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Daily-current-affairs / 17 Jan 2024

2024 ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव का क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव

2024 ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव का क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव

संदर्भ –

2024 के ताइवानी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डी. पी. पी.) के उम्मीदवार लाई चिंग-ते (विलियम लाई) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की यह लगातार तीसरी जीत है । यह जीत विशेष रूप से ताइवान की पीपुल्स पार्टी के उदय के कारण उल्लेखनीय है, जिसने चुनावों को त्रिकोणीय प्रतियोगिता में बदल दिया था। ताइवान के भू-राजनीतिक महत्व को चीन के एक अलग प्रांत के रूप में इस द्वीप के लगातार दावे, चीन-संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बढ़े तनाव और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बढ़ती मुखरता से रेखांकित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, ताइवान के अधिकांश लोग खुद को चीनी नहीं मानते हैं, यह ताइवान के राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बनाता हैं।

चीन की बढ़ती आक्रामकताः

ताइवान के प्रति चीन की मुखरता हाल के दिनों में बढ़ी है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना के बारे में चिंताएँ बढ़ गई है। अगस्त 2022 में 'द ताइवान क्वेश्चन एंड चाइनाज़ रीयुनिफिकेशन इन द न्यू एरा' शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया गया था, जिसमें ताइवान को चीन की मुख्य भूमि से मिलाने के लिए बल का उपयोग करने की संभावना की ओर इशारा किया गया था।

इसके जवाब में, ताइवान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया, सैन्य सेवा की अवधि को बढ़ाया और संयुक्त राज्य अमेरिका से रक्षात्मक हथियार प्राप्त किए हैं। अगस्त 2022 में U.S. हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद तनाव काफी बढ़ गया था , परिणामतः ताइवान के नजदीक चीन द्वारा सैन्य अभ्यास किया गया था। इन अभ्यासों के दौरान जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में एक मिसाइल लैंडिंग ने व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया था, इससे हिंद-प्रशांत में स्थिरता भी प्रभावित हुई थी।

लोकतांत्रिक मूल्य और तकनीकी सामर्थ्यः

ताइवान के लोकतांत्रिक मूल्यों और तकनीकी कौशल के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसका काफी महत्व है, यह संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण भागीदार भी है। नव निर्वाचित राष्ट्रपति लाई ताइवान की संप्रभुता की रक्षा करने में काफी मुखर रहे हैं और इन्होंने डी. पी. पी. के चार्टर में एक नए संविधान का मसौदा तैयार करने और "ताइवान गणराज्य" घोषित करने का संकल्प लिया गया है। यह प्रतिबद्धता चीन के सत्तावादी उदय के सामने एक लोकतांत्रिक राज्य के रूप में ताइवान की रणनीतिक स्थिति के साथ मेल खाती है।

चुनाव पर चीन की प्रतिक्रियाः

लाई की जीत पर चीन की प्रतिक्रिया असंतोषजनक रही है। इस चुनाव को शांति और समृद्धि बनाम टकराव और आर्थिक चुनौतियों के बीच एक विकल्प के रूप में लड़ा गया था । डी. पी. पी. की जीत के बावजूद, चीन ने ताइवान में मुख्यधारा की पार्टी के प्रतिनिधित्व को स्वीकार करने से इनकार किया है। चीन ने ताइवान के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने के अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए ताइवान के एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए यहाँ के विभिन्न समूहों के साथ जुड़ने के अपने इरादे की घोषणा की है।

राष्ट्रपति लाई के समक्ष आर्थिक दबाव और अन्य संभावित चुनौतियां:

चुनाव के दौरान, चीन ने आर्थिक दबाव की रणनीति अपनाई, जिसके तहत आर्थिक सहयोग फ्रेमवर्क समझौते के तहत प्रमुख पेट्रोकेमिकल वस्तुओं पर टैरिफ लगाया। चीन द्वारा इस व्यापार समझौते पर फिर से विचार करने या उसे रद्द करने की संभावना ताइवान के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक खतरा है, क्योंकि चीन इसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इसके अलावा, ताइवान की राजनीतिक प्रक्रिया में बीजिंग का हस्तक्षेप, राष्ट्रपति लाई के प्रशासन को कमजोर करने की संभावित रणनीति का संकेत देता है।

