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Daily-mcqs 12 May 2026
Q1:
हाइपरसोनिक मिसाइलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः 1. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, हाइपरसोनिक हथियार कम ऊँचाई पर उड़ सकते हैं तथा दिशा बदल सकते हैं, जिससे वे अत्यधिक अप्रत्याशित बन जाते हैं। 2. हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGVs) निरंतर एवं ईंधन-कुशल वायुमंडलीय उड़ान के लिए स्क्रैमजेट इंजनों का उपयोग करते हैं। 3. हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों (HCMs) को दहन बनाए रखने के लिए अपने साथ ऑक्सीडाइज़र ले जाना पड़ता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें परवलयाकार (Parabolic) और पूर्वानुमेय मार्ग पर चलती हैं, जबकि हाइपरसोनिक मिसाइलें मैक 5 से अधिक गति से उड़ती हैं और इनमें अत्यधिक गतिशीलता (maneuverability) होती है। ये कम ऊँचाई पर उड़ सकती हैं तथा अपना मार्ग बदल सकती हैं, जिससे इन्हें पारंपरिक रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों द्वारा पहचानना और रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है।
कथन 2 गलत है:
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGVs) को पहले रॉकेट की सहायता से ऊपरी वायुमंडल तक पहुँचाया जाता है, जिसके बाद वे बिना निरंतर इंजन प्रणोदन के ग्लाइड करते हुए और दिशा बदलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं।
निरंतर शक्ति प्राप्त करने के लिए स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों (HCMs) में किया जाता है।
कथन 3 गलत है:
स्क्रैमजेट (Supersonic Combustion Ramjet) इंजन विशेष रूप से वायुमंडल में उपलब्ध ऑक्सीजन का उपयोग दहन के लिए करते हैं, इसलिए इन्हें भारी ऑक्सीडाइज़र अपने साथ ले जाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे मिसाइल हल्की और अधिक दक्ष बनती है।
Q2:
MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः 1. यह एक मिसाइल को केवल एक बड़े वारहेड को ले जाने की अनुमति देती है, जो दुश्मन के रडार से बचने के लिए दिशा बदल सकता है। 2. अंतरिक्ष में पहुँचने के बाद, मिसाइल अनेक री-एंट्री व्हीकलों को छोड़ती है, जो अलग-अलग लक्ष्यों की ओर पृथक प्रक्षेप पथ (trajectories) का अनुसरण करते हैं। 3. इस तकनीक के सफल एकीकरण से भारत विश्व के चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
MIRV तकनीक एक मिसाइल को केवल एक नहीं, बल्कि अनेक वारहेड ले जाने की क्षमता प्रदान करती है। ये वारहेड सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार करने के लिए निर्देशित किए जा सकते हैं।
कथन 2 सही है:
जब MIRV युक्त मिसाइल अंतरिक्ष में पहुँचती है, तब उसका पेलोड भाग—जिसे प्रायः “बस” कहा जाता है—अलग-अलग री-एंट्री व्हीकलों को छोड़ता है। इसके बाद ये व्हीकल स्वतंत्र रूप से अलग-अलग प्रक्षेप पथों का अनुसरण करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं।
कथन 3 सही है:
इस सफल परीक्षण के साथ भारत आधिकारिक रूप से उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है (जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं) जो MIRV युक्त बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती करने में सक्षम हैं।
Q3:
हाल ही में किए गए एडवांस्ड अग्नि मिसाइल परीक्षण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः 1. इस परीक्षण का संचालन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था। 2. इस मिसाइल की मारक क्षमता 5,000–5,500 किमी से अधिक है, जिससे यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में आती है। 3. यह भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (Credible Minimum Deterrence) और द्वितीय प्रहार क्षमता (Second-Strike Capability) को प्रमाणित करता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का उड़ान परीक्षण ओडिशा तट के निकट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप (पूर्व में व्हीलर द्वीप) से किया गया था।
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में स्थित इसरो (ISRO) का अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र है।
कथन 2 सही है:
परीक्षित अग्नि मिसाइल के उन्नत संस्करण की मारक क्षमता 5,000 से 5,500 किमी से अधिक है, जिससे यह स्पष्ट रूप से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में आती है।
कथन 3 सही है:
MIRV तकनीक के उपयोग से एक ही मिसाइल एक साथ कई दूर-दूर स्थित लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है। इससे भारत की द्वितीय प्रहार क्षमता (Second-Strike Capability) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तथा उसकी “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता” की नीति को मजबूती मिलती है, क्योंकि यह पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों को आसानी से निष्प्रभावी कर सकती है।
Q4:
रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-Spotted Cat) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः 1. यह भारतीय उपमहाद्वीप की स्थानिक (endemic) प्रजाति है तथा IUCN रेड लिस्ट में Vulnerable श्रेणी में सूचीबद्ध है। 2. भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत शामिल करके सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। 3. अरावली के झाड़ीदार क्षेत्रों (scrublands) में इसकी प्रजननशील आबादी का हालिया अवलोकन यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों के निकट खंडित आवास (fragmented habitats) भी दुर्लभ जैव-विविधता का समर्थन कर सकते हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
रस्टी-स्पॉटेड कैट (Prionailurus rubiginosus) केवल भारत की स्थानिक प्रजाति नहीं है; यह स्वाभाविक रूप से भारत, श्रीलंका और नेपाल में पाई जाती है।
इसके अतिरिक्त, IUCN में इसकी स्थिति Near Threatened है, न कि Vulnerable। यद्यपि यह आवासीय दबावों का सामना कर रही है, फिर भी यह Vulnerable श्रेणी की आवश्यक सीमा तक नहीं पहुँचती।
कथन 2 सही है:
भारत में रस्टी-स्पॉटेड कैट को सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।
इससे इस प्रजाति को पूर्ण संरक्षण प्राप्त होता है तथा इसके विरुद्ध किए गए अपराधों पर कठोरतम दंड का प्रावधान है।
कथन 3 सही है:
हाल ही में अरावली क्षेत्र (फरीदाबाद, दिल्ली-एनसीआर के निकट) में मादा रस्टी-स्पॉटेड कैट और उसके शावक के फोटोग्राफिक प्रमाण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह केवल किसी भटके हुए जीव की उपस्थिति नहीं, बल्कि एक प्रजननशील आबादी के अस्तित्व का ठोस प्रमाण है। इससे यह संकेत मिलता है कि मानव-जनित खंडन (fragmentation) के बावजूद अरावली जैसे झाड़ीदार पारितंत्र दुर्लभ वन्यजीवों के लिए आवश्यक आवास, शिकार उपलब्धता और पारिस्थितिक स्थिरता प्रदान करते हैं।
Q5:
भारत में हाल ही में अधिसूचित श्रम संहिताओं (Labour Codes) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः 1. श्रम संहिताएँ 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार अलग-अलग संहिताओं में समाहित करती हैं तथा असंगठित क्षेत्र और गिग श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाती हैं। 2. वेतन संहिता (Code on Wages) केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए एक समान राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (National Floor-Level Minimum Wage) निर्धारित करने का अधिकार देती है। 3. संहिताओं के प्रावधानों के अंतर्गत ‘श्रम’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (State List) का विषय बना रहता है, जिसके कारण राज्यों को केंद्र की स्वीकृति लेनी पड़ती है। 4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता (OSHWC Code) महिला श्रमिकों को रात्रि पाली (Night Shift) में कार्य करने की अनुमति देती है, बशर्ते वे सहमति दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
भारत सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को चार कार्यात्मक संहिताओं में समाहित किया है:
इन संहिताओं ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे को असंगठित श्रमिकों, प्रवासी श्रमिकों तथा गिग/प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों तक विस्तारित किया है।
कथन 2 सही है:
वेतन संहिता, 2019 केंद्र सरकार को न्यूनतम जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए “राष्ट्रीय फ्लोर वेतन” निर्धारित करने का अधिकार देती है।
राज्य सरकारें इस राष्ट्रीय फ्लोर वेतन से कम न्यूनतम वेतन निर्धारित नहीं कर सकतीं।
कथन 3 गलत है:
‘श्रम’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (Concurrent List / List III) का विषय है।
अर्थात् संसद और राज्य विधानसभाएँ दोनों श्रम संबंधी कानून बना सकती हैं। इसी कारण राष्ट्रीय श्रम संहिताएँ राज्यों द्वारा नियम निर्माण के लिए एक आधारभूत ढाँचा प्रदान करती हैं।
कथन 4 सही है:
OSHWC संहिता लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है तथा महिलाओं के रोजगार हेतु समान प्रावधान प्रदान करती है।
महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उनकी सहमति आवश्यक है तथा नियोक्ता को पर्याप्त सुरक्षा, संरक्षा और परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध करानी होती हैं।