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Daily-current-affairs / 09 Jan 2026

भारत का एआई दृष्टिकोण: समावेशी विकास, संप्रभु नवाचार और विकसित भारत @2047

भारत का एआई दृष्टिकोण: समावेशी विकास, संप्रभु नवाचार और विकसित भारत @2047

संदर्भ:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज वैश्विक शक्ति-संतुलन, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक परिवर्तन का निर्णायक कारक बन चुकी है। जिन देशों ने समय रहते एआई को नीति, निवेश और संस्थागत सुधारों के साथ अपनाया है, वे नवाचार, उत्पादकता और वैश्विक प्रभाव में अग्रणी बन रहे हैं। भारत भी इसी परिवर्तनकारी दौर में है।  एआई अब शोध प्रयोगशालाओं या बड़ी कंपनियों तक सीमित न रह कर हर स्तर पर नागरिकों के जीवन में प्रवेश कर चुकी है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय एआई स्टार्टअप्स के साथ हुई गोलमेज़ बैठक और आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारत एआई को केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास रणनीति के रूप में देख रहा है। 

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026

भारत 19–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में 'भारत-एआई इम्पैक्ट समिट'आयोजित करेगा। यह वैश्विक दक्षिण (Global South) में आयोजित होने वाला पहला उच्चस्तरीय वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन होगा। प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा फ्रांस में आयोजित एआई एक्शन समिट में की थी।

मुख्य विशेषताएँ:
यह शिखर सम्मेलन एक बहुपक्षीय मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य जिम्मेदार, समावेशी और विकासोन्मुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहयोग को आगे बढ़ाना है। इसके प्रमुख विषयों में एआई गवर्नेंस, नैतिकता, डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), कौशल विकास, और सार्वजनिक हित के क्षेत्रों, जैसे- स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु और आपदा प्रबंधन, में एआई के अनुप्रयोग शामिल होंगे।

महत्त्व:
यह पहल भारत की “समावेशी डिजिटल विकास” की दृष्टि को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती है और वैश्विक दक्षिण की विकासात्मक आवश्यकताओं को एआई एजेंडा के केंद्र में लाती है। साथ ही, यह नियम-आधारित, मानव-केंद्रित एआई के लिए साझा मानकों, सर्वोत्तम प्रथाओं और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करेगी। भारत के लिए यह डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कूटनीति में नेतृत्व स्थापित करने का अवसर भी है।

भारत का एआई इकोसिस्टम: वर्तमान परिदृश्य:

      • भारत का तकनीकी और एआई इकोसिस्टम तीव्र गति से विस्तार कर रहा है। अनुमानतः इस क्षेत्र का वार्षिक राजस्व 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है और 60 लाख से ज्यादा पेशेवर इसमें कार्यरत हैं। देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम भी उल्लेखनीय है, लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स में से नए स्टार्टअप्स का बड़ा हिस्सा एआई को अपने उत्पादों और सेवाओं में एकीकृत कर रहा है।
        वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति सुदृढ़ हुई है। स्टैनफोर्ड के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल (2025) के अनुसार, भारत एआई प्रतिस्पर्धात्मकता में विश्व का तीसरा प्रमुख देश बनकर उभरा है। यह उपलब्धि प्रतिभा, अनुसंधान, निवेश और नीतिगत समर्थन के समन्वय का परिणाम है।

इंडियाएआई मिशन: भारत की एआई रणनीति का आधार:

भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) यात्रा का केंद्रीय स्तंभ इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission) जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वतंत्र व्‍यापार प्रभाग है, को मार्च 2024 में ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृति दी गई। मिशन का विज़न भारत में एआई बनाना और एआई को भारत के लिए कारगर बनाना डिजिटल संप्रभुता और लोक-कल्याण को साथ लेकर चलता है।

इंडियाएआई मिशन के सात स्तंभ हैं:

      • इंडियाएआई कंप्यूट स्तंभ: यह स्तंभ किफायती लागतों पर उच्च-स्तरीय जीपीयू उपलब्‍ध कराता है। अब तक 38,000 से अधिक जीपीयू शामिल किए गए हैं।
      • इंडियाएआई एप्लिकेशन डिवेलपमेंट पहल: यह स्तंभ विशिष्ट रूप से भारत की चुनौतियों के लिए एआई एप्‍लीकेशन विकसित करता है। इसमें स्वास्थ्य सेवाकृषिजलवायु परिवर्तनशासनऔर सहायक शिक्षण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। जैसेसाइबरगार्ड एआई हैकथॉन
      • एआईकोश (डेटासेट प्लेटफ़ॉर्म): एआईकोश एआई मॉडल्स के प्रशिक्षण के लिए बड़े डेटासेट विकसित करता है। यह सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटा एकीकृत करता है। ये संसाधन डेवलपर्स को बुनियादी मॉड्यूल बनाने के बजाय एआई समाधान पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं।
      • इंडियाएआई फाउंडेशन मॉडल्स: यह स्तंभ भारतीय डेटा और भाषाओं का उपयोग करके भारत के अपने बड़े मल्टीमॉडल मॉडल्स विकसित करता है। यह जनरेटिव एआई में संप्रभु क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करता है।
      • इंडियाएआई फ़्यूचर स्किल्‍स: यह स्तंभ एआई-कुशल पेशेवर तैयार करता है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में डेटा और एआई लैब्स स्थापित की जा रही हैं। 
      • इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण: यह स्तंभ एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह मार्च 2025 में लॉन्च किया गया।
      • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई: यह स्तंभ मजबूत शासन के साथ जिम्मेदार एआई एडॉप्‍शन सुनिश्चित करता है। ये मशीन अनलर्निंगपूर्वाग्रह शमननिजता-संरक्षित मशीनलर्निंगव्याख्यात्मकताऑडिटिंगऔर शासन परीक्षण पर केंद्रित हैं। 

