Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 22 January 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 22 January 2020



World Economic Outlook Update

  • अक्टूबर 2019 में आई World Economic Outlook में वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में यह कहा गया था कि यह लगातार ैसवूकवूद की ओर बढ़ रही है।
  • इसमें यह भी संभावना व्यक्त की गई थी कि यह स्लोडाॅउन और भी नीचे जा सकती है।
  • लेकिन इस अपडेट में यह कहा गया कि इधर के समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुछ आंशिक सुधार आये हैं।
  • कारण के रूप में कहा गया है कि US और चीन के बीच पहली ट्रेड डील हो चुकी है और ब्रेक्जिट की निश्चित प्रक्रिया का भी पालन किया जायेगा।
  • इसमें 2019 की वैश्विक GDP संवृद्धि दर 2.9% रहने का अनुमान किया गया है।
  • 2020 में इसके 3.3% और 2021 में 3.4% रहने की संभावना है।
  • अक्टूबर माह में आई रिपोर्ट में 2019 के लिए 2.9% रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था जबकि 2020 एवं 2021 के लिए क्रमशः 3.4% एवं 3.6% अनुमानित की गई थी।
  • विश्व की गति में कमी के कारण के रूप में एक कारण भारत को माना गया।
  • अर्थात भारत में आया Slowdown वैश्विक Slowdown का करण बन रहा है।
  • अक्टूबर माह में आई मुख्य रिपोर्ट में भारत की संवृद्धि दर 6.1% अनुमानित थी, जिसे अब घटाकर 4.8% कर दिया गया है।
  • भारत के अलावा ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब और मैक्सिको जैसी इमर्जिंग इकॉनमी वाले देशों की वृद्धि दर भी कम की गई है।
  • इस रिपोर्ट में इस बात की चर्चा की गई है कि आने वाले समय में वैश्विक वृद्धि दर Emerging Economy की वृद्धि दर पर निर्भर करेगा।
  • Advance Economy Stabilizes हो चुकी है।
  • आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था कुछ ओर कारकों पर निर्भर करेगी।
  1. भूराजनीतिक तनाव- जो इस समय चीन, ईरान के साथ USA का दिखाई दे रहा है।
  2. सोशल अनरेस्ट कई देशों में बढ़ रहा है।
  3. बवर्नेंस में भागीदारी लोगों की कम हो रही है।
  4. लोगों का संस्थाओं पर भरोशा कम हो रहा है।
  • आने वाले समय में आसियान और चीन की वृद्धि दर कम होने की संभावना है।
देश 2018 2019 2020 2021
भारत 6.8 4.8 5.8 6.5
चीन 6.6 6.1 6.0 5.8
आसियान 5.2 4.7 4.8 5.1
  • भार की GDP वृद्धि दर कम होने के पीछे दो कारण Local Demand का कम होना और NBFC को बताया जा रहा है।

IMF- International Monetary Fund

  • स्थापना - 27 दिसंबर 1945
  • मुख्यालय - वाशिंगटन D.C.
  • सदस्य - 189
  • उद्देश्य - अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग बढ़ाना, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रेरित करना, तीव्र ओर समावेशी विकास को बढ़ाना

