Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 July 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 July 2020



रीवा सोलर पार्क

  • विश्व के सामने जो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं उसमें जलवायु परिवर्तन सबसे प्रमुख है ! यह हमारे द्वारा भूतकाल में किए गए कार्यों की हकीकत है !
  • जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख संबंध ग्लोबल वार्मिंग से है ! और ग्लोबल वार्मिंग का संबंध ग्रीन हाउस गैसों से है !
  • ग्रीन हाउस गैसें जब अधिक मात्रा में वायुमंडल पहुंचती है तो ग्लोबल वार्मिंग की तीव्रता बढ़ती है !
  • ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में लगभग एक चौथाई योगदान जीवाश्म ईंधन द्वारा ऊर्जा उत्पादन में निकलने वाले ग्रीन हाउस गैसों का है ! इसी कारण वैश्विक समुदाय इसके लिए कोयला के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों के प्रतिशत को बढ़ाकर GHGs की मात्रा को कम करने का प्रयास कर रहा है !
  • भारत भी अपनी वैश्विक जिम्मेदारी के प्रति सजग है इसलिए भारत आजादी के 75 वें साल अर्थात वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा (Solar Energy ) के माध्यम से करना चाहता है !
  • भारत 31 मार्च 2020 तक लगभग 23.5% ऊर्जा का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतो से कर रहा है ! जबकि कोयला से सर्वाधिक लगभग 55.4% ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है !
  • यदि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट ( 12.3%) को भी जोड़ दिया जाए तो यह प्रतिशत 35.8% हो जाता है !
  • अभी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में सर्वाधिक योगदान पवन ऊर्जा ( 37693.75 MW) का है जिसे 2022 तक 60000 मेगावाट किया जाना है !वही सोलर ऊर्जा का योगदान 34627.82 मेगावाट है जिसे 2022 तक 100000 मेगावाट करने का लक्ष्य है ! · इसी लक्ष्य को प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण भाग सोलर पार्क माने जाते हैं !
  • सोलर पार्क ऐसे स्थान होते हैं जहां बड़ी संख्या में सोलर पैनल लगाए जाते हैं !
  • हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रीवा ( मध्य प्रदेश) में एक सोलर पार्क को राष्ट्र को समर्पित किया !
  • 750 मेगावाट की इस परियोजना का लोकार्पण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया गया !
  • इसका निर्माण वर्ष 2017 में प्रारंभ हुआ था , जिस पर लगभग 4500 करोड रुपए का खर्च आया !
  • इसका निर्माण रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) द्वारा किया गया है !
  • RUMSL- सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की संयुक्त कंपनी है जिसमें दोनों के पास 50-50% हिस्सेदारी है !
  • 1500 हेक्टेयर में विस्तृत इस सोलर पार्क को 250- 250 मेगावाट के तीन भागों में विभाजित किया गया है !
  • इस सौर ऊर्जा से प्रतिवर्ष 15 लाख टन CO 2 का उत्सर्जन कम होगा !
  • इसीलिए इसे श्योर, प्योर और सिक्योर के रूप में उद्घोषित किया गया !
  • श्योर इसलिए क्योंकि सूर्य से ऊर्जा हमेशा प्राप्त होगी ! प्योर इसलिए क्योंकि इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा ! सिक्योर इसलिए क्योंकि बिजली की आवश्यकता की पूर्ति हमेशा हो सकेगी !
  • यह देश का पहला प्रोजेक्ट है जिसे World Bank (WB) की तरफ से Clean Technology Fund- CTF प्राप्त हुआ है !
  • यह World Bank द्वारा विकासशील देशों के पर्यावरण परियोजनाओं के लिए दिया जाने वाला फंड है !
  • वर्ष 2017 की शुरुआत में उस समय की मौजूदा परियोजना की लागत लगभग 4.50 रुपए प्रति यूनिट की तुलना में अगले 15 वर्ष तक 2.97 रुपए प्रति यूनिट और 25 साल की अवधि के लिए 3.30 रुपए प्रति यूनिट की दर का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा !
  • इस पार्क से उत्पादित ऊर्जा का 24% का प्रयोग दिल्ली मेट्रो द्वारा तथा 76% का प्रयोग मध्यप्रदेश के डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा किया जाएगा !
  • इसे World Bank Group President Award For Innovation and Excellence मिला है !
  • इसे Prime Minister's 'A Book Of Innovation: New Beginnings में शामिल किया गया है !

हांगकांग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का बढ़ता वैश्विक विरोध

  • हांगकांग एक देश दो सिस्टम व्यवस्था के तहत शासित होता है !
  • हांगकांग की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था मूल चीन से अलग है ! इसका अपना संविधान, झंडा, वीजा नियम, आर्थिक प्रणाली है लेकिन विदेशी मामलों पर चीन का अधिकार है !
  • हांगकांग में जहां लंबे समय से बड़ी आबादी चीन हस्तक्षेप का विरोध करती आई है वहीं चीन उस पर नियंत्रण बढ़ाता जा रहा है जिससे चीन के प्रति यहां आंदोलन एवं संघर्ष एक सामान्य बात बन चुकी है !
  • हाल ही में चीन समर्थित हांगकांग की सरकार ने एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू किया ! इसमें चीन के झंडे एवं राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करना गैरकानूनी बताया गया है तो साथ ही चीन के खिलाफ किसी साजिश को सजा श्रेणी में रखा गया है !
  • यह कानून हांगकांग में चीन के खिलाफ होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने की शक्ति बीजिंग को देता है !
  • इसके बहुत से प्रावधान मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाले हैं !
  • इस कानून को हांगकांग के लोगों की सहमति के बिना लागू किया गया है अर्थात यह हांगकांग विधानसभा की स्वतंत्रता का हनन करता है !
  • ऑस्ट्रेलिया ने इस कानून के खिलाफ हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधि को निलंबित कर दिया है !
  • प्रत्यर्पण किसी देश द्वारा अपनाई जाने वाली वह औपचारिक प्रक्रिया है जो किसी व्यक्ति को किसी दूसरे देश में अभियोजन के लिए आत्मसमर्पण करने या अपराध करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने की अनुमति प्रदान करता है !
  • प्रत्यर्पण संधि अलावा ऑस्ट्रेलिया ने 2 से 5 वर्ष के लिए वीजा विस्तार तथा स्थाई निवास वीजा के मार्ग की भी घोषणा की है !
  • इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने तियानमेन स्क्वायर की घटना के समय 27000 से अधिक चीनी छात्रों को अपने यहां स्थाई रूप से रहने की अनुमति दी थी !
  • चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है और ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी दी है !
  • चीन ने कहा है कि द्विपक्षीय आर्थिक समझौते प्रभावित कर सकते हैं और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और मुद्रा पर गंभीर परिणाम पड़ सकता है !
  • ऑस्ट्रेलिया के बाद कनाडा भी हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधि वापस लेने पर विचार कर रहा है !
  • ब्रिटेन भी ‘ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज पासपोर्ट’ के लिए मात्र तीन मिलियन हांगकांग वासियों के लिए रेसीडेंसी अधिकारों का विस्तार कर रहा है ! इसके तहत नागरिकों को 5 वर्ष तक यू. के. में रहने और काम करने की अनुमति मिलती है !
  • भारत ने ऐसा कोई कठोर कदम नहीं उठाया है लेकिन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि यहां भारतीय मूल लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है !
  • अमेरिका हांगकांग में चीन द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेप का बहुत पहले से विरोध कर रहा है और वह हांगकांग मानवाधिकार विधेयक को भी अनुमति दे चुका है !
  • इस समय डोनाल्ड ट्रंप पर डेमोक्रेटिक पार्टी का भी दबाव बढ़ा है कि वह हांगकांग में मानवाधिकार की रक्षा नहीं कर पा रहे !

