(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (21st - 30th December 2019)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (21st - 30th December 2019)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • केंद्रीय मंत्रीमंडल ने दी राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR को अपडेट करने की मंजूरी। असम को छोड़कर देश के सभी हिस्सों में किया जायेगा NPR के अपडेटेशन का काम
  • भूजल संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने शुरू की अटल भू-जल योजना। भूमि जल प्रबंधन को बढ़ावा देने का काम करेगी ये योजना
  • नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए अपनाया गया नागपुर संकल्प। बेहतर सेवा वितरण और शासन की गुणवत्ता की पहचान के लिये उठाए गए हैं नागपुर संकल्प के तहत कई महत्वपूर्ण क़दम
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ पद को भी सृजित करने की मिली केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूरी। ऐतिहासिक सैन्य सुधार के तहत सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के तौर पर बनाया जाएगा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS का पद
  • अमेरिका ने की अपनी रक्षा प्रणाली को और मज़बूत बनाने के लिए US स्पेस फोर्स की स्थापना। 21वीं सदी में रूस और चीन से मिल रही रणनीतिक चुनौतियों के मद्देनज़र अमेरिका ने किया है अमेरिकी अंतरिक्ष सेना का गठन
  • क्रॉस-डिसिप्लिनरी लीडरशिप को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुआ इको नेटवर्क। अनुसंधान, ज्ञान और भारतीय पारिस्थितिकी व पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता फ़ैलाने का काम करेगा इको नेटवर्क
  • पाकिस्तान से सटे गुजरात के कुछ ज़िलों में टिड्डियों के समूहों का हमला। किसानों के लिए बढ़ी मुश्किलें

खबरें विस्तार से:

1.

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बीते दिनों 2021 की जनगणना और राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर को अपडेट करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब देश की पूरी आबादी की जनगणना की जाएगी, और राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR के अपडेटेशन का काम भी असम को छोड़कर देश के बाकी सभी हिस्सों में किया जायेगा। एक ओर जहां जनगणना प्रक्रिया पर आठ हजार सात सौ 54 करोड़ रुपए से अधिक की राशि को मजूरी मिली है तो वहीं राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर को अपडेट करने के लिए भी तीन हजार नौ सौ 40 करोड़ से अधिक राशि को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

भारत की जनंसख्‍या गणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनंसख्‍या गणना प्रक्रिया है। देश में हर दस साल बाद जनगणना का काम 1872 से किया जा रहा है। जनगणना 2021 देश की 16 वीं और आजादी के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। जनसंख्‍या गणना कुछ महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर की जाती है। इनमें आवासीय स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों ,जनसंख्‍या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति , भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक गतिविधियों , विस्‍थापन और प्रजनन क्षमता जैसे अलग - अलग मानक शामिल हैं। इन्हीं मानकों के आधार पर गांवों, शहरों और वार्ड स्‍तर पर लोगों की संख्‍या का आंकड़ा इकठ्ठा किया जाता है। बता दें कि जनगणना कानून 1948 और जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्‍ध कराता है।

इसके अलावा बात अगर राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR की करें तो NPR देश के आम निवासियों का एक रजिस्टर है। राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR के तहत एक आम निवासियों वो व्यक्ति है जो कम से कम छह महीने या उससे ज्यादा समय के लिए देश के किसी इलाके में निवास कर रहा है या आगे और भी वक़्त वहां रहने की मंशा रखता हो। देखा जाए तो देश में हरेक व्यक्ति का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR का मुख्य मक़सद है। इस डेटाबेस में सभी व्यक्तियों के विवरण शामिल होंगे। NPR डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण एक यूआईडी नंबर के साथ चिप-एंबेडेड स्मार्ट कार्ड में उपलब्ध होंगे और ये 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को जारी किए जायेंगे। हालाँकि देश में नए नागरिकता क़ानून को लेकर छिड़ी बहस में अब NPR को भी शामिल कर लिया गया है। NPR को लेकर विवाद इसलिए हो रहा है कि ये भारत के निवासियों पर बहुत अधिक मात्रा में व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने का इरादा रखता है। साथ ही इतने बड़ी तदात में इकट्ठा किए जा रहे डेटा की सुरक्षा के लिए तंत्र पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है। देखा जाए तो प्रत्येक देश में जनसांख्यिकीय विवरण के साथ अपने निवासियों का एक व्यापक पहचान डेटाबेस होना ज़रूरी होता है। ऐसे डेटाबेस सरकार को अपनी नीतियों को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय सुरक्षा में भी मदद करते हैं। सरकार के मुताबिक NPR प्रणाली लालफीताशाही को कम करेगी साथ ही इसके ज़रिए सरकारी लाभार्थियों को बेहतर तरीके से लक्षित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा एनपीआर डेटा के बाद, निवासियों को आधिकारिक काम में उम्र, पता और अन्य विवरण के अलग - अलग प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने होंगे। साथ ही सरकार का कहना है कि यह मतदाता सूचियों में दोहराव को भी समाप्त करेगा। ग़ौरतलब है कि राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर NPR की प्रक्रिया असम को छोड़कर, देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले साल अप्रैल से सितंबर महीने के बीच पूरी की जायेगी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा इस बार के एनपीआर के लिए, एक गजट अधिसूचना अगस्त में हीं जारी की गई थी। इससे पहले पिछली बार एनपीआर से संबंधित आंकड़े 2010 में लिये गये थे, जो 2011 की जनगणना से जुड़े थे। नागरिकता कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के तहत राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसका अद्यतन किया गया था।

2.

