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Daily-mcqs 01 May 2026
Q1:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए (एपीडा पहल के संदर्भ में): 1. एपीडा द्वारा पीलीभीत में स्थापित किया जा रहा केंद्र बासमती चावल और जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन सुविधा प्रदान करेगा। 2. इस पहल का उद्देश्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात-उन्मुख उत्पादन के लिए तैयार करना है। 3. एपीडा एक नियामक संस्था है जो कृषि उत्पादों की घरेलू कीमतों को नियंत्रित करती है। 4. यह केंद्र केवल सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए है और किसानों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। सही उत्तर चुनिए:
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
हाल ही में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एपीडा द्वारा बासमती चावल एवं जैविक खेती के लिए एक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र स्थापित करने की पहल की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों को निर्यात-उन्मुख कृषि, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और मूल्य संवर्धन के लिए तैयार करना है। इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं। वहीं कथन 3 गलत है, क्योंकि एपीडा कोई मूल्य नियंत्रित करने वाली संस्था नहीं, बल्कि कृषि निर्यात को बढ़ावा देने वाली संस्था है। इसी प्रकार कथन 4 भी गलत है, क्योंकि यह केंद्र विशेष रूप से किसानों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय प्रदर्शन के लिए बनाया जा रहा है, न कि केवल सरकारी अधिकारियों के लिए। अतः सही उत्तर (a) केवल 1 और 2 है।
Q2:
मिशन सक्षम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. मिशन सक्षम भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक क्षमता निर्माण पहल है। 2. इस मिशन का उद्देश्य प्रबंधकीय क्षमता, अनुपालन संस्कृति तथा संस्थागत सुदृढ़ता को मजबूत करना है। 3. यह मिशन मुख्यतः नए सहकारी बैंकों को लाइसेंस प्रदान करने हेतु एक नियामक ढांचा है। 4. इस पहल के अंतर्गत बड़ी संख्या में बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मिशन सक्षम (Mission SAKSHAM) नामक एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है, जो वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनमें शासन संबंधी कमजोरियाँ, अनुपालन संस्कृति की कमी तथा जोखिम प्रबंधन की अपर्याप्तता जैसी समस्याएँ देखी गई हैं; इस मिशन के अंतर्गत लगभग 1.4 लाख हितधारकों (जैसे बोर्ड सदस्य, CEO, आईटी स्टाफ, ऑडिटर्स आदि) को आधुनिक बैंकिंग प्रक्रियाओं, नियामकीय अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और डिजिटल प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे कथन 1 और 2 सही हैं क्योंकि यह एक क्षमता निर्माण पहल है और इसका उद्देश्य प्रबंधकीय दक्षता, अनुपालन संस्कृति तथा संस्थागत सुदृढ़ता को बढ़ाना है, जबकि कथन 3 गलत है क्योंकि यह कोई नियामक ढांचा या लाइसेंसिंग तंत्र नहीं बल्कि प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम है (यहाँ UPSC अक्सर “नियमन बनाम क्षमता निर्माण” का भ्रम उत्पन्न करता है), तथा कथन 4 सही है क्योंकि इस मिशन का मुख्य फोकस बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन है; इस प्रकार यह पहल RBI के व्यापक सुधार एजेंडा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सहकारी बैंकों की शासन व्यवस्था में सुधार करना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना तथा जमीनी स्तर पर बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है।
Q3:
भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य परिणाम केवल चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। 2. पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को प्रभावित करती है। 3. भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रायः केवल मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित करके देखा जाता है। 4. आर्थिक निर्भरता और निर्णय लेने की सीमित क्षमता महिलाओं के स्वास्थ्य-सेवा प्राप्ति व्यवहार को प्रभावित करती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 2,3 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
हाल ही में प्रकाशित विश्लेषण में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य की समस्या केवल चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरे सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों—विशेषकर पितृसत्तात्मक व्यवस्था, आर्थिक निर्भरता और सामाजिक असमानताओं—से जुड़ी हुई है; इसलिए कथन 1 गलत है क्योंकि स्वास्थ्य परिणाम केवल अस्पताल, डॉक्टर या दवाओं पर निर्भर नहीं करते बल्कि सामाजिक निर्धारक (जैसे लैंगिक मानदंड, असमानता और संसाधनों का वितरण) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि पितृसत्तात्मक व्यवस्था महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और उनकी प्राथमिकता को प्रभावित करती है, जहाँ परिवार में संसाधनों का वितरण अक्सर पुरुषों के पक्ष में होता है और महिलाओं को कम प्राथमिकता दी जाती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि लंबे समय तक महिलाओं के स्वास्थ्य को केवल मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित करके देखा गया, जिससे गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य आदि जैसे अन्य महत्वपूर्ण पहलू उपेक्षित रह गए। कथन 4 सही है क्योंकि महिलाओं की आर्थिक निर्भरता और सीमित निर्णय लेने की क्षमता उनके स्वास्थ्य-सेवा प्राप्ति व्यवहार को प्रभावित करती है, जिसके कारण वे उपचार लेने का निर्णय स्वयं नहीं ले पातीं या देर से लेती हैं; अतः यह स्पष्ट होता है कि भारत में महिलाओं का स्वास्थ्य केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा ही नहीं बल्कि एक सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है, जहाँ लैंगिक असमानता सीधे स्वास्थ्य परिणामों को प्रभावित करती है।
