Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 06 February 2020


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15 वें वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट

  • यह एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 280 में वित्त आयोग जिक्र है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति प्रत्येक 5 साल या उससे पहले इसका गठन करेंगे।
  • इसका एक अध्यक्ष होता है तथा चार अन्य सदस्य होते है, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
  • इनका कार्यकाल राष्ट्रपति के आदेश के तहत तय होता है और पुनर्नियुक्ति भी हो सकती है।
  • वित्त आयोग राष्ट्रपति को निम्न मामलों में सिफारिशें देता है।
  1. संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगामें का वितरण और राज्य के बीच ऐसे आगमों का आवंटन।
  2. भारत की संचित निधि में से राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान को शासित करने वाले सिद्धांत।
  3. राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य में नगरपालिकाओं और पंचायतों के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि के संवर्धन के लिए आवश्यक उपाय।
  4. राष्ट्रपति द्वारा आयोग को सुदृढ़ वित्त के हित में निर्दिष्ट कोई अन्य विषय।
  • इन्हीं संवैधानिक दायित्वों के तहत अब तक 15 वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं।
  • पहला वित्त आयोग 1951 K.C. Neogy की अध्यक्षता 1952 से 1957 तक के लिए नियुक्त किया गया था।
  • 15 वें वित्त आयोग का गठन 2017 में N.K सिंह की अध्यक्षता में गठित किया गया जिसका कार्यकाल 2020-2025 है।
  • 4 अन्य सदस्य शशिकांत दास, अशोक लाहिरी, रमेश चन्द्र और अनूप सिंह थे।
  • 2015 से 2020 के लिए 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू थी।
  • 15 वें वित्त आयोग की सिफारिशें 2020-2025 तक लागू होनी है।
  • यहाँ पर यह ध्यान देना आवश्यक है कि इसके गठन के समय में आयोग को अपनी रिपोर्ट देते समय कुछ बिंदुओ को ध्यान में रखने को कहा गया था।
  • इसमें कहा गया था कि वित्त आयोग 2011 के जनसंख्या के आकड़ों का प्रयोग करेगा।
  • दक्षिण भारत के राज्यों द्वारा इसका विरोध किया। क्योंकि इससे कम राजस्व दक्षिण के राज्यों को प्राप्त होगा।
  • दूसरा बिंदु नेशनल डिफेंस और सिक्योरिटी के फण्ड के निर्माण से संबंधित था। जिसमें कहा गया था कि इस फण्ड का निर्माण करों के विभाजन से पहले हो।
  • राज्यों द्वारा इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इस फण्ड का निर्माण बंटवारे के बाद बचे केन्द्र के हिस्से से किया जाना चाहिए।
  • इस आयोग को अपनी रिपोर्ट 30 अक्टूबर 2019 तक देना था। लेकिन तीन बार यह अवधि बढ़ानी पड़ी।
  • जम्मू-कश्मीर की स्थिति में बदलाव, महंगाई, टैक्स का संग्रहण कम होना और कम आर्थिक वृद्धि दर की वजह से यह हुआ।
  • अब आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी है जिसे संसद के सामने रखा जा चुका है।
  • अंतरिम रिपोर्ट में आयोग द्वारा राज्यों को कर हिस्सा 40% से 41% देने की सिफारिश की गई है।
  • 41% का विभाजन राज्यों के बीच विभाजन (क्षैतिज विभाजन) के लिए Income distance को 45% 1971 के जनसंख्या को 0% 2011 की जनगणना के लिए 15%, Tax Effort को 2.5% क्षेत्रफल 15%, वनावरण 10%, Demographic Performance ( Fertility Rate ) 12.5%
  • स्थानीय सरकारों को 90000 करोड़ रूपये देने की सिफारिश भी आयोग द्वारा की गई है।
  • इसमें से 60750 करोड़ रूपये पंचायतों को और 29250 करोड़ म्युनिसिपल बाडीज को मिलेगा।
  • पंचायतों को दिये जाने वाले पैसे में से 50% पैसे का आवंटन जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए किये गये प्रयास के तहत होगा।
  • आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए आपदा शमन फंड ( Disaster Mitigation Fund ) के निर्माण की बात भी आयोग द्वारा कही गई है।
  • 0-6 साल के बच्चों एवं दुग्धपान करोने वाली महिलाओं को पोषकता प्रदान करने के लिए 7.735 करोड़ रूपये आवंटित करने की बात कही गई है।
  • जिन राज्यों ने कृषि क्षेत्र, बिजली क्षेत्र, प्राथमिक शिक्षा, व्यापार वृद्धि में अच्छा प्रयास किया है उन्हें अनुदान दिया जाये।
  • Defense और National Security के लिए फंड बनाया जाये जिसमें पैसा कर हिस्सा विभाजन से कर संग्रह से खर्च किया जाये।

