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Brain-booster / 11 Jan 2023

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: एंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल (Maritime Anti-piracy Bill)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: एंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल (Maritime Anti-piracy Bill)

चर्चा में क्यों?

  • राज्यसभा ने हाल ही में एंटी-मैरीटाइम पायरेसी बिल पारित किया है, जो भारत सरकार के अनुसार मेरीटाइम पायरेसी से निपटने के लिए एक प्रभावी कानून साबित होगा। बिल को लोकसभा में 19 दिसंबर, 2022 को पारित किया गया था।

विधेयक की मुख्य बातें:

  • विधेयक भारतीय अधिकारियों को गहरे समुद्र में मेरीटाइम पायरेसी के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा।
  • यह बिल भारत को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम करेगा।
  • यह विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) से परे समुद्र पर लागू होता है, अर्थात भारत के समुद्र तट से 200 समुद्री मील से आगे का क्षेत्र ।

पायरेसीः

  • बिल अनुसार मेरीटाइम पायरेसी को एक निजी जहाज के चालक दल या यात्रियों द्वारा निजी उद्देश्यों के लिए किसी जहाज, व्यक्ति के खिलाफ हिंसा, हिरासत या विनाश के किसी भी अवैध कार्य के रूप में परिभाषित करता है।
  • पाइरेसी में वो अन्य कार्य भी शामिल है जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री डकैती माना जाता है।
  • इसमें पाइरेसी के लिए उपयोग किए जाने वाले समुद्री डाकू जहाज के संचालन में स्वैच्छिक भागीदारी भी शामिल है।

अपराध और दंडः

  • विधेयक अनुसार मेरीटाइम पायरेसी के कृत्य को दंडनीय बनाता है तथा निम्न दंड प्रक्रियाओं के बारे में प्रावधान रखताः
  • आजीवन कारावास।
  • मौत, (अगर समुद्री डकैती मौत का कारण बनती है या उसका प्रयास करती है।)
  • अपराधों को प्रत्यर्पण योग्य माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि अभियुक्त को अभियोजन के लिए किसी भी देश में स्थानांतरित किया जा सकता है जिसके साथ भारत ने प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • ऐसी संधियों के न होने की स्थिति में, देशों के बीच पारस्परिकता के आधार पर अपराधी प्रत्यर्पित किए जा सकते हैं।

क्षेत्रधिकारः

  • केंद्र सरकार, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से, सत्र न्यायालयों को इस विधेयक के तहत नामित न्यायालयों के रूप में अधिसूचित कर सकती है।
  • हालांकि, न्यायालय के पास एक विदेशी जहाज (जब तक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है) और गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए नियोजित युद्धपोतों और सरकारी स्वामित्व वाले जहाजों पर किए गए अपराधों पर अधिकार क्षेत्र नहीं होगा।

विधेयक की आवश्यकताः

  • 2008 और 2011 के बीच समुद्री डकैती की 27 घटनाएं हुईं जिनमें 288 भारतीय नागरिक शामिल थे।
  • जबकि 2014 से 2022 में पायरेसी की 19 घटनाएं हुईं जिनमें 155 भारतीय चालक दल के सदस्य के रूप में शामिल थे।
  • भारत, रणनीतिक रूप से लगभग 7,517 किमी की तटरेखा के साथ, दुनिया के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर स्थित है।
  • देश का लगभग 95% व्यापार, मात्रा के हिसाब से और 68% व्यापार, मूल्य के हिसाब से समुद्री परिवहन के माध्यम से होता है।
  • भारत का 90% से अधिक व्यापार समुद्री चौनलों द्वारा संचालित होता है और देश की 80% से अधिक हाइड्रोकार्बन जरूरतों को शिपिंग के माध्यम से पूरा किया जाता है।
  • 2021 तक, भारत के शिप ब्रेकिंग उद्योग की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 30% से अधिक है, और अलंग, गुजरात में दुनिया की सबसे बड़ी शिप-ब्रेकिंग सुविधा मौजूद हैं।

निष्कर्षः

  • यह विधेयक भारतीय दंड संहिता या आपराधिक प्रक्रिया संहिता में समुद्री डकैती पर एक विशिष्ट कानून या कानूनी प्रावधान के अभाव में, समुद्री डकैती से निपटने के लिए एक शक्तिशाली कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराएगा। यह भारत को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम बनाएगा। हालांकि, अनिवार्य मृत्युदंड तथा क्षेत्र से संबंधित मुद्दों आदि जैसे कुछ मुद्दों में और सुधार किया जा सकता है।

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