मुक्त समाज में धरने का अधिकार

  • सरकार द्वारा नागरिकता (संसोधन) अधिनियम पर पुनर्विचार करने के लिए हम भारत के अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन देख रहे हैं, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतरे, यह एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक समाज की पहचान है।
  • ये विरोध से एक अर्थ तो यह निकलता है कि लोगों से विचार विमर्श करने के बाद कोई कानून बनाया जाये।
  • विरोध प्रदर्शन पर मनमाना नियंत्रण जैसे धारा 144 लगाना आदि सरकार की अक्षमता को दर्शाती है, विरोध प्रदर्शन पर एक सीमा के बाद नियंत्रण विरोधाभाष है, कि जिसके नाम पर सरकार शासन करती है, उन पर नियंत्रण लगाती है।
  • हमे अदालतों के प्रति आभार प्रकट करना चाहिए कि विरोध करने का अधिकार मौलिक अधिकार है, जबकि संविधान का एक सामान्य छात्र इस बात का परीक्षण कर सकता है, कि इसमें से विरोध शहद गायब है।
  • वह प्रासंगिक अनुच्छेदों विशेष रूप से अनुच्छेद 19 को पूरी तरह से गैर राजनीतिक रूप से पढ़ सकता है।
  • उदाहरण के रूप में देखें तो, वाक एवं अभिव्यक्ति का मतलब यह निकाला जाये कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करने, फिल्म करने या अपने शहर की स्थिति को व्यक्त करने का अधिकार है।
  • संबन्ध का अधिकार (Right to Associate)या गठन करने का अधिकार का अर्थ है, स्व.विनियमित क्लबों, पेशेवर संघों के गठन का अधिकार है।
  • वही शांतिपूर्ण धरने के अधिकार में पार्क में, पिकनिक में, धामिक उत्सवों में शामिल होने का अधिकार निहित है।
  • इन अधिकारों की गारंटी अधिनायकवादी सरकारों में नहीं होती किन्तु लोकतंत्र में इसकी निसक्रियता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह संकीर्ण व्यवस्था है।
  • वे हमारी राजनीतिक स्वतंत्रता का गठन करते हैं जो सरकार के आचरण पर वाक एवं अभिव्यक्ति की आजादी स्वतंत्र रूप से राय रखने की आजादी में बदल जाते हैं।
  • सामूहिक रूप से सरकार के फैसले को चुनौती देना यहाँ तक की सरकार द्वारा शक्तियों के दुरोपयोग की जांच की मांग करना आदि, हमारी बहुदलीय व्यवस्था का आधार है क्योंकि हमारे यहाँ विपक्षी भी मूल्यवान विरोधी होता है, जो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करता है।
  • विश्वविद्यालय आदि में धरने के अधिकार आदि का संक्षेप में 2 रूपों से व्यस्थापित किया जा सकता है, पहला इसका उपयोग लोगों द्वारा निजी स्वार्थों के लिए किया जाता है, जिसे गैर राजनीतिक क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है, तथा दूसरा सत्ता पाने के लिए अतः यह एक लोकतांत्रिक मौलिक अधिकार है।
  • किसी भी देश का संविधान केवल एक पत्र है, बल्कि एक ऐतिहासिक रूप से अनुभवों का संग्रह है जो कि हमारे संविधान में इतिहास प्रवाहित होती दिख रही है।
  • भारतीय संविधान निर्विवाद रूप से उपनिवेश विरोधी संघर्ष के मूल्यों से बनी है, जिसके भीतर एक सार्वजनिक, लोकतांत्रिक तथा राजनैतिक संविधान के बीज बोये गये हैं।
  • भारतीयों को औपनिवेशिक सरकार के विरूद्ध अपनी राय रखने के लिए, असहमति व्यक्त करने के लिए आदि अधिकार को पाने के लिए एक लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी है।
  • लोगों ने रिट याचिका के प्रयोग के साथ.साथ धरना प्रदर्शन आदि किया, यहाँ तक की गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन किया इनके को भी शब्द संविधान में अक्षरत नहीं है, पर मूल्य है, इसीलिए प्रस्तावना में भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य कहा गया है।
  • इन अधिकारों (अभिव्यक्ति, धरना etc.) के लिए हम प्रहरी के रूप में काम करते हैं। और इस पर निगरानी रखते हैं, यहाँ तक सरकार भी गलती पर परामर्श कर सकती है।
  • एक चुनी हुयी सरकार भी इन अधिकारों के प्रति संवेदनहीन हो सकती है ऐसे में इन अधिकारों की प्रासंगिकता यही है कि इनके माध्यम से दबाव बनाया जा सकता है।
  • ध्यातव्य है कि मद्रास राज्य का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक तेलुगुभाषी राज्य की मांग हेतु श्रीरामालू ने स्वयं को कालकवलित कर दिया था ऐसे ही चिपको आंदोलन भी हुआ था जिसके कर्ताधर्ता गौरादेवी चंडी प्रसाद भट्ट आदि थे। हाल ही में अशिक्षित लोगों का एक विरोध UP में लकड़हारा को ठेका देसे से संबंधित भी देखा गया जो महत्वपूर्ण है।
  • आखिर अशिक्षित व्यक्ति भी शांतिपूर्ण मार्च कर सकता है यह तो कुछ भी नहीं है अब्राहम लिंकन ने क्रान्ति के लिए लोगों को इकट्ठा होने को संवैधानिक अधिकार कहा था।
  • राजनीतिक अधिकार के रूप में स्वतंत्र रूप से नागरिाकों को अपनी सरकार को चुनने का अधिकार, तथा असंतुष्ट सरकार को वैध तरीके से सत्ता से बाहर करने का अधिकार (Art-326) एक संवैधानिक प्रक्रिया है, दरअसल सत्ता का शांतिपूर्ण ढंग से हस्तांतरण लोकतंत्र की महान शक्ति है, ऐसे सरकारी निर्णयों को चुनौती देने का संवैधानिक रूप से वैध होना चाहिए।
  • अनुच्छेद 19 के अनुसार सरकार को जवाब देह बनाने के लिए विरोध करने का अधिकार मौलिक अधिकार है।
  • ये अधिकार सरकार के ऐसे निर्णय पर जवाबदेही सुनिश्चित करती है जिसे गुपचुप तरीके से मध्य रात्री में लिया जाता है।
  • क्या ऐसी सरकार जिसने सबका साथ सबका विकास का वादा किया था क्या वह आलोचकों की सुनकर अपनी वैधता सुनिश्चित करेगी या विरोधियों को देश द्रोही करार देगी।