ग्राम न्यायालय

  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह में ग्राम न्यायालय स्थापित करने के लिए आदेश जारी करें।
  • न्यायालयों में बढ़ते दबाव और केसों की बढ़ती संख्या के समाधान के लिए न्यायालय ने यह आदेश जारी किया है।
  • सभी राज्यों में ग्राम न्यायालय को स्थापित और संचालित करने की इच्छा शक्ति एक समान दिखाई नहीं दे रही है।
  • बहुत से मामले ऐसे होते हैं जिनका समाधान बहुत जल्द किया जा सकता है लेकिन न्यायालयों के अभाव के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।
  • इनकी स्थापना ग्राम न्यायालय एक्ट 2008 के तहत की जाती है।
  • यह Mobile Village कोर्ट होते हैं।
  • न्यायालय लगने से पहले घोषणा कर दी जाती है कि वहाँ न्यायालय लगेगी।
  • यह फौजदारी और अपराधिक दोनों मामलों को सुनने का अधिकार होता है।
  • कितनी रकम तक के केस सुने जायेगे यह संबंधित राज्य के H.C निर्धारित करते हैं।
  • इनके फैसले के खिलाफ अपराधिक मामले में 6 माह के अंदर सेशन कोर्ट में और फौजदारी मामलों में ड्रिस्टिक्ट कोर्ट के सामने अपील की जा सकती है।
  • केस दर्ज कराने के लिए 100 रूपये से ज्यादा फीस नहीं रखी जा सकती है।
  • सोशल लीडर मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।