Transforming India with AI: Rs 10,300 crore mission, 38,000 GPUs & a vision  for inclusive growth

एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोग:

      • कृषि: एआई मौसम पूर्वानुमान, कीट-रोग पहचान और सिंचाई सलाह के माध्यम से किसानों को डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर रही है। उपग्रह डेटा और मृदा विश्लेषण से उपज व आय-सुरक्षा में सुधार हो रहा है।
      • स्वास्थ्य सेवा: एआई-आधारित डायग्नोस्टिक्स, टेलीमेडिसिन और व्यक्तिगत उपचार योजनाएँ ग्रामीणशहरी स्वास्थ्य अंतर को कम कर रही हैं। इससे समय, लागत और त्रुटियों में कमी आती है।
      • शिक्षा और कौशल विकास: व्यक्तिगत शिक्षण (Personalised Learning), बहुभाषी सामग्री और एआई-सहायता प्राप्त प्लेटफ़ॉर्म शिक्षा को अधिक समावेशी बना रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एआई कौशल का समावेशन भविष्य के कार्यबल को तैयार कर रहा है।
      • शासन और न्याय: ई-कोर्ट्स, एआई-आधारित अनुवाद और दस्तावेज़ विश्लेषण से न्याय तक पहुँच सरल हो रही है। बहुभाषी निर्णय उपलब्धता शासन की पारदर्शिता बढ़ाती है।
      • मौसम और जलवायु सेवाएँ: एआई भारत की प्राकृतिक घटनाओं की भविष्यवाणी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत कर रहा है। एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करती है।
      • शासन और न्यायालय सम्बन्धी सेवाएं: एआई शासन और सार्वजनिक सेवा प्रदायगी को पुनः आकार दे रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसारई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट फेज III के तहतन्याय प्रणाली को अधिक कुशल और सुलभ बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया जा रहा है। ई-एचसीआर और ई-आईएलआर जैसे डिजिटल कानूनी प्लेटफ़ॉर्म अब नागरिकों को कई क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन निर्णयों तक पहुँच प्रदान करते हैंजिससे न्याय प्रदाय अधिक पारदर्शी और समावेशी बनता है।

अन्य प्रमुख सरकारी पहलें और नीतिगत प्रोत्साहन:

भारत सरकार परिवर्तनकारी पहलों की एक श्रृंखला के माध्यम से अपने एआई विज़न को कार्य रूप दे रही है।

      • एआई उत्कृष्टता केंद्र: अनुसंधान-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिएसरकार ने स्वास्थ्य सेवाकृषिऔर टिकाऊ शहरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तीन उत्कृष्टता केंद्र (CoEs) स्थापित किए हैं। ये केंद्र सहयोगात्मक स्थान के रूप में डिज़ाइन किए गए हैं जहाँ अकादमिकउद्योगऔर सरकारी संस्थान मिलकर स्केलेबल एआई समाधान विकसित करते हैं। इसके साथ हीपांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैंजिससे युवाओं को उद्योग-संगत एआई कौशल के साथ तैयार किया जा सके और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित किया जा सके।
      • एआई दक्षता ढांचा: यह ढांचा सरकारी अधिकारियों के लिए संरचित प्रशिक्षण प्रदान करता हैजिससे वे आवश्यक एआई कौशल प्राप्त कर सकें और उन्हें नीति निर्माण और शासन में लागू कर सकें। वैश्विक मानकों के अनुरूप डिज़ाइन किया गयायह ढांचा सुनिश्चित करता है कि भारत का सार्वजनिक क्षेत्र सूचितचुस्तऔर एआई-प्रेरित भविष्य के लिए तैयार रहे।
      • सर्वम् एआई: स्मार्टर आधार सेवाएँ: सर्वम् एआईबेंगलुरु स्थित कंपनीउन्नत एआई अनुसंधान को व्यावहारिक शासन समाधानों में परिवर्तित कर रही है। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआईके साथ साझेदारी मेंयह जनरेटिव एआई का उपयोग करके आधार सेवाओं को अधिक स्मार्ट और सुरक्षित बना रही है।
      • भाषिणी: डिजिटल समावेशन के लिए आवाज़: भाषिणी एक एआई-संचालित प्लेटफ़ॉर्म है जो कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद और संभाषण उपकरण प्रदान करके भाषा की बाधाओं को मिटाता है। यह नागरिकों को आसानी से डिजिटल सेवाएं उपयोग करने में मदद करता हैभले ही वे पढ़ने-लिखने में सहज न हों।
      • भारतजेन एआई: भारत का बहुभाषी एआई मॉडल: जून 2025 को भारतजेन समिट में लॉन्च किया गयाभारतजेन एआई पहला सरकार द्वारा वित्तपोषितदेशज मल्टीमॉडल बड़ा भाषा मॉडल है। यह 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है और टेक्स्टसंभाषणऔर छवि की समझ को एकीकृत करता है।
      • इंडिया एआई इम्‍पैक्‍ट समिट 2026: भारत, फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी करेगा। इस समिट में भारत की एआई क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा और विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

