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Daily-mcqs 10 Sep 2026
Q1:
सेलुलर वायरलेस नेटवर्क के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँ 5G तकनीक मोबाइल ब्रॉडबैंड से आगे बढ़कर परस्पर जुड़ी हुई औद्योगिक व्यवस्थाओं की ओर विकास को दर्शाती है, वहीं 6G की परिकल्पना पूरी तरह बुद्धिमान तथा AI-आधारित कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए की गई है। 2. नेटवर्क की लक्षित लेटेंसी (Latency) विभिन्न पीढ़ियों के साथ लगातार कम होती जाती है। यह 4G में लगभग 30–50 मिलीसेकंड, 5G में लगभग 1 मिलीसेकंड और 6G में 1 मिलीसेकंड से कम या माइक्रोसेकंड के स्तर तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है। 3. 5G की अधिकतम डेटा ट्रांसमिशन गति 1 Gbps तक है, जबकि 6G के बारे में अनुमान है कि इसकी गति टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) तक पहुँच सकती है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
विभिन्न पीढ़ियों के वायरलेस नेटवर्क में प्राथमिकता धीरे-धीरे बदलती गई है। 4G का मुख्य उद्देश्य स्मार्टफोन के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराना था। 5G का दायरा बढ़कर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), स्वचालन (Automation) और स्मार्ट सिटी जैसी तकनीकों तक पहुँच गया। 6G में ध्यान “Intelligent Connectivity” (बुद्धिमान कनेक्टिविटी) की ओर स्थानांतरित होने की संभावना है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence—AI) को नेटवर्क की मूल संरचना में ही शामिल किया जाएगा।
कथन 2 सही है:
लेटेंसी (Latency) का अर्थ है नेटवर्क द्वारा किसी अनुरोध का जवाब देने में लगने वाला समय। यह विभिन्न नेटवर्क पीढ़ियों में लगातार कम होती गई है। 4G में लेटेंसी लगभग 30–50 ms होती है। 5G में इसे घटाकर लगभग 1 ms तक करने का लक्ष्य है, जो रियल-टाइम ऑटोमेशन जैसी तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण है। 6G में अत्यंत कम, अर्थात 1 ms से भी कम या माइक्रोसेकंड स्तर की प्रतिक्रिया का लक्ष्य रखा गया है, ताकि तत्काल फीडबैक वाली प्रणालियों को सक्षम किया जा सके।
कथन 3 गलत है:
5G की डेटा स्पीड के संबंध में दिए गए आँकड़े गलत हैं। मानक तकनीकी मानकों के अनुसार, 4G की अधिकतम गति लगभग 1 Gbps तक पहुँच सकती है। 5G में यह अधिकतम क्षमता बढ़कर लगभग 10–20 Gbps तक पहुँचती है। भविष्य की 6G तकनीक में इससे भी अधिक गति की परिकल्पना की जा रही है, जो टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) के स्तर तक पहुँच सकती है।
Q2:
भारत में समर्पित माल ढुलाई गलियारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (Eastern Dedicated Freight Corridor—EDFC) मुख्य रूप से कोयला और थोक माल (Bulk Freight) के परिवहन पर केंद्रित है, जबकि पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (Western Dedicated Freight Corridor—WDFC) कंटेनर और EXIM कार्गो का परिवहन करता है। 2. पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC) उत्तर प्रदेश के दादरी से महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) तक विस्तृत है। 3. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) प्रशासनिक रूप से पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) के नियंत्रण में कार्य करता है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (EDFC) उत्तर और पूर्वी भारत के प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरता है और इसका प्रमुख ध्यान कोयला तथा थोक माल के परिवहन पर है। इसके विपरीत, पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC) भारत के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों से होकर गुजरता है तथा कंटेनर परिवहन और EXIM (निर्यात-आयात) कार्गो को पश्चिमी बंदरगाहों से जोड़ने पर विशेष ध्यान देता है।
कथन 2 सही है:
पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC) दादरी (उत्तर प्रदेश) से JNPT (महाराष्ट्र) तक बनाया गया है। यह उत्तरी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को पश्चिमी तट के प्रमुख समुद्री बंदरगाहों से सीधे जोड़ता है।
कथन 3 गलत है:
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) एक विशेष प्रयोजन संस्था (Special Purpose Vehicle—SPV) है, जिसे समर्पित माल ढुलाई गलियारों के निर्माण, रखरखाव और संचालन के लिए बनाया गया है। यह पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन नहीं, बल्कि रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
Q3:
भारत के लॉजिस्टिक्स और रेलवे बुनियादी ढाँचे में हाल के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (Western Dedicated Freight Corridor—WDFC) के अंतिम खंडों के उद्घाटन के साथ, प्रमुख DFC परियोजना का पूरा नियोजित नेटवर्क 2,800 से अधिक रूट किलोमीटर में पूरी तरह परिचालन में आ गया है। 2. WDFC विशेष रूप से उच्च क्षमता वाले डबल-स्टैक कंटेनर संचालन और अधिक एक्सल लोड (Axle Load) को सक्षम बनाता है। इससे पारंपरिक यात्री रेलवे नेटवर्क पर माल ढुलाई का दबाव कम करने में मदद मिलती है। 3. केंद्रीय बजट में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए दांकुनी–सूरत ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे नए गलियारों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने WDFC के बचे हुए महत्वपूर्ण अंतिम हिस्सों—जैसे सफाले, JNPT और साणंद के आसपास के खंडों—का उद्घाटन किया। इससे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई और देश का प्रमुख DFC नेटवर्क 2,800 किलोमीटर से अधिक की लंबाई में पूरी तरह परिचालन में आ गया।
