(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (15th - 22nd November 2019)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (15th - 22nd November 2019)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • 18 नवंबर को हुई संसद के उच्च सदन राज्य सभा में 250वें सत्र की शुरुआत। 250 सीटों वाले उच्च सदन के 250वें सत्र को कई मायनों में माना जा रहा है ऐतिहासिक
  • भारतीय वन अधिनियम 1927 में संशोधन के लिये लाए गये मसौदे को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लिया वापस। मसौदे में शामिल कुछ खामियों और भारी विरोध के चलते लिया गया है ये फैसला
  • कालापानी क्षेत्र को लेकर भारत और नेपाल के रिश्तों में दिख रही है तल्खी। पिछले दिनों जारी भारत के नए राजनीतिक मानचित्र से उठा है कालापानी क्षेत्र का मसला
  • केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने प्रदान किया खादी को हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड। खादी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के मक़सद से प्रदान किया हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने की साँस अभियान की शुरुआत। शिशुओं में निमोनिया के चलते होने वाली मृत्युदर को कम करना है साँस अभियान का लक्ष्य
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक निजी कंपनी स्पेसएक्स ने किया 60 सैटेलाइटों के एक समूह को लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित । स्पेस इंटरनेट के लिए स्थापित की गईं हैं ये सैटेलाइटें
  • प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए लोगों में पैदा हो रहा है ईको एंज़ायटी नाम का मानसिक विकार। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक़ पर्यावरण की समाप्ति और अपने भविष्य को लेकर चिंतित होता है ईको एंज़ायटी से ग्रसित व्यक्ति
  • दिल्ली में आयोजित हुआ पहला राष्ट्रीय कृषि रसायन सम्मेलन। कीटनाशक विज्ञान भारत द्वारा आयोजित हुआ था कीटनाशकों के संबंध में ये कार्यक्रम

खबरें विस्तार से:

1.

पिछले 18 नवंबर को संसद के उच्च सदन यानी राज्य सभा में 250वें सत्र की शुरुआत हुई। ये सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक है। दरअसल, संविधान के मुताबिक़ राज्यसभा में कुल सीटों की संख्या 250 है, और ये सत्र भी 250वां है। ऐसे में, इस मौके पर सभापति एम वेंकैया नायडु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के सभी सांसदों को बधाई दी और प्रधानमंत्री ने ऊपरी सदन को संबोधित भी किया। बता दें कि शीतकालीन सत्र 18 नवम्बर से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलेगा। उम्मीद ज़ाहिर की जा रही है कि इस मौके पर कुल 47 ऐसे विषयों को उठाया जाएगा जो पिछले कुछ सत्रों से लंबित हैं। इसके अलावा इनमें कुछ नए विधेयक भी शामिल होंगे।

दरअसल भारत में दूसरे सदन यानी राज्यसभा की शुरुआत साल 1918 के मोन्टेग-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट से हुई थी। भारत सरकार अधिनियम, 1919 में उस समय विधानमंडल के दूसरे सदन के तौर पर ‘काउंसिल ऑफ स्टेट्स’ को गठित करने का प्रावधान बनाया गया। हालांकि उस समय ‘काउंसिल आफ स्टेट्स’ को बहुत थोड़े विशेषाधिकार दिए गए थे और इसका पदेन सभापति गवर्नर-जनरल हुआ करता था। बाद में, भारत सरकार अधिनियम, 1935 लाया गया, लेकिन काउंसिल आफ स्टेट्स के गठन में कोई विशेष परिवर्तन नहीं किया गया।

आजादी के बाद भारत में उच्च सदन को बनाया जाए या ना बनाया जाए इसको लेकर संविधान सभा में काफी बहस हुआ। अंत में, यह तय किया गया कि आज़ाद भारत के लिए एक द्विसदनी विधान-मंडल बनाया जाएगा। चूंकि भारत अपार विविधताओं वाला देश है, साथ ही इसकी राजव्यवस्था में परिसंघीय लक्षण यानी फेडरल स्ट्रक्चर के गुण देखे जा सकते हैं। ऐसे में, एकल सदन आजाद भारत के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने में अपर्याप्त साबित होती। शायद इसीलिए ‘काउंसिल आफ स्टेट्स’ यानी राज्य सभा को दूसरे सदन के तौर पर गठित किया गया।

राज्यसभा जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है राज्यों की एक परिषद है। यह अप्रत्यक्ष रूप से जनता का प्रतिनिधित्व करती है। वैसे तो राज्यसभा के वर्तमान सदस्यों की संख्या 238 हैं, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक, राज्यसभा के सदस्यों की कुल संख्या 250 तय की गई है। इनमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों से चुनकर आते हैं और बाकी के 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाते हैं। ये 12 सदस्य ऐसे लोग होते हैं जो साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हों। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की संख्या संविधान की चौथी अनुसूची में बताई गई है।

संविधान के अनुच्छेद 80(4) के मुताबिक, राज्यों के प्रतिनिधियों का चुनाव सम्बंधित राज्यों की विधान-सभाओं के सदस्यों के द्वारा किया जाता है। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है। जो व्यक्ति राज्यसभा का चुनाव लड़ना चाहता है उसका नाम पर विधानसभा के कम-से-कम 10 सदस्यों द्वारा अनुमोदन होना जरूरी है।

मूल्यों की दृष्टि से देखें तो राज्यसभा के गठन में चार सिद्धांत दिखाई देते हैं। इनमें अर्ध संघीय, प्रतिनिधित्व सिद्धांत, संयुक्त पुनर्विचार और नियंत्रण एवं संतुलन का सिद्धांत और विशेषज्ञों को नीति-निर्माण में शामिल करने का सिद्धांत। राज्यसभा के विशेषाधिकार भले ही कम हों या फिर इसके निर्वाचन की प्रक्रिया अलग हो, लेकिन पिछले 67 सालों में इसने लोकतंत्र को मज़बूत करने में अहम् भूमिका निभाई है।

2.

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पिछले दिनों भारतीय वन अधिनियम 1927 में संशोधन के लिये लाए गये एक मसौदे को वापस लेने का फैसला लिया है। केन्‍द्रीय पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पिछले पांच सालों से केन्‍द्र सरकार जनजातियों और वनवासियों के हित के लिए काम करती रही है और ऐसे में उनसे जुड़े किसी भी कानून में कोई खामी नहीं रहने देगी। उन्‍होंने कहा हम भारतीय वन अधिनियम, 1927 में संशोधन के लिए तैयार मसौदे को पूरी तरह से वापस ले रहे हैं ताकि इसकी ख़ामियों को दूर किया जा सके।

दरअसल इस मसौदे में कुछ खामियों थी जिससे कारण ये मसौदा वापस लिया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि इसी साल मार्च महीने में लाए गए इस विधेयक में प्रस्तावित क़ानून का पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कई राज्य सरकारों ने विरोध किया था। बता दें कि भारतीय वन अधिनियम 2019, भारतीय वन अधिनियम 1927 में संशोधन के लिए लाया गया था। इस मसौदे के ज़रिए भारत के वनों की मौजूदा चुनौतियों से निपटने का प्रयास किया गया था। इसके अलावा भारतीय वन अधिनियम 2019 में वन अधिकारी के पास वन अपराधों की जाँच करने और दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत तलाशी करने करने या तलाशी संबंधी वारंट जारी करने का अधिकार दिया गया था। साथ ही इस संशोधन मसौदा के तहत कोई भी वन-अधिकारी किसी भी वक़्त अपने क्षेत्राधिकार के अंदर किसी भी जगह जाकर कर निरीक्षण कर सकता है। इस नए मसौदे में सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि इसके तहत वन अधिकारियों को कानूनों का उल्लंघन करने वाले आदिवासियों को गोली मारने का खुली छूट दी गई थी। इसके अलावा नए संशोधन के ज़रिए वन विभाग किसी भी जंगल को आरक्षित घोषित कर सकता था और जंगलों में रहने करने वाले समुदायों को उनकी पैतृक ज़मीन से भी अलग कर सकता था।

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक़, भारत में अनुमानित 104 मिलियन आदिवासी रहते हैं। जबकि सिविल सोसाइटी समूहों का अंदाज़ा है कि वन क्षेत्रों में 1 लाख 70 हज़ार गांवों मेंरहने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य वनवासियों मिलाकर लगभग 200 मिलियन लोग हैं, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 22% हिस्सा कवर करते हैं।

3.

भारत-नेपाल के बीच लम्बे अरसे से चली आ रही दोस्ती में कालापानी क्षेत्र को लेकर तनाव पैदा होने की आशंका ज़ाहिर की जा रही है। बीते दिनों जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत सरकार की और से देश का नया मानचित्र जारी किया गया था। भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस राजनीतिक मानचित्र में कालापानी क्षेत्र को भारतीय सीमाओं के अंदर दिखाए जाने पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाल के प्रधानमंत्री के पी ओली का कहना है कि नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर मौजूद ये क्षेत्र नेपाल के क्षेत्र में आता है। जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर जवाब देते हुए कहा है कि इस नए राजनीतिक मानचित्र में भारत के सम्पूर्ण भूभाग का सटीक और सही चित्रण किया गया है। इस मामले में किसी भी पड़ोसी देश के साथ सीमा को संशोधित नहीं किया गया है।

बता दें कि उत्तराखंड बॉर्डर पर नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर मौजूद कालापानी क्षेत्र करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारत सरकार के मुताबिक़ करीब 35 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला ये इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का एक हिस्सा है। जबकि नेपाल सरकार इसे अपने दारचुला जिले का हिस्सा बता रहा है। ग़ौरतलब है कि 1962 में भारत-चीन के बीच युद्ध के बाद से ही इस इलाके में भारत के आईटीबीपी के जवानों मौजूद है। इसके अलावा कालापानी क्षेत्र से होकर ही महाकाली नदी भी गुजरती है जिसके उद्गम स्थल को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद हैं।

जानकारों के मुताबिक़ भारत-चीन और नेपाल के ट्राई जंक्शन पर मौजूद कालापानी इलाका सामरिक रूप से काफी अहम है। दरअसल कालापानी एक तरह से डोकलाम जैसा ही है। डोकलाम में जहां भारत, भूटान और चीन अपनी सीमा साझा करता है तो वहीं कालापानी इलाका में भी भारत, नेपाल और चीन का साझा बॉर्डर है। कहा ये भी जा रहा है कि नेपाल कालापानी का मुद्दा चीन के कहने पर उठा रहा है। दरअसल चीन की मंशा है कि वो नेपाल तक एक रेल लाइन का निर्माण करे। ऐसे में वो नेपाल को अपने साथ लाने में जुटा हुआ है। इसके अलावा नेपाल चीन की BRI परियोजना में भी शामिल है।जबकि भारत शुरू से ही चीन की इस परियोजना का विरोध कर रहा है।

4.

बीते दिनों केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने खादी को हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड प्रदान किया गया है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय MSME के मुताबिक़ खादी को HS कोड मिलने से खादी को लेकर लोगों के मन में बनी रूढ़िगत छवि समाप्त होगी और इससे खादी के उत्पादों का निर्यात भी बढ़ेगा। इससे पहले साल 2006 में केंद्र सरकार ने MSME के अंतर्गत स्थापित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग को निर्यात संवर्द्धन परिषद का दर्जा दिया था।

आपको बता दें कि हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड छह अंकों का एक कोड है। हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड को विश्व सीमा शुल्क संगठन द्वारा विकसित किया गया है। दरअसल किसी वस्तु को हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड के मिलने का मतलब ये है कि उस वस्तु या उत्पाद ने बहुउद्देशीय अंतर्राष्ट्रीय उत्पाद के रूप में अपनी पहचान हासिल कर ली है। मौजूदा वक़्त में दुनिया के क़रीब 200 से अधिक देश व्यापार नीतियाँ बनाने, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आँकड़ों को इकठ्ठा करने और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपने सामान की निगरानी व अपने सीमा-शुल्क की दरों को तय करने के लिये हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा हार्मोनाइज़्ड सिस्टम कोड प्रणाली सामानों की व्यापार प्रक्रिया और सीमा शुल्क को आसान बनाती है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में लागत को भी कम करती है।

5.

बीते दिनों स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने साँस अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मक़सद नवजात शिशुओं में निमोनिया के कारण होने वाली मृत्युदर को कम करना है। दरअसल भारत में पाँच साल से कम उम्र के क़रीब 15 फीसदी नवजात शिशुओं की मौत निमोनिया की वजह से ही होती है। इसके अलावा स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के एक आकंड़े के मुताबिक़ देश में पाँच साल से कम उम्र के प्रति 1000 जीवित बच्चों में से क़रीब 37 बच्चों की मौत अकेले निमोनिया की वजह से होती हैं। HMIS के 2018-19 के आँकड़ों के मुताबिक़ मध्य प्रदेश और गुजरात ऐसे राज्य हैं जहां निमोनिया के चलत्ते सर्वाधिक बच्चों की मृत्यु हुई है। साँस अभियान अभियान के तहत बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों को कम करने का लक्ष्य तय किया गया है। साँस अभियान अभियान के ज़रिए 2025 तक प्रति 1000 जीवित बच्चों पर निमोनिया से होने वाली मौतों को 3 से भी कम करने का लक्ष्य तय हुआ है। इस अभियान में निमोनिया से ग्रसित बच्चों को आशा कार्यकर्ताओं द्वारा अमोक्सीसीलीन नामक एंटीबायोटिक की खुराक दी जाएगी।

6.

सर्दियों के शुरू होते ही दिल्ली की आबोहवा ख़राब होनी शुरू हो जाती है। दिल्ली की ज़हरीली हवा को सुधारने के लिए बीते दिनों कई प्रयास किए गए। इसी कड़ी में अब दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा है कि वो दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर प्यूरीफाइंग टॉवर या स्मॉग टॉवर लगाने का एक खाका तैयार करे।

बता दें कि स्मॉग टॉवर एक तरह की हवा साफ करने वाली मशीन है। स्मॉग टॉवर के रूप में जाने जाने वाला ये एयर प्यूरीफायर काफी बढ़ा होता है और ये अपने आसपास की ज़हरीली हवा अंदर खींचता है। दरअसल ये हवा में मौजूद गंदगी को लगभग कम कर देता है और बाहर साफ़ सुथरी हवा फेंकता है। एक आकंड़ें के मुताबिक़ ये हर घंटे कई करोड़ घन मीटर हवा साफ कर सकते है। इसके अलावा हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे नुक्सानदयाक कणों को 75 फीसद तक कम कर देता है। दरअसल दिल्ली की हवा इतनी ख़राब हो चुकी है कि यहां की हवा में अब पीएम 2.5 से भी सूक्ष्म कण पाए जा रहे हैं। पीएम 2.5 से भी छोटे ये कण पीएम 1.5 और पीएम 1 की श्रेणी में आते हैं जिन्हें अल्ट्राफाइन पार्टिकल्स भी कहा जाता है। ये सूक्ष्म कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें मास्क पहहने के बावजूद भी रोकन नहीं जा सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के मुताबिक़ पीएम 1 और पीएम 1.5 के कणों की वजह से लोगों में गठिया रोग होने की सम्भावना रहती है।

7.

बीते दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लेह में राष्ट्रीय सोवा-रिगपा संस्थान NISR की स्थापना को मंजूरी दे दी। आयुष मंत्रालय के अधीन स्वायत्तशासी संस्थान के रूप में राष्ट्रीय सोवा-रिगपा संस्थान की स्थापना इसलिए हुई है ताकि सोवा-रिगपा के पारम्परिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, उपकरणों और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ा जा सके। इससे न सिर्फ सोवा-रिगपा से जुड़े पारम्परिक औषधि प्रणाली के अलग - अलग विषयों की शिक्षा मिलेगी बल्कि अनुसंधान को भी प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।

बता दें कि सोवा-रिगपा भारत की हिमालय पट्टी की एक पारम्परिक औषधि प्रणाली है। ये प्रणाली सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, दार्जिलिंग, हिमाचल प्रदेश, केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख और अब पूरे भारत में लोकप्रिय है। राष्ट्रीय सोवा-रिगपा संस्थान की स्थापना से भारतीय उप-महाद्वीप में सोवा-रिगपा को दोबारा जीवित करने में मदद मिलेगी। साथ ही ये संस्थान भारत के अलावा अन्य देशों के सोवा-रिगपा के छात्रों को अवसर प्रदान करेगा। राष्ट्रीय सोवा-रिगपा संस्थान NISR के गठन से सोवा-रिगपा उत्पादों से सम्बंधित बेहतर शिक्षा, वैज्ञानिक प्रमाणिकरण, गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण और सुरक्षा मूल्यांकन की सुविधा होगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सोवा-रिगपा संस्थान उत्कृष्ट सोवा-रिगपा उपचार की पहचान करेगा, जिनमें मानक प्रक्रियाएं शामिल हैं।

8.

बीते दिनों अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक निजी कंपनी स्पेसएक्स ने 60 सैटेलाइटों के एक समूह को लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया है। ये 60 सेटेलाइटें स्पेस इंटरनेट सुविधा के लिए प्रक्षेपित की गई हैं। दरअसल स्पेसएक्स की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना स्टारलिंक नेटवर्क प्रोजेक्ट का मक़सद 2020 तक अमेरिका और कनाडा में स्पेस इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराना है। इसके अलावा इस परियोजना के लक्ष्यों में 2021 तक पूरी दुनिया में बेहद ही सस्ती दर पर नॉन-स्टॉप स्पेस इंटरनेट की भी सेवा प्रदान करना है। फिलहाल इस परियोजना के पहले चरण के तहत12,000 सैटेलाइटों को निम्न भू-कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करना है। इसके अलावा इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के दूसरे चरण में तीस हज़ार अन्य सैटेलाइटें भी इसी लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित की जाएंगी।

बता दें कि स्पेस इंटरनेट के ज़रिए बिना किसी रूकावट के इंटरनेट उपलब्ध होगा। इसके अलावा दूर दराज़ के उन इलाकों में भी इस परियोजना से इंटरनेट की पहुँच आसान हो जाएगी जहां फाइबर ऑप्टिक्स केबल और वायरलेस नेटवर्क की पहुंच नहीं है। हालाँकि स्पेस इंटरनेट से कुछ संभावित नुकसानों का भी खतरा है। इनमें अंतरिक्ष में सैटेलाइटों की बढ़ती संख्या सबसे प्रमुख समस्या है। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ मौजूदा वक़्त में अंतरिक्ष में क़रीब 2000 सैटेलाइटें मौजूद हैं। इसके अलावा 1957 में शुरू हुए अंतरिक्ष युग से लेकर अभी तक लगभग 9000 सैटेलाइटें भेजी जा चुकी हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इनमें से ज़्यादातर सैटेलाइटें निचली कक्षाओं में मौजूद हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष में बढ़ती सैटेलाइटों की वजह से प्रकाश प्रदूषण का भी खतरा पैदा हो सकता है।

9.