समावेशी सामाजिक विकास और नीति आयोग का दृष्टिकोण

    • अक्टूबर 2025 की नीति आयोग की रिपोर्ट समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआईभारत के विशाल अनौपचारिक कार्यबल को सशक्त बनाने हेतु उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग का एक व्यावहारिक और समावेशी रोडमैप प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट का तर्क है कि एआई को श्रमिकों का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी उत्पादकता, सुरक्षा और आय-वृद्धि का साधन बनना चाहिए।
    • रिपोर्ट वास्तविक जीवन के अनुभवों, जैसे गृह स्वास्थ्य सहायक, बढ़ई, किसान आदि, के माध्यम से अनौपचारिक श्रमिकों के सामने मौजूद प्रणालीगत बाधाओं और उनकी आकांक्षाओं को उजागर करती है। इसमें एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और इमर्सिव लर्निंग को ऐसे सक्षम उपकरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो भाषा, साक्षरता, भुगतान, कौशल और सूचना से जुड़ी चुनौतियों को दूर कर सकते हैं।
    • 2035 तक के लिए परिकल्पित भविष्य में वॉयस-फर्स्ट एआई इंटरफेस, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से पारदर्शी भुगतान, तथा माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और ऑन-डिमांड लर्निंग के ज़रिये निरंतर कौशल उन्नयन की व्यवस्था शामिल है। इस दृष्टि का केंद्र डिजिटल श्रमसेतु मिशन है, जो राज्य-प्रेरित कार्यान्वयन, नियामक समर्थन और बहु-हितधारक साझेदारियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को बढ़ावा देगा।
    • अंततः, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि समावेशी डिजिटल विकास के लिए केवल तकनीकी आशावाद नहीं, बल्कि समन्वित आर एंड डी निवेश, लक्षित कौशल विकास और मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। आधार, यूपीआई और जन धन जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत में समावेशी और स्केलेबल डिजिटल समाधान संभव हैं।

 

चुनौतियाँ:

      • डेटा की गुणवत्ता और निजता: एआई प्रणालियों की प्रभावशीलता बड़े और विश्वसनीय डेटा पर निर्भर करती है। भारत में डेटा का बिखराव, असंगत गुणवत्ता और मानकीकरण की कमी एआई मॉडल्स की सटीकता को प्रभावित करती है। साथ ही, नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और निजता एक गंभीर चिंता है, विशेषकर तब जब एआई का उपयोग स्वास्थ्य, पहचान और वित्तीय सेवाओं में किया जा रहा हो।
      • एल्गोरिद्मिक पूर्वाग्रह और नैतिकता: यदि एआई प्रणालियाँ पक्षपातपूर्ण या अपूर्ण डेटा पर प्रशिक्षित होती हैं, तो वे सामाजिक भेदभाव को दोहरा या बढ़ा सकती हैं। जाति, लिंग, क्षेत्र और भाषा से जुड़े पूर्वाग्रह एल्गोरिद्मिक निर्णयों में परिलक्षित हो सकते हैं, जिससे समानता और न्याय के संवैधानिक मूल्यों पर प्रश्न खड़े होते हैं।
      • डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण और हाशिये के समुदाय: डिजिटल अवसंरचना, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की असमानता के कारण एआई के लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँच पा रहे हैं। ग्रामीण, आदिवासी और हाशिये पर स्थित समुदायों के लिए एआई-आधारित सेवाओं तक पहुँच अभी भी सीमित है, जिससे सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ और गहरी हो सकती हैं।
      • नियामक संतुलन: नवाचार बनाम नियंत्रण: नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि वे नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए सुरक्षा, नैतिकता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित करें।

निष्कर्ष:

भारत की एआई यात्रा एक स्पष्ट संदेश देती है कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य केवल दक्षता नहीं, बल्कि समावेश, सशक्तिकरण और न्याय होना चाहिए। इंडियाएआई मिशन, समावेशी नीतियाँ और क्षेत्रवार अनुप्रयोग भारत को न केवल तकनीकी रूप से सक्षम, बल्कि सामाजिक रूप से उत्तरदायी एआई शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं। विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, एआई भारत के लिए एक साधन है जो आर्थिक वृद्धि के साथ मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।

 

UPSC/PCS मेन्स परीक्षा प्रश्न: एआई संचालित शासन नागरिकों और राज्य के बीच की खाई को पाटने में कैसे मदद कर सकता है, साथ ही सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और विश्वास को कैसे मज़बूत कर सकता है?