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Daily-mcqs 09 Sep 2026
Q1:
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण (Swachh Vayu Sarvekshan) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा किया जाने वाला द्विवार्षिक (Biennial) आकलन है, जिसमें वास्तविक समय (Real-time) के परिवेशी वायु गुणवत्ता आँकड़ों के आधार पर शहरों की रैंकिंग की जाती है। 2. यह ढाँचा पूरी तरह से PM10 और PM2.5 के स्तर में कमी पर निर्भर करता है तथा अंतिम रैंकिंग में इसे 100% भारांक (Weightage) दिया जाता है। 3. यह शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं (City-Specific Clean Air Action Plans - CAPs) के शासन और कार्यान्वयन का मूल्यांकन करके प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण एक वार्षिक (Annual) आकलन है, न कि द्विवार्षिक। इसे 2022-23 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा शुरू किया गया था, न कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा। इसके अतिरिक्त, यह शहरों की रैंकिंग केवल परिवेशी वायु गुणवत्ता के आँकड़ों के आधार पर नहीं करता, बल्कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रयासों के आधार पर करता है।
कथन 2 गलत है:
यह सर्वेक्षण मुख्य रूप से प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करता है, न कि केवल प्रदूषण के पूर्ण/वास्तविक स्तरों का। महत्वपूर्ण रूप से, PM10 में कमी का मूल्यांकन मानदंडों में केवल 2.5% भारांक है। शेष भारांक बायोमास प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और जन-जागरूकता जैसे कार्यान्वयन संबंधी मानकों को दिया जाता है।
कथन 3 सही है:
विभिन्न जनसंख्या श्रेणियों के अंतर्गत शहरों को स्वच्छ वायु से संबंधित उपायों के आधार पर रैंक करके, यह आकलन प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा देता है और स्थानीय/शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करता है।
Q2:
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. NCAP का लक्ष्य 2025-26 तक PM10 की सांद्रता में 40% तक की कमी लाना या राष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करना है। 2. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में, 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, क्योंकि वह अपने वार्षिक PM10 स्तर को राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) से नीचे लाने में सफल रहा। 3. मूल्यांकन की कार्यप्रणाली में एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया शामिल है, जिसमें शहर द्वारा स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तर पर निगरानी और स्वतंत्र क्षेत्रीय सत्यापन शामिल हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जनवरी 2019 में शुरू किया गया था। इसका स्पष्ट उद्देश्य लक्ष्य वर्ष 2025-26 तक PM10 के स्तर में 30% से 40% तक की कमी लाना या राष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करना है।
कथन 2 गलत है:
लखनऊ ने 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में प्रथम स्थान अवश्य प्राप्त किया है, लेकिन यह उपलब्धि इसके शासन एवं संरचनात्मक उपायों जैसे मशीनीकृत सड़क सफाई और इलेक्ट्रिक कचरा वाहनों आदि के आधार पर है। लखनऊ में वार्षिक PM10 की सांद्रता अभी भी राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) 60 µg/m³ से अधिक है। हालांकि लखनऊ ने PM10 के स्तर को 2017-18 में 250 µg/m³ से घटाकर 137 µg/m³ कर लिया है, फिर भी यह राष्ट्रीय मानक से नीचे नहीं आया है।
कथन 3 सही है:
पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया को एक मजबूत बहु-स्तरीय प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है। इसमें शहर द्वारा स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तर पर निगरानी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा मूल्यांकन तथा स्वतंत्र तृतीय-पक्ष द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन शामिल हैं।
Q3:
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक घरेलू बाजार-आधारित तंत्र है, जो मुख्य रूप से पूर्ण उत्सर्जन सीमा (Absolute Emission-Cap) दृष्टिकोण पर आधारित है। 2. इस योजना को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (Energy Conservation Act, 2001) में संशोधन के माध्यम से सक्षम बनाया गया है तथा इसे विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) द्वारा अधिसूचित किया गया है। 3. जो संस्थाएँ अपने लिए निर्धारित लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र (Carbon Credit Certificates - CCCs) प्राप्त होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