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने बीते दिनों अटल भू-जल योजना को मंजूरी दे दी है। भूमि जल प्रबंधन को बढ़ावा देने वाली इस योजना के तहत केंद्र सरकार पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। बता दें कि अटल भूजल योजना जल जीवन मिशन के तहत काम करेगी जिसमें 7 राज्यों के 8 हज़ार से अधिक गांवों शामिल हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अटल जल योजना या जल जीवन मिशन से संबंधित दिशा-निर्देश 2024 तक देश के प्रत्येक घर में पानी पहुंचाने के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि यह जल संकट एक परिवार, एक नागरिक और एक देश के रूप में हमारे लिए बहुत चिंताजनक है और यह विकास को भी प्रभावित करता है।

अटल भूजल योजना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 95वें जन्मदिवस के मौके पर लांच की गोई है। अटल भूजल योजना को पांच सालों के भीतर गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और उत्‍तर प्रदेश जैसे राज्यों के चिन्हित क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। दरअसल देश के इन राज्यों कुल 25 प्रतिशत भू जल का दोहन होता है। इनमें भी अत्यधिक दोहन वाले, अत्यधिक जोखिम और कम जोखिम वाले ब्लॉक शामिल हैं। इस योजना के शुरू होने से इन राज्यों के कुल 78 जिलों में लगभग 8350 ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा अटल जल मांग पक्ष प्रबंधन पर मुख्य जोर के साथ पंचायत केन्द्रित भूजल प्रबंधन और व्यवहारगत बदलाव को भी बढ़ावा देगी। 5 वर्षों यानी 2020-21 से शुर होकर 2024-25 तक की अवधि के दौरान चलने वाली इस योजना में कुल 6 हज़ार करोड़ रुपये का ख़र्च आएगा। इस योजना में विश्व बैंक और केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 50:50 की है। यानी इस योजना के तीन हज़ार करोड़ विश्व बैंक और बाकी के केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को अनुदान के रूप में दिए जायेंगे। बाद में विश्व बैंक का पुनर्भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा ही किया जाएगा।

देखा जाए तो जल दोहन के मामले में भारत की स्थिति काफी खराब है। दुनिया का क़रीब 25% भूजल का दोहन भारत में ही होता है। संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनेस्को द्वारा बीते दिनों जारी वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट रिपोर्ट के मुताबिक भारत जल दोहन के मामले में चेन से भी आगे निकल गया है। इसके अलावा नीति आयोग के समग्र जल प्रबंधन सूचकांक 2018 की रिपोर्ट में भी इस बात का ज़िक्र है कि मौजूदा वक़्त में क़रीब 75 फीसदी घरों में पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों के लगभग 84 % घरों में पानी की पाइपलाइन तक मौजूद नहीं है। अत्यधिक भूजल दोहन के कारणों का ज़िक्र करें तो इसमें मुख्य रूप से खेती और घरेलू इस्तेमाल में अनावश्यक इस्तेमाल होने वाला पानी शामिल है। इसके अलावा बढ़ती जनसँख्या, जलवायु परिवर्तन और पानी संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी भी अत्यधिक भूजल के दोहन के लिए ज़िम्मेदार है। अटल भूजल योजना इन्हीं सब मुश्किलों से उबरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के तहत न सिर्फ भूजल के दोहन को कम करने की कोशिश की जाएगी, बल्कि भूजल की मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी। केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत किसानों से ऐसी खेती पर करने का का आग्रह किया है जिसमें पानी की लागत काम हो, साथ ही लोगों से जल कम खर्च करने का आह्वाहन और जल संरक्ष की दिशा में स्टार्टअप कंपनियों को आगे आकर नई तकनीकि विकसित करने का आग्रह भी केंद्र सरकार द्वारा किया गया है जिससे भूजल के अत्यधिक दोहन से बचा जा सके।

3.

केंद्र सरकार ने हिमाचल और लेह को जोड़ने वाले रोहतांग दर्रे का नाम बदलकर अब अटल टनल कर दिया है। दरअसल रणनीतिक महत्‍व को देखते हुए इस सुरंग का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान ही साल 2000 में किया गया था। बता दें कि ये सुरंग लेह और मनाली को जोड़ती है। अटल सुरंग का काम पूरा होने के बाद सभी मौसम में लाहौल और स्पीति घाटी के सभी इलाकों में संपर्क बना रहेगा। साथ ही इससे मनाली और लेह की दूरी भी लगभग 46 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।

रोहतांग दर्रे के नीचे एक रणनीतिक सुरंग बनाने का ऐतिहासिक निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिया गया था। 8.8 किलोमीटर लंबी यह सुरंग समुद्र तल से 3,000 मीटर की ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी सुरंग है। यह मनाली और लेह के बीच की दूरी में 46 किलोमीटर की कमी करेगी और परिवहन लागतों में करोड़ों रुपये की बचत करेगी। यह 10.5 मीटर चौड़ी सिंगल ट्यूब बाइ-लेन सुरंग है, जिसमें एक अग्निरोधी आपातकालीन सुरंग मुख्य सुरंग में ही निर्मित है। दोनों सिराओं पर सफलता 15 अक्टूबर, 2017 को ही अर्जित कर ली गई थी। यह सुरंग पूरी होने वाली है और हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों को सदैव कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है, जो अन्यथा शीत ऋतु के दौरान लगभग 6 महीने तक लगातार शेष देश से कटे रहते थे।

4.

