होम > Daily-mcqs
Daily-mcqs 01 Sep 2026
Q1:
हाल ही में शुरू की गई “एक राष्ट्र, एक समय” पहल तथा विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ये नियम भारतीय मानक समय (IST) को विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के वैधानिक समर्थन के अंतर्गत अनिवार्य और एकमात्र संदर्भ समय बनाते हैं। 2. राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) संस्थानों के बीच सूक्ष्म-सेकंड से लेकर नैनो-सेकंड स्तर तक समय-सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रकाश-तंतु आधारित संचार तंत्र पर व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (White Rabbit Technology) का उपयोग करती है। 3. इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक समय-अंकन के लिए मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा नियंत्रित वैश्विक स्थिति-निर्धारण प्रणाली (GPS) पर निर्भर रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 52 के अंतर्गत विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इससे समय को माप की एक विनियमित इकाई के रूप में कानूनी मान्यता मिलती है। साथ ही, विभिन्न डिजिटल संचार तंत्रों में एक समान समय-सामंजस्य लागू करने के लिए कानूनी आधार प्राप्त होता है।
कथन 2 सही है:
सटीक समय के प्रसार के लिए सरकार ने व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी पर आधारित एक प्रदर्शन संचार तंत्र स्थापित किया है। यह प्रौद्योगिकी प्रकाश-तंतु आधारित संचार तंत्र के माध्यम से नैनो-सेकंड से भी कम स्तर की समय-सटीकता प्राप्त करने में सक्षम है। इसके लिए संचारित आँकड़ों के विलंब को लगातार मापा और सुधारा जाता है।
इससे शेयर बाजार, बैंकिंग व्यवस्था तथा दूरसंचार तंत्र जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों को एक ही सटीक समय के साथ जोड़े रखना संभव होता है।
कथन 3 गलत है:
“एक राष्ट्र, एक समय” पहल का उद्देश्य अमेरिका की वैश्विक स्थिति-निर्धारण प्रणाली (GPS) पर निर्भरता बढ़ाना नहीं, बल्कि विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करना है। GPS साइबर-छल, संकेतों में छेड़छाड़ तथा संकेत-अवरोध जैसी समस्याओं के प्रति संवेदनशील हो सकता है।
इसके स्थान पर भारत अपने स्वदेशी उपग्रह-आधारित दिशा-निर्धारण तंत्र — नाविक (NavIC) के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। नाविक का पूरा नाम “भारतीय नक्षत्र के साथ नौवहन” (Navigation with Indian Constellation) है। यह भारत की सामरिक एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
Q2:
1. भारतीय मानक समय (IST) की गणना 82.5° पूर्वी मानक मध्याह्न रेखा के आधार पर की जाती है, जो भारत के ठीक चार राज्यों से होकर गुजरती है। 2. भारत के लिए समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) के आधिकारिक निर्धारण और रखरखाव की जिम्मेदारी सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) की है। 3. नए नियम आधिकारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय संस्थानों को अपनी आंतरिक घड़ियों को उन्नत करने तथा भारतीय मानक समय के साथ समन्वित करने के लिए 180 दिनों की संक्रमण अवधि प्रदान करते हैं।भारतीय मानक समय (IST) की आधारभूत भौगोलिक स्थिति और संस्थागत ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
82.5° पूर्वी देशांतर भारत की मानक मध्याह्न रेखा के रूप में निर्धारित है। हालाँकि, यह चार नहीं बल्कि पाँच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है। ये राज्य हैं — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश।
कथन 2 सही है:
नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) भारत की आधिकारिक समय-निर्धारक संस्था है। यह अत्यंत उन्नत सीज़ियम और रूबिडियम परमाणु घड़ियों की सहायता से भारत के राष्ट्रीय समय मानक को बनाए रखती है, जिसे UTC(NPLI) के रूप में नामित किया गया है।
कथन 3 सही है:
इस बात को ध्यान में रखते हुए कि नियमों को तुरंत लागू करने से स्वचालित कंप्यूटर नेटवर्क में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 में लागू करने की एक विलंबित व्यवस्था रखी गई है।
संस्थानों को अपने सर्वर, आँकड़ा-संग्रह प्रणालियों और अभिलेखों को भारतीय मानक समय के अनुरूप व्यवस्थित करने के लिए 180 दिनों की अनुपालन अवधि दी गई है। इसका उद्देश्य समय संबंधी त्रुटियों तथा संभावित सुरक्षा समस्याओं को रोकना है।
Q3:
1. अगस्त 2026 में प्रधानमंत्री की ताशकंद यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया। 2. दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। 3. दोनों देशों के बीच मूल रणनीतिक साझेदारी की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी, जिसके कारण वर्ष 2026 में इस साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो गए।भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हाल के द्विपक्षीय घटनाक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
अगस्त 2026 में ताशकंद की आधिकारिक राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
कथन 2 सही है:
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान में 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के स्तर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
कथन 3 सही है:
भारत और उज्बेकिस्तान ने पहली बार वर्ष 2011 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। इसलिए वर्ष 2026 में इस साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हुए, जिसके बाद इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में और अधिक मजबूत किया गया।
Q4:
1. यह एक राष्ट्रीय स्तर का समग्र डिजिटल निगरानी मंच है, जिसे राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित किया गया है और तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाती है। 2. उर्वरकों के लिए वर्तमान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था के अंतर्गत, सब्सिडी की राशि सीधे व्यक्तिगत किसानों के सत्यापित बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है। 3.यह मंच खरीदारों की श्रेणी, भूमि-स्वामित्व और फसल के प्रकार जैसे विशिष्ट मानकों के आधार पर उर्वरक की खरीद का विश्लेषण करने के लिए बड़े आँकड़ों के विश्लेषण का उपयोग करता है।एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग के लिए राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित किया गया है तथा इसे तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाती है। यह एक डिजिटल आधारभूत तंत्र के रूप में कार्य करती है, जो घरेलू उत्पादन और आयात से लेकर खुदरा बिक्री तक पूरी उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करती है।
कथन 2 गलत है:
अन्य कल्याणकारी योजनाओं के विपरीत, जिनमें धनराशि सीधे लाभार्थी को हस्तांतरित की जाती है, उर्वरक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था में 100% सब्सिडी सीधे उर्वरक निर्माण करने वाली या आयात करने वाली कंपनियों को दी जाती है।
यह भुगतान तभी किया जाता है जब आधार से जुड़े सत्यापन के साथ बिक्री केंद्र (PoS) उपकरणों के माध्यम से वास्तविक खुदरा बिक्री सफलतापूर्वक दर्ज हो जाती है।
किसान को उर्वरक सब्सिडी वाली कम खुदरा कीमत पर खरीदना होता है; उसे सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में नहीं मिलती।
कथन 3 सही है:
iFMS के आधुनिक चरण में आँकड़ा विश्लेषण का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके माध्यम से अधिकारी विभिन्न खरीदार श्रेणियों, भूमि-स्वामित्व के आकार, जिलावार वितरण और फसल के प्रकार के आधार पर उर्वरक की खपत के स्वरूप का विश्लेषण कर सकते हैं।
इससे उर्वरक की मांग में असामान्य वृद्धि, संभावित कमी अथवा अवैध रूप से उर्वरक के दूसरे स्थान पर भेजे जाने जैसी घटनाओं का समय रहते पता लगाने में सहायता मिलती है।
Q5:
1. उर्वरक की खुदरा खरीद को प्रमाणित भूमि अभिलेखों और वास्तविक फसल आवश्यकताओं के साथ सटीक रूप से जोड़ना। 2. खरीदार की स्थिति का वास्तविक समय में सत्यापन करना, ताकि वास्तविक किसानों और भूमिहीन बिचौलियों के बीच अंतर किया जा सके। 3. सब्सिडी स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों के भौतिक आवागमन को समाप्त करके, शुरू से अंत तक स्वचालित ई-बिल प्रणाली लागू करना।भारत के कृषि प्रशासन के संदर्भ में, उर्वरक विभाग ने हाल ही में iFMS को हरियाणा की ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) और राष्ट्रीय एग्रीस्टैक (AgriStack) पहल के साथ एकीकृत किया है। इस डिजिटल एकीकरण के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
इस डिजिटल एकीकरण का मुख्य उद्देश्य सटीक और आँकड़ा-आधारित उर्वरक वितरण सुनिश्चित करना है। हरियाणा की ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) तथा केंद्रीय एग्रीस्टैक जैसे मंचों से उर्वरक बिक्री को जोड़कर, प्रणाली खरीदार द्वारा तत्काल खरीदी गई उर्वरक की मात्रा का मिलान उसके आधिकारिक रूप से पंजीकृत भूमि क्षेत्र और वर्तमान फसल की आवश्यकता से करती है।
इससे उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण रखने और मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
कथन 2 सही है:
उर्वरक क्षेत्र में लंबे समय से कालाबाजारी और उर्वरकों को कृषि के बजाय औद्योगिक उपयोग के लिए अवैध रूप से भेजे जाने की समस्या रही है। इन डिजिटल मंचों को आपस में जोड़ने से एक मजबूत सत्यापन व्यवस्था तैयार होती है।
इससे यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है कि सब्सिडी वाले उर्वरक केवल सत्यापित किसानों या वैध पट्टेदार किसानों तक पहुँचें, जो वास्तव में खेतों में कृषि कार्य कर रहे हैं।
कथन 3 सही है:
आँकड़ों के एकीकरण के साथ-साथ मंत्रालय ने एक स्वचालित ई-बिल प्रणाली भी शुरू की है। इससे वित्तीय प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाता है।
इस प्रणाली के माध्यम से उर्वरक कंपनियों और सरकार के बीच बिलों के भौतिक आवागमन को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इससे लगभग ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी की निगरानी अधिक पारदर्शी और लेखा-परीक्षण योग्य बनती है।