Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 29 January 2020


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एयर इंण्डिया को क्यों बेच रही है सरकार ?

  • भारत सरकार ने एयर इंडिया के 100% शेयर को बेचने के लिए आवेदन मांगे हैं।
  • इस तरह अब सरकार अपनी हिस्सेदारी को बिल्कुल समाप्त करना चाहती है।
  • एयर इण्डिया के प्राइवेटाइजेशन का समय काल छोटा नहीं है।
  • इस प्रकार का सबसे पहला प्रयास 200-01 में किया गया।
  • 2007 में एयर इण्डिया के साथ इण्डियन एयरलाइन्स का विलय कर दिया गया और एयर इण्डिया लिमिटेड कंपनी की स्थापना की गई।
  • 2013 में सिविल एविएशन मिनिस्टर अजित सिंह ने 2013 में कहा की एयर इण्डिया को बचाने का एकमात्र विकल्प प्राइवेटाइजेशन का विचार सामने रखा।
  • 2017.18 के वित्तीय वर्ष तक एयर इण्डिया के ऊपर 50000 करोड़ रूपये से ज्यादा का कर्ज हो गया था।
  • यह कर्ज अब लगभग 60000 करोड़ रूपये तक पहुँच गया है।
  • 2017 में सरकार ने अंतिम रूप से यह निर्णय लिया कि इसका निजीकरण किया जायेगा।
  • मई 2018 में सरकार ने इसका 76% शेयर बेचने का प्रस्ताव रखा।
  • यहाँ कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया। इसके पीछे 2019 का चुनाव उसके परिणाम की अनिश्चितता थी।
  • सरकार 2018 में 24% हिस्सेदारी बचाकर रखना चाहती थी, और बाद में कंपनी के शेयर मूल्य में वृद्धि होने पर उसे बेचना चाहती थी।
  • अब सरकार ने दूसरी बार यह बेचने का प्रस्ताव रखा है और 100% शेयर बेचना चाहती है।
  • सरकार ने आवेदन देने की अंतिम तारिख 17 मार्च 2020 रखा है।
  • यह एक प्रकार का स्ट्रेटजिक डिसइन्वेस्टमेंट हे।
  • आवेदन में किसको एयर इण्डिया पर अधिकार प्राप्त हुआ है, इसकी घोषणा मार्च के अंत में की जायेगी।
  • एयर को खरीदने वाले व्यक्ति या संस्था को एयर इण्डिया के 125 एयरक्राफ्ट प्राप्त होंगे तो इसी के साथ एयर इण्डिया एक्सप्रेस के 25 प्लेन्स प्राप्त होंगे।
  • यहाँ ध्यान देना है कि इन Planes के साथ 4 Baring 747-400 जम्बोजेट एयरक्राफ्ट नहीं होंगे।
  • बोइंग के साथ कुछ ऑफिस जैसे मुम्बई का Nariman Point Building नई दिल्ली का कनोट प्लेट के पास स्थित ऑफिस ट्रांसफर नहीं किये जोयेंगे।
  • आवेदन देने वाली कंपनी के लिए शर्त यह रखा गया है कि उसका Net Worth 3500 करोड़ रूपये होनी चाहिए। जो 2018 में 5000 करोड़ रूपये रखी गई थी।
  • विदेशी निवेश एयर लाइंस में 49% तक सीमित है इसलिए कोई बाहरी व्यक्ति इसका 100% मालिक नहीं बन सकता है। यह हो सकता है कि भारतीय खरीदार उसे अपना पार्टनर बना ले।
  • एक शर्त इसको चलाने के संदर्भ में रखी गई है। जो भी व्यक्ति इसे खरीदेगा उसे तीन साल तक चलाना होगा, इससे पहले बंद नही कर सकता है।
  • नाम परिवर्तन न करने की शर्त भी रखी गई है।
  • एयर इंण्डिया
  • एयर इंडिया भारत सरकार की फ्लैग कंपनी है।
  • स्थापना- 15 अक्टूबर 1935- As Tata Airlines के रूप में की गई।
  • 29 जूलाई, 1946 में भारत सरकार ने 49% हिस्सेदारी खरीद ली है।
  • 1953-1954 में सरकार ने हिस्सेदारी और बढ़ा लिया।
  • 1980 के दशक में एयर इण्डिया की परफार्मेंश बहुत अच्छी थी।
  • एयर इण्डिया की एक प्रकार की मोनोपोली थी।
  • 1991 के बाद एयरलाइन्स के क्षेत्र में कई कंपनियों ने कदम रखा।
  • इसके बाद एयरइण्डिया की हालत बिगड़ने लगी।
  • 1990 के अंतिम समय में इस चुनौती से निपटने के लिए Disinvestment Commission Of Indiaaa का गठन किया गया।
  • इसने सिफारिश की कि सरकार अपनी हिस्सेदारी कम कर 40% तक सीमित करे।
  • 1999-2004 के NDA एयरलाइन्स सत्ता में थी, इसने विनिकेश के कई प्रयास किये लेकिन नौकरशाहों के छल-कपट से यह पूर्ण नहीं हो पाया।
  • प्राइवेट एयरलाइन्स प्रमोटर की लॉबी की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
  • 2009 के बाद कुछ ऐसे निर्णय लिये गये जिससे एयर इण्डिया की स्थिति और खराब हो गई।
  1. अनेक एयरक्राफ्ट को शामिल कर, संख्या में वृद्धि की गई
  2. इण्डियन एयरलाइन्स को एयर इण्डिया के साथ विलय इण्डियन एयरलाइन्स की स्थिति एयर इण्डिया से भी खराब थी।
  • 2009 में सर्वप्रथम एयरइण्डिया को वित्तीय स्थिति की खराब स्थिति के विषय में उस समय के चेयरमेंन अरविंद जाधव स्पष्ट रूप से जानकारी दे।
  • सरकार ने कोर प्रोब्लम का समाधान न कर 30000 करोड़ रूपये का बेल आउट पैकेज दिया, जिससे स्थिति में कोई खास असन नहीं आया।
  • करना क्या चाहिए था?
  • प्रोफेशनल मैनेजमेंट एवं इफ्फेक्टिव लिडरशिप
  • फाइनेंशियल पैकेज के साथ- प्रतिदिन होने वाले राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति
  • वर्क कंडिशन एवं पे-पैकेज को अच्छा करना।
  • Against Disinvestment
  1. भावनात्मक लगाव, पिछला समय बहुत शानदार भी रहा है।
  2. अंगरक्षक की भूमिका भी- एयरलिफ्ट मूवी, इराक ने कुवैत पर जब हमला किया था तब 1 लाख 75 हजार लोगों को बचाया गया।
  3. एयर इण्डिया से जुड़े यूनियन का विरोध
  4. पुराने सफल चेयरमैन का मत कि एयर इंडिया इस परिस्थिति से बाहर आ सकती है।
  • सरकार को चाहिए आंकड़े स्पष्ट करें - विनिवेश से क्या होगा, रणनीति क्या होगी, यदि नहीं किया गया तो क्या होगा, अन्य विकल्प तलाश किये गये हैं कि नहीं, विनिवेश का तरीका क्या होगा आदि।

विरोध प्रदर्शन बनाम देशद्रोह ( IPC धारा 124-A) कानून

  • 28 जनवरी 2020 को दिल्ली पुलिस ने बिहार के जहानाबाद जिला से दिल्ली के शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का सह-समन्वयक एवं भड़काउ भाषण देने वाले शहजीत इमाम को देशद्रोह या IPC की धारा 124 A के तहत गिरफ्तार किया।
  • कौन है शहजीत इमाम ?
  • शहजीत इमाम बिहार के जहानाबाद जिले का रहने वाला है जिसने IIT पटई से पढ़ाई की है, तथा IIT बौम्बे में भी काम कर चुका है, फिलहाल वह JNU से Ph.D कर रहा है।
  • 16 जनवरी 2020 को CAA तथा NRC के विरोध में इसने जनता को भड़काने वाले तथा देश को बांटने वाला भाषण दिया था, जैसे दिल्ली इसने कहा था।

“अगर 5 लाख लोग हमाने पास संगठित हो तो हम हिन्दुस्तान को स्थाई रूप से अलग कर सकते हैं।“

  • इतना ही नहीं इस पर यह भी आरोप है कि दिल्ली में शाहीन बाग में चल रहे CAA तथा NRC के विरोध के धरने में यह सह-समन्वयकारी था, ध्यातव्य है कि इसमें देश विरोधी गतिविधियाँ चलने का भी आरोप है।
  • शहजीत इमाम को IPC की धारा 124 A के तहत गिरफ्तार किया गया है। हम जानते हैं कि प्च्ब् की धारा 124 । (देशद्रोह) पहले से ही विवादित रहा है, ऐसे में 124 । की पृष्टभूमि तथा इससे सम्बन्धित विवाद या मत को जान लेना जरूरी है।

IPC की धारा 124 A या देशद्रोह की पृष्टभूमि-

  • 124 A को पहली बार 1860-61 में लाया गया था, दरअसल ब्रिटिश सरकार स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से इसे बनाया था, हम जानते हैं कि इसका प्रयोग स्वतंत्रता सेनानी जैसे जोगेन्द्र चंद्र बोस बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी के विरूद्ध अंग्रेजों ने कई बार किया था।

क्या कहता है 124 A ?

  • सरल शब्दों में बोलकर लिखकर या अन्य माध्यम से सरकार के विरूद्ध लोगों को भड़काना या देश के विभाजनकारी मत को प्रचाटित करना 124 A के तहत गम्भीर अपराध है जिसके तहत जुर्माना या 3 साल की सजा अथवा उम्रकैद की सजा हो सकती है।
  • यद्यपि समय समय पर सरकार द्वारा इसके प्रयोग पर समीक्षकों द्वारा सवाल उठाए गये जिसके संदर्भ में निम्न तर्क दिये जाते हैं।
  • यह ब्रिटिश काल का कानून है, और इसे स्वतंत्रता सेनानी को रोकने के लिए लाया गया था ऐसे में अब आजाद हिन्दुस्तान के नागरिकों पर प्रयोग वाक् एवं अभिव्यक्ति की आजादी (ACT-19) का उलंघन है।
  • पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी इस की आलोचना करते हुए इसके उन्मूलन की बात कही थी।
  • आज से 10 वर्ष पहले ही इस कानून के जनक ब्रिटेन ने अपने यहाँ इसको समाप्त कर दिया है।
  • सरकार के नीतियों की आलोचना करना देश द्रोह नहीं माना जायेगा जैसा की मेनका गांधी केस 1978 में SC ने भी कहा था।
  • गृह मंत्रालय के आँकड़े दर्शाते हैं कि 2014 से 2016 के बीच 179 लोगों को इसके तहत गिरफ्तार किया गया है किन्तु मात्र 2 लोग ही दोषी पाये गये।
  • इसका प्रयोग सरकार अपनी सुविधा अनुसार भी कर सकती है, जैसे तमिलनाडु के कुंडमकुलम में एक गांव पर इसका इस्तेमाल किया गया क्योंकि वे लोग वहाँ परमाणु संयंत्र लगाने का विरोध कर रहे थे।

कानून के पक्ष में तर्क

  • आज कई राज्यों में उग्रवादी समूह हिंसक तरीके से अलगाववादी राजनीति करते हैं ऐसे में इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
  • समीक्षक के एक वर्ग का यह भी मानना है कि यदि न्यायपालिका की अवमानना करने पर दण्ड दिया जाता है, तो फिर सरकार की अवमानना करने पर क्यों न किया जाये।

124 A से जुड़े उच्चतम न्यायालय के निर्णय

  • केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य (1962)
  • इसमें SC ने कहा था कि आलोचना करना राजद्रोह नहीं है, किन्तु यह धारा आप्रासंगिक नहीं है।

रमेश थापर बनाम भारत संघ-

  • इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार किसी पुस्तक पर इस आधार पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती कि उससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। 1982 के पी- अलावी VIS केरल राज्य तथा 1995 के बलवंत सिंह एवं AVR बनाम पंजाब राज्य.
  • बाद में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार की आलोचना करना राजद्रोह नहीं है।

124 A के बारे में विधि आयोग

  • पिछले 50 वर्षो में विधि आयोग ने तीन बार इस पर अपना मत दिया-
  1. पहली बार 1968 में कहा था कि इसे अभी नहीं हटाना चाहिए।
  2. दूसरी बार 1971 में कहा था कि इसे और व्यापक करके संविधान में जोड़ दिया जाये साथ ही, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा विधायिका तक इसे विस्तृत कर दिया जाये।
  3. तीसरी बार 2018 में कहा कि इस पर पुनः विचार करके इसे निरस्त किया जाये।
  • जैसा कि हम जानते हैं कि पिछले दिनों मोंब लिचिंग को लेकर 49 प्रबुद्ध भारतीयों (रामचंद्र गुह) इतिहासकार समेंत कई लोगों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, किन्तु लोगों द्वारा यह आरोप लगाया गया कि इससे धार्मिक भावना आहत होती है जिससे इनपर 124 A लगा दिया गया। हालांकि बाद में दरबार के चलते केस वापस ले लिया गयां अरूंधति राय, प्रवीण तोगड़िया, कन्हैया कुमार समेंत कई लोगों के विरूद्ध इसका प्रयोग किया जा चुका है।

आगे की राह

  • कम्यूनिटी एवं सिविल सोसायटी को मिलाकर इस कानून के बारे में जागरूकता फैलाना चाहिए।
  • देशद्रोह की परिभाषा की परिधि को सीमित किया जाये जिसमें केवल क्षेत्रीय अखण्डता एवं देश की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हों।