(Video) डेली करेंट अफेयर्स (Daily Current Affairs) : कतर संकट समाप्ति की घोषणा (Qatar Crisis End) - 05 January 2021


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कतर संकट समाप्ति की घोषणा

  • कतर अरब प्रायद्वीप के उत्तर पूर्वी तट पर स्थित एक छोटा प्रायद्वीप है। इसके दक्षिण में जहां सऊदी अरब है वहीं शेष तीनों ओर फारस की खाड़ी है।
  • कतर दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक है, जिसका क्षेत्रफल 11,439 वर्ग किमी- है। यहां की आबादी लगभग 28 लाख है जिसमें 85-90 प्रतिशत विदेशी हैं।
  • कतर लगभग 55 साल ब्रिटेन के संरक्षण में रहा। 1971 में जब कतर ने संयुक्त अब अमीरात (UAE) का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया तो एक अलग देश के तौर पर कतर अस्तित्व में आया।
  • कतर एक समय दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल था लेकिन तेल एवं गैस भंडार ने कतर की किस्मत बदल दिया।
  • आज कतर अपनी संपन्नता के लिए जाना जाता है। प्रति व्यक्ति आय 81 लाख रुपये से अधिक है और यह दुनिया के सबसे धनी देश में शामिल है।
  • कतर की सरकारी एयरलाइंस कतर एयरवेज दुनिया की सबसे अच्छी एयरलाइंस में शामिल है, जिसके बेड़े में 192 विमान हैं, जो 150 से अधिक शहरों को जोड़ते हैं।
  • कतर में वर्ष 2022 में फुटबाल वर्ल्ड कप का आयोजन होगा। अरब दुनिया का यह पहला देश है जो ऐसा करेगा।
  • कतर लिक्विफाइड नेचुरल गैस अर्थात एलएनजी का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है जो वैश्विक कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत का उत्पादन करता है।
  • वर्ष 2019 में कतर ने प्रतिदिन 6.10 लाख बैरल तेल का उत्पादन किया।
  • वर्ष 2019 में कतर ने ओपेक से अलग होने की घोषण किया था। कतर ओपेक का 11वां सबसे बड़ा तेल उत्पादक था। कतर का मानना था कि वह ओपेक से अलग होकर अपने उत्पादन को और बढ़ा पायेगा।
  • कतर की सरकार ने 1996 में अल जजीरा के नाम से एक टेलीविजन नेटवर्क बनाया, जिसने अरब दुनिया