(Global मुद्दे) इस्लामी सहयोग संगठन - ओआईसी और भारत (Organization of the Islamic Conference - OIC and India)



(Global मुद्दे) इस्लामी सहयोग संगठन - ओआईसी और भारत (Organization of the Islamic Conference - OIC and India)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): पिनाक रंजन चक्रवर्ती (पूर्व राजदूत), डा. वायल अव्वाद (वरिष्ठ अरब पत्रकार)

मुख्य बिंदु:

OIC SUMMIT 2019

  • 1 और 2 मार्च को अबुधाबी में OIC की 46वीं बैठक हुई।
  • भारत को इस समिट में "गेस्ट ऑफ़ ऑनर" के तौर पर आमंत्रित किया गया।
  • OIC SUMMIT 2019 की थीम - 50 Years of Islamic Cooperation: Road Map for Prosperity and Development
  • OIC के मंच पर भारत पिछले करीब 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार शामिल हुआ है।
  • OIC की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शिरकत किया

क्या है OIC?

  • OIC का पूरा नाम इस्लामी सहयोग संगठन है (Organisation of Islamic Cooperation)
  • OIC का इससे पहले नाम Organisation of Islamic Countries था
  • OIC मुस्लिम दुनिया की आवाज़ का प्रतिन्धित्व करने के लिए जाना जाता है
  • संयुक्त राष्ट्र के बाद ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है
  • OIC के कुल 57 सदस्य देश हैं, जिनमें क़रीब 47 देश मुस्लिम बहुल और बाकी 10 देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं
  • OIC का मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दाह में है
  • OIC में शामिल होने के लिए किसी भी देश को मुस्लिम बाहुल्य देश होना ज़रूरी होता है
  • OIC कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हो सकते हैं
  • हालांकि इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद तीसरे सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाले देश भारत को OIC में पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं मिला हुआ है, जबकि रूस थाईलैंड जैसे कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को OIC पर्यवेक्षक का दर्ज़ा मिला हुआ है।
  • OIC में UAE और सऊदी अरब देश मुख्य भूमिका में है

OIC का इतिहास

  • 21 अगस्त 1969 को यरूशलम में मौजूद इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र मस्जिद 'अल-अक्सा' पर एक हमले की कोशिश की गई
  • 24 अगस्त को अरब विदेश मंत्रियों ने इस घटना के बाद विचार करने के लिए तत्काल बैठक बुलाई
  • संयुक्त अरब गणराज्य (मिस्र और सीरिया) का मानना था कि इस बैठक के लिए केवल अरब देशों बुलाया जाना चाहिए
  • जबकि सऊदी अरब और मोरक़्क़ो का मानना था कि इस बैठक में सभी इस्लामिक देशों को बुलाया जाना चाहिए
  • सऊदी अरब और मोरक़्क़ो दोनों ही देश इसे आयोजित कराने के लिए काफी उत्साहित थे
  • तमाम विचार-विमर्श के बाद शिखर सम्मलेन आयोजित कर एक तैयारी समिति (Preparatory Committee) का गठन किया गया।
  • इस समिति में अरब जगत के दो-दो प्रतिनिधि शामिल थे। जिसमें सऊदी अरब और मोरक्को, एशिया - ईरान और मलेशिया और अफ्रीका - नाइजर और सोमालिया
  • तैयारी समिति (Preparatory Committee) के सदस्य देशों ने पहले 8 और 9 सितम्बर 1969 को रबात में एक मुलाक़ात की
  • मुलाक़ात के अंतिम क्षणों में पकिस्तान ने सबसे बड़े इस्लामिक राष्ट्र होने के नाते इस बैठक में शामिल किए जाने का हवाला दिया और फिर 9 सितम्बर को पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल और विदेश सचिव यूसुफ भी रबात मुलाक़ात में सरीक हो गए।
  • तैयारी समिति (Preparatory Committee) ने एक शिखर सम्मेलन के आयोजन की सिफारिश की
  • ये सम्मेलन 22-24 सितंबर 1969 को रबात में होना था
  • इस समिति ने बैठक में आमंत्रित किए जाने वाले देशों के लिए 2 मानदंड तय किए
  • ऐसे देश जो मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश है या जिन राष्ट्रों के मुखिया मुस्लिम हैं वो इस बैठक में शामिल हो सकते हैं

भारत ने क्या कहा?

  • विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने - "वैश्विक शांति और भाइचारे पर ज़ोर दिया।
  • इसके अलावा आतंकवाद पर बोलते हुए कहा कि - कुछ देश आतंकवाद को पालने में लगे है।
  • आतंकवाद को पनाह और फंडिंग बंद होनी चाहिए। क्यूंकि बढ़ता आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए खतरा है।
  • विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ये भी कहा कि - हमारी लड़ाई आतंकवाद के ख़िलाफ़ है और इसका किसी मज़हब से कोई लेना देना नही है।

रबात कॉन्फ्रेंस

  • मोरक्को में होने वाले रबात कॉन्फ्रेंस में बारे में वहां मौजूद भारतीय राजनयिक गुरुबचन सिंह को भी आमंत्रित किया गया
  • इसके साथ ही मोरक़्क़ो ने भारत के एक प्रतिनिधिमंडल को भी रबात कॉन्फ्रेंस में भेजे जाने की पेशकश की
  • भारतीय राजनयिक गुरुबचन सिंह 22 और 23 सितम्बर तक रबात कॉन्फ्रेंस है हिस्सा रहे
  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल (Mr. Fakhruddin Ali) जब 24 तारीख़ को रबात कॉन्फ्रेंस में भाग लेने पहुंचा तो पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या ख़ान ने इस कॉन्फ्रेंस को बहिष्कार करने की धमकी दे डाली।
  • बाद में पाकिस्तान को अन्य देशों ने साथ रखने का फैसला किया और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को बिना शामिल हुए वापस लौटना पड़ा।

OIC ने पकिस्तान के कहने पर बुलाई थी इमरजेंसी बैठक

  • इस्लामी सहयोग संगठन OIC ने पाकिस्तान के अनुरोध पर 26 फरवरी को कश्मीर मुद्दे को लेकर एक कॉन्टेक्ट ग्रुप की आपात बैठक बुलाई थी
  • OIC संगठन के सभी 57 सदस्य मुस्लिम देशों का एक ‘कश्मीर कॉन्टेक्ट ग्रुप है और इस ग्रुप पर पूरी तरह से पाकिस्तान का कब्ज़ा है।
  • नोटिस के अनुसार OIC के सदस्य राष्ट्रों के स्थायी राजदूत कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करने के लिए शामिल हुए
  • ये बैठक पुलवामा हमले के बाद भारत तथा पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के मद्देनजर बुलायी गयी
  • पाकिस्तान के नेताओं ने पुलवामा हमले का खंडन करते हुए इसका कड़ा विरोध किया था

OIC और भारत

  • OIC में भारत को निमंत्रण मिलना भारतीय विदेश नीति की कामयाबी है
  • OIC देशों के साथ भारत के संबंध काफी बेहतर हैं।
  • UAE ने भारत को OIC में शिरकत करने के लिए प्रस्ताव 2 कारणों से दिया था
  • पहला भारत के ग्लोबल स्टेटस के कारण और दूसरा भारत में मौजूद ज़रूरी इस्लामिक जड़ों के कारण
  • UAE, सऊदी अरब, ओमन और क़तर जैसे OIC सदस्य देशों के साथ भारत के अच्छे सम्बन्ध है
  • 2002 में कतर ने भारत को पर्यवेक्षक दर्ज़ा देने का OIC संगठन में प्रस्ताव भी रखा था
  • पिछले साल तुर्की और बांग्लादेश ने भी भारत को OIC में सदस्य देश के तौर पर शामिल किए जाने की मांग की
  • OIC का रुख़ अब पकिस्तान से हटकर भारत की ओर ज़्यादा है।
  • पश्चिम एशिया में लगभग 8 मिलियन भारतीय रहते हैं। सिर्फ सऊदी अरब से हर साल 11 बिलियन डॉलर की धनराशि भारत आता है, इससे स्पष्ट होता है कि इन देशों से भारत के कितने गहरे ताल्लुकात हैं।
  • भारत का OIC देशों के साथ क़रीब 230 बिलियन अमरीकी डॉलर (2017) का कारोबार है। जबकि पाकिस्तान का OIC से कारोबार 23 - 25 बिलियन (2015) तक ही रहा है
  • इसके अलावा मौजूदा समय में अमेरिका इजराइल और यूरोपीय देश भारत के साथ हैं ऐसे में सऊदी अरब भी पाकिस्तान के साथ खुलकर सामने आने का जोखिम नहीं उठा सकता है।
  • बांग्लादेश OIC में कुछ सुधार की मांग कर रहा है , जिनमें भारत को OIC में शामिल किए जाने का सुधार भी मौजूद है
  • OIC सदस्य देशों में सऊदी अरब, UAE, कतर, ओमान, मोरक़्क़ो, टुनिशिया और मिस्र जैसे देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय कारोबार और निवेश सम्बन्ध काफी बेहतर हुए हैं।
  • कुछ दिन पहले भारत ने सूडान, सीरिया ओमान और क़तर में पेट्रोलियम से जुड़े वेंचरों में निवेश किया है।
  • भारत और ईरान के सम्बन्ध पहले से ही बेहतर हैं। सऊदी अरब यहां नहीं चाहता कि भारत ईरान की ओर झुकने पाए।

OIC और पाकिस्तान

  • OIC के सदस्य देश पाकिस्तान ने भारत को आमंत्रित किए जाने विरोध किया और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी इसमें शामिल नहीं हुए।
  • OIC में पकिस्तान का अब 1969 वाला कद नहीं रह गया है
  • पाकिस्तान ने कई साल तक OIC का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए किया है
  • 1969 से 2013 तक पाकिस्तान भारत को OIC में कश्मीर समस्या, बाबरी मस्जिद और मानवाधिकारों से जुड़े कई मुद्दों के लिए टार्गेट करता रहा है ।
  • जानकारों का कहना है कि पाकिस्तानी प्रोपोगैंडा के कारण OIC का रुख़ पाकिस्तान की ओर ही रहा है। दिसंबर 2018 में OIC ने कश्मीर के प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाये जाने की कड़ी आलोचना की और इसे "टेररिस्ट एक्ट" बताया।
  • 1969 में हुई रबात कॉन्फ्रेंस से लेकर अब स्थति काफी बदल चुकी है
  • उस दौर में पाकिस्तान सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश था। अमेरिका भी उस समय पाकिस्तान के पाले में था।
  • 2013 के बाद इंडोनेशिया बांग्लादेश और ईरान जैसे देश भारत के साथ उभरते द्विपक्षीय संबंधों के कारण भारत समर्थन में आ गए और पाकिस्तान की ओर से भारत के ख़िलाफ़ लगाए जाने वाले आरोपों में कुछ कमी आई।

OIC ने क्यूं दिया भारत को गेस्ट ऑफ़ ऑनर

  • भारत दुनिया की 6ठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
  • भारत के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक कद के कारण इस्लामिक देश भारत की ओर झुक रहे हैं
  • भारत को काफी तादात में ऊर्जा की ज़रूरत है। जिसके कारण भी खाड़ी देश भारत को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं।
  • OIC के सदस्य देशों में भारतीय कामगार भी काफी अधिक हैं जिनका UAE और सऊदी अरब जैसे देशों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
  • OIC सदस्य देश में अब पाकिस्तान के भारत को नज़रअंदाज करने की भूल नहीं कर सकते

भारत - पाकिस्तान सम्बन्ध

  • भारत पकिस्तान संबंध के बीच आतंकवाद सबसे गंभीर समस्या है
  • हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पकिस्तान को 1996 में दिए MFN - मोस्ट फेवर्ड नेशन के दर्ज़े को भी वापस ले लिया है
  • भारत अब पाकिस्तान से आयात होने वाले सामानों पर 200 % का सीमा शुल्क वसूलेगा। जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
  • विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबकि 2016-17 में भारत पकिस्तान का द्विपक्षीय सम्बन्ध 2.28 बिलियन डॉलर रहा था
  • पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज़ में डूबती जा रही है।
  • ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पकिस्तान पर विदेशी क़र्ज़ लगभग 92 अरब डॉलर का हो गया है।
  • आर्थिक संकट से जूझ रहा पकिस्तान चीन से हमेशा ही क़र्ज़ लेता रहा है।
  • पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी गिरकर 8.12 अरब डॉलर पर आ गया है जो कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्वबैंक के सुझाए न्यूनतम स्तर से भी कम है। जबकि भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार 400 अरब डॉलर से अधिक है।
  • भारत आने वाले वक़्त में हो सकता है कि पाकिस्तान से सिंधु जल समझौता भी समाप्त कर ले। जिसका उसकी अर्थव्यवस्था सबसे बुरा प्रभाव पड़ेगा।

भारत OIC का इस्तेमाल कैसे कर सकता है

  • भारत को अगर OIC में पर्यवेक्षक या फिर सदस्य देश बनने का मौका मिलता है तो भारत को इसे स्वीकार करना चाहिए। क्यूंकि भारत इसके ज़रिए पाकिस्तान को काउंटर कर सकता है।
  • इसके अलावा भारत चीन पर भी इसके ज़रिए दबाव बना सकता है। ये दबाव OIC देशों के ज़रिए पहले पाकिस्तान और फिर चीन पर बनाया जा सकता है।
  • हालाँकि अभी भी भारत को इस मामले में अभी थोड़ी सतर्कता बरतने और इंतज़ार करने की ज़रूरत है कि आगे क्या फैसला लिया जा रहा है ? क्यूंकि जानकारों का कहना है कि OIC का राजनीतीकरण हो चुका है।
  • जानकारों के मुताबिक़ OIC अपने उद्देश्यों का पालन नहीं कर रहा है। इसका इस्तेमाल अक्सर ही देशों ने अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हांसिल करने के लिए किया है।
  • इसके अलावा लीबिया और इराक़ जैसे मुस्लिम देशों में इंटरनेशनल कम्युनिटी का हस्तक्षेप करना OIC पर सवाल खड़े करता है।
  • इस्लामिक देशों के मामले में अंतराष्ट्रीय समुदाय का हावी होना OIC संगठन में सुधार किए जाने को दर्शाता है।
  • OIC द्वारा संतुलित और निष्पक्ष रुख़ अपनाए जाने की ज़रुरत है।
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