विकसित होते परिदृश्य में भारत की संभावित भूमिकाः

सांस्कृतिक आदान-प्रदानः

राष्ट्रपति लाई, चीन पर ताइवान की आर्थिक निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, यह भारत के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक अवसर प्रस्तुत करता है। मौजूदा ढांचे के आधार पर, भारत योग और आयुर्वेद जैसे विषयों में रुचि रखने वाले ताइवान के युवाओं को अधिक छात्रवृत्ति प्रदान कर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान शुरू कर सकता है। ताइवानी विश्वविद्यालयों की शैक्षिक क्षमता को भारतीय छात्रों के लिए गंतव्य के रूप में खोजा जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

बौद्ध पर्यटन परिपथ को बढ़ावा :

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और ताइवान बौद्ध पर्यटन परिपथ को बढ़ावा देने में सहयोग कर सकते हैं। बौद्ध विरासत की खोज में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ताइवान में जुआनजांग मंदिर और भारत में बोधगया जैसे तीर्थ स्थलों को जोड़ा जा सकता है। यह पहल सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर सकती है और दोनों क्षेत्रों में पर्यटन विकास में योगदान दे सकती है।

आर्थिक जुड़ाव और तकनीकी सहयोगः

आर्थिक क्षेत्र में, भारत को ताइवान के साथ बढ़ते जुड़ाव से लाभ होगा, विशेष रूप से जब ताइवान तैयार उत्पादों के बजाय महत्वपूर्ण घटकों का निर्यात करना चाहता है। यह रणनीतिक सहयोग भारत के मध्यम और लघु उद्योग क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यहाँ के सेमीकंडक्टर उद्योग के जन्मस्थल ताइवान के सिंचू साइंस पार्क के साथ तकनीकी सहयोग भारत की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा सकता है।

ताइवान के प्रति भारत का विकसित होता दृष्टिकोणः

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने चीन को परेशान करने से बचने के लिए ताइवान को दरकिनार किया है, जबकि चीन ने भारतीय हितों को सदैव निशाना बनाया है। हालांकि, विकसित हो रहे भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत के दृष्टिकोण के पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। "इतिहास की झिझक" को छोड़ते हुए, भारत अधिक मुखर रुख अपना सकता है और ताइवान के साथ अपनी एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप एक साहसिक व सहयोगी संबंध बना सकता है।

निष्कर्ष :

2024 के ताइवानी राष्ट्रपति चुनाव में चुनाव लाई चिंग-ते की जीत ने क्षेत्र की भू-राजनीति में एक गतिशील अवधि के लिए मंच तैयार किया है। चीन की बढ़ती मुखरता और ताइवान के रणनीतिक महत्व के साथ, विकसित परिदृश्य विभिन्न अवसरों और चुनौतियों को प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति लाई जटिल परिदृश्य में ताइवान के हितों को पूरा करने की कोशिश करेंगे , ऐसे में भारत के पास सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक अवसरों का लाभ उठाते हुए ताइवान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का मौका है। यह सक्रिय दृष्टिकोण न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर सकता है बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दे सकता है। जैसा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पूर्वी एशिया के विकास को महत्वाकांक्षा की दृष्टि से देख रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और भारत जैसे प्रमुख देशों की भूमिका ताइवान और उसके वैश्विक गठबंधनों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए संभावित प्रश्न-

1. हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता पर 2024 के ताइवानी राष्ट्रपति चुनाव के प्रभाव का मूल्यांकन करें। ताइवान के रणनीतिक महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए भू-राजनीतिक गतिशीलता को आकार देने में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत जैसे प्रमुख देशों की भूमिकाओं का विश्लेषण करें। ( 10 Marks, 150 Words)

 2. 2024 के ताइवानी राष्ट्रपति चुनाव के बाद निर्वाचित राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के सामने आने वाली आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का आकलन करें। इन चुनौतियों से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में भारत के संभावित योगदान का विश्लेषण करें । ( 15 Marks, 250 Words)

 

Source- ORF

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj