(Daily News Scan - DNS) गाजा चक्रवात (Gaza Cyclone)


गाजा चक्रवात (Gaza Cyclone)


मुख्य बिंदु:

पिछले दिनों चर्चा में रहने वाले गाजा चक्रवात का असर अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठने वाले गाजा चक्रवात में अब तक कुल 45 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। इस चक्रवात का असर मुख्य रूप से तमिलनाडु राज्य के तटीय इलाकों में रहा। जहां इसने करीब 1.17 से भी अधिक घरों को नुकसान पहुंचाया। चक्रवातों के नामकरण नियमावली के अनुसार गाजा चक्रवात का नाम श्रीलंका ने रखा। ये चक्रवात तमिलनाडु के पेंवन और कुड्डालोर इलाकों से टकराया था।

  • चक्रवात निम्न वायुदाब वाली ऐसी मौसमी परिघटना होती है जिसमें हवाएं बाहर से अंदर की ओर तेज़ गत से घूमती है।
  • पृथ्वी के दोनों उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धोंमें चक्रवात के मामले देखे जा सकते हैं।
  • दक्षिणी गोलार्द्धों में ये चक्रवात घड़ी की सुई की दिशा यानी Clockwise जबकि उत्तरी गोलार्द्ध में ये चक्रवात घड़ी की सुई के विपरीत यानी Anti Clockwise घूमते हैं।
  • चक्रवात मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।
  • पहला उष्णकटिबंधीय चक्रवात जिसे अंग्रेजी टर्म में Temperate Cyclones और दूसरा शीतोष्ण चक्रवात जिसे Temperate Cyclones के रूप में जाना जाता है।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात का प्रभाव प्रमुख रूप से प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और उत्तरी अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों पर ज्यादा रहता है।
  • इस क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों को अपने स्थान और तीव्रता के आधार पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस श्रेणी में हरिकेन, टाइफ़ून, ट्रोपिकल स्ट्रोमी, साइक्लोनिक स्टोर्म ट्रोपिकल डिप्रेशन और साइक्लोन यानी चक्रवात शामिल होते हैं। इन चक्रवातों की रफ़़्तार 50 से 300 km/h तक होती है क्योंकि इनमें वाष्पीकरण के कारण भारी मात्रा में स्ंजमद Laten Heat रहती है।
  • जबकि शीतोष्ण चक्रवातों का प्रभाव उत्तरी एटलांटिक महासागर और उत्तरी प्रशांत महासागर में रहता है।
  • इन क्षेत्रों में चक्रवात की उत्पत्ति महासागरों के उन क्षेत्रों में होती है जहां उष्ण कटिबंधीय वायु शीत कटिबंधीय वायु से मिलती है।
  • शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले इन चक्रवातों की रफ्तार अलग-अलग होती है, जबकि इनके आगे की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घण्टे तक होती है।

नामकरण की प्रक्रिया:

  • पृथ्वी के दोनों गोलार्द्धों पर चक्रवात आते रहते हैं। भारत के मौसम विभाग के अनुसार पूरी दुनिया में ये चक्रवात लगभग 80 से भी ज़्यादा बार उत्पन्न होते हैं। चक्रवातों का नमा रखने की प्रक्रिया काफ़ी पुरानी है। मौजूदा वक्त में विश्व मौसम संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र एशिया प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक कमीशन इन चक्रवाती तूफानों का नाम रखते हैं।
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफानों के लिए नाम देने की जिम्मेदारी 8 उत्तरी समुद्री देशों की है। इन देशों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैण्ड जैसे देश शामिल हैं।
  • दरअसल किसी तूफान का नाम क्या होगा, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि वे तूफान कहां यानी किस देश के हिस्से आ रहा है।

इन चक्रवातों से निपटने के लिए सरकारें क्या करती है:

  • चक्रवात के रूप में आने वाली इस प्राकृतिक आपदा में भारी जान और माल का नुकसान होता है। तटीय इलाकों में ये चक्रवात न सिर्फ आधारभूत ढ़ांचे को करते हैं बल्कि इनसे फ़सलें और पशुधन भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। संकट की इस स्थिति में मौसम विभाग की ओर से निर्देश जारी किया जाते हैं, जिससे कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जान और माल के नुकसान को कम किया जा सके।
  • मौसम विभाग इस स्थिति में मछुआरों को भी समुद्र में जाने से रोकती है तथा अन्य लोगों को भी सतर्क रहने की हिदायत देती है।
  • चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए हमें खुद भी कुछ तैयारियां रखनी चाहिए। इन तैयारियों में समय-समय पर रेडियो केन्द्रों से प्रसारित होने वाले समाचारों पर ध्यान देना, घरों से बाहर न निकलना, जानवरों और पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।