बीते दिनों नागपुर में आयोजित एक क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को अपनाया गया। प्राशासनिक सुधार और लोक शिकायतें विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मलेन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त तंत्र और त्‍वरित निर्णय सुशासन के लिए बेहद ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि Development approach और कतार के अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशीलता, काम में संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस मौके पर बताया गया कि किसी भी सिविल सेवक के लिए सामाजिक और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बहुत महत्व रखती है। प्रशासन हमारे देश की ताकत है और यह महत्वपूर्ण हितधारक हैं। ऐसे में लोक सेवकों के कार्य प्रदर्शन की नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाने की भी ज़रूरत है।

इस सम्‍मेलन में संकल्‍प लिया गया कि भारत सरकार, महाराष्‍ट्र सरकार और सार्वजनिक सेवा अधिकार के लिए महाराष्‍ट्र राज्‍य आयोग और भागीदारी करने वाली राज्‍य सरकारें निम्‍नलिखित काम करेंगी- इनमें बेहतर सेवा वितरण, शिकायतों का सुधार और प्रौद्योगिकी का उपयोग जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा गतिशील नीति बनाना, तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान और शासन की गुणवत्ता की पहचान के लिये सुशासन सूचकांक जारी करने की बात कही गई है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्य आयुक्त, सेवा का अधिकार, श्री एस.एस. क्षत्रिय ने कहा कि 20 राज्यों ने सेवा का अधिकार अधिनियम को पारित कर दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा के अधिकार के बारे में भी जागरूकता पैदा करने की भी जरूरत है।

5.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते दिनों चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के पद को भी सृजित करने की मंजूरी प्रदान कर दी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीडीएस थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच तालमेल सुनिश्चित करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ होने से हमारे सशस्त्र बल और अधिक प्रभावशाली बनेंगे। केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले के बाद देश में अब ऐतिहासिक सैन्य सुधार के तहत सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS का पद बनाया जाएगा। देखा जाए तो चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ ही सैनिक मामलों के विभाग का भी प्रमुख होगा। साथ ही चीफ ऑफ डिफेंस ही अब रक्षा मंत्रालय के सचिव के रूप में भी काम करेगा।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का गठन रक्षा मंत्रालय के तहत किया जाएगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के नेतृत्व में सैन्य मामलों का विभाग कई क्षेत्रों में काम करेगा। इनमें संघ की सशस्त्र सेना यानि सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल होगी। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय के समन्वित मुख्यालय जिनमें सेना मुख्यालय, नौसेना मुख्यालय, वायु सेना मुख्यालय और डिफेंस स्टॉफ मुख्यालय शामिल है। साथ ही प्रादेशिक सेना के अलावा। सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़े काम और चालू नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार पूंजीगत प्राप्तियों को छोड़कर सेवाओं के लिए विशिष्ट खरीद जैसे काम अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के नेतृत्व में किए जायेंगे।

सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होने के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी के अध्यक्ष भी होंगे। वे सेना के तीनों अंगों के मामले में रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे, लेकिन इसके साथ ही तीनों सेनाओं के अध्यक्ष रक्षा मंत्री को अपनी सेनाओं के संबंध में सलाह देना जारी रखेंगे।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ तीनों सेनाओं के प्रमुखों का कमान नहीं करेंगे और नहीं किसी अन्य सैन्य कमान के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे, ताकि राजनीतिक नेतृत्व को सैन्य मामलों में निष्पक्ष सुझाव दे सके। बता दें कि 15 अगस्‍त, 2019 को प्रधानमंत्री ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के पद का ऐलान किया था।

6.

अमेरिकी ने अपनी रक्षा प्रणाली को और मज़बूत बनाने के लिए US स्पेस फोर्स की स्थापना की है। US स्पेस फोर्स की स्थापना के लिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम पर दस्‍तखत करते हुए इसे आधिकारिक रूप से मंज़ूरी प्रदान की है। जानकारों के मुताबिक़ अमेरिका ने ये क़दम रूस और चीन की ओर से मिल रही 21वीं सदी की रणनीतिक चुनौतियों के मद्देनज़र उठाया है। अब अमेरिका की स्‍पेस आर्मी, अमेरिकी सशस्त्र बलों की छठी शाखा बन जाएगी।

अमेरिका की अंतरिक्ष सेना अमेरिकी सेना विभाग का ही एक हिस्सा होगी। आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, कोस्ट गार्ड और मरीन फोर्सेज के बाद स्पेस फोर्स अमेरिकी डिफेंस की छठी शाखा होगी। US स्पेस फोर्स में तीन इकाइयाँ शामिल होंगी। इनमें युद्ध संबंधी ऑपरेशंस, स्पेस डेवलपमेंट एजेंसी और स्पेस ऑपरेशंस फोर्स जैसी इकाइंया शामिल हैं। युद्ध संबंधी ऑपरेशंस की निगरानी के लिये जहां स्पेस कमांड का नेतृत्व सबसे वरिष्ठ जनरल द्वारा किया जाएगा। तो वहीं स्पेस डेवलपमेंट एजेंसी नई प्रौद्योगिकियों की पहचान और विकास का काम सभालेगी। इसके अलावा स्पेस ऑपरेशंस फोर्स का गठन नेताओं और सेनानियों की विशेषज्ञता के आधार पर किया गया है। क़रीब 16 हजार सैनिकों की ताकत वाली अमरीका की ये अंतरिक्ष सेना अब अंतरिक्ष में पैदा होने वाले खतरों से निपटेगी। इसके अलावा US स्पेस फोर्स का काम अंतरिक्ष डोमेन के अमेरिकी प्रभुत्व को सुरक्षित और विकसित करना है। साथ ही ये सैन्य अंतरिक्ष बलों को व्यवस्थित, प्रशिक्षित और सुसज्जित करने का भी काम करेगी।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष बल स्थापित करने का मुख्य मक़सद अंतरिक्ष में अमेरिकी क्षमता और प्रभुत्व को स्थापित करने के साथ ही चीन व रूस की अंतरिक्ष ताकतों को भी छोटा साबित करना है। इसके अलावा इसी साल अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि चीन और रूस ने अंतरिक्ष में खुफिया, जासूसी और सैन्य परीक्षण करने लायक सक्षम तकनीक विकसित कर ली है।

