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Daily-mcqs 08 Oct 2026
Q1:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित SME Growth Fund (SGF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे पारंपरिक बैंक ऋण या कर्ज के बजाय प्रत्यक्ष इक्विटी और विकास-उन्मुख पूंजी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। 2. इस फंड को एक वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund - AIF) के रूप में संरचित और स्थापित किया जाएगा। 3. इसका दायरा विशेष रूप से महानगरीय शहरों में स्थित सूक्ष्म और लघु विनिर्माण इकाइयों तक ही सीमित है। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: SME Growth Fund का उद्देश्य धैर्यपूर्ण (patient), विकास-उन्मुख इक्विटी पूंजी प्रदान करना है, ताकि विस्तार करने वाले SMEs के लिए इक्विटी वित्तपोषण की संरचनात्मक कमी को पूरा किया जा सके और पारंपरिक ऋण-प्रधान या ऋण-आधारित दृष्टिकोण से हटकर वित्त उपलब्ध कराया जा सके।
कथन 2 सही है: सरकार की ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के दिशानिर्देशों के तहत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
कथन 3 गलत है: यह फंड केवल सूक्ष्म/लघु उद्यमों तक सीमित नहीं है, बल्कि विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों के छोटे और मध्यम उद्यमों को लक्षित करता है। साथ ही, इसका मजबूत ध्यान टियर-II और टियर-III शहरों (और औद्योगिक क्लस्टरों) में संतुलित क्षेत्रीय विकास पर है, न कि केवल महानगरीय क्षेत्रों तक सीमित रहने पर।
Q2:
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संशोधित MSME वर्गीकरण के अंतर्गत, विनिर्माण और सेवा उद्यमों को अलग किए बिना निवेश और वार्षिक कारोबार पर आधारित एक समान मापदंड लागू किया जाता है। 2. एक सूक्ष्म उद्यम को ऐसी इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें ₹2.5 करोड़ तक का निवेश और ₹10 करोड़ तक का वार्षिक कारोबार हो। 3. हाल के आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, MSMEs भारत के कुल निर्यात में 45% से अधिक का योगदान करते हैं। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: संशोधित MSME वर्गीकरण दिशानिर्देशों के अंतर्गत, सरकार ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बीच के अंतर को समाप्त कर दिया है तथा दोनों के लिए निवेश और वार्षिक कारोबार के संयुक्त मानदंड को लागू किया है।
कथन 2 सही है: एक सूक्ष्म उद्यम (micro enterprise) के लिए सीमा मानदंड संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में ₹2.5 करोड़ से अधिक का निवेश न होना तथा ₹10 करोड़ से अधिक का वार्षिक कारोबार न होना निर्धारित किया गया है।
कथन 3 सही है: MSMEs भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संरचनात्मक चालक हैं और भारत के कुल निर्यात में लगभग 48.58% का योगदान करते हैं, जो 45% से अधिक होने वाले कथन को सही ठहराता है।
Q3:
अक्टूबर 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की आयोजित मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. MPC ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि करके इसे 5.50% कर दिया। 2. नीतिगत रुख को 'तटस्थ' (neutral) से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) कर दिया गया। 3. इस संशोधन के बाद, स्थायी जमा सुविधा (Standing Deposit Facility - SDF) दर को 5.25% पर समायोजित किया गया और सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility - MSF) दर को 5.75% पर निर्धारित किया गया। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: अक्टूबर 2026 में, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय MPC ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.50% करने का निर्णय लिया। यह फरवरी 2023 के बाद RBI द्वारा रेपो दर में पहली वृद्धि थी।
कथन 2 सही है: MPC ने अपने समग्र मौद्रिक नीति रुख को 'तटस्थ' (neutral) से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) कर दिया, ताकि लगातार बनी खुदरा मुद्रास्फीति के दबावों के विरुद्ध अधिक सक्रिय और कठोर प्रतिक्रिया का संकेत दिया जा सके (जैसे अगस्त 2026 में मुद्रास्फीति का बढ़कर 4.82% हो जाना)।
कथन 3 सही है: रेपो दर 5.50% होने के साथ, कॉरिडोर समायोजन के तहत स्थायी जमा सुविधा (Standing Deposit Facility - SDF) दर को 5.25% पर रखा गया, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility - MSF) दर और बैंक दर (Bank Rate) दोनों को 5.75% पर समायोजित किया गया।
Q4:
