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Daily-mcqs 11 Mar 2026
Q1:
श्वेत फॉस्फोरस (White Phosphorus – WP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. श्वेत फॉस्फोरस ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही स्वतः प्रज्वलित हो जाता है। 2. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी परिस्थितियों में प्रतिबंधित किया गया है। 3. इसका उपयोग कानूनी रूप से धुएँ की आड़ (smoke screens) और युद्धक्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था (battlefield illumination) के लिए किया जा सकता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही:
श्वेत फॉस्फोरस एक पायरोफोरिक (Pyrophoric) पदार्थ है, जिसका अर्थ है कि यह ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही स्वतः प्रज्वलित हो जाता है। इससे तीव्र गर्मी और घना सफेद धुआँ उत्पन्न होता है।
कथन 2 – गलत:
इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूर्ण रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। कुछ परिस्थितियों में इसका उपयोग अनुमति प्राप्त है, लेकिन नागरिकों या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका प्रयोग प्रतिबंधित या सीमित है।
कथन 3 – सही:
सैन्य बल श्वेत फॉस्फोरस का धुएँ की आड़ (smokescreen), संकेत देने (signaling) और प्रकाश व्यवस्था (illumination) के लिए कानूनी रूप से उपयोग करते हैं।
Q2:
श्वेत फॉस्फोरस जैसे दाहक हथियारों (Incendiary Weapons) के नियमन को मुख्य रूप से किस अंतरराष्ट्रीय समझौते के अंतर्गत कवर किया जाता है?
A: रासायनिक हथियार सम्मेलन (Chemical Weapons Convention – CWC)
B: कुछ पारंपरिक हथियारों पर सम्मेलन (Convention on Certain Conventional Weapons – CCW)
C: जैविक हथियार सम्मेलन (Biological Weapons Convention – BWC)
D: परमाणु हथियारों के अप्रसार की संधि (Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons – NPT)
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
Convention on Certain Conventional Weapons (CCW) उन हथियारों को नियंत्रित करता है जिन्हें अत्यधिक हानिकारक या अनावश्यक पीड़ा पहुँचाने वाला माना जाता है।
· CCW का प्रोटोकॉल III विशेष रूप से दाहक हथियारों (Incendiary Weapons) से संबंधित है, जिसमें श्वेत फॉस्फोरस भी शामिल हो सकता है जब इसका उपयोग दाहक हथियार के रूप में किया जाता है।
CWC (Chemical Weapons Convention):
यह रासायनिक हथियारों जैसे नर्व एजेंट (सरीन, VX) आदि पर प्रतिबंध लगाता है, न कि धुएँ या दाहक उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले श्वेत फॉस्फोरस पर।
BWC (Biological Weapons Convention):
यह जैविक हथियारों से संबंधित है।
NPT (Non-Proliferation Treaty):
यह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधि है।
Q3:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्रदान करता है। 2. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या करते हुए इसमें निजता के अधिकार (Right to Privacy) को शामिल किया है। 3. प्रतिष्ठा का अधिकार (Right to Reputation) भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – गलत:
अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों (persons) पर लागू होता है, केवल भारतीय नागरिकों पर नहीं। इसलिए विदेशी नागरिक भी इस अधिकार का दावा कर सकते हैं।
कथन 2 – सही:
Justice K.S. Puttaswamy बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार घोषित किया।
कथन 3 – सही:
न्यायालयों ने प्रतिष्ठा के अधिकार को भी जीवन और गरिमा (dignity) के अधिकार के हिस्से के रूप में अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मान्यता दी है।
Q4:
“भूल जाने का अधिकार” (Right to be Forgotten) की अवधारणा निम्नलिखित में से किससे सबसे अधिक संबंधित है?
A: सूचना का अधिकार (Right to Information) कानून
B: यूरोपीय डेटा संरक्षण विनियम (European Data Protection Regulations)
C: संयुक्त राष्ट्र चार्टर (United Nations Charter)
D: WTO के डिजिटल व्यापार समझौते
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
Right to be Forgotten की अवधारणा मुख्य रूप से यूरोपीय संघ (European Union) के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) ढाँचे से विकसित हुई है।
यह व्यक्तियों को यह अधिकार देता है कि वे सर्च इंजन या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से अपने पुराने, अप्रासंगिक या अनावश्यक व्यक्तिगत डेटा को हटाने का अनुरोध कर सकें।
भारत में निजता के अधिकार (Right to Privacy) के विकास के साथ न्यायालयों ने धीरे-धीरे “Right to be Forgotten” की अवधारणा को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गोपनीयता संबंधी न्यायशास्त्र (privacy jurisprudence) के माध्यम से मान्यता देना शुरू किया है।
Q5:
एम्फिपोड्स (Amphipods) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एम्फिपोड्स छोटे क्रस्टेशियन (Crustaceans) होते हैं जो सामान्यतः समुद्री, मीठे पानी तथा स्थलीय वातावरण में पाए जाते हैं। 2. ये आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) संघ से संबंधित हैं। 3. सभी एम्फिपोड्स परजीवी (parasitic) प्रकृति के होते हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही:
एम्फिपोड्स छोटे झींगा (shrimp) जैसे क्रस्टेशियन होते हैं, जो समुद्र, मीठे पानी के स्रोतों तथा नम स्थलीय आवासों में पाए जाते हैं।
कथन 2 – सही:
ये आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) संघ से संबंधित हैं, जिसमें कीट, मकड़ियाँ और केकड़े भी शामिल होते हैं।
कथन 3 – गलत:
अधिकांश एम्फिपोड्स स्वतंत्र रूप से रहने वाले (free-living) होते हैं और डिट्रिटिवोर (मृत जैविक पदार्थ खाने वाले) या स्कैवेंजर के रूप में कार्य करते हैं, न कि परजीवी।