अफ्रिका से भारत में चीता लाने का प्रयास

  • National Tiger Conservation Authority (NTCA) ने सुप्रीम कोर्ट में एक एप्लीकेशन लगाया था।
  • इसमें अफ्रिका से भारत चीता को लाने की अनुमति मांगी गई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाने के लिए कहा है जो इस मुद्दे पर NTCA को गाइड करेगी।
  • यही कमेंटी NTCA के साथ काम कर यह निर्धारित करेगी कि चीता को लाना है या नहीं और लाना है तो कैसे ? कहाँ रखा जायेगा ? कैसे रखा जायेगा ? आदि।
  • भारत से चीता लगभग 70 साल पहले विलुप्त हो गये थे।
  • एशिया में यह सिर्फ ईरान में नगण्य रूप में पाये जाते हैं।
  • प्रमुख रूप से यह अफ्रीका के सवाना दक्षिण के मरूस्थलीय क्षेत्र में पाये जाते हैं।
  • 1990 के दशक से ही हम चीता को भारत में लाने का प्रयास कर रहे हें।
  • ईरान से कई बार अपील की गई कि वह कुछ चीता हमें दे दे लेकिन उसने मना कर दिया।
  • ईरान के द्वारा मना करने के बाद हमने अफ्रीका की ओर रूख किया।
  • नामिबिया भारत की मदद करने सामने आया और सरकार ने अफ्रीका चीता लाने का प्लान तैयार किया जो 2010 में बनकर तैयार हो गया ।
  • 2011 में केन्द्र सरकार द्वारा इस प्लान के लिए 50 करोड़ रूपये आवंटित भी कर दिये गये।
  • यह प्लान पूर्णतः जमीन पर उतर पाता उससे पहले 2013 में सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय आया।
  • इसमें कहा गया कि बाहर से किसी प्रजाति को लाने की जरूरत नहीं है। पहले यहाँ की प्रजातियों को संरक्षित किया जाये।
  • दरअसल सुप्रीम कोर्ट गिर के जंगलों में पाये जाने वाले Lions का स्थानांतरण करने के एक मामले की सुनवाई कर रहा था।
  • इस केस के निर्णय में यह कहा गया कि कुछ Lions गुजरात से मध्यप्रदेश के Kuno-Polpur वन्य जीव अभ्यारण्य में ट्रांसफर कर दिया जाये जिससे किसी बीमारी या आपदा का प्रभाव सभी प्रजातियों को समाप्त न कर दे।
  • वर्तमान जजमेंट को 2013 के जजमेंट के अपोजिट माना जा रहा है। जिसमें कोर्ट ने साफ तौर पर इन्हें लाने से मना कर दिया था।
  • Desert National Park सरकार की नजर में चीता के लिए सबसे पसंदीदा जगह है। लेकिन यहाँ से Great Indian Bustard को विस्थापित करना होगा।
  • Kuno- Polpur Park एक दूसरा विकल्प है। लेकिन इस क्षेत्र में घटता घास क्षेत्र और यहाँ पहले से पाई जाने वाली प्रजातियों की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • तीसरा विकल्प Nauradehi वन्य जीव अभ्यारण्य है यहाँ विस्तृत घास क्षेत्र पाये जाते हें। यहाँ Wolves पाये जाते हैं जिनके साथ चीता का संघर्ष बढ़ सकता है।
  • भारत चीन को लेकर जरूर आना चाहता है लेकिन कई तरह के प्रश्न समीक्षकों द्वारा उठाये जा रहे हैं।
  • पहला प्रश्न यह उठाया जा रहा है कि जब हम अपने यहाँ की देशज अन्य प्रकार के प्रजातियों का संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं तो बाहर से एक प्रजाति को क्यों ला रहे हैं।
  • शेर, टाइगर, हिम तेंदुआ आदि चीता की तरह ही विशिष्ट जीव हैं उनके संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
  • चीता एक शिर्ष स्तर उपभोक्ता जीच है जिसके लिए विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होगी। भारत की बढ़ती जनसंख्या के कारण घास क्षेत्र पर बहुत दबाव है।
  • मानव पशु के बीच जिस प्रकार का संघर्ष बढ़ रहा है उसमें यह कदम घातक हो सकता है।
  • चीता की अफ्रीकन प्रजाति एशियाटिक प्रजाति की तरह भारत में सर्वाइव कर पाये यह भी आवश्यक नहीं है।
  • चीता संरक्षण जीव संरक्षण के अंब्रेला प्रोजेक्ट का हिस्सा है इसलिए अन्य जीवों का संरक्षण इससे हो जायेगा।
  • भारत सरकार घास क्षेत्र के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है इसलिए घास क्षेत्र में कमी नही आयेगी।
  • भारत में पर्यटन की अपार संभावनाएं है और यह जीव इसमें सहायक हो सकता है।
  • कुछ लोग चीता शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के चित्र शब्द से मानते हैं। जिसका अर्थ ऐसे जीव से है जिसके शरीर पर कई चित्र बने होते हैं।
  • यह बहुत तीव्र गति से दौड़ने वाला जीव है जो 120 किमी. प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ सकता है।
  • इसके आवास के रूप में शुष्क घास वाला क्षेत्र अनुकूल होता है।