Q4:
पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद एक अंतरराष्ट्रीय मंत्री-स्तरीय मंच है, जिसका उद्देश्य UN जलवायु सम्मेलनों (COP) की तैयारी करना है। 2. वर्ष 2026 में आयोजित 17वें संस्करण में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 3. इस संवाद का मुख्य उद्देश्य केवल विकसित देशों के बीच जलवायु सहयोग को बढ़ाना है। 4. इस मंच में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उपायों पर चर्चा की जाती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
हाल ही में जर्मनी में आयोजित 17वें पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद ने वैश्विक स्तर पर जलवायु कूटनीति को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, विशेषकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा संकट) बहुपक्षीय सहयोग को कमजोर कर रहे हैं; यह मंच मूलतः UN जलवायु सम्मेलनों (COP) की तैयारी के लिए एक मंत्री-स्तरीय अनौपचारिक संवाद है, जिसका उद्देश्य देशों के बीच विश्वास निर्माण, वार्ता संबंधी अंतर को कम करना और जलवायु कार्रवाई को गति देना है, इसलिए कथन 1 सही है। इस 17वें संस्करण में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह मंच व्यापक वैश्विक भागीदारी वाला है, इसलिए कथन 2 सही है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह संवाद केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विकसित और विकासशील दोनों देशों की भागीदारी होती है तथा चर्चाएँ विशेष रूप से जलवायु वित्त, समानता और CBDR-RC (सामान्य लेकिन विभेदित दायित्व एवं संबंधित क्षमताएँ) जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहती हैं, जो वैश्विक दक्षिण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कथन 4 सही है क्योंकि इस संवाद में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने (पेरिस समझौता लक्ष्य) पर विशेष जोर दिया गया, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण, जीवाश्म ईंधनों में कमी तथा जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई गई; इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि एक भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा भी है, जहाँ पीसीडी जैसे बहुपक्षीय मंचों का मुख्य उद्देश्य विश्वास निर्माण और सहमति निर्माण है, तथा विकासशील देश लगातार जलवायु न्याय और वित्तीय सहायता की मांग कर रहे हैं।
Q5:
सामाजिक सुरक्षा एवं बीमा कवरेज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सरकार का उद्देश्य “Insurance for All” के माध्यम से देश में सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज सुनिश्चित करना है। 2. बीमा क्षेत्र का विस्तार वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 3. सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ केवल औपचारिक (formal) क्षेत्र के कर्मचारियों तक सीमित होती हैं। 4. सरकार बीमा कवरेज बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी नवाचारों का उपयोग कर रही है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,2 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
हाल ही में जारी PIB जानकारी के अनुसार, सरकार “Insurance for All” के लक्ष्य की दिशा में कार्य कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के सभी वर्गों—विशेषकर असंगठित क्षेत्र—को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है; इस पहल का उद्देश्य केवल बीमा उपलब्ध कराना नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन तथा सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करना भी है, इसलिए कथन 1 सही है। कथन 2 भी सही है क्योंकि बीमा कवरेज बढ़ने से लोगों को बीमारी, दुर्घटना या प्राकृतिक आपदाओं जैसे वित्तीय झटकों से सुरक्षा मिलती है, जिससे वित्तीय समावेशन और आर्थिक स्थिरता दोनों सुदृढ़ होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि वर्तमान नीतियाँ केवल औपचारिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार विशेष रूप से असंगठित श्रमिकों, ग्रामीण आबादी और कमजोर वर्गों को भी बीमा कवरेज में शामिल करने पर जोर दे रही है, जो “Insurance for All” का मुख्य उद्देश्य है। कथन 4 सही है क्योंकि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एकीकरण और तकनीक-आधारित समाधानों के माध्यम से बीमा योजनाओं की पहुँच और कार्यकुशलता बढ़ा रही है, जिससे लाभार्थियों तक सेवाएँ तेज़ी से पहुँच सकें; इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि भारत एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली की ओर अग्रसर है, जहाँ बीमा केवल कल्याण का साधन नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता का भी महत्वपूर्ण उपकरण बनता जा रहा है, और नीतिगत फोकस लक्षित योजनाओं से आगे बढ़कर सार्वभौमिक कवरेज की दिशा में परिवर्तित हो रहा है।