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Daily-mcqs 04 Jun 2026
Q1:
रुद्रम-II मिसाइल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक एयर-टू-सर्फेस एंटी-रेडिएशन मिसाइल है, जिसे मुख्य रूप से दुश्मन के रडार और संचार प्रणालियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। 2. इसमें एक द्वि-मार्गदर्शन (Dual-guidance) प्रणाली है, जो इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर का उपयोग करती है, जिससे दुश्मन द्वारा रडार बंद करने पर भी लक्ष्य पर नज़र बनाए रखी जा सकती है। 3. इसकी गति क्षमता मैक 5.5 तक है और यह लगभग 300 किमी की स्टैंड-ऑफ रेंज के भीतर लक्ष्यों को भेद सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
यह मिसाइल रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद और भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा विकसित एक स्वदेशी अगली पीढ़ी की एयर-टू-सर्फेस एंटी-रेडिएशन मिसाइल है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय करना है, जिसमें रडार स्टेशन, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) साइट्स और निगरानी नेटवर्क शामिल हैं।
कथन 2 सही है:
इस मिसाइल में अत्याधुनिक बहु-स्तरीय मार्गदर्शन प्रणाली है। यह पैसिव रडार होमिंग (PRH) के साथ-साथ इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर का उपयोग करती है। इससे यदि दुश्मन रडार बंद भी कर दे, तब भी मिसाइल अपने लक्ष्य को सटीकता से भेद सकती है।
कथन 3 सही है:
रुद्रम-II स्टैंड-ऑफ क्षमता वाली मिसाइल है, जिसकी अनुमानित रेंज 300–350 किमी है और यह मैक 5.5 तक की हाइपरसोनिक गति प्राप्त कर सकती है। इससे दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिल पता है।
Q2:
मिशन “स्नेहजोरी” के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और असम सरकार द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई एक क्लस्टर-आधारित पहल है। 2. इस मिशन का उद्देश्य मूगा रेशम उत्पादकों और बुनकरों की आय बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम से अधिक करना है। 3. इसमें एक डिजिटल अनुरेखण (ट्रेसेबिलिटी) प्रणाली शामिल है, जो वैश्विक उपभोक्ताओं को उनकी खरीद की भौगोलिक संकेतक (GI) प्रामाणिकता सत्यापित करने की सुविधा प्रदान करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1: सही।
मिशन “स्नेहजोरी” ₹411 करोड़ की क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और असम सरकार द्वारा संयुक्त रूप से वर्ष 2026 से 2028 तक के लिए प्रारंभ किया गया है।
कथन 2: सही।
मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य मूल्य संवर्धन के माध्यम से मूगा रेशम उत्पादकों और बुनकरों की आय को ऐतिहासिक औसत ₹25,000 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम से अधिक करना है।
कथन 3: सही।
मूगा रेशम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विलासिता ब्रांड बनाने के लिए मिशन के अंतर्गत एकीकृत “स्नेहजोरी” ब्रांडिंग तथा जीआई-आधारित डिजिटल अनुरेखण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता उत्पाद की प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे।
Q3:
भारत में मूगा रेशम और उसके सांस्कृतिक महत्त्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूगा रेशम को एरी और तसर रेशम के साथ वान्य (जंगली) रेशम की श्रेणी में रखा जाता है। 2. इसे भारत के प्रथम रेशम उत्पाद के रूप में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ था। 3. ऐतिहासिक रूप से अहोम वंश के राजदरबार के बाहर मूगा रेशम की खेती और उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1: सही।
भारत में रेशम उत्पादन को मुख्यतः शहतूत (मलबरी) रेशम और वान्य (जंगली) रेशम में वर्गीकृत किया जाता है। मूगा, एरी और तसर रेशम वान्य रेशम की श्रेणी में आते हैं।
कथन 2: सही।
मूगा रेशम केवल असम में पाया जाता है तथा यह विश्व का एकमात्र प्राकृतिक स्वर्णिम रेशम है। इसे भारत के प्रथम रेशम उत्पाद के रूप में जीआई संरक्षण प्राप्त हुआ था।
कथन 3: गलत।
यद्यपि मूगा रेशम का उपयोग ऐतिहासिक रूप से अहोम वंश के राजकीय परिधानों में व्यापक रूप से किया जाता था और इसका विशेष सांस्कृतिक महत्व था, किंतु इसका उपयोग सामान्य जनता के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित नहीं था। वर्तमान में भी यह असम के पारंपरिक परिधान मेखला-चादर का प्रमुख अंग है तथा ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।
Q4:
भारत–नेपाल सीमा विवाद की ऐतिहासिक एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. सन् 1816 की सुगौली संधि में काली (महाकाली) नदी को नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में निर्धारित किया गया था। 2. सीमा विवाद का मुख्य कारण महाकाली नदी के वास्तविक उद्गम-स्थल के संबंध में स्पष्टता का अभाव है। 3. नेपाल का दावा है कि नदी का उद्गम कालापानी से होता है, जबकि भारत इसे लिम्पियाधुरा से उत्पन्न मानता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है :
भारत और नेपाल के मध्य सीमा-निर्धारण का ऐतिहासिक आधार 1816 की सुगौली संधि है, जो ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल राज्य के बीच संपन्न हुई थी। इस संधि में काली (महाकाली) नदी को नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में स्वीकार किया गया था।
कथन 2 सही है :
विवाद का मूल कारण महाकाली नदी के वास्तविक उद्गम-स्थल को लेकर भिन्न-भिन्न व्याख्याएँ हैं। संधि में सीमा को नदी के आधार पर निर्धारित तो किया गया, किंतु नदी के उद्गम-स्थल तथा उसकी प्रमुख सहायक धाराओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था।
कथन 3 गलत है :
यह कथन उल्टा प्रस्तुत किया गया है। नेपाल का मत है कि महाकाली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा से होता है, जिसके आधार पर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा नेपाल के भूभाग में आते हैं। दूसरी ओर, भारत नदी का उद्गम कालापानी–लिपुलेख क्षेत्र के निकट मानता है तथा इन क्षेत्रों को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद का अभिन्न भाग मानता है।
Q5:
भारत में पितृत्व (Paternity) विवादों में डीएनए परीक्षण से संबंधित कानूनी ढांचे और न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की पूर्व धारा 112 (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 116) के तहत, वैध विवाह के दौरान जन्मे बच्चे की वैधता (legitimacy) के पक्ष में एक मजबूत कानूनी अनुमान (presumption) होता है। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्थापित किया है कि किसी भी वैवाहिक (matrimonial) या अभिरक्षा (custody) विवाद में सत्य का पता लगाने के लिए न्यायालय बिना किसी विशेष आधार के डीएनए परीक्षण का आदेश दे सकते हैं। 3. नंदलाल वासुदेव बदवाइक बनाम लता (2014) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि जब वैज्ञानिक सत्य (डीएनए परीक्षण से प्राप्त) और कानूनी अनुमान में प्रत्यक्ष टकराव हो, तो वैज्ञानिक सत्य को प्राथमिकता दी जा सकती है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
कानून परिवार की स्थिरता और बच्चे की गरिमा की रक्षा के लिए बच्चे की वैधता का मजबूत अनुमान लगाता है। यह प्रावधान पहले भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 112 में था, जिसे अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam - BSA), 2023 की धारा 116 में शामिल किया गया है। इसके अनुसार, वैध विवाह के दौरान या विवाह-विच्छेद के 280 दिनों के भीतर (यदि माँ ने पुनर्विवाह न किया हो) जन्मा बच्चा वैध माना जाएगा, जब तक कि पति-पत्नी के बीच “non-access” (संपर्क/सहवास का अभाव) कठोर रूप से सिद्ध न कर दिया जाए।
कथन 2 गलत है:
सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार कहा है कि डीएनए परीक्षण का आदेश नियमित रूप से या केवल सत्य की खोज के लिए नहीं दिया जा सकता। Goutam Kundu v. State of West Bengal तथा अन्य निर्णयों में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षण का आदेश देने से पहले एक मजबूत prima facie (प्रथम दृष्टया) मामला स्थापित होना चाहिए। बिना पर्याप्त आधार के डीएनए परीक्षण करवाना व्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता का उल्लंघन कर सकता है तथा बच्चे को सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ सकता है।
कथन 3 सही है:
Nandlal Wasudeo Badwaik v. Lata मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दो-स्तरीय सिद्धांत स्थापित किया। सामान्य परिस्थितियों में कानूनी अनुमान लागू होगा, लेकिन यदि न्यायालय के आदेश पर डीएनए परीक्षण कराया जाता है और उसके परिणाम स्पष्ट रूप से किसी जैविक तथ्य को सिद्ध करते हैं, तो वैज्ञानिक साक्ष्य कानूनी अनुमान पर वरीयता प्राप्त कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि वैज्ञानिक प्रमाणों से स्थापित वास्तविकता को केवल कानूनी अनुमान के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।