ये दोनों ही देश साइबरस्पेस क्षमताएं विकसित करने में काफी सफल हुए हैं। मौजूदा वक़्त में इन देशों के पास पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के अलावा हवा में लेजर से हमला करने की भी क्षमता है। ऐसे में अंतरिक्ष में मौजूद सैकड़ों अमेरिकी सैन्य सैटेलाइटों की ये देश नुक्सान पहुंचा सकते हैं जिनकी सुरक्षा के लिए अमेरिका के पास कोई खास इंतजामात नहीं हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र था कि ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश भी धीरे-धीरे अंतरिक्ष में अपनी पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में लगातार अंतरिक्ष में चुनौतियां बढ़ रही हैं। अमेरिका के इस क़दम पर चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमरीका ब्रह्मांड को युद्ध क्षेत्र बना रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इससे विश्व शांति को खतरा पैदा होगा।

दरअसल हमारी 21 वीं सदी की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली का अधिकांश हिस्सा जिनमें बैंक लेनदेन से लेकर मौसम की भविष्यवाणी तक, टेलीविजन सेवा से लेकर जीपीएस दिशाओं तक के अलावा सेना और चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के काम करने वाले कई ऐसे काम हैं जो उपग्रहों पर ही निर्भर करते है। ऐसे में कोई भी देश इन पर हमला करके किसी देश की पूरी संरचना को ही बिगाड़ सकता है। इसकी मुश्किलों की बात करें तो अंतरिक्ष का भौतिक वातावरण ऐसा नहीं है कि वहां इन ऑपेऱशनों को अंजाम दिया जा सके। दरअसल अंतरिक्ष में पहले से ही काफी ढेर सारी निष्क्रिय पड़ी सैटलाइटों का मलबा मौजूद है। इसके अलावा इस तरह के ऑपरेशन्स के लिए ऊर्जा आवश्यकताएं बहुत अधिक हैं।

7.

बीते दिनों देश में क्रॉस-डिसिप्लिनरी लीडरशिप को बढ़ावा देने के लिए इको नेटवर्क की शुरुआत की गई। बता दें कि इको नेटवर्क भारत के नेतृत्‍व में एक से अधिक विषय के लिए अनुसंधान, ज्ञान और भारतीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता फ़ैलाने का काम करेगी। इसके अलावा ये राष्ट्रीय कार्यक्रम विज्ञान से घिरे हमारे आधुनिक समाज को बदलने के लिए एक नया मंच भी स्थापित करेगा। इको नेटवर्क के शुरुआत के मौके पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने कहा कि ये नेटवर्क भारतीय शिक्षा के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा साथ ही ये तकनीकी दुनिया के बाद के लिए ज़रूरी अन्वेषण की भी व्‍यवस्‍था करेगा।

EChO नेटवर्क भारत में क्रॉस-डिसिप्लिनरी लीडरशिप के लिए एक खाका प्रदान करने का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण के बढ़ते अनुसंधान, ज्ञान और जागरूकता के मामले पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने इस बड़ी सामाजिक नवाचार साझेदारी के लिए कई हितधारकों को एक साथ लाया है। यह पहल उद्योग, सरकारी, निजी और शैक्षणिक क्षेत्रों में भारतीयों की एक नई पीढ़ी को उत्प्रेरित करेगी जो अंतःविषय अवधारणाओं को संश्लेषित कर सकती है। साथ ही ये पहल चिकित्सा, कृषि, पारिस्थितिकी और प्रौद्योगिकी में वास्तविक दुनिया की समस्याओं से भी निपट सकती है। आपको बता दें कि इको नेटवर्क मानव और पर्यावरण पारिस्थितिकी प्रणालियों के तहत चयनित विषयों पर नागरिकों, उद्योग, शिक्षा और सरकार के साथ आयोजित होने वाले इंटरेक्टिव सत्रों के ज़रिए ज्ञान में अंतराल की पहचान करेगा। इसके बाद इन विषयों पर अनुसंधान और आउटरीच में पोस्टडॉक्टोरल नेतृत्वकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही इको नेटवर्क में मौजूदा वक़्त के सार्वजनिक और निजी प्रयासों को भी शामिल किया जायेगा। इतना ही नहीं इको नेटवर्क के तहत सभी शैक्षिक स्तरों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ नागरिकों, उद्योग और सरकार के लिए सार्वजनिक प्रवचन और शिक्षा के ज़रिए से इन मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता की स्थापना भी की जाएगी।

दरअसल भारत को अपने पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र के लिए अभूतपूर्व खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके हल के लिए भारत की मजबूत तकनीकी विशेषज्ञता और प्राकृतिक दुनिया के ज्ञान के संगम की ज़रूरत है। इको नेटवर्क भारतीयों की एक नई पीढ़ी को उत्प्रेरित करने के लिए एक राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करेगा जो अंतःविषयक अवधारणाओं का समन्‍वय कर सकता है और चिकित्सा, कृषि, पारिस्थितिकी और प्रौद्योगिकी में वास्तविक दुनिया की समस्याओं से निपट सकता है। भारत के ईसीएचओ नेटवर्क के निदेशक प्रो.शैनन ओल्सन के मार्गदर्शन में इस पहल में सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के साथ, सरकार, उद्योग और शिक्षाविद सहयोगी हैं। इसके अलावा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, राउंडग्लास, इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव, अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (एटीआरईई), और सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर प्लेटफ़ॉर्म (सी-कैंप) ईसीएचओ नेटवर्क के संस्थापक भागीदार हैं।

8.