भारत की CCTS एक कठोर पूर्ण उत्सर्जन सीमा (Absolute Emission-Cap) के बजाय उत्सर्जन-तीव्रता (Emissions-Intensity) दृष्टिकोण का पालन करती है। इसमें निर्धारित क्षेत्रों में उत्पादन या आउटपुट की प्रति इकाई के सापेक्ष कार्बन उत्सर्जन को मापा और मूल्यांकित किया जाता है। इससे आर्थिक विकास को जारी रखते हुए सापेक्ष ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता को कम करने में मदद मिलती है।
कथन 2 सही है:
CCTS के लिए कानूनी ढाँचा ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 (Energy Conservation (Amendment) Act, 2022) के माध्यम से स्थापित किया गया, जिसने मूल ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 में संशोधन किया। केंद्र सरकार ने विद्युत मंत्रालय के माध्यम से इस योजना की परिचालन व्यवस्था को अधिसूचित किया।
कथन 3 सही है:
CCTS की व्यवस्था के अंतर्गत, पंजीकृत संस्थाएँ यदि अपने निर्धारित उत्सर्जन-तीव्रता लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, तो उन्हें कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र (Carbon Credit Certificates - CCCs) प्रदान किए जाते हैं। जो संस्थाएँ अपने लक्ष्यों को पूरा करने में असफल रहती हैं, उन्हें अनुपालन (Compliance) के लिए इन क्रेडिट्स को खरीदना पड़ता है।
Q4:
यूनाइटेड किंगडम के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और भारत की CCTS को हाल ही में मिली मान्यता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. CBAM का प्राथमिक उद्देश्य कार्बन रिसाव (Carbon Leakage) को रोकना है, जिसके लिए घरेलू उत्पादन और कार्बन-गहन आयातित वस्तुओं के बीच कार्बन लागत को समान स्तर पर लाया जाता है। 2. UK द्वारा CCTS को मान्यता दिए जाने से पात्र भारतीय वस्तुओं के UK आयातक भारत में पहले से भुगतान किए गए कार्बन मूल्य (Carbon Price) के लिए राहत का दावा कर सकते हैं। 3. CBAM सभी आयातित वस्तुओं पर सार्वभौमिक रूप से लागू होता है, चाहे उनकी कार्बन तीव्रता या क्षेत्र (Sector) कुछ भी हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) का मुख्य उद्देश्य कार्बन रिसाव (Carbon Leakage) को रोकना है। कार्बन रिसाव ऐसी स्थिति है जिसमें कार्बन-गहन उद्योग उन देशों में अपना उत्पादन स्थानांतरित कर देते हैं जहाँ पर्यावरण संबंधी कानून अपेक्षाकृत कम कठोर होते हैं या जलवायु अनुपालन की लागत कम होती है।
CBAM का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों और कार्बन-गहन आयातित वस्तुओं के बीच कार्बन लागत में समानता स्थापित करना है।
कथन 2 सही है:
भारत की घरेलू CCTS (Carbon Credit Trading Scheme) को एक योग्य कार्बन-प्राइसिंग तंत्र के रूप में मान्यता देकर, UK भारतीय निर्माताओं द्वारा घरेलू स्तर पर पहले से भुगतान किए गए कार्बन मूल्य के लिए आयातकों को कार्बन मूल्य में राहत (Carbon Price Relief) या समायोजन का लाभ देता है। इसका उद्देश्य दोहरी कराधान (Double Taxation) की स्थिति से बचना है।
कथन 3 गलत है:
CBAM सभी आयातित वस्तुओं पर सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं होता। यह विशेष रूप से चयनित कार्बन-गहन उत्पादों (Carbon-Intensive Products) को लक्षित करता है।
उदाहरण के लिए, UK के ढाँचे में लोहा और इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक, सीमेंट, सिरेमिक, काँच और हाइड्रोजन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
Q5:
रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council - DAC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जो तीनों सेनाओं और भारतीय तटरक्षक बल के लिए नई नीतियों तथा पूंजीगत अधिग्रहण (Capital Acquisitions) से संबंधित निर्णय लेती है। 2. इस परिषद की अध्यक्षता चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) द्वारा की जाती है। 3. हाल ही में, DAC ने लगभग ₹1.10 लाख करोड़ मूल्य के प्रस्तावों के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity - AoN) प्रदान की, जिसमें लगभग 98% खरीद भारतीय घरेलू उद्योग से करने का लक्ष्य रखा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसे भारतीय थल सेना, नौसेना, वायु सेना और तटरक्षक बल के लिए पूंजीगत अधिग्रहण के संबंध में सैद्धांतिक स्वीकृति, अर्थात् आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity - AoN) प्रदान करने का अधिकार है।
कथन 2 गलत है:
DAC की अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री (रक्षा मंत्री) द्वारा की जाती है, न कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) द्वारा।
कथन 3 सही है:
सितंबर 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में DAC ने लगभग ₹1.10 लाख करोड़ मूल्य के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें लगभग 98% खरीद भारतीय घरेलू उद्योग से किए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है।