कथन 2 सही है:
WDFC की प्रमुख इंजीनियरिंग विशेषताओं में डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों को चलाने की क्षमता और अधिक गति पर भारी एक्सल लोड को संभालने की क्षमता शामिल है। इससे भारी माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा यात्री ट्रेनों के साथ साझा की जाने वाली पारंपरिक रेलवे लाइनों से हट जाता है और यात्री रेल नेटवर्क पर भीड़ कम होती है।
कथन 3 सही है:
प्रमुख उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम रेल मार्गों से आगे माल ढुलाई नेटवर्क का विस्तार करने के लिए, केंद्रीय बजट में दांकुनी–सूरत ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य भारी माल ढुलाई के लिए रेल नेटवर्क का विस्तार करना और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स (Multimodal Logistics) को और अधिक मजबूत करना है।
Q4:
हाल के सुधारों के तहत भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के संस्थागत ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ISRO मुख्य रूप से परिपक्व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण (Commercialisation) और उद्योग-आधारित उपयोग पर ध्यान केंद्रित करता है। 2. IN-SPACe भारत में गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों (Non-Government Space Activities—NGSA) को बढ़ावा देने, अधिकृत करने और विनियमित करने के लिए सिंगल-विंडो स्वायत्त एजेंसी के रूप में कार्य करता है। 3. NSIL (NewSpace India Limited) अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) की वाणिज्यिक शाखा (Commercial Arm) के रूप में कार्य करता है और परिपक्व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर उपयोग में लाने में सहायता करता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
ISRO का मुख्य ध्यान व्यावसायीकरण पर नहीं है। नए संस्थागत ढाँचे के तहत ISRO का मुख्य कार्य उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D), ग्रहों की खोज (Planetary Exploration), अंतरिक्ष विज्ञान तथा रणनीतिक राष्ट्रीय मिशनों पर केंद्रित है।
कथन 2 सही है:
IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) को एक सिंगल-विंडो नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र की संस्थाओं को भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने की अनुमति देना, उनका मार्गदर्शन करना तथा गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा और विनियमन प्रदान करना है।
कथन 3 सही है:
NSIL (NewSpace India Limited) अंतरिक्ष विभाग की वाणिज्यिक शाखा के रूप में कार्य करता है। इसका प्रमुख कार्य परिपक्व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को उद्योगों तक पहुँचाना, उनका व्यावसायिक उपयोग बढ़ाना तथा उपयोगकर्ता-आधारित वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशनों को आगे बढ़ाना है।
Q5:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ISRO की स्थापना 15 अगस्त, 1969 को भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का सीधे स्थान लेते हुए की गई थी। 2. INCOSPAR की स्थापना मूल रूप से 1962 में डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में की गई थी। 3. 1969 में अपनी स्थापना के बाद से ही ISRO सीधे अंतरिक्ष विभाग (Department of Space—DOS) के अधीन कार्य करता रहा है, जिसकी देखरेख भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
ISRO की आधिकारिक स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी। इसने अपनी पूर्ववर्ती संस्था INCOSPAR का स्थान लिया और इसका कार्यक्षेत्र अधिक व्यापक किया गया, ताकि राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सके।
कथन 2 सही है:
INCOSPAR (Indian National Committee for Space Research) की स्थापना 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy—DAE) के अंतर्गत, महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की पहल पर की गई थी। उन्हें व्यापक रूप से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक (Father of the Indian Space Programme) माना जाता है।
कथन 3 गलत है:
यद्यपि वर्तमान में ISRO अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अधीन कार्य करता है, लेकिन 1969 में अपनी स्थापना के समय यह सीधे अंतरिक्ष विभाग के अधीन नहीं था। प्रारंभ में ISRO परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन था। बाद में 1972 में इसे नवगठित अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अधीन कर दिया गया। अंतरिक्ष विभाग सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है।