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Daily-mcqs 02 May 2026
Q1:
संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UNSG) की नियुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. महासचिव की नियुक्ति महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर की जाती है। 2. इस पद के लिए सिफारिश हेतु सुरक्षा परिषद में कम से कम 9 मतों की आवश्यकता होती है, जिसमें पाँचों स्थायी सदस्यों के सहमति मत शामिल होते हैं। 3. संयुक्त राष्ट्र चार्टर महासचिव के चयन के लिए क्षेत्रीय समूहों के बीच भौगोलिक घूर्णन (रोटेशन) की व्यवस्था को स्पष्ट रूप से अनिवार्य करता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 97 के अनुसार, महासचिव की नियुक्ति महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर की जाती है।
कथन 2 सही है: सुरक्षा परिषद की सिफारिश एक महत्वपूर्ण (substantive) विषय है। इसके लिए 9 मतों की आवश्यकता होती है और यह पाँच स्थायी सदस्यों (P5) के वीटो अधिकार के अधीन होता है। किसी भी स्थायी सदस्य का वीटो किसी उम्मीदवार को रोक सकता है।
कथन 3 गलत है: भौगोलिक रोटेशन एक अनौपचारिक प्रथा (informal practice) है और यह परंपरा पर आधारित है, न कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया प्रावधान। यद्यपि वर्तमान में लैटिन अमेरिका और कैरेबियन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की अपेक्षा रहती है, यह कानूनी आवश्यकता नहीं है।
Q2:
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की भूमिका और महत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत महासचिव को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (Chief Administrative Officer) के रूप में वर्णित किया गया है। 2. महासचिव के पास सदस्य देशों पर सीधे प्रतिबंध (sanctions) लगाने का अधिकार होता है। 3. महासचिव अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा पहुँचाने वाले मामलों को सुरक्षा परिषद के समक्ष ला सकता है। 4. महासचिव अक्सर जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे मुद्दों पर वैश्विक प्रवक्ता (spokesperson) के रूप में कार्य करता है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 2,3 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही
संयुक्त राष्ट्र चार्टर महासचिव को “मुख्य प्रशासनिक अधिकारी” के रूप में परिभाषित करता है।
कथन 2 – गलत
महासचिव प्रतिबंध नहीं लगा सकता। यह अधिकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास होता है।
कथन 3 – सही
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 99 के तहत, महासचिव अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले मामलों को सुरक्षा परिषद के समक्ष ला सकता है।
कथन 4 – सही
महासचिव की व्यापक कूटनीतिक और नैतिक भूमिका होती है:
• जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और असमानता जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना
• वैश्विक कूटनीतिज्ञ और मध्यस्थ के रूप में कार्य करना
Q3:
कांडला में भारत के पहले ग्रीन मेथनॉल संयंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. यह भारत का पहला संयंत्र है जो प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (Prosopis juliflora) नामक एक आक्रामक झाड़ी को कच्चे माल (फीडस्टॉक) के रूप में उपयोग करके मेथनॉल का उत्पादन करता है। 2. इस तकनीक में बायोमास को सिंगैस (syngas) में परिवर्तित किया जाता है, जो दहन (combustion) और पाइरोलिसिस (pyrolysis) के बीच की प्रक्रिया है। 3. यह परियोजना दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण और असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड की संयुक्त पहल है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: कांडला (गुजरात) में यह परियोजना प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा, जिसे आमतौर पर गंडो बावल या विलायती कीकर कहा जाता है, का उपयोग करती है। यह मैक्सिको मूल की एक अत्यधिक आक्रामक झाड़ी है, जो बन्नी घासभूमि की जैव विविधता को प्रभावित कर रही है। इसे मेथनॉल में परिवर्तित किया जा रहा है।
