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Daily-current-affairs / 19 Dec 2023

भारत का आर्थिक पुनर्जागरण: चुनौतियां और अवसर - डेली न्यूज़ एनालिसिस


भारत का आर्थिक पुनर्जागरण: चुनौतियां और अवसर - डेली न्यूज़ एनालिसिस

तारीख Date : 20/12/2023

प्रासंगिकता: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 - भारतीय अर्थव्यवस्था

कीवर्ड्स: जीडीपी वृद्धि, अल नीनो का प्रभाव, न्यू इंडिया, रोजगार सृजन

संदर्भ:

भारत अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ वैश्विक आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गया है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्ष 2023-24 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि के 7% तक बढ़ने के नवीनतम अनुमान ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के सामने एक नए उत्साह का सृजन किया है। इस लेख में हम भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले कारकों की जांच से आर्थिक गतिशीलता और रूपांतरणकारी परिवर्तनों के बहुआयामी परिदृश्य का विश्लेषण करेंगे।


जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच ग्रामीण लचीलापन:

वर्ष के आरंभ है वर्षा और खाद्य उत्पादन पर एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव से ग्रामीण मांग पर संकट उत्पन्न हुआ था। परंतु ग्रामीण श्रमिकों ने सरकार द्वारा पूंजीगत वैसे संचालित निर्माण क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार प्राप्त किया जिससे ग्रामीण क्षेत्र में प्रभावी रूप से मांग उत्पन्न हुई तथा रोजगार व मजदूरी को एक स्थिर मंच मिला। यह मंच बैंकिंग क्षेत्र से भी जुडकर आर्थिक वृद्धि की ओर संकेत कर रहा है।

बैंकिंग, आवास और निर्माण का गठबंधन:

  • बैंक ऋण, घर की कीमतों और निर्माण चक्रों के बीच परस्पर क्रिया एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। बैंकिंग क्षेत्र की क्लीन बैलेंस शीट ने आगे ऋण वृद्धि का समर्थन किया और तेजी से निर्माण कार्यों में योगदान दिया। यह तालमेल पहले की तुलना में कुछ लचीला है जो हाल ही के विकास उन्नयन को स्पष्ट करता है।
  • उपर्युक्त दोनों कारक भारत के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को प्रकट करते हैं ।

“न्यू इंडिया" का उदय:

तात्कालिक परिदृश्य से आगे की बात करें तो आने वाले वर्षों में भारत की विकास संभावनाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस विकास पथ में एक महत्वपूर्ण कारक "न्यू इंडिया" है, जिसका जीडीपी में लगभग 15% का योगदान है। न्यू इंडिया में दो उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र है: उच्च-प्रौद्योगिकी वस्तुओं व सेवाओं का निर्यात तथा भारत की मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना।

उच्च-प्रौद्योगिकी निर्यात और सेवाएं:

  • 2017 से भारत ने मोबाइल हैंडसेट, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी निर्यात में वैश्विक बाजार मैं महत्वपूर्ण भाग का प्रतिनिधित्व किया।
  • सेवाओं के निर्यात में भारत ने पारंपरिक निर्यात भूमिकाओं से आगे बढ़कर, लेखा, कानूनी और आर एंड डी जैसी विविध पेशेवर सेवाओं को भी सम्मिलित किया ।
  • वैश्विक क्षमता केंद्रों (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों) के उदय ने भारत के सेवा निर्यात में एक नया आयाम जोड़ा है। इससे भी विकास को गति मिल रही है।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी स्टार्ट-अप:

  • तकनीकी स्टार्ट-अप ने भारत के प्रभावशाली डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत किया है, जिससे फिनटेक, ई-कॉमर्स, एड-टेक और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास को बढ़ावा मिला है।
  • इन स्टार्ट-अप्स ने व्यापक लाभ के साथ उद्यम-समर्थक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए पर्याप्त विदेशी पूंजी को आकर्षित किया है।

सतत विकास और रोजगार चुनौतियाँ:

यद्यपि वर्तमान विकास पथ आशाजनक है परंतु भारत की बढ़ती आबादी के लिए आवश्यक रोजगार सृजन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकांश कार्यबल "पुराने भारत" में रचा-बसा है, जिसमें शिथिल तकनीक वाले विनिर्माण और कृषि क्षेत्र शामिल हैं।

विनिर्माण चुनौतियाँ:

  • छोटी विनिर्माण कंपनियां प्राय: बड़े पैमाने पर संघर्ष करती हैं, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
  • डिजिटलीकरण, तकनीकी स्टार्ट-अप को सस्ता इनपुट, बड़े बाजार और बेहतर क्रेडिट प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करके सक्रिय विनिर्माण का अवसर प्रदान करता है।

कृषि परिवर्तन:

  • 46% श्रमबल को रोजगार देने वाली कृषि आर्थिक उत्पादन में केवल 16% का योगदान देती है।
  • बड़े पैमाने पर क्रेडिट तक आसान पहुंच सहित डिजिटल नवाचार, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।