बीते दिनों अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय भेषज संहिता यानी Indian फार्मा कोपी आ IP को औपचारिक रूप से मजूरी प्रदान कर दी। ऐसे में Indian फार्मा कोपी आ IP को औपचारिक तौर पर स्वीकृति देने वाला अफगानिस्तान पहला दुनिया का पहला देश बन गया है। अफगानिस्तान में IP को मजूरी मिलने के बाद अब इस्तेमाल अफगानिस्तान में दवाओं व अन्य स्वास्थ्य उत्पादों के निर्माण में किया जायेगा। बता दें कि Indian फार्मा कोपी आ IP आधिकारिक तौर पर स्वीकृत एक पुस्तक है। इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 के तहत निर्धारित मानकों के मुताबिक़ बनाया गया है।

Indian Pharmacopoeia- IP एक प्रकार की पुस्तक है। इसमें अलग - अलग फार्मास्यूटिकल पदार्थों के फार्मूले और उनके निर्माण के तरीकों का ज़िक्र होता है। IP को एक आधिकारिक पुस्तक का दर्जा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की दूसरी अनुसूची के तहत प्रदान किया गया है। इसका काम बाहरी देशों से आने वाली आयातित या देश में निर्मित दवाओं की बिक्री, स्टॉक, प्रदर्शनी या वितरण हेतु मानदंड तय करना है। इसके अलावा Indian Pharmacopoeia देश में मानव और पशुओं के स्वास्थ्य के लिये ज़रूरी दवाओं की पहचान, गुणवत्ता, शुद्धता और क्षमता को ध्यान में रखते हुए उनके निर्माण और बिक्री के लिये भी मानक तय करता है। IP के अलावा दुनिया भर के ज़्यादातर देशों में दवाओं की विवरणिका मौजूद है। अलग-अलग देशों में इसे अलग - अलग नामों से जाना जाता है। जैसे- अमेरिका की विवरणिका से में बनी दवाओं पर U.S.P., ब्रिटेन की विवरणिका से बनी दवाओं को B.P. और भारत में बनी या भारतीय विवरणिका के तहत बनी दवाओं पर Indian Pharmacopoeia - यानी IP लिखा होता है। ग़ौरतलब है कि भारतीय भेषज संहिता आयोग यानी Indian Pharmacopoeia Commission- IPC IP के निर्माण के लिये उत्तरदायी संस्था है। इसके अलावा भारतीय भेषज संहिता आयोग भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।

9.

उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड ने कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में गैंडों को लाने से संबंधित एक प्रस्ताव को मंज़ूरी प्रदान कर दी है। इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलने अब असम या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से गैंडों को कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में भेजा जायेगा। दरअसल कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व का भौगोलिक भू-भाग और यहाँ के पर्यावरण की स्थिति गैंडों के लिये आदर्श स्थान है। ऐसे में गैंडों के संरक्षण के साथ साथ मानव - पशु संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आएगी। बता दें कि उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड को ये प्रस्ताव भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देना और निम्न ऊँचाई वाले घास-भूमि क्षेत्र में रहने वाली प्रजातियों को प्रोत्साहित करने के मक़सद से दिया गया है।

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले में मौजूद है। साल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर को कॉर्बेट नेशनल पार्क में लॉन्च किया गया था, जो कि अब कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व का ही एक हिस्सा है। कॉर्बेट नेशनल पार्क के बीच बहने वाली कुछ प्रमुख नदियों में रामगंगा, सोननदी, मंडल, पलायन और कोसी जैसी नदियां शामिल हैं। कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के भौगोलिक महत्व को देखते हुए गैंडो को यहां भेजने का प्रस्ताव रखा गया था। दरअसल कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व उत्तर में निम्न हिमालय, दक्षिण में शिवालिक पहाड़ियों और पूर्व में रामगंगा कुंड से घिरा हुआ है। ऐसे में ये चीज़े गैंडों की आवाजाही को रोकने के लिये प्राकृतिक बाधाओं के रूप में काम करेंगी, जिससे न सिर्फ मानव - पशु संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आएगी बल्कि गैंडों के संरक्षण की दिशा में भी ये कदम महत्वपूर्ण होगा। जानकारों का कहना है कि इन गैंडों को अवैध शिकार से बचाना राज्य के वन विभाग के कर्मचारियों के लिये बड़ी चुनौती होगी। क्यूंकि कुछ समय पहले उत्तराखंड राज्य और उसके आस-पास के तराई-क्षेत्र में पाए जाने वाले गैंडे अवैध शिकार के कारण धीरे-धीरे समाप्त हो गए।

बता दें कि गैंडों का अवैध शिकार गैंडे के सींग के लिए किया जाता है। गैंडों की सींग से कामोत्तेजक औषधियों का निर्माण होता है जिनकी मांग बज़ार में काफी अधिक होती है । इसके अलावा भारत में पाया जाने वाला एक सींग वाला गैंडा IUCN की रेड लिस्ट में सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में शामिल है। ग़ौरतलब है कि एक सींग वाला गैंडा गैंडे की सभी प्रजातियों में सबसे बड़ा होता है। भारत सरकार ने गैंडों के संरक्षण के लिए ‘इंडियन राइनो विज़न’ 2020 कार्यक्रम भी चलाया है।

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बीते दिनों रूस ने स्वदेशी वैकल्पिक इंटरनेट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। रूस इस प्रोजेक्ट पर पिछले तीन सालों से लगा हुआ था। दरअसल स्वदेशी वैकल्पिक इंटरनेट उपलब्ध होने के बाद रूस अब किसी भी आपात स्थति में चाहे वो वर्ल्ड वाइड वेब से उसके संबंध टूटने का हो या फिर अमेरिकी रूस के इंटरनेट के मामले में को हस्तक्षेप करता है तो वह देश के लोगों को जोड़ने के लिए अपने इंटरनेट सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है।

