(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 08 December 2020


(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 08 December 2020



रोहिंग्या को बांग्लादेश अपने यहाँ से कहाँ भेज रहा ?

  • रोहिंग्या म्यामाँर के रखाइन (अराकान) क्षेत्र के निवासी हैं तथा यह 7वीं शताब्दी में अराकान क्षेत्र में रहने वाले अरब, मुगल तथा बंगाली मुस्लिम व्यापारियों के वंशज हैं।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में म्यांमार पर ब्रिटिश नियंत्रण के बाद रोहिंग्या समुदाय की वफादारी अंग्रेजों की प्रति थी। 1947 में इन्होंने एक सेना का गठन कर जिन्ना से उत्तरी अराकान क्षेत्र का विलय पूर्वी पाकिस्तान में करने के लिए कहा। यहीं से रोहिंग्या समुदाय ओर म्यांमार के बीच मतभेद बढ़ाने लगा।
  • 1948 में म्यामार जब स्वतंत्र हुआ। म्यामार की अधिकांश जनसंख्या बौद्ध धर्म को मानने वाली है, इसीकारण यहां के प्रशासन में बौद्ध समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व भी ज्यादा है। आजादी के बाद बौद्ध अधिकारियों ने जो नीतियाँ बनानी प्रारंभ की उसे मुस्लिम समुदाय भेदभावपूर्ण मानता आया है।
  • 1982 में नागरिक कानून, जो सैन्य शासकों द्वारा बनाया गया था, उसमें इन्हें गैर राष्ट्रीय तथा विदेशी घोषित कर दिया गया। जातीय संहार से बचने के लिए बड़ी संख्या में रोहिंग्या म्यांमार छोड़कर पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, थाईलैण्ड व मलेशिया जैसे देशों में रह रहे हैं।
  • यहां रोहिंग्या और बौद्ध धर्म को मानने वालों के बीच धार्मिक संघर्ष है, जातीय विभेदताएं एवं तनाव है। जिसके कारण हिंसा होती रहती है। वर्ष 2012, 2014, 2016 में भी यहां हिंसा हुई जिसमें कई रोहिंग्या मारे गये।
  • अगस्त 2017 में अराकान रोहिंग्या सालवेशन आर्मी चानी ने म्यामांर के बॉर्डर गार्डस पर हमला कर 12 गार्डस को मार दिया। इसके बाद सेना कार्रवाई की जिसकी वजह से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मारे गये। इसके बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या अपनी घर छोड़कर दूसरे देशों की ओर जाने लगे। म्यांमार के ऊपर आरोप लगता है कि वहां की सेना ने रोहिंग्या का नरसंहार किया है।
  • रोहिंग्या समुदाय आज कई देशों में शरणार्थी के रूप में रह है। कई मानव तस्कर की जाल फस चुके हैं, कई समुद्र में लापता होकर मौत का शिकार बन चुके है। संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या के संदर्भ में में चिंता जाते हुए कहा है कि- ‘‘यह दुनिया के सबसे प्रताडित लोगों में से हैं।’’
  • इस समय लगभग 10-11 लाख रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश में, 2 लाख सऊदी अरब में, 3-5 लाख पाकिस्तान में, 10000 UAE में, 40 हजार भारत में, 1-5 लाख मलेशिया में और इसी तरह कई देशों में रह रहे हैं।
  • बांग्लादेश के कॉवस बाजार में लगभग 7 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं। जिसके कारण यहां का जनघनत्व बढ़कर लगभग प्रति वर्ग किमी- 60000 प्रति व्यक्ति तक हो गया है, जो दुनिया में सर्वाधिक है। जिसके कारण यहां कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।
  • जून 2015 में बांग्लादेश की सरकार ने इस द्वीप पर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए निवास स्थान के रूप में भाषण चार द्वीप का विकल्प दिया था। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी तार्किक रूप से चुनौतीपूर्ण माना था।
  • बांग्लादेश की सरकार ने आश्रयन परियोजना-3 के तहत 2300 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने के लिए घर बनवाये हैं। यहां आवास, अस्पताल और मस्जिद का निर्माण किया गया है।
  • यहां चीनी एवं ब्रिटिश कंपनी द्वारा बाढ़ नियंत्रण चक्रवात रोकथाम एवं आपदा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। यहाँ खेती पशुपालन की भी व्यवस्था की गई है।
  • 4 दिसंबर से बांग्लादेश की सरकार ने इन रोहिंग्या लोगों में से 1 लाख लोगों को बाशान चार (Bhasam Char) द्वीप पर भेजना प्रारंभ कर दिया है।
  • वर्ष 2017-18 से बांग्लादेश सरकार यह प्रयास कर रही हे कि यहां रोहिंग्या लोगों को रखा जाये। अप्रैल 2020 में 300 से अधिक रोहिंग्या लोगों को यहां भेजा गया था लेकिन कोरोना के कारण यह सतत रूप से नहीं चल पाया।
  • बांग्लादेश के सरकार के इस निर्णय की आलोचना मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही है। इनका कहना है कि रोहिंग्या को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि ने जब इसका निरीक्षण किया था तो इसे ठीक विकल्प नहीं माना था।
  • भाषन चार का शाब्दिक अर्थ होता है बहता हुआ द्वीप। इस द्वीप का निर्माण लगभग 20 साल पहले अवसाद एकत्रण से प्रारंभ हुआ था अभी भी इसका निर्माण हो रहा है। 40 वर्ग किमी में फैला यह द्वीप मुख्य भूमि से 60 किमी दूर है जबकि हटिया द्वीप से 30 किमी दूर है। यह हिमालयन अवसाद से निर्मित अभी निर्मित हुआ है, कितने साल तक स्थिर रहेगा कहा नहीं जा सकता है।

