Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 25 January 2020


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Democracy Index 2019

  • लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने वाले 60 इंडिकेटर्स जो 5 कैटेगरी में बटे होते हैं उनके आधार पर इस इंडेक्स को तैयार किया जाता है।
  • इस इंडेक्स को UK Based एक कंपनी The Economist Intelligence Unit द्वारा तैयार किया जाता है।
  • इस इंडेक्स को सर्वप्रथम 2006 में जारी किया गया था।
  • यह इंडेक्स पिछले वर्ष की स्थिति को बताता है। इसीलिए 2020 में आई रिपोर्ट 2019 के नाम से प्रकाशित हुई है।
  • इस बार के इंडेक्स में 165 स्वतंत्र राज्य तथा दो टेरिटरिज को शामिल किया गया है।
  • आधार के रूप में 5 आधार बनाया गया है। यह है-
  • Political Culture
  • Political Participation
  • Civil Liberties
  • Electro Proclus And Pluralism
  • Functioning Of Government.
  • वर्ष 2018 के इंडेक्स में भारत का स्थान 41वाँ था और स्कोर 7.23 था।
  • नई 2019 के इंडेक्स भारत 10 स्थान नीचे गया है और स्कोर कम होकर 6.90 हो गया है।
  • वर्ष 2006 से जारी किये जा रहे इंडेक्स में यह भारत का सबसे न्यूनतम रैंक है।
  • यदि हम 2006 से भारत की स्थिति देखें तो पता चलेगा कि 2006 में भारत का स्कोर 7.68 था जो 2014 में बढ़कर सर्वाधिक 7.92 पर पहुँच गया था।
  • 2015 से क्रमशः भारत का स्कोर 7.74, 7.81, 7.23, 7.23, 6.9 है।
  • जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में किये गये बदलाव को इसके कारण के रूप में बताया गया है।
  • NRC एवं इससे उत्तपन्न मुद्दे को एक अन्य प्रमुख कारण के रूप मे माना गया है।
  • CAA को खराब रैंकिंग के कारण के रूप में नहीं माना गया है।
  • नार्वे के बाद क्रमशः आइसलैण्ड, स्वीडन, न्यूजीलैण्ड, फिनलैण्ड, आइसलैण्ड, डेनमार्क का स्थान है।
  • सबसे खराब स्थिति उत्तरी कोरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और सीरिया (नीचे से चौथा) की है।
  • पाकिस्तान पिछले इंडेक्स से सुधार करते हुए 112 वें से 108 वें स्थान पर आ गया है।

यह (संबन्ध) अभी तक हाउडी मोदी नहीं है

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यालय में शारशरात्रों के बीच 3 वर्ष पूरे कर लिए हैं, इसी सप्ताह में उनपर महाभियोग की प्रक्रिया भी चलाई गयी थी, यदि ट्रम्प फिर से अमेंरिकी चुनाव जीतते हैं, तो 2024 तक उनकी पीएम मोदी के साथ 6 साल पूरे हो जायेंगे। ये दोनों नेता दोनों देशों के बीच सम्बन्ध मजबूत कर रहे हैं, इसी सिलसिले में ट्रम्प अगले महीने भारत की यात्रा पर आ रहे हैं।
  • दोनों नेता इस बात को दोहराते रहे हैं कि पूर्ववर्ती शासक राष्ट्रहित को संरक्षित करने में असक्षम रहे हैं, इसलिए राष्ट्रहित को पुनः प्राप्त करने के लिए दोनों प्रतिबद्ध हैं, जैसे कि ह्यूस्टन में मोदी तथा हाल ही में दाबोस में ट्रम्प ने पूर्ववर्ती शासकों को एक प्रभावी अभिभावक जरूर बताया।
  • दोनों नेताओं का अपनी सांस्कृतिक एवं आर्थिक एजेंडा है और ऐसा मानना है कि, पूर्ववर्ती शासकों द्वारा एक कच्चा सौदा किया गया था जो उनके वैश्विक समकक्षों एवं कुलीन वर्गों द्वारा विनियमित था, दोनों मानते हैं कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अच्छे लोंगों के लिए एक बल की तरह काम करते हैं, इनका यह भी मानना है, कि इस्लामवाद राष्ट्र के लिए चुनौति है, क्योंकि इस्लाम का वैश्विक दृष्टिकोण सीमाओं देश के भीतर भी इन्हें सहयोग प्रदान करता है।
  • दोनों नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय सीमा की कड़ाई से निगरानी होनी चाहिए, इतना ही नहीं दोनों में यह भी समानता है कि दोनों नौकरी देने हेतु प्रतिबद्ध भी है जैसा कि ट्रम्प के ट्वीट में जोब्स, जोब्स, जोब्स जैसा ट्वीट दिखता भी है।
  • दोनों शासक संघ तथा राज्यों, राज्यों तथा नागरिको के बीच सहयेाग एवं अनुबंध बनाने की बात करते हैं तथा विधायिका और न्यायपालिका पर कार्यपालिका के सर्वोच्चता का दावा करते हैं, दोनों का मीडिया पर भी गम्भीर आलोचनात्मक दृष्टिकोण है।
  • USA को फिर से बनाने की परियोजना से ट्रम्प अभी बहुत दूरा नहीं आये हैं, जैसे अभी हाल ही में अमेंरिकी उच्चतम न्यायालय ने ट्रम्प को जनगणना संबंधी के मामले पर रेाक दिया, ऐसे ही मोदी भी संसद या न्यायपालिका के किसी अर्थपूर्ण मामले को विफल कर सकते हैं, किन्तु हमें यह समझना चाहिए कि दुनिया का कोई भी राष्ट्र अपने वास्तविक स्थान का दावा तब तक नहीं कर सकता जब तक वह अपने पूर्ववर्ती शासकों की सत्ता स्वीकार न करे। हालांकि भारत USA के साझा मूल्यों के दोनों नेता एक नई ऊँचाईयों पर पहुँचा रहे हैं।
  • भारत अमेंरिका के मजबूत संबंधों के पक्षधर विशेषज्ञों का ऐसा मानना था कि, इनकी राष्ट्रवादी राजनीति का आपसी द्विपक्षीय संबंधो पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, किन्तु दोनों नेता अपनी नीतियों एवं शासन में उल्लेखनीय रूप से सफल है, जैसे ट्रम्प ने कॉर्पोरेट तथा सुरक्षा की स्थापना की समस्या का काफी समाधान किया एवं दुनिया के सामने अमेरिकी दृष्टिकोण रखा तथा उसमें बदलाव भी किया। ऐसे ही श्री मोदी ने भी राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सैन्य सुरक्षा की स्थापना का पूर्ण समर्थन किया।
  • साझा मूलों के बावजूद दोनों नेताओं के द्वारा राष्ट्रीय उपेक्षा भी दिखी है, जिससे कभी -कभी संबंधों में गिरावट भी आयी है, जैसे कि ट्रम्प ने पेरिस जलवायु समझौता तथा WTO जैसे वैश्विक संस्थाओं तथा नियम आधारित व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए संधियां की।
  • श्री मोदी के द्वारा भी UNSC तथा NSG की सदस्यता हेतु निरंतर प्रयास जारी है, और कई द्विपक्षीय निवेश संधियों को भी रद्द किया है, इतना ही नहीं वैश्विक आदेशों को चुनौति देने का भी दृष्टिकोण श्री मोदी रखते हैं, जैसा कि उनकी परमाणु संबंधित महत्वाकांक्षा में भी देखा जा सकता है।
  • ट्रम्प एवं मोदी दोनों क्रमशः अमेंरिका तथा भारत के पड़ोसी के साथ भी प्रभावी नीतियों पर बल देते हैं, जैसे उत्तरी अमेंरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करके USA ने मैक्सिको एंव कनाडा को अपनी मांगों को मानने के लिए मजबूर किया, ऐसे ही भारत ने भी अपने पड़ोसियों के कमजोर नस को छुआ है। जो कि दबंग भारत समझकर वे हमेशा भारत से सावधान रहते थे, हालांकि बांग्लादेश के साथ सम्बंधों में कुछ सुस्ती आयी है, इन सबके बावजूद वैश्विक व्यवस्था को फिर से बनाने में भारत USA से अमेंरिकी समर्थन की उम्मीद नहीं कर सकता
  • भारत अमेंरिका सम्बन्ध, चीन पाकिस्तान का अमेंरिका के साथ संबंधों से प्रभावित है जिसमें दोनों के खिलाफ ट्रम्प के दृष्टिकोण ने भारत में यह उम्मीद जगाई थी कि भारत एवं अमेंरिका में रणनीतिक एकरूपता है जैसे कि ट्रम्प के साथ मोदी ने ह्यूस्टन में 9/11 (USA) तथा 26/11 मुंबई हमले पर दर्शकों से सवाल पूछे थे किन्तु, सांस्कृतिक एकरूपता इस बात की गारण्टी नहीं है कि राजनीतिक एकरूपता भी रहेगी।
  • पश्चिम एशिया में ट्रम्प की आक्रामकता भारत के हित में नहीं है, तथा दोनों देश गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, किन्तु अफगानिस्तान में चुनाव से पहले वहां से सेना वापस बुलाने की ट्रम्प की अधीरता उसे पाकिस्तान के पास लेकर गयी है।
  • USA इस क्षेत्र से पीछे हटना चाहता है तथा एशिया के साथ सम्बन्धों में हित तलाशता है जैसे द- कोरिया जापान जैसे देशों को नए व्यापार सौदों के लिए मजबूर किया है तथा चीन के विस्तार को किसी भी कीमत पर सीमित करना चाहता है।
  • भारत केा चीन को प्रतिसंतुलित करने में सहयोग के रूप में देखने के बजाय USA भारत एवं चीन दोनों को एक अनुचित लाभ प्राप्तकर्ता के रूप में देखता है, जैसा की ट्रम्प ने दोनों देशों पर एक ही ट्वीट में व्यापार को बढ़ाने, बौद्विक संपदा अधिकार का उल्लंघन करने, तथा अमेरिकी नौकरियों को छीनने का आरोप लगाया, इसके अलावा H-1B बीजा पर प्रतिबंध तथा भारत से SGP जैसे व्यवस्था को वापस लिया।
  • USA से हाइड्रोकार्बन आयात कर भारत द्वारा व्यापार अधिशेष को कम करने की कोशिश कर रहा है, हालांकि इस संबंध में डेमोक्रेटिक पक्ष के लोग चिंतित हैं।
  • अतः एक मजबूत अर्थव्यवस्था ने ट्रम्प को धु्रवीकरण का मौका दिया किन्तु आर्थिक सुस्ती के दौर में मोदी को दरोहरी मार झेलनी पड़ी, भारत के लिए अमेरिकी सहयोग जरूरी है ऐसे में अगले महीने में ट्रम्प की भारत यात्रा संबंधी को नया आयाम दे सकती है।