इंटरनेट किसी सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होता है। और न ही किसी एक व्यक्ति, कंपनी, संस्था या सरकार का इस पर अधिकार नहीं होता है। मौजूदा वक़्त में दुनिया में क़रीब साढ़े चार सौ करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। दरअसल डोमेन वह सिस्टम होता है, जो इंटरनेट में बताए गए नाम और आईपी एड्रेस को स्टोर रखता है। डोमेन का उल्लेख होते ही इंटरनेट सर्वर उसे संबंधित आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट करके डेटा कंप्यूटर तक भेज देता है। इसके अलावा इंटरनेट में गाइडलाइन, स्टैंडर्ड और रिसर्च करने वाले समूह को वर्ल्ड वाइड कंसोर्टियम यानी W3C कहते है। इनमें भी सर्विस प्रोवाइडर तीन स्तरों पर काम करते हैं। इनमें समुद्र के नीचे केबल के ज़रिए सर्विस प्रोवाइडर्स को दुनियाभर से जोड़ती हैं। दूसरी इन प्रोवाइडर्स को राष्ट्र से और तीसरी कंपनी स्थानीय प्रोवाइडर्स होती हैं। रूस के इस प्रयोग पर अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने नारजगी ज़ाहिर की है। इन देशों के कहना है कि रूस के इस क़दम से इंटरनेट ब्रेकअप होगा। साथ ही इन देशों ने ये भी कहा है कि रूस अपने ही देश के लोगों पर पूरा नियंत्रण रखना चाहता है। ग़ौरतलब है कि इससे पहले चीन और ईरान जैसे देश स्वदेशी इंटरनेट विकसित करने की कोशिश कर चुके हैं।

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पाकिस्तान से सटे गुजरात के कुछ ज़िलों में टिड्डियों के समूहों ने हमला किया है। बनासकांठा टिड्डियों के हमले से सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िला है। दरअसल टिड्डियों का ये समूह दिन के दौरान उड़ता रहता है और रात के वक़्त खेतों में ही रुक जाता है। ऐसे में टिड्डियों के इन समूहों को भगाना काफी दूभर हो जाता है जोकि खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद ही जटिल समस्या है।

उत्तरी गुजरात के तीन जिलों बनासकांठा, पाटन और कच्छ टिड्डियों के समूहों द्वारा किए गए हमलों से बुरी तरह से प्रभावित है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन FAO ने भारत और पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया में टिड्डियों के आक्रमण की चेतावनी जारी की थी। इसके अलावा टिड्डी चेतावनी संगठन LWO ने भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर टिड्डियों के हमले की भविष्यवाणी की थी। हालाँकि इसके बावजूद भी राज्य प्रशासन द्वारा कोई महत्वपूर्ण क़दम नहीं उठाया गया। मौजूदा वक़्त में इन इलाकों में रहने वाले किसान टिड्डियों को भगाने के लिये ढोल और बर्तन पीटने जैसी पुरानी तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक़ टिड्डियाों के समूहों का भारत आना के पीछे इस साल दक्षिण-पश्चिमी-मानसून का लंबे वक़्त तक प्रभावी रहना था। जानकारों की माने तो टिड्डियों का ये समूह साल के शुरुआत में अफ्रीकी देशों सूडान और इरिट्रिया से सऊदी अरब और ईरान के रास्ते पाकिस्तान में दाख़िल हुईं और मौजूदा वक़्त में सिंध प्रांत से होते हुए राजस्थान और गुजरात इलाके को अपने आक्रमण से प्रभावित किया है। राज्य प्रशासन इन टिड्डियों को नष्ट करने के लिये अब केंद्रीय प्रशासन के साथ मिलकर कीटनाशक-छिड़काव अभियान शुरू कर रहा है । इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के ज़रिए कीटनाशक रसायनों का छिड़काव कराए जाने की भी बात कही गई है।

टिड्डी एक तरह के बड़े उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं और इनके पास उड़ने की बेमिसाल क्षमता भी होती है। देखा जाए तो सामान्य तौर पर ये हर रोज़ 150 किलोमीटर तक उड़ सकते हैं। भारत में टिड्डियों की प्रजातियाों के बारे में आपको बताएं तो इनमें रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, बॉम्बे टिड्डी और ट्री टिड्डी जैसी प्रजातियां पाइन जाती हैं। दरअसल टिड्डियों के ये समूह मुख्य रूप से वनस्पति के लिये बड़ा खतरा होते हैं। एक वयस्क टिड्डी प्रतिदिन अपने वज़न के बराबर भोजन यानी लगभग 2 ग्राम वनस्पति खा सकती है। इसके अलावा टिड्डी चेतावनी संगठन LWO के बारे में बताए तो ये कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अंतर्गत आता है। मौजूदा वक़्त में इसका मुख्यालय फरीदाबाद में स्थित है।

LWO के कामों में टिड्डियों पर शोध करना, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क और समन्वय स्थापित करना और टिड्डी चेतावनी संगठन के सदस्यों, राज्य के अधिकारियों, BSF कर्मियों और किसानों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करना है। साथ ही टिड्डियों के कारण पैदा होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों से उबरने के लिये टिड्डी नियंत्रण अभियान शुरू करना भी टिड्डी चेतावनी संगठन LWO के कामों में शुमार है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. कार्मिक मंत्रालय ने जारी किया सुशासन सूचकांक। शासन-व्यवस्था के मामले में तमिलनाडु रहा देश का अव्वल राज्य