मनोवैज्ञानिकों ने बताया है दुनिया भर में बढ़ रहे प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए पिछले कुछ सालों के दौरान लोगों में एक अलग तरह का मानसिक विकार पैदा हो रहा है। मनोवैज्ञानिकों ने इस मानसिक विकार को ईको एंज़ायटी नाम दिया है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक़ ईको एंज़ायटी एक ऐसी मानसिक मनोदशा है जिसमें कोई व्यक्ति इस बात से डरा होता है कि आने वाले वक़्त में पर्यावरण का ख़त्म हो जाएगा। ग़ौरतलब है ईको एंज़ायटी से ग्रसित व्यक्ति जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों के कारण परिवार, बच्चों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर चिंतित रहता है।

इस संबंध में फिलहाल कोई स्पष्ट आँकड़ा नहीं हैं। हालाँकि ऐसा ज़रूर है कि एक बड़ा तबका जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय प्रदूषण के संभावित खतरों को लेकर अवसादित और चिंतित रहता है। एक सर्वे के मुताबिक़ प्रत्येक 10 में से 1 ब्रिटिश वयस्क नागरिक अपने जीवन में कुछ वक़्त के लिये इस तरह की मानसिक बीमारी से ग्रसित ज़रूर रहता है। बता दें कि ईको एंज़ायटी से ग्रसित लोग इस अवसाद से छुटकारा पाने के लिये शराब जैसे नशीले पदार्थों का भी सेवन करने लगते हैं। ग़ौर करने वाली बात ये है कि भारत में भी इस तरह के लक्षण लोगों में देखने को मिले हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में लोग प्रदूषण बढ़ने की वजह से अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।

10.

बीते दिनों नई दिल्ली में पहले राष्ट्रीय कृषि रसायन सम्मेलन का आयोजन हुआ। 13-16 नवंबर के बीच आयोजित इस सम्मलेन का विषय कृषि रसायन के अलग - अलग मोर्चों पर देश की स्थिति रहा है। इस मौके पर कीटनाशकों के संबंध में कुछ महत्त्वपूर्ण सिफारिशें पेश की गईं। इनमें कीटनाशकों का प्रयोग करते वक़्त लेबलिंग का इस्तेमाल, जोखिम आधारित पहलुओं को को ध्यान में रख कर कीटनाशकों पर प्रतिबंधात्मक रोक लगाना, आयातित तकनीकी कीटनाशकों के आँकड़ों के संरक्षण के लिए नीति निर्माण करना, और सुरक्षित नैनो-सूत्रीकरण की शुरूआत के अलावा प्रशिक्षण और विस्तार के लिये किसानों को अधिकार सशक्त बनाने जैसी सिफारिशें की गईं हैं। बता दें कि राष्ट्रीय कृषि रसायन सम्मेलन पहली बार आयोजित हुआ है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मुख्यालय में आयोजित हुआ ये कार्यक्रम कीटनाशक विज्ञान भारत द्वारा किया गया था। दरअसल इस सम्मेलन का आयोजन कीटनाशक प्रबंधन में रसायनिक कीटनाशकों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए किया गया है। क्यूंकि लक्ष्य आधारित और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद समय-समय पर शुरू किये जा रहे हैं। इसके अलावा कीटनाशक के इस्तेमाल के फायदे उनके नुकसान के मुक़ाबले अधिक हैं।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस के मौके पर, जल शक्ति मंत्रालय ने दिया स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्कार- 2019 राज्यों की श्रेणी में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण पुरस्कार- 2019 के तहत तमिलनाडु को मिला है पहला स्थान

बता दें कि हरियाणा और गुजरात के तमिनाडु के बाद राज्यों की सूची में शीर्ष पर हैं। इसके अलावा ज़िलों की श्रेणी में शीर्ष स्थान पेडापल्ली (तेलंगाना) का है इसके बाद क्रमशः फरीदाबाद तथा रेवाड़ी (हरियाणा) हैं। साथ ही इस में उत्तर प्रदेश अधिकतम जन भागीदारी वाला राज्य रहा है।

2. भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच संयुक्त क्षेत्र प्रशिक्षण दुस्त्लिक अभ्यास-2019 का आयोजन। ताशकंद के नज़दीक चिर्चिक प्रशिक्षण क्षेत्र में आयोजित हुआ था ये अभ्यास। बता दें कि शहरी परिदृश्य में आतंकवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ अभियानों पर केंद्रित था ये अभ्यास

