्टा क्षेत्र में खोजे गए नए खनिजों को सीधे मौजूदा पट्टा व्यवस्था में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे नया खनन पट्टा प्राप्त करने में लगने वाला समय और पूंजी बचती है।


कथन 2 सही है:
घरेलू संसाधन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विधेयक महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के खनन को प्रोत्साहन देता है। पट्टाधारकों को लिथियम, ग्रेफाइट, कोबाल्ट, निकेल, सोना और चांदी जैसे रणनीतिक खनिजों को मौजूदा उत्पादन पट्टे में शामिल करने के लिए अतिरिक्त शुल्क या प्रीमियम का भुगतान करने से छूट दी गई है।


कथन 3 सही है:
पिछली व्यवस्था के तहत कैप्टिव खानों को अपनी आवश्यकता से बची हुई खनिज मात्रा को खुले/व्यावसायिक बाजार में बेचने पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता था। 2026 का संशोधन इन प्रतिबंधों को समाप्त करता है। अब खदान मालिक की अपनी परिचालन आवश्यकताएं पूरी होने के बाद कैप्टिव खानों से उत्पादित खनिजों को खुले बाजार में बेचा जा सकता है। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।


                            
Aliganj Gomti Nagar Prayagraj