चुनौतियों का समाधान

"पुराने भारत" को ऊर्जावान बनाने में स्टार्ट-अप :

परंपरागत रूप से सेवाओं पर केंद्रित तकनीकी स्टार्ट-अप डिजिटल विनिर्माण और कृषि-प्रौद्योगिकी में उद्यम करके एक निर्णायक बदलाव ला सकते हैं। डिजिटल अवसंरचना का लाभ उठाकर, ये स्टार्ट-अप छोटे विनिर्माण फर्मों के विकास को सुविधाजनक बना सकते हैं और कृषि में बदलाव ला सकते हैं।

आर्थिक सुधारों की आवश्यकता:

सामान्यतः डिजिटल अवसंरचना अनुप्रयोग कृषि जैसे क्षेत्रों में अस्थायी समाधान ही प्रदान करते हैं इसलिए निरंतर और बड़े पैमाने पर लाभ प्राप्त करने के लिए व्यापक आर्थिक सुधारों की आवश्यकता है। इन सुधारों में कृषि ई-कॉमर्स के लिए एक बाजार-अनुकूल कानूनी ढांचा बनाना, सभी क्षेत्रों के व्यापार में सुधार, घरेलू पूंजीगत व्यय में वृद्धि , शिक्षा और रोजगार में चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।

भविष्य के विकास और रोजगार सृजन का अनुमान:

सतत सुधारों के साथ भारत की जीडीपी के अगले दशक में 7.5% की दर से बढ़ने की संभावना है, जिससे देश की दो-तिहाई रोजगार समस्या का समाधान हो सकता है। हालांकि, यह वृद्धि अकेले ही पर्याप्त नहीं हो सकती है, विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

वैश्विक गतिशीलता और भारत की स्थिति:

  • वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए, दो कारक भारत के विकास पथ का समर्थन करते हैं:
  • पहला, विश्व वस्तु-व्यापार में डी-ग्लोबलाइजेशन की ओर एक बदलाव देख रहा है, लेकिन सेवा व्यापार में ग्लोबलाइजेशन के लिए व्यापक अवसर हैं। भारत, जिसकी जीडीपी में सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा है, इस प्रवृत्ति से लाभ उठा सकता है।
  • दूसरा, भारत के लिए 2040 तक आवश्यक पूंजीगत स्टॉक अभी तक अपर्याप्त बना है, जो हरित प्रौद्योगिकी में तीव्र वृद्धि और संभावित रूप से निर्यात तथा विनिर्माण को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है।

हरित विकास की बाधाओं को दूर करना :

  • यद्यपि देश में हरित प्रौद्योगिकी अपनाने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है परंतु बिजली वितरण कंपनियों के वित्त में सुधार, वित्तीय बाधाओं और नौकरशाही को संबोधित करने के लिए एक समन्वित संस्थागत ढांचा स्थापित करने जैसी बाधाएं भी हैं। इन चुनौतियों का समाधान और हरित विकास के लाभों को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए एक रणनीतिक और ठोस प्रयास की आवश्यकता है।
  • निष्कर्ष:

    • भारत का आर्थिक परिदृश्य पारंपरिक चुनौतियों और उभरते अवसरों के मिश्रण से निर्देशित हो रहा है। तकनीकी प्रगति और डिजिटलीकरण द्वारा संचालित "नए भारत" और "पुराने भारत" के बीच परस्पर क्रिया सतत और समावेशी विकास की कुंजी है।
    • विकसित भारत के लिए न केवल उच्च-प्रौद्योगिकी निर्यात के साथ डिजिटल अवसंरचना की क्षमता का दोहन करना होगा ; बल्कि विनिर्माण, कृषि और आर्थिक सुधारों में चुनौतियों का समाधान करने की भी आवश्यकता है।
    • इसके लिए सही नीतियों और रणनीतिक पहलों के साथ भारत में न केवल अपनी वर्तमान विकास गति को बनाए रखने की क्षमता है, बल्कि इससे एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति भी बन सकता है। इन प्रयासों से समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत होती है। भारत के लिए यह समय कुशलतापूर्वक अवसरों का लाभ उठाने का है।

    यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए संभावित प्रश्न

    1. विनिर्माण और कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को प्रभावी बनाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण करें। डिजिटलीकरण विकासशील देशों में रोजगार सृजन और सतत आर्थिक विकास में कैसे योगदान दे सकता है? (10 अंक, 150 शब्द)
    2. वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के प्रभावों का परीक्षण करें। वैश्विक मंच पर अपनी सेवा-उन्मुख अर्थव्यवस्था का लाभ उठाने में भारत के लिए क्या चुनौतियाँ और अवसर हैं? नीतिगत सुधार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार गतिशीलता में भारत की स्थिति को कैसे मजबूत कर सकते हैं? (15 अंक, 250 शब्द)

    Source- The Hindu



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