3. जारी हुआ भारत का पहला ज़ियोकेमिकल बेसलाइन एटलस। राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान NGRI ने जारी किया है ज़ियोकेमिकल बेसलाइन एटलस

बता दें कि इस एटलस का इस्तेमाल नीति निर्माताओं द्वारा पर्यावरणीय क्षति का आकलन करने के लिए किया गया है। इस एटलस में क़रीब 45 मानचित्र शामिल हैं। इन मानचित्रों में देश में मृदा की सतह और उसके नीचे की धातुओं, ऑक्साइड्स और तत्त्वों के बारे में जानकारी उपलब्ध है।

4. अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी को सियांग से जोड़ने वाले सिसेरी नदी पुल की शुरुआत। इस पहल से पूर्वोत्तर और अरुणाचल प्रदेश में खुलेंगे विकास के नए द्वार ।

5. कोच्चि में मौजूद विलिंग्डन द्वीप पर फिट इंडिया और गो ग्रीन नामक दो पहलों की भारतीय नौसेना ने की शुरुआत। भारत का सबसे बड़ा कृत्रिम द्वीप है विलिंग्डन द्वीप।

6. भारत और कतर की नौसेनाओं के बीच आयोजित हो रहा है पाँच दिवसीय द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ज़ायर-अल-बह्र। कतर की राजधानी दोहा में आयोजित हो रहा है ये द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास

बता दें कि इस अभ्यास ज़रिए दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग मज़बूत होगा और परिचालन क्षमता बढ़ेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आतंकवाद और समुद्री डाकुओं के आतंक से लड़ने के क्षेत्र में सहयोग मिलेगा।

7. 2020 में उपलब्ध होगा जीका वायरस का टीका। सालों से शोध कर रही हैदराबाद स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड अगले साल 2020 तक लांच कर देगी जीका वायरस का टीका।

बता दें कि जीका वायरस एडिज, एजिप्टी व अन्य मच्छरों के काटने से फैलने वाला संक्रमण है। इसका वायरस वीनस फ्लेविवायरस व फैमिली फ्लेविविरिडी के तहत आता है। इसकी शुरुआत लैटिन अमेरिकी देशों से हुई है, जो अब भारत भी पहुंच चुका है। इससे संक्रमित गर्भवती से पैदा बच्चा आकार में छोटा व अविकसित दिमाग के साथ होता है। यह शरीर के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है।

8. सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया नई दिल्‍ली में आकाशवाणी के नये, रंग भवन सभागार का उद्घाटन । इस मौके पर जावड़ेकर ने प्रसार भारती संग्रहालय से संकलित गुरबानी और शबद कीर्तन का डिजीटल संस्‍करण भी जारी किया।

9. कोलकाता के इडेन गार्डेंस में खेला गया भारत और बांग्‍लादेश के बीच गुलाबी गेंद से पहला डे-नाइट टेस्ट मैच। इस मौके पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और खेल जगत की कई ब़ड़ी हस्तियां रहीं मैदान में मौजूद

10. Institute of economic and peace ने जारी किया Global Terrorism index 2019 इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अफगानिस्तान रहा। बता दें कि इस रैंकिंग में भारत को भारत को 7वे स्थान पर रखा गया है।

11. पापुआ न्यू गिनी से अलग होकर बोगनविली बना दुनिया का नया देश। 18वीं शताब्दी के फ़्राँसीसी खोज़कर्ता के नाम पर पड़ा है बोगनविली का नाम

12. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस व इस्पात मंत्रालय ने इस्‍पात उद्योग से हरित इस्‍पात मिशन के मक़सदों को हासिल करने की दिशा में काम करने का किया आह्वान । हरित इस्पात, इस्पात निर्माण की ऐसी प्रक्रिया को होती है जो हरितगृह गैसों के उत्सर्जन को कम करने और कम लागत के साथ-साथ इस्पात की गुणवत्ता में करता है सुधार ।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।