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Daily-mcqs 08 Jul 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 08 Jul 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

वैश्विक AI शासन (Global AI Governance) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   AI शासन पर प्रथम संयुक्त राष्ट्र (UN) वैश्विक संवाद (Global Dialogue on AI Governance) की स्थापना सभी देशों को उत्तरदायी AI (Responsible AI) के सिद्धांतों को निर्धारित करने हेतु समान मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।

2.   इसके प्रमुख उद्देश्यों में से एक AI के विकास को अंतरराष्ट्रीय कानून तथा मानवाधिकारों के अनुरूप सुनिश्चित करना है।

3.   यह संवाद केवल राष्ट्रीय सरकारों की भागीदारी तक सीमित है तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) और नागरिक समाज (Civil Society) के हितधारकों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1 और 2 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 2 और 3 केवल

D: 1, 2 और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 – सही: AI शासन पर संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक संवाद संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के अधिदेश के तहत स्थापित किया गया, ताकि सभी देशों को AI शासन के सिद्धांतों के निर्माण में समान एवं समावेशी भागीदारी का अवसर मिल सके।

  • कथन 2 – सही: इस संवाद का उद्देश्य मानवीय निगरानी (Human Oversight), सुरक्षा (Safety), संरक्षा (Security) तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप उत्तरदायी AI के विकास को बढ़ावा देना है।

  • कथन 3 – गलत: यह संवाद बहु-हितधारक (Multi-stakeholder) प्रकृति का है, जिसमें सरकारों, उद्योग जगत (Industry), नागरिक समाज (Civil Society) तथा विशेषज्ञों की भागीदारी होती है। अतः यह केवल सरकारों तक सीमित नहीं है।


                            

Q2:

बैंकों में ऋण-से-जमा अनुपात (Credit-to-Deposit Ratio/CD Ratio) तथा परिसंपत्ति-दायित्व प्रबंधन (Asset-Liability Management/ALM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   उच्च ऋण-से-जमा अनुपात (Credit-to-Deposit Ratio) यह दर्शाता है कि बैंक अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा ऋण देने में उपयोग कर रहे हैं।

2.   लगातार उच्च ऋण-से-जमा अनुपात बैंकों के पास उपलब्ध तरलता सुरक्षा (Liquidity Cushion) को कम कर सकता है।

3.   परिसंपत्ति-दायित्व असंतुलन (Asset-Liability Mismatch) तब उत्पन्न होता है जब बैंक अल्पकालिक जमाओं (Short-term Deposits) के आधार पर दीर्घकालिक ऋण (Long-term Loans) प्रदान करते हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1 और 2 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 2 और 3 केवल

D: 1, 2 और 3

उत्तर: D

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 – सही: ऋण-से-जमा अनुपात (Credit-to-Deposit Ratio/CD Ratio), जिसे ऋण-से-जमा अनुपात (Loan-to-Deposit Ratio/LDR) भी कहा जाता है, यह मापता है कि बैंक ने अपनी कुल जमा राशि का कितना भाग ऋण के रूप में वितरित किया है। उच्च अनुपात दर्शाता है कि बैंक जमा राशि का अधिक हिस्सा ऋण देने में उपयोग कर रहे हैं।

  • कथन 2 – सही: यद्यपि उच्च CD अनुपात बैंक की प्रभावी ऋण वितरण क्षमता को दर्शा सकता है, लेकिन इससे बैंकों के पास तरलता का सुरक्षा भंडार (Liquidity Buffer) कम रह जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक बड़ी मात्रा में जमा निकासी (Deposit Withdrawal) या वित्तपोषण संबंधी झटकों (Funding Shocks) का सामना करने पर बैंक अधिक जोखिम में सकते हैं।

  • कथन 3 – सही: परिसंपत्ति-दायित्व असंतुलन (Asset-Liability Mismatch/ALM) तब उत्पन्न होता है जब बैंक दीर्घकालिक परिसंपत्तियों (जैसे ऋण) का वित्तपोषण अल्पकालिक दायित्वों (जैसे जमा) के माध्यम से करते हैं। यदि जमाकर्ता ऋणों की परिपक्वता (Maturity) से पहले अपनी जमा राशि निकाल लेते हैं, तो बैंक को तरलता संकट (Liquidity Stress) का सामना करना पड़ सकता है।


                            

Q3:

भारत में CASA (चालू खाता एवं बचत खाता) जमा (Deposit) की वृद्धि में मंदी आने के लिए निम्नलिखित में से कौन-से कारक उत्तरदायी रहे हैं?

1.   परिवारों द्वारा इक्विटी बाजार, म्यूचुअल फंड तथा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेश में वृद्धि।

2.   UPI तथा ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के माध्यम से तीव्र डिजिटलीकरण।

3.   बचत खातों की तुलना में सावधि जमा (Fixed Deposits/FDs) पर अधिक ब्याज दरों की पेशकश।

4.   भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि (Balance) को अनिवार्य रूप से कम करने का निर्देश।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: 1, 2 और 3 केवल

B: 1, 3 और 4 केवल

C: 1, 2 और 4 केवल

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 – सही: निवेशक अधिक प्रतिफल (Higher Returns) की तलाश में अपनी बचत को इक्विटी बाजार, म्यूचुअल फंड, ETFs तथा अन्य बाजार-आधारित निवेश साधनों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं, जिससे कम लागत वाले CASA जमा की वृद्धि प्रभावित हुई है।

  • कथन 2 – सही: UPI, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सरल KYC प्रक्रिया तथा ऑनलाइन निवेश ऐप्स ने निवेश को अधिक आसान और सुलभ बना दिया है, जिसके कारण पारंपरिक बचत खातों से धन का स्थानांतरण तेज़ हुआ है।

  • कथन 3 – सही: बैंकों द्वारा बचत खातों की तुलना में सावधि जमा (FDs) पर अधिक ब्याज दरें प्रदान किए जाने से जमाकर्ता CASA खातों से धन निकालकर टर्म डिपॉजिट (Term Deposits) में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।

  • कथन 4 – गलत: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है, जिसमें बचत खातों की शेष राशि को अनिवार्य रूप से कम करने की बात कही गई हो। CASA जमा की वृद्धि में मंदी का मुख्य कारण बाजार की बदलती परिस्थितियाँ तथा परिवारों की निवेश संबंधी प्राथमिकताओं में परिवर्तन है।


 


                            

Q4:

भारतीय न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) के उपयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   AI हैलुसिनेशन (AI Hallucinations) से आशय ऐसी स्थिति से है, जब AI प्रणाली मनगढ़ंत (Fabricated) या गलत जानकारी उत्पन्न करती है, लेकिन उसे वास्तविक एवं प्रामाणिक (Authentic) के रूप में प्रस्तुत करती है।

2.   उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने यह माना है कि यदि AI से कार्यकुशलता बढ़ती है और लंबित मामलों (Case Pendency) में कमी आती है, तो वह न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning) का स्थान ले सकता है।

3.   AI द्वारा तैयार किए गए कानूनी शोध (Legal Research) का न्यायिक निर्णय लेने में उपयोग करने से पहले उसका स्वतंत्र रूप से सत्यापन (Independent Verification) किया जाना आवश्यक है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1 और 2 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 2 और 3 केवल

D: 1, 2 और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 – सही: AI हैलुसिनेशन (AI Hallucinations) तब होता है, जब AI प्रणाली झूठी, मनगढ़ंत या गलत जानकारी उत्पन्न करती है, लेकिन उसे तथ्यात्मक (Factual) जानकारी के रूप में प्रस्तुत करती है। कानूनी संदर्भ में इसमें अस्तित्वहीन न्यायिक निर्णय (Non-existent Judgments), फर्जी उद्धरण (Fake Citations) अथवा गलत कानूनी व्याख्याएँ शामिल हो सकती हैं।

  • कथन 2 – गलत: उच्चतम न्यायालय ने AI को न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning) का विकल्प नहीं माना है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि AI केवल सहायक उपकरण (Assistive Tool) के रूप में कार्य कर सकता है, जबकि न्यायिक निर्णय मानवीय विवेक, संवैधानिक मूल्यों तथा सत्यापित कानूनी स्रोतों पर ही आधारित होने चाहिए।

  • कथन 3 – सही: AI द्वारा उत्पन्न फर्जी कानूनी उद्धरणों (Fabricated Legal Citations) के सामने आने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि AI द्वारा तैयार की गई किसी भी कानूनी सामग्री का उपयोग न्यायिक निर्णय में करने से पहले उसका स्वतंत्र सत्यापन किया जाना चाहिए तथा न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए।


                            

Q5:

न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) को अपनाने से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?

1.   मनगढ़ंत (Fabricated) कानूनी उद्धरण (Legal Citations) तथा गलत कानूनी जानकारी का सृजन।

2.   ऐतिहासिक कानूनी आँकड़ों (Historical Legal Datasets) में मौजूद पक्षपात (Bias) का पुनरुत्पादन।

3.   सहानुभूति (Empathy) तथा प्रासंगिक संवैधानिक तर्क (Contextual Constitutional Reasoning) का प्रयोग करने में AI की असमर्थता।

4.   न्यायालयों में AI के उपयोग को विनियमित करने हेतु व्यापक कानूनी ढाँचे (Comprehensive Legal Framework) का अभाव।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: 1, 2 और 3 केवल

B: 1, 3 और 4 केवल

C: 1, 2 और 4 केवल

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: D

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 – सही: AI कभी-कभी हैलुसिनेशन (AI Hallucinations) के कारण मनगढ़ंत न्यायिक निर्णय, फर्जी कानूनी उद्धरण (Fake Citations) या गलत कानूनी व्याख्याएँ प्रस्तुत कर सकता है। यदि इनका सत्यापन किया जाए, तो ये न्यायिक निर्णयों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।

  • कथन 2 – सही: ऐतिहासिक कानूनी आँकड़ों पर प्रशिक्षित AI प्रणालियाँ उन आँकड़ों में पहले से मौजूद पूर्वाग्रहों (Biases) को अपनाकर उन्हें और बढ़ा सकती हैं, जिससे निष्पक्षता (Fairness) तथा कानून के समक्ष समानता (Equality before Law) प्रभावित हो सकती है।

  • कथन 3 – सही: न्यायिक निर्णय केवल कानूनी प्रावधानों पर आधारित नहीं होते, बल्कि उनमें सहानुभूति, तथ्यों का समुचित मूल्यांकन, संवैधानिक सिद्धांतों की समझ तथा सामाजिक संदर्भ का भी महत्व होता है। AI इन मानवीय गुणों का स्वतंत्र रूप से स्थानापन्न नहीं बन सकता।

  • कथन 4 – सही: वर्तमान में भारत में न्यायालयों में AI के उपयोग को विशेष रूप से नियंत्रित करने वाला कोई व्यापक नियामक या कानूनी ढाँचा उपलब्ध नहीं है। इसलिए नैतिक दिशा-निर्देश (Ethical Guidelines), जवाबदेही तंत्र (Accountability Mechanisms) तथा कानूनी पेशेवरों में AI साक्षरता (AI Literacy) विकसित करने की आवश्यकता है।


 


                            
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