सार्क में नया क्या हुआ है?

  • सार्क (SARRC - South Asian Association for Regional Cooperation) दक्षिण एशिया के आठ देशों का एक संगठन है। 8 दिसंबर, 1985 को बने इस संगठन का उद्देश्य दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग से शांति और प्रगति हासिल करना है।
  • इसके सात संस्थापक देश थे- भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं मालदीव थे। वर्ष 2005 में सार्क के 13वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान को इसका सदस्य बनाया गया। इस तरह सदस्य देशों की संख्या अब 8 हो गई है। इसका मुख्यालय एवं सचिवालय नेपाल के काठमांडू में है।

उद्देश्य-

  1. सदस्य देशों के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देना एवं उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  2. दक्षिण एशिया में आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक विकास में तेजी लाना और सभी व्यक्तियों को गरिमापूर्ण जीवन का अवसर प्रदान करना, जिससे उनकी क्षमता में वृद्धि हो सके।
  3. आपसी समस्याओं का मूल्यांकन और समाधान का प्रयास करना और सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है, जिससे क्षेत्रीय मजबूती में सबकी भूमिका सुनिश्चित हो सके।
  4. आर्थिक-सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग और सक्रियता को बढ़ावा देना।
  5. समय हितों के मामले में आपसी सहयोग करना तथा अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

महत्व-

सार्क का विस्तार विश्व के लगभग 3 प्रतिशत भाग पर है लेकिन यहां विश्व की लगभग 21 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इस तरह यह क्षेत्र उच्च जनघनत्व का क्षेत्र है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी मात्र 3.8 प्रतिशत है अर्थात् जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी कम है, जिसे बढ़ाया जा सकता है।

  • यह क्षेत्र कृषि, उद्योग, सेवा विस्तार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यहां उपजाऊ भूमि है, खनिज संसाधन है तथा बड़ा बाजार है जो वैश्विक आकर्षण का भाग है।
  • यहां की संस्कृतिक और राजनैतिक संरचना लगभग एक समान है जो आपसी सहयोग के लिए लाभदायक है।
  • सार्क देशों की चुनौतियाँ भी लगभग एक समान है जैसे- गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, प्राकृतिक आपदायें, औद्योगिक एवं तकनीकी पिछड़ापन, निम्न जीडीपी तथा निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति।
  • सार्क के सदस्य देशों ने एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) स्थापित किया है।
  • SAPTA (South Asia Preferential Trading Agreement) वर्ष 1995 में सार्क देशों के मध्य व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए किया गय था।
  • वर्ष 2016 तक सभी वस्तुओं के सीमा शुल्क को कम करने के लिए समझौता किया गया। अर्थात् मुक्त व्यापार समझौते को प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।