इस मामले में महाराष्ट्र दूसरे, कर्नाटक तीसरे और छत्तीसगढ़ को चौथा स्थान मिला है। इसके बाद आंध्र प्रदेश को पांचवें, गुजरात को 6वें , हरियाणा को 7वें और केरल 8वें पायदान पर इस सूची में काबिज़ रहा है। बता दें कि राजधानी दिल्ली को इस सूची में 22वां स्थान मिला है।

2. केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया दूसरे ईट राइट मेले का उद्घाटन। 25-29 दिसम्बर तक होगा नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में इस मेले का आयोजन

National Association of Street Vendors of India और FSSAI यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। ये नेशनल स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल का 11वां संस्करण है। नेशनल स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। इस वर्ष नेशनल स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल की थीम ‘स्वस्थ डाइट’ है।

3. केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने लांच किया भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग नेटवर्क। अनुसन्धान व शैक्षणिक संस्थानों का नेटवर्क है भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग का ये नेटवर्क

Network for Scientific Co-operation for Food Safety and Applied Nutrition यानी NetSCoFAN के तहत अलग - अलग क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों के आठ समूह है। इनमें जीव विज्ञान, रसायन, पोषण, पशुओँ से प्राप्त भोजन, पेड़ पोधों से प्राप्त भोजन, जल व अन्य पेड़, भोजन की जांच सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग आदि शामिल हैं। NetSCoFAN खाद्य सुरक्षा मामलों पर डाटा इकट्ठा करेगा और डेटा बेस तैयार करेगा।

4. RBI ने लॉन्च किया प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट पीपीआई। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए छोटे मूल्य के पेमेंट गटवे के रूप में काम करने वाले 'सेमी क्लोज्ड प्रीपेड पेमेंट' पीपीआई उत्पाद को किया गया है लॉन्च ।

इससे 10,000 रुपये तक के वस्तुओं को खरीदने के साथ इतने मूल्य तक के ही सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। इस उत्पाद में बैंक खाते से पैसा डाल सकते हैं। यह कार्ड या इलेक्ट्रॉनिक रूप में हो सकता है।

5. भारतीय वायुसेना की ताकत रहे मिग-27 लड़ाकू विमान की जोधपुर एयर बेस से हुई विदाई। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देने वाले मिग-27 लड़ाकू विमान को ‘बहादुर के रूप में दिया गया था उपनाम ।

6. लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील के पास सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर काम शुरू कर रहा है चीन। भारत और चीन के रिश्तों में बढ़ सकती है तल्ख़ी

7. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रखी लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय की आधारशिला। राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करना है और लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय का उद्देश्य

8. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुरू हुआ राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य उत्सव 2019 । पहली बार रायपुर में आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य उत्सव का 27-29 दिसम्बर के दौरान किया जाएगा आयोजन

9. भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड ने की ओडिशा के बोलांगीर जिले में आधुनिक एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की स्थापना। 42 लाख सिलिंडर है इस प्लांट की वार्षिक क्षमता।

भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड यह एक महारत्न तेल व गैस कंपनी है, यह भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन कार्य करती है।

10. विजडन पत्रिका ने जारी की दशक के सबसे बेहतरीन क्रिकेटरों की सूची। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली भी हुए हैं इस सूची में शामिल

विराट कोहली के अलावा दक्षिण के डेल स्टेन, एबी डीविलियर्स, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ तथा महिला खिलाड़ी एलिस पेरी को शामिल किया गया है। विराट कोहली को विजडन टेस्ट टीम ऑफ़ द डिकेड का कप्तान चुना गया है, साथ ही उन्हें एकदिवसीय टीम में भी शामिल किया गया है।

11. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की पुरालेख शाखा ने खोजी अब तक की सबसे पुरानी संस्कृत शिलालेख। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के चेबरोलु गाँव में पाया गया है सबसे पुराना संस्कृत शिलालेख

12. 25 दिसम्बर को मनाया गया सुशासन दिवस। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के मौके पर साल 2014 से हुई थी हर साल 25 दिसम्बर को सुशासन दिवस मनाए जाने की शुरुआत

13. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के फाजिलनगर खंड में की जाएगी भारत की पहली ट्रांसजेंडर यूनिवर्सिटी की स्थापना। अखिल भारतीय किन्नर शिक्षा सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है इस विश्वविद्यालय का निर्माण

14. 2024 तक डिजिटल रेडियो लांच करने की योजना बना रहा है आल इंडिया रेडियो आकाशवाणी। डिजिटल रेडियो के जारी होगी रेडियो की ध्वनी गुणवत्ता और इसकी रेंज में वृद्धि

15. केन्द्रीय दूरसंचार व आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लांच किया डिजिटल विलेज गुरुद्वारा’। इस मौके पर उन्होंने कहा 2020 तक पहुंचेगा सभी गाँवों तक निशुल्क वाई-फाई

16. संगीता रेड्डी बनी फिक्की की नई अध्यक्ष। भारत का सबसे बड़ा और सबसे पुराना व्यापारिक संगठन है FICCI

यह गैर-सरकारी व गैर लाभकारी संगठन है। इसका मक़सद भारतीय उद्योग की कुशलता और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि करना है। इसके अलावा यह घरेलु व विदेशी मार्किट में व्यापारिक अवसरों के विस्तार करने के कार्य करता है। इसकी स्थापना 1927 में घनश्याम दास बिरला ने की थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

17. भारतीय रेलवे ने नासिक रेलवे स्टेशन में शुरू किया ऑक्सीजन पार्लर। लोगों को स्वच्छ हवा का अनुभव उपलब्ध करवाना है इसका उद्देश्य