अक्टूबर 2026 के अपने मौद्रिक नीति वक्तव्य में RBI द्वारा घोषित व्यापक आर्थिक अनुमानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए CPI मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2% लगाया गया है। 2. 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान संशोधित करके 7.1% कर दिया गया है। 3. दर में वृद्धि का मुख्य कारण घरेलू विनिर्माण में पूर्ण आर्थिक ठहराव के साथ-साथ अपस्फीतिकारी चक्र (deflationary spirals) था। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: अक्टूबर 2026 की नीति समीक्षा में RBI ने 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2% लगाया (पहले के 5.0% के अनुमान से संशोधित), जिसका कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक व्यवधान तथा खाद्य और मुख्य मुद्रास्फीति (core price) का लगातार दबाव था।
कथन 2 सही है: मौद्रिक परिस्थितियों को सख्त करने के बावजूद, RBI ने 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि के अनुमान को 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1% कर दिया, यह उल्लेख करते हुए कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां लचीली बनी हुई हैं।
कथन 3 गलत है: दर में वृद्धि ठहराव या अपस्फीति के कारण नहीं हुई थी। इसके बजाय, यह एक पूर्व-emptive और प्रतिक्रियात्मक सख्ती चक्र था, जो बढ़ती खुदरा मुद्रास्फीति (आरामदायक स्तरों से ऊपर जाने), वैश्विक कमोडिटी/कच्चे तेल से संबंधित प्रतिकूल परिस्थितियों, बाहरी क्षेत्र के दबावों और वैश्विक स्तर पर समकालिक मौद्रिक सख्ती की प्रवृत्तियों के कारण शुरू हुआ।
Q5:
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और फॉर्म 6 में संशोधन के संबंध में हाल की सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यदि कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) अन्य निर्वाचन आयुक्तों से परामर्श किए बिना फॉर्म 6 जैसे वैधानिक प्रपत्रों में एकतरफा बदलाव कर सकते हैं। 2. फॉर्म 6 एक वैधानिक दस्तावेज है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत बनाए गए निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 द्वारा विनियमित होता है। 3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 में आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि ECI एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है और निर्णय निर्धारित वैधानिक तथा संस्थागत निर्णय-प्रक्रिया के अनुरूप होने चाहिए। CEC द्वारा बहुमत या सर्वसम्मति के ढांचे से बाहर जाकर की गई एकतरफा कार्रवाइयों को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है और न्यायालयों द्वारा संभावित रूप से निरस्त किया जा सकता है।
कथन 2 सही है: पात्र नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आवेदन करने हेतु फॉर्म 6 का उपयोग किया जाता है। यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के वैधानिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करता है (ये नियम ECI से परामर्श के बाद अधिनियम की धारा 28 के तहत बनाए गए हैं)।
कथन 3 सही है: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 CEC और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेदों को हल करने के लिए सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया और निर्धारित बहुमत तंत्र का प्रावधान करता है।
Q6:
हाल ही में स्वीकृत Integrated Transport & Logistics Authority (ITLA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे संसद के एक समर्पित अधिनियम द्वारा समर्थित एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया है। 2. यह 10 वर्ष या उससे अधिक की योजना अवधि के साथ एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा। 3. इसे ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली सभी सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं का तकनीकी और वित्तीय, दोनों प्रकार का मूल्यांकन करने का दायित्व सौंपा गया है। उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ITLA को संसद के अधिनियम द्वारा सीधे बनाए गए वैधानिक निकाय के बजाय एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle - SPV) और शीर्ष संस्थागत तंत्र के रूप में स्थापित करने की मंजूरी दी है।
कथन 2 सही है: ITLA 10 वर्ष या उससे अधिक की योजना अवधि के साथ एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा, जिसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह और नौवहन, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय नौवहन, शहरी गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स शामिल होंगे।
कथन 3 गलत है: ITLA विशेष रूप से ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा, जबकि वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा तंत्रों के माध्यम से ही किया जाता रहेगा।