एनकाउंटर संबंधी प्रावधान

  • एनकाउंटर शब्द का प्रयोग भारतीय संविधान में कहीं भी नहीं किया गया है !
  • पुलिस भाषा में इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब सुरक्षा बल/पुलिस की किसी चरमपंथी/ उग्रवादी/अपराधी से भिड़ंत होने से चरमपंथी अपराधी की मौत हो जाए !
  • भारतीय कानून में कहीं भी एनकाउंटर की प्रक्रिया न तो लिखित और न ही इसे वैध ठहराने के प्रावधान है, लेकिन कुछ ऐसा कानून जरूर है जिसमें पुलिस को यह ताकत दी गई है कि वह आत्मरक्षा में कदम उठा सकती है !
  • सीआरपीसी की धारा 46 कहती है कि यदि कोई अपराधी खुद को गिरफ्तार होने से बचाने की कोशिश करता है या पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है तो इन हालातों में पुलिस उस अपराधी पर जवाबी हमला कर सकती है !
  • एनकाउंटर के दौरान हुई हत्याओं को एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग कहा जाता है !
  • कल एक कुख्यात अपराधी विकास दुबे का एनकाउंटर पुलिस द्वारा किया गया जिसके बाद एनकाउंटर संबंधी प्रावधान पुनः चर्चा में आ गए !
  • सोशल मीडिया के साथ अनेक प्लेटफार्म पर एनकाउंटर को लेकर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं !
  • 9 जुलाई को मुंबई के वकील घनश्याम उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस विकास दुबे का एनकाउंटर कर सकती है इसलिए उसे सुरक्षा दी जानी चाहिए !
  • एनकाउंटर के संबंध में पुलिस मैनुअल यह कहता है कि सामने से गोली चले बिना पुलिस फायरिंग नहीं कर सकती है ! अर्थात जब-तक सामने से गोली नहीं चलती है, पुलिस पर हमला नहीं किया जाता है तब तक पुलिस गोली नहीं चला सकती है !
  • यहां ध्यान देना आवश्यक है कि गोली चलाकर घायल करना और गोली चलाकर मार देना दोनों अलग अलग बात है !
  • एक पुलिस अधिकारी के अनुसार अगर पुलिस की गोली किसी की जान लेती है, तो यह केवल उसी हालत में मुमकिन है जब पुलिस को लग रहा हो कि गोली नहीं चलाई तो पुलिसकर्मियों की जान जा सकती है !
  • पल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने 1999 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें 1995-97 में मुंबई पुलिस द्वारा किए गए 99 ( कुल 135) मुठभेड़ो पर सवाल उठाए गए थे !
  • वर्ष 2014 में जस्टिस R.M. लोढ़ा और जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने 16 बिंदुओं का दिशानिर्देश जारी किया !
  1. पुलिस को अगर किसी तरह की आपराधिक गतिविधि की सूचना मिलती है तो उसे लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में दर्ज करना होगा !
  2. सूचना मिलने के बाद यदि एनकाउंटर में किसी की जान चली जाती है तो धारा 157 के तहत केस दर्ज होना चाहिए और कोर्ट को तुरंत सूचित करना चाहिए !
  3. एनकाउंटर की जांच CID या दूसरे पुलिस स्टेशन से करवाना जरूरी है ! जांच की निगरानी एनकाउंटर में शामिल सबसे बड़े अधिकारी से एक रैंक ऊपर के अधिकारी द्वारा की जाएगी !
  4. धारा 176 के तहत पुलिस फायरिंग से होने वाली हर मौत की मजिस्ट्रियल जांच होगी !
  5. जब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर संदेह न हो, तब तक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इन मामलों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि घटना की सूचना परिस्थिति अनुसार, एनएचआरसी या राज्य मानवाधिकार आयोग को बिना किसी देरी दे दी जानी चाहिए.
  6. घायल अपराधी/पीड़ित को मेडिकल हेल्प दी जाए. मजिस्ट्रेट या मेडिकल ऑफिसर के सामने उसका बयान दर्ज करवाया जाना चाहिए.