भारतीय रेलवे ने ‘Airo Guard’ के साथ मिलकर ऑक्सीजन पार्लर की शुरुआत की है। इस ऑक्सीजन पार्लर में लगभग 1500 पौधें हैं, यह पौधे रेलवे स्टेशन में मौजूद हवा को स्वच्छ बनाने में उपयोगी भूमिका निभाते हैं।

18. हर्षवर्धन श्रृंगला बने देश के नए विदेश सचिव। 1984 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं हर्षवर्धन श्रृंगला

19. पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों ने शुरु की नयी करेंसी इको। फ्रांसीसी उपनिवेश काल से चली आ रही गुलामी को ख़त्म करते हुए लिया गया है ये फैसला

पश्चिमी अफ्रीका के इन 8 देशो में माली, नाइजर, सेनेगल, बेनिन,टोगो, बुर्किना फासो, गिनी-बसाउ, और आइवरी कोस्ट जैसे देश शामिल हैं। दरअसल इन देशों में अभी तक जो मुद्रा प्रचलन में थी उसका नाम था CFA फ्रैंक। CFA फ्रैंक का मतलब है कि अफ्रीका में फ्रांसीसी उपनिवेश यानी एक तरीके ये मुद्रा बतलाती है कि अफ़्रीकी देश आज भी आर्थिक तौर पर फ्रांस का गुलाम हैं। सीएफए फ्रैंक करेंसी को 1945 से ही इन देशों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

20. 22 दिसंबर को मनाया गया राष्ट्रीय गणित दिवस। हर साल इसी दिन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के रूप में मनाया जाता है राष्ट्रीय गणित दिवस। बता दें कि महान गण‍ितज्ञ श्रीन‍िवास रामानुजन का जन्‍म 22 दिसंबर 1887 को कोयंबटूर के ईरोड गांव में हुआ था।

21. सेतुरमन पंचनाथन को चुना अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिष्ठित नेशनल साइंस फाउंडेशन का अध्यक्ष। अमेरिकी की सरकारी एजेंसी नेशनल साइंस फाउंडेशन। बता दें कि नेशनल साइंस फाउंडेशनविज्ञान एवं इंजीनियरिंग के सभी गैर-चिकित्सकीय क्षेत्रों में मौलिक अनुसंधान और एजुकेशन को समर्थन देती है।

22. बेल्ज़ियम के पूर्व प्रधानमंत्री चार्ल्स मिशेल ने संभाला यूरोपियन काउंसिल और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार। 751 सदस्यों वाली यूरोपीय संसद में चार्ल्स मिशेल के नाम को मिला है समर्थन
बता दें कि इस निकाय में यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष के साथ सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख शामिल होते हैं। इसके अलावा इसकी बैठकों की अध्यक्षता उस सदस्य देश का प्रतिनिधि करता है जिसके पास उस समय यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता होती है।

23. रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन ने किया Quick Reaction Surface-to-Air Missile QRSAM का सफल परीक्षण। ओडिशा की चांदीपुर टेस्ट रेंज में किया गया ये परीक्षण भारतीय सेना को मज़बूत बनाने के लिहाज़ से किया गया है।

24. 24 - आयुष्‍मान खुराना और विक्‍की कौशल को मिला फिल्‍म अंधाधुन व उरी : द सर्जिकल स्‍ट्राइक फिल्‍म के लिए सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता का पुरस्‍कार। उपराष्ट्रपति एम् वेंक्या नायडू ने दिया 66वे राष्ट्रीय सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के रूप में ये पुरस्‍कार

25. हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल का निधन। हिंदी साहित्य जगत में अकहानी आंदोलन’ के जनक के रूप गंगा प्रसाद विमल को जाना जाता था।

26. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लंबी दूरी तय करने वाली भारत की पहली CNG बस का किया अनावरण। भारत को गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था बनाने और CNG को देश में लंबी दूरी के आवागमन का पर्यावरण-अनुकूल विकल्‍प बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी ये CNG बस

27. भारती एयरटेल ने शुर की देश में वाई-फाई कॉलिंग की सुविधा। वाई-फाई कॉलिंग एक नई तकनीकी है जिसके ज़रिए से हम बिना किसी कैरियर नेटवर्क के कर सकते हैं किसी से बात ।

28. भारतीय रेलवे ने कालका-शिमला मार्ग पर एक विशेष ट्रेन “हिम दर्शन एक्सप्रेस” की की शुरुआत। विस्टाडोम कोच वाली पहली ट्रेन है हिम दर्शन एक्सप्रेस जो नियमित रूप से होगी आवागमन के के लिए उपलब्ध

29. केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने जारी किया राजस्व आसूचना निदेशालय DRI की विशिष्ट सेवा और राष्ट्र की रक्षा में गौरवशाली योगदान के लिए डाक टिकट दिसंबर, 1957 को किया गया था राजस्व आसूचना निदेशालय DRI का गठन

यह भारत की प्रमुख तस्करी विरोधी खुफिया, जाँच और संचालन एजेंसी है। यह वित्त मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes & Customs) के अधीन तस्करी के खतरे से निपटने के लिये एक शीर्ष आसूचना निकाय है।

30. 30 - 26 दिसंबर को पृथ्वी के पूर्वी गोलार्द्ध में देखा गया वलयाकार सूर्य ग्रहण। एक तरह की खगोलीय घटना है सूर्य ग्रहण

31. पाकिस्तान की संघीय कैबिनेट ने भारत से की पोलियो मार्कर के आयात की सिफारिश। पोलियो वैक्सीन पीने वाले बच्चों के नाखूनों पर निशान के लिए इस्तेमाल होता है पोलियो मार्कर

पोलियो वैक्सीन पीने वाले बच्चों के नाखूनों पर निशान लगाने की प्रक्रिया को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्वीकृत मिली हुई है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।