कथन 2 सही है: इसमें गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमें बायोमास को बिना ऑक्सीजन के गर्म करके सिंगैस बनाया जाता है। यह प्रक्रिया दहन और पाइरोलिसिस के बीच मानी जाती है।
कथन 3 गलत है: यह परियोजना असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड की नहीं, बल्कि थर्मैक्स लिमिटेड और अंकुर साइंटिफिक एनर्जी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा विकसित की जा रही है।
Q4:
ग्रीन मेथनॉल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. यह एक कम-कार्बन तरल ईंधन है, जिसे बायोमास या ग्रीन हाइड्रोजन तथा अवशोषित CO2CO_{2}CO2 के संयोजन से बनाया जा सकता है। 2. यह पारंपरिक ईंधनों की तुलना में CO2CO_{2}CO2 उत्सर्जन को 95% तक कम कर सकता है। 3. इसमें अम्ल (acid) की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसे संग्रहित करना कठिन होता है, जबकि जीवाश्म मेथनॉल में ऐसा नहीं होता। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: ग्रीन मेथनॉल नवीकरणीय स्रोतों से बनाया जाता है—या तो बायो-मेथनॉल (बायोमास से) या ई-मेथनॉल (ग्रीन हाइड्रोजन और अवशोषित CO2CO_{2}CO2 से)।
कथन 2 सही है: ग्रीन मेथनॉल एक स्वच्छ विकल्प है, जो CO2CO_{2}CO2 उत्सर्जन में 95% तक की कमी, NOxNO_{x}NOx में लगभग 80% की कमी, तथा सल्फर ऑक्साइड (SOxSO_{x}SOx) को लगभग समाप्त कर सकता है।
कथन 3 गलत है: यद्यपि कच्चा माल (जैसे प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा) सघन हो सकता है, लेकिन उत्पादित ग्रीन मेथनॉल को स्वच्छ और उपयोगी ईंधन के रूप में तैयार किया जाता है। इसमें उच्च अम्लीयता जैसी समस्या नहीं होती, जिससे भंडारण कठिन हो।
Q5:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. भारत और इटली के बीच सैन्य सहयोग योजना संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है। 2. इटली, भारत का NATO सहयोगी होने के कारण, भारत को सुरक्षा गारंटी प्रदान करता है। 3. इस सहयोग में रक्षा उत्पादन और तकनीकी साझेदारी भी शामिल है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
हाल ही में Rajnath Singh और Guido Crosetto के बीच भारत–इटली सैन्य सहयोग योजना (एमसीपी) 2026–27 का आदान-प्रदान हुआ, जो दोनों देशों के रक्षा संबंधों को एक संरचित और संस्थागत आधार प्रदान करता है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब Russia–Ukraine War के कारण यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ी है तथा NATO देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं, जिससे भारत के लिए बहु-आयामी रक्षा साझेदारी का महत्व बढ़ जाता है।
इस सैन्य सहयोग योजना के अंतर्गत संयुक्त सैन्य अभ्यास, त्रि-सेवा (थल, जल, वायु) प्रशिक्षण, सैन्य कर्मियों के आदान-प्रदान तथा रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही, उभरती हुई प्रौद्योगिकियों—जैसे साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणालियाँ, और उन्नत रक्षा उपकरण—के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएँ भी विकसित की जा रही हैं। यह भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति के अनुरूप है, जिसके तहत भारत किसी एक सैन्य गुट पर निर्भर हुए बिना बहु-साझेदार मॉडल अपनाता है, साथ ही रक्षा आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण भी करता है।
हालाँकि, इटली NATO का सदस्य होने के बावजूद भारत को कोई सामूहिक सुरक्षा गारंटी प्रदान नहीं करता, क्योंकि नाटो की सामूहिक रक्षा व्यवस्था केवल उसके सदस्य देशों तक सीमित है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत–इटली संबंध एक सैन्य गठबंधन (Alliance) नहीं बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) है, जिसमें सहयोग लचीला और हित-आधारित होता है।
इसके अतिरिक्त, यह सहयोग ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा सह-उत्पादन (Co-production) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) को भी प्रोत्साहित करता है। इससे भारत में रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी निर्भरता कम होगी और स्वदेशी क्षमताएँ विकसित होंगी।
व्यापक महत्व