  7. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि FIR और पुलिस डायरी कोर्ट को बिना देरी के उपलब्ध कराई जाए.
  8. जांच के बाद रिपोर्ट सीआरपीसी की धारा 173 के तहत कोर्ट के पास भेजी जानी चाहिए. जांच अधिकारी की ओर से पेश आरोप पत्र के मुताबिक मुकदमे का निपटारा जल्दी किया जाना चाहिए.
  9. मौत की स्थिति में, कथित अपराधी/पीड़ित के परिजन को जितनी जल्दी हो सके, जानकारी दी जानी चाहिए.
  10. पुलिस फायरिंग में मौतों की स्थिति में सभी मामलों का छमाही ब्योरा पुलिस महानिदेशक की ओर से एनएचआरसी को भेजा जाना चाहिए.
  11. जांच में पुलिस की गलती पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ एक्शन लिया जाए.
  12. पुलिस मुठभेड़ में मारे गये व्यक्ति के आश्रितों को मुआवजा देने के लिए आईपीसी की धारा 357-ए पर अमल किया जाना चाहिए.
  13. संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत संबंधित अधिकारी को जांच के लिए अपने हथियार जांच एजेंसी के पास सरेंडर करने होंगे.
  14. पुलिस अधिकारी के परिवार को जानकारी दी जाए. आरोपी अधिकारी को वकील मुहैया कराया जाना चाहिए.
  15. घटना के तुरंत बाद संबंधित अधिकारियों को न तो बिना बारी के प्रमोशन दिया जाना चाहिए, न ही कोई वीरता पुरस्कार. हर हाल में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ये पुरस्कार तभी दिया जाए या इसकी सिफारिश तभी की जाए, जब संबंधित अधिकारियों की वीरता पर कोई संदेह न हो.
  16. अगर पीड़ित के परिवार को लगता है कि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया या स्वतंत्र जांच में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका हो, तो वह सत्र न्यायाधीश से शिकायत कर सकते हैं. शिकायत मिलने के बाद सत्र न्यायाधीश उसकी जांच करेगा.
  • 1997 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के चेयरमैन जस्टिस एम. एन. वेंकट चलैया ने एनकाउंटर पर चिंता प्रकट की और लिखा कि अगर पुलिस कर्मी की गोली से कोई मारा जाता है तो पुलिस वाले पर सजा योग्य हत्या का केस दर्ज होना चाहिए !
  • मई 2010 में NHRC के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस जी पी माथुर ने कहा था कि पुलिस को किसी की जान लेने का अधिकार नहीं है !
  • दरअसल कोर्ट और NHRC के सामने हर साल सैकड़ों ऐसे मामले आते हैं जिसमें फेक एनकाउंटर की शिकायत होती है !
  • वर्ष 2002 से 2008 के बीच NHRC के सामने 440 एनकाउंटर को फेक एनकाउंटर बताते हुए रजिस्टर्ड करवाए गए थे ! उत्तर प्रदेश ( 231) राजस्थान ( 33) महाराष्ट्र (31) प्रमुख राज्य थे !
  • 2009/10 से 2013 के 555 केस इस प्रकार के दर्ज कराए गए ! उत्तर प्रदेश ( 138), मणिपुर (62) असम (52) एवं पश्चिम बंगाल प्रमुख राज्य !
  • वर्ष 2015 से 2019 के बीच 211 केस रजिस्टर्ड किए गए ! आंध्र प्रदेश (57), उत्तर प्रदेश (39) और ओडिशा (22) प्रमुख राज्य हैं !
  • पुलिस मामलों के जानकारों का कहना है कि पुलिस को कई विषम परिस्थितियों में कार्य करना होता है इसलिए पुलिस द्वारा आत्मरक्षा के इस अधिकार में कटौती नहीं की जानी चाहिए !
  • मानवाधिकार समर्थकों का मानना है कि पुलिस इस अधिकार का दुरुपयोग कई प्रकार के लोभ और लालच के लिए भी करती है जिससे लोगों के मानवाधिकार का हनन होता है !