Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 December 2019


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 December 2019



नागरिकता संशोधन बिल 2019

  • यह बिल CAB नाम से भी जाना जा रहा है।
  • लोकसभा से यह बिल पास हो गया है। पक्ष में 311 एवं विपक्ष में 80 वोट पड़े। अर्थात कुल 391 ने इसमें भाग लिया।
  • अब इसे राज्य सभा मे पास होना है !
  • यह बिल नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करेगा।
  • मुख्य प्रावधान जो चर्चा का विषय बना हुआ है, वह धर्म से जुड़ा है।
  • यदि कोई व्यक्ति हिन्दू, जैन, क्रिश्चन, सिख, बौद्ध, पारसी समुदाय से संबंध रखता है और वर्तमान समय में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहता है और उन्हें धार्मिक रूप से प्रताड़ित किया गया है और भारत में आकार रहना चाहता है तो उन्हें भारतीय नागरीकता दी जायेगी।
  • इन तीन देशों का राजकीय धर्म इस्लाम है। इसलिए इन्हे प्रताड़ित किये जाने की संभावना है।
  • यदि कोई ऊपर लिखे समुदाय में आता है और वह 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गया हो तो उसे नागरिकता प्रदान कर दी जायेगी।
  • अब कोई व्यक्ति आता है तो उसे 6 वर्ष यहाँ रहने के बाद नागरिकता प्रदान कर दी जायेगी।
  • नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार यदि कोई विदेशी वैधानिक रूप से भारत में प्रवेश करते हैं और एक निश्चित अवधि तक यहाँ निवास करता है तो उसे नागरिकता मिल जायेगी।
  • कोई व्यक्ति Naturalisation की प्रक्रिया अपनाकर भी यहाँ का नागरिक बन सकता है। कोई व्यक्ति लगातार 1 साल तक भारत में रहता है और उसने यदि पिछले 14 सालों में 11 साल भारत में निवास किया हो तो वह भारत का नागरिक बन सकता है।
  • 6 समुदाय से संबन्धित व्यक्ति अब भारत आता है तो उसे यहाँ 11 साल नहीं 6 साल रहने के बाद नागरिक बन जायेगा। यह प्रावधान पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संबंध में ही लागू होगा।
  • यदि कोई व्यक्ति 2016 में आया हो तो वह 2 साल बाद और 2017 में आया हो तो 3 साल बाद नागरिक बन जायेगा।
  • एक प्रावधान यह भी है किया गया है कि यदि उसके खिलाफ गैरवैधानिक तरीके से प्रवेश का कोई केस चल रहा है तो उसे इनसे मुक्त कर दिया जायेगां

लागू करने का तरीका

  • 6वीं अनुसूची में शामिल राज्यों असम, मेंघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के संदर्भ में एक विशेष प्रावधान यह भी किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति बांग्लादेश से आता है तो वह इन राज्यों में नहीं बस सकते, जमीन नहीं खरीद सकते। यह प्रावधान इनकी सहायता को बचाये रखने के लिए किया गया है।
  • अरूणांचल प्रदेश, मिजोरम, और नागालैंड जहाँ पर Inner Line Permit का नियम लागू होता है वहाँ के लिए भी एक अपवाद है।
  • मणिपुर के संदर्भ में केंद्र की तरफ से आश्वासन दिया गया है कि वहाँ पर ILP की व्यवश्था की जा सकती है।
  • मणिपुर विधानसभा से दरअसल पिछले साल ILP को लेकर एक कानून पास किया था जो राष्ट्रपति के पास विचाराधीन है। इसे अनुमति मिलते ही ILP और नागरिकता के प्रावधान यहाँ पर भी कुछ बदलाव के साभ लागू होंगे।

मुद्दे

  • मुस्लिम समुदाय को वंचित किया गया है जो धर्म के आधार पर भेद-भाव की बात उठाने का मौका कुछ लोगों को दे रहा है।
  • यह समानता के अधिकार अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। यह सभी लोगों को मिला है नागरिक एवं विदेशी दोनों को।
  • उत्तर पूर्व राज्यों में विरोध हो रहा है। उनका मानना है बांग्लादेश से आने वाले लोग उत्तर-पूर्व में ही बसने का प्रयास करेंगे। जिससे उनकी जनांकिकी परिवर्तित हो जायेगी।
  • श्रीलंका, नेपाल जैसे हिंदु बहुल देशों की जनता को यह अधिकार नहीं दिया गया है।
  • नास्तिक लोगों को यह अधिकार न देकर मानवाधिकार को नजर अंदाज किया गया है।
  • पाकिस्तान PM इमरान खान ने धार्मिक भेदभाव बिल बताते हुए इसका विरोध किया है। खान की तरफ से कहा गया है कि यह RSS का हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है, जिसे मोदी सरकार लागू कर रही है।
  • यूनाइटेड स्टेट कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजस फ्रीडम ने अपनी चिंता जताई है।

Shiyan-1

  • यह चीन का एक जहाज है जो चीन के समुद्री रिसर्च अभियान का हिस्सा होता है।
  • इस समय चीन समुद्री रिसर्च में अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहा है और उसके पास इस तरह के लगभग 50 जहाज हैं।
  • यह जहाज भारत के EEZ में प्रवेश कर गया था। जिसे भारतीय नेवी ने अपने क्षेत्र से बाहर कर दिया।

रिसर्च किस चीज की

  • समुद्री संसाधनों का पता लगाने के लिए क्योंकि समुद्री सतह में अनेक प्रकार के संसाधन पाये जाते हैं।
  • पानी की गहराई, रास्ता, अवस्थिति आदि से संबंधित डेटा का संग्रहण करते हैं, जिसका प्रयोग सैन्य अभियानों के लिए भी किया जा सकता है।
  • See Bed Mining का अधिकार चीन को दक्षिण-पश्चिम हिंद-महासागर और कुछ अन्य क्षेत्रो के लिए मिला हुआ है।
  • इसका फायदा चीन कुछ देशों को Fillet For Science Diplomacy के तहत
  • अपने साथ जोड़कर उठा सकता है।

UNCLOS – UnitedNation Convention On The Low Off The see

  • विश्व के सागरों. महासागरों पर देशों का अधिकर और जिम्मेदारी को निर्धारित करने वाला कानून
  • निर्माण 1982 में हुआ था लेकिन 60 देशों के हस्ताक्षर को बाद 1994 में प्रभावी हुआ।
  • यह समुद्र को प्रमुख हिस्सों में विभाजित करता है।
  1. क्षेत्रीय सागर
  2. संलग्न या निकटवर्ती क्षेत्र
  3. अनन्य आर्थिक क्षेत्र एवं उच्च सागर क्षेत्र

क्षेत्रीय सागर जल

  • यह तटीय आधार रेखा से 12 नोटिकल मील तक होता है।
  • संपूर्ण संप्रभुता स्थलीय भाग की ही तरह होती है।
  • संलग्न या निकटवर्ती क्षेत्र
  1. यह आधार रेखा से 24 नोटिकल मील तक होती है।
  2. यहाँ पर स्थायी नौसेना स्थापित नहीं की जा सकती है, लेकिन सैन्य अभ्यास हो सकते हैं।
  3. यहाँ सीमा शुल्क वसूली, प्रदूषण तथा अप्रवासन संबंधी कानून बनाने का अधिकार होता है।

अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)

  • यह आधार रेखा से 200 नोटिकल मील तक क्षेत्र होता है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान, संसाधनों का दोहन, द्वीप का निर्माण करने
  • कोई दूसरा देश यहाँ कोई आर्थिक क्रिया नहीं कर सकता है लेकिन परिवहन के लिए उपयोग कर सकता है।