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Daily-mcqs 01 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 01 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

सुप्रीम कोर्ट के हालिया Ex Post Facto (कार्य के बाद दी गई) पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) संबंधी निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि Ex Post Facto पर्यावरणीय स्वीकृति पूरी तरह असंवैधानिक है और इसे किसी भी परिस्थिति में प्रदान नहीं किया जा सकता।

2.   न्यायालय ने वर्ष 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum - OM) को निरस्त कर दिया क्योंकि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता था।

3.   इस निर्णय का प्रभाव भूतलक्षी (Retrospective) है, अर्थात 2021 के OM के तहत पहले से दी गई सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ तत्काल प्रभाव से रद्द एवं निरस्त मानी जाएँगी।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – गलत है:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः Ex Post Facto पर्यावरणीय स्वीकृति स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, न्यायालय ने प्रत्येक परिस्थिति में इस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया। उसने स्पष्ट किया कि असाधारण परिस्थितियों में, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत सरकार किसी परियोजना को नियमित (Regularize) कर सकती है, बशर्ते कि ऐसा करने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान हो तथा इसके पीछे प्रबल लोकहित (Compelling Public Interest) हो।


कथन 2 – सही है:
न्यायालय ने वर्ष 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) को निरस्त कर दिया क्योंकि यह:



  • अनुच्छेद 14 (मनमाने व्यवहार एवं स्थायी छूट/Perpetual Amnesty) का उल्लंघन करता था।

  • अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार का हिस्सा माने जाने वाले पर्यावरण संरक्षण को कमजोर करता था) का भी उल्लंघन करता था।


कथन 3 – गलत है:
इस निर्णय का प्रभाव भावी (Prospective) है, भूतलक्षी (Retrospective) नहीं। अर्थात:



  • वर्ष 2017 की अधिसूचना तथा 2021 के OM के अंतर्गत पहले से प्रदान की गई पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ वैध रहेंगी, जब तक कि उन्हें अलग से न्यायालय में चुनौती दी जाए।

  • इन नियमों के तहत पहले से निर्मित प्रमुख सार्वजनिक अवसंरचना (Public Infrastructure) परियोजनाओं को इस निर्णय के कारण ध्वस्त नहीं किया जाएगा।


                            

Q2:

भारत में पर्यावरणीय स्वीकृतियों (Environmental Clearances) के विधिक एवं नियामक ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   निर्दिष्ट परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance - EC) की आवश्यकता, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 से उत्पन्न होती है, जिसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी किया गया था।

2.   कार्यपालिका द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देश तथा कार्यालय ज्ञापन (Office Memoranda) को संसद द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अंतर्गत निर्मित वैधानिक नियमों को निरस्त (Supersede) या कमजोर (Dilute) करने का कानूनी अधिकार प्राप्त होता है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 2

C: 1 व 2 दोनों

D: कोई नहीं

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है: वर्ष 2006 की EIA अधिसूचना, जो निर्दिष्ट श्रेणी की परियोजनाओं में निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य बनाती है, एक वैधानिक अधिसूचना है और इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी किया गया था।


कथन 2 गलत है: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि कार्यपालिका के आदेश कानून को निरस्त नहीं कर सकते प्रशासनिक निर्देश या कार्यालय ज्ञापन, EIA 2006 जैसी अधिसूचनाओं द्वारा स्थापित वैधानिक सुरक्षा उपायों को तो समाप्त कर सकते हैं और ही कमजोर कर सकते हैं। पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना ही सामान्य नियम बना रहता है।


                            

Q3:

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index - EPI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से प्रतिवर्ष जारी किया जाता है।

2.   EPI 2026 संस्करण में देशों का मूल्यांकन 47 संकेतकों के आधार पर किया गया है, जिन्हें तीन व्यापक नीतिगत उद्देश्यों के अंतर्गत 12 विषयगत श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

3.   EPI 2026 रैंकिंग में एस्टोनिया (Estonia) प्रथम स्थान पर रहा, जबकि लाओस (Laos) अंतिम स्थान पर रहा।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – गलत है:
पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (EPI) एक द्विवार्षिक (Biennial) आकलन है, अर्थात इसे हर दो वर्ष में प्रकाशित किया जाता है, कि प्रतिवर्ष। इसे Yale Center for Environmental Law & Policy, Center for International Earth Science Information Network तथा Yale Center for Geospatial Solutions द्वारा संयुक्त रूप से तैयार एवं प्रकाशित किया जाता है। इसे UNEP या विश्व बैंक द्वारा जारी नहीं किया जाता।


कथन 2 – सही है:
EPI 2026
संस्करण में 177 देशों का मूल्यांकन 47 प्रदर्शन संकेतकों (Performance Indicators) के आधार पर किया गया है। इन संकेतकों को 12 विषयगत श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जो तीन प्रमुख नीतिगत उद्देश्यों के अंतर्गत आते हैं:



  • पर्यावरणीय स्वास्थ्य (Environmental Health)

  • पारिस्थितिकी तंत्र की सजीवता (Ecosystem Vitality)

  • जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation)


कथन 3 – सही है:
EPI 2026
रैंकिंग में Estonia प्रथम स्थान पर रहा, जबकि Laos 21.78 अंक के साथ 177वें (अंतिम) स्थान पर रहा।


                            

Q4:

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक 2026 के संदर्भ में भारत के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   भारत ने मूल्यांकन किए गए 177 देशों में 176वाँ स्थान प्राप्त किया।

2.   भारत का समग्र (Overall) स्कोर दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय औसत से अधिक था।

3.   रिपोर्ट में प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों (Key Biodiversity Areas) में वृक्ष आवरण (Tree Cover) के नुकसान को भारत के लिए एक गंभीर चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 1 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही है:
EPI 2026
रिपोर्ट में भारत ने 177 देशों में 176वाँ स्थान प्राप्त किया। इस प्रकार भारत वैश्विक सूचकांक में सबसे निचले देशों में शामिल रहा और केवल लाओस से ऊपर रहा।


कथन 2 – गलत है:
भारत का समग्र स्कोर 22.46 था, जो दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय औसत 31.81 से काफी कम है। इसलिए यह कथन सही नहीं है।


कथन 3 – सही है:
रिपोर्ट में भारत के समक्ष उपस्थित प्रमुख पारिस्थितिकीय चुनौतियों को रेखांकित किया गया है। विशेष रूप से प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों (Key Biodiversity Areas) में वृक्ष आवरण (Tree Cover) की गंभीर हानि को एक महत्वपूर्ण चिंता बताया गया है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता तथा प्राकृतिक आवास (Habitat) संरक्षण से संबंधित चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है।


                            

Q5:

हाल ही में प्रकाशित ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की रिपोर्ट, Unlocking Access: Journey of Credit Expansion in India, के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   न्यू-टू-क्रेडिट (New-to-Credit - NTC) उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी आई है, जो यह दर्शाती है कि ऋणदाता अब पुनः ऋण लेने वाले (Repeat Borrowers) ग्राहकों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।

2.   उपभोग ऋण (Consumption Credit), जिसमें व्यक्तिगत ऋण (Personal Loans) और क्रेडिट कार्ड शामिल हैं, अब कुल उधारी का पहले की तुलना में अधिक बड़ा हिस्सा बन गया है।

3.   वर्ष 2024–26 के दौरान क्रेडिट-सक्रिय (Credit-Active) उपभोक्ताओं की वृद्धि दर, 2017–19 की तुलना में तेज़ हो गई है।

4.   वाणिज्यिक ऋण (Commercial Credit) में भागीदारी कमजोर हुई है, जिससे संकेत मिलता है कि अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) अभी भी औपचारिक ऋण प्रणाली (Formal Credit Ecosystem) से बाहर हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 1,2 और 4

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही है:
न्यू-टू-क्रेडिट (NTC) उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 2017 में 32% से घटकर 2026 में 13% रह गई। यह दर्शाता है कि ऋणदाता नए ग्राहकों की अपेक्षा मौजूदा उधारकर्ताओं को अधिक ऋण प्रदान कर रहे हैं।


कथन 2 – सही है:
उपभोग ऋण (Consumption Credit) का हिस्सा 34% से बढ़कर 51% हो गया है। इससे स्पष्ट होता है कि ऋण लेने का रुझान अब जीवनशैली आधारित (Lifestyle-Driven) और असुरक्षित ऋण (Unsecured Borrowing) की ओर बढ़ रहा है।


कथन 3 – गलत है:
क्रेडिट-सक्रिय उपभोक्ताओं की वृद्धि तेज़ नहीं हुई, बल्कि धीमी पड़ गई है। इनकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 2017–19 में 14% थी, जो 2024–26 में घटकर 9% रह गई।


कथन 4 – सही है:
वाणिज्यिक ऋण (Commercial Lending) में भागीदारी कम हुई है। यह इस बात का संकेत है कि अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) अब भी औपचारिक ऋण व्यवस्था तक पर्याप्त पहुँच नहीं बना पाए हैं।


                            
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