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Daily-mcqs 09 Oct 2026
Q1:
2026 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार किसे प्रदान किया गया?
A: रयोजी नयोरि और के. बैरी शार्पलेस
B: हेनरी बी. कागन और केन्सो सोई
C: कार्ल डिसेरोथ और पीटर हेगेमैन
D: बेंजामिन लिस्ट और डेविड मैकमिलन
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
2026 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार 7 अक्टूबर, 2026 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापानी रसायनज्ञ केन्सो सोई को प्रदान किया गया।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इस जोड़ी को “असममित कार्बनिक संश्लेषण में गैर-रैखिक प्रभावों और स्व-उत्प्रेरण की खोज के लिए” सम्मानित किया। उनके क्रांतिकारी कार्य ने यह विस्तार से बताकर एक सदी पुरानी रासायनिक पहेली को सुलझाया कि रासायनिक अभिक्रियाएँ “दर्पण प्रतिबिंब” वाले अणुओं में असममिति कैसे उत्पन्न और बढ़ा सकती हैं। इस घटना को आणविक काइरलता (Chirality) या समकाइरलता (Homochirality) के रूप में जाना जाता है।
Q2:
असममित कार्बनिक संश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. काइरलता (Chirality) उस गुण को संदर्भित करती है जिसमें कोई अणु और उसका दर्पण प्रतिबिंब एक-दूसरे पर पूर्णतः अध्यारोपित नहीं किए जा सकते। 2. गैर-रैखिक प्रभाव तब होता है जब किसी अभिक्रिया उत्पाद की एनैन्टियोमेरिक शुद्धता, काइरल उत्प्रेरक की एनैन्टियोमेरिक शुद्धता के सीधे समानुपाती नहीं होती है। 3. असममित उत्प्रेरण हमेशा दो एनैन्टियोमरों का 50:50 मिश्रण उत्पन्न करता है। 4. गैर-रैखिक प्रभाव रासायनिक अभिक्रिया के दौरान थोड़े-से काइरल असंतुलन के प्रवर्धन को समझाने में सहायता कर सकते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 — सही: काइरलता एक आणविक गुण है, जो दाएँ और बाएँ हाथ जैसी संरचनात्मक विशेषता से संबंधित है। किसी काइरल अणु के दो दर्पण-प्रतिबिंब रूपों को एनैन्टियोमर कहा जाता है। वे अक्सर जैविक प्रणालियों में अलग-अलग व्यवहार करते हैं।
कथन 2 — सही: गैर-रैखिक प्रभाव तब उत्पन्न होता है जब काइरल उत्प्रेरक और उत्पाद की एनैन्टियोमेरिक संरचना के बीच संबंध रैखिक नहीं होता है। अभिक्रिया की क्रियाविधि के आधार पर, उत्पाद में उत्प्रेरक की तुलना में अधिक या कम एनैन्टियोमेरिक आधिक्य हो सकता है।
कथन 3 — गलत: असममित उत्प्रेरण का उपयोग विशेष रूप से एक एनैन्टियोमर के निर्माण को दूसरे की तुलना में प्राथमिकता देने के लिए किया जाता है। यह आवश्यक नहीं है कि इससे 50:50 का मिश्रण ही उत्पन्न हो।
कथन 4 — सही: कुछ उत्प्रेरक प्रणालियाँ दो दर्पण-प्रतिबिंब रूपों के बीच प्रारंभिक छोटे असंतुलन को बढ़ा सकती हैं, जिससे यह समझने में सहायता मिलती है कि एनैन्टियोमेरिक संवर्धन का उच्च स्तर कैसे उत्पन्न हो सकता है।
Q3:
लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह रिपोर्ट 1970 से अब तक विश्व स्तर पर विलुप्त हुई प्रत्येक व्यक्तिगत पशु प्रजाति की कुल संख्या का पता लगाती है। 2. स्थलीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की तुलना में मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों में कशेरुकी जीवों की आबादी में औसत गिरावट सबसे अधिक दर्ज की गई। 3. रिपोर्ट में शामिल लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI), जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (ZSL) के सहयोग से तैयार किया जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI) विलुप्त हो चुके या लुप्त हुए व्यक्तिगत जानवरों की कुल संख्या को नहीं मापता है। इसके बजाय, यह समय के साथ निगरानी की गई कशेरुकी जीवों की आबादी के आकार में सापेक्ष प्रचुरता में औसत परिवर्तन (वृद्धि या कमी) को मापता है। औसतन 73% की गिरावट का अर्थ है कि आबादी के आकार में औसतन कमी आई है, न कि 73% प्रजातियाँ विलुप्त हो गई हैं।
कथन 2 सही है: 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिसमें औसतन 85% की कमी आई। यह स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों (69%) और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों (59%) की तुलना में कहीं अधिक है।
कथन 3 सही है: लिविंग प्लैनेट इंडेक्स को वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के साथ साझेदारी में जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (ZSL) द्वारा विकसित और तैयार किया जाता है।
Q4:
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) द्वारा जारी लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. वैश्विक स्तर पर कशेरुकी जीवों की आबादी में औसत गिरावट (1970–2022): 73% 2. सबसे अधिक क्षेत्रीय जनसंख्या गिरावट वाला क्षेत्र: लैटिन अमेरिका और कैरेबियन (95%) 3. रिपोर्ट में जैव विविधता के वैश्विक ह्रास का सबसे बड़ा एकल कारक बताया गया है: केवल जलवायु परिवर्तन ऊपर दिए गए कितने युग्मों का सही मिलान किया गया है?
A: केवल एक
B: केवल दो
C: सभी तीनो
D: कोई नहीं
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
युग्म 1 का सही मिलान किया गया है: 2026 की रिपोर्ट में 1970 से 2022 के बीच निगरानी की गई कशेरुकी जीवों की आबादी (स्तनधारी, पक्षी, मछलियाँ, उभयचर और सरीसृप) में औसतन 73% की गिरावट को रेखांकित किया गया है।
युग्म 2 का सही मिलान किया गया है: क्षेत्रीय स्तर पर, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में सबसे गंभीर गिरावट दर्ज की गई, जहाँ वन्यजीवों की आबादी में औसतन 95% की कमी देखी गई।
युग्म 3 का गलत मिलान किया गया है: हालाँकि जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारक है, लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट रूप से वैश्विक खाद्य प्रणाली (जिस तरीके से दुनिया खाद्य पदार्थों का उत्पादन और उपभोग करती है) को जैव विविधता के ह्रास का सबसे बड़ा एकल कारक बताती है। इसके साथ-साथ आवासों का विनाश और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी जैव विविधता के ह्रास के प्रमुख कारण हैं।
Q5:
भारत में अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के कानूनी और संवैधानिक ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को अंतरराज्यीय नदियों के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी भी विवाद के न्यायनिर्णयन का प्रावधान करने का अधिकार देता है। 2. संसद ने ऐसे विवादों से निपटने के लिए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 बनाया। 3. सर्वोच्च न्यायालय को अनुच्छेद 131 के तहत किसी भी अंतरराज्यीय जल विवाद का सीधे निर्णय करने का मूल अधिकार क्षेत्र प्राप्त है, जो संसद द्वारा बनाए गए अधिकार क्षेत्र को अपवर्जित करने वाले कानूनों को दरकिनार करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262(1) कहता है कि संसद कानून बनाकर किसी भी अंतरराज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण के संबंध में किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन का प्रावधान कर सकती है।
कथन 2 सही है: अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम (ISRWD), 1956 को संसद द्वारा अनुच्छेद 262 के तहत अधिनियमित किया गया था, ताकि बातचीत के माध्यम से समाधान विफल होने पर विवादों के निपटारे के लिए तदर्थ अधिकरणों की स्थापना की जा सके।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 262(2) स्पष्ट रूप से संसद को ऐसा कानून बनाने की अनुमति देता है, जिसके तहत न तो सर्वोच्च न्यायालय और न ही कोई अन्य न्यायालय ऐसे किसी विवाद या शिकायत के संबंध में अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सके। ISRWD अधिनियम के तहत, अधिकरण को सौंपे गए मामलों के संबंध में सामान्य न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र, जिसमें अनुच्छेद 131 के तहत सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार क्षेत्र भी शामिल है, वर्जित है (हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय अधिकरण के अंतिम निर्णय के संबंध में सीमित अपीलीय/विशेष अनुमति अधिकार क्षेत्र बनाए रखता है)।