भारत के लिए सार्क का महत्व-

  1. भू-रणनीतिक महत्व
  2. क्षेत्रीय स्थिरता
  3. वैश्विक नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण
  4. भारत की पड़ोसी देशों के साथ नीति के लिए महत्व
  • दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के प्रयासों की हमेशा से बहुत जरूरत रही है। भारत के लिए ऐसे प्रयासों का विशेष महत्व रहा है। हाल ही में बांग्लादेश और भूटान जैसे महत्वपूर्ण दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर होना एक सकारात्मक कदम है। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती देने के लिए प्रेफ्रेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट यानी वरीयता मूलक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भूटान पहला देश है जिसके साथ बांग्लादेश ने 1971 के बाद से कोई वरीयता मूलक व्यापार समझौता किया है। दूसरे शब्दों में 1971 के बाद बांग्लादेश ने पहली बार किसी देश के साथ पी टी ए पर हस्ताक्षर किया है। 6 दिसंबर , 1971 को भूटान पहला देश था जिसने बांग्लादेश की स्वतन्त्रता के बाद उसे मान्यता प्रदान किया था। इसके बाद भारत दूसरा देश था जिसने बांग्लादेश को एक नए देश के रूप में राजनीतिक कूटनीतिक मान्यता प्रदान की थी। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में 6 दिसंबर , 2020 को दोनों देशों ने पी टी ए पर हस्ताक्षर किया। दोनों देश अपने कूटनीतिक संबंधों की 50 वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं।
  • वरीयता मूलक अथवा तरजीही व्यापार समझौते के अनुसार 100 बांग्लादेशी वस्तुओं को भूटान के बाजार में सीमाशुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। वहीं 34 भूटानी उत्पादों को बांग्लादेश के बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलेगा। भूटान के जिन उत्पादों को बांग्लादेश के बाज़ार में व्यापार करने के लिए तरजीही छूट मिलेगी उसमें शामिल हैं : संतरे , सेब , अदरक , फलों के जूस , दूध , प्राकृतिक शहद , आटा , लकड़ी के फर्नीचर आदि।

सार्क देशों में सहयोग के लिए जरूरी कदम :

  • बांग्लादेश और भूटान को बी बी आई एन कॉरिडोर के महत्वपूर्ण किरदार के रूप में देखा गया है। यह दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय एकीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण पहल है। 15 जून, 2015 को भूटान की राजधानी थिंपू में बीबीआईएन देशों के परिवहन मंत्रियों द्वारा चार देशों के मध्य यात्रियों, व्यक्तिगत और मालवाहक वाहन परिवहन के विनियमन हेतु बांग्लादेश, भूटान, भारत, और नेपाल(बीबीआईएन) – अब सार्क देशों में से चार के मध्य एक मोटर वाहन करार (एमवीए) पर हस्ताक्षर किए गए थे। बीबीआईएन एम वी ए से बीबीआईएन देशों को उनके बीच भूमि यातायात सुविधाओं के कार्यान्वयन में आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी, जिससे यातायात अधिकारों का आदान-प्रदान और सामान की सीमा पार आवाजाही का सुगमीकरण, वाहनों और व्यक्तियों, इसके द्वारा व्यक्ति से व्यक्ति के संपर्क को बढ़ाने में मदद, उनके मध्य व्यापार और आर्थिक आदान-प्रदान संभव होगा। बी बी आई एम एम वी ए से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का बांग्लादेश, भूटान और नेपाल तथा सीमा-पार व्यापार और यातायात अधिक प्रभावी होगा। इस दृष्टिकोण से बांग्लादेश भूटान के अच्छे संबंध भारत के हितों के लिहाज से जरूरी समझे गए हैं।

आज ही के दिन हुई थी सार्क की स्थापना

  1. 1970 के दशक में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने दक्षिण एशिया में एक व्यापार गुट के सृजन का प्रस्ताव रखा।
  2. अप्रैल 1981 में सातों देशों के विदेश सचिव कोलंबो में पहली बार मिले और सहयोग के मुद्दों पर बातचीत की गई। इसके लिए एक चार्टर का विकास किया गया, जिस पर हस्ताक्षर करके सार्क की स्थापना की जानी थी।
  3. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग पर 1983 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रियों ने 9 सहमत क्षेत्रों अर्थात कृषि, ग्रामीण विकास, दूरसंचार, मौसम, स्वास्थ्य, परिवहन, डाक सेवा, विज्ञान, और प्रौद्योगिकी, खेल, कला और संस्कृति में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
  4. इसकी स्थापना आज ही के दिन, 8 दिसंबर 1985 को ढ़ाका में सार्क चार्टर पर हस्ताक्षर करने के साथ थी।

चार्टर के उद्देश्य-

  • दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए, जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मिलजुल कर कार्य करना।
  • क्षेत्र के आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास में तेजी लाने और सभी व्यक्तियों को स्वाभिमान के साथ रहने और पूरी क्षमता का एहसास कराने का प्रयास और सहयोग करना।
  • सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और मजबूती प्रदान करना।
  • समान लक्ष्य और उद्देश्य के साथ अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना।

भारत-मंगोलिया संयुक्त सहयोग समिति की 7वीं बैठकः

  • मंगोलिया पूर्व और मध्य एशिया का एक लेंडलॉक देश हैं इसकी सीमाएं उत्तर में रूस, दक्षिण, पश्चिम और पूर्व में चीन से लगती है। कज़ाखिस्तान की सीमा इससे नहीं लगती है लेकिन यह सिफ 38 किमी- दूर है।
  • देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर उलान बटोर है। यहाँ देश की लगभग 38 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
  • भारत ने दिसंबर 1955 में मंगोलिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किये, सोवियत संघ के बाहर मंगोलिया के साथ इस प्रकार का संबंध स्थापित करने वाला पहला देश भारत था।
  • भारत और मंगोलिया के बीच 1973, 1994, 2001 और 2004 में आपसी मित्रता और सहयोग की संधियाँ हुई है और दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ सहयोग को मजबूत किया है।
  • भारत और मंगोलिया केवल सामारिक साझेदार ही नहीं बल्कि बौद्ध विरासत से जुड़े आध्यात्मिक पड़ोसी भी है।
  • पिछले साल मंगोलियाई राष्ट्रपति खाल्टमागिन बुतुल्गा (Khaltmaagi Battulga) ने भारत का दौरा किया था। यह पिछले एक दशक में पहली बार किसी मंगोलियाई राष्ट्रपति की पहली यात्र थी।
  • इस दौर के दौरान दोनों देशों ने अंतरिक्ष सहयोग, आपदा प्रबंधन, रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में समझौते पर हस्ताक्षर किया। दोनों पक्षों ने मंगोलिया में स्थापित होने वाले साइबर सुरक्षा केंद्र के निर्माण का भी जायजा लिया। इसके साथ ही दोनों देशों ने आध्यात्मिक भाईचारा और आपसी विश्वास बढ़ाने का समझौता किया।
  • वर्ष 2020 भारत और मंगोलिया के बीच राजनायिक संबंधों को स्थापित करने की 65 वीं वर्षगांठ है।
  • 03 दिसंबर 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत-मंगोलिया संयुक्त सहयोग समिति की 7वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की मुख्य बातें और निष्कर्ष निम्नलिखित हैं -
  • भारतीय पक्ष ने मंगोलिया द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के निर्णय का स्वागत किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि इस पहल से भारत, मंगोलिया और दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
  • भारत और मंगोलिया उलानबटोर में आयुष सूचना प्रकोष्ठ स्थापित करने पर सहमत हुए।
  • भारतीय पक्ष ने भारतीय नागरिकों के लिए 'वीजा ऑन अराइवल' की सुविधा प्रदान करने के लिए मंगोलिया की सराहना की।
  • दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने 1.236 बिलियन डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट और US $ 20 मिलियन अटल बिहारी वाजपेयी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आईसीटी और आउटसोर्सिंग समेत जारी विकास संबंधी साझेदारी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।
  • राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65 वीं वर्षगांठ के अवसर पर, मंगोलियाई पक्ष की ओर से मंगोल पोस्ट द्वारा एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया। विदेश मंत्री ने वस्तुतः मंगोलियाई कंजूर के 25 खंडों को सौंपा, जो कि भारत सरकार द्वारा पांडुलिपियों के लिए राष्ट्रीय अभियान के तहत मुद्रित 108 खंडों में बौद्ध विहित पाठ है।
  • दोनों मंत्रियों ने मई 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगोलिया की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा को याद किया जिस दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था। भारत के किसी प्रधानमंत्री की ओर से मंगोलिया की यह पहली यात्रा है जिससे भारत - मंगोलिया संबंधों में एक नए युग की शुरूआत हुई थी।
  • भारत और मंगोलिया क्रमश: 2021-2022 और 2023-2024 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सीट के लिए एक - दूसरे के प्रस्ताव के परस्पर समर्थन पर भी सहमत हो चुके हैं।
  • मंगोलिया अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय को अपनाकर भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए अपनी सहमति भी व्यक्त कर चुका है।
  • भारत और मंगोलिया के बीच असैन्य परमाणु सहयोग समझौता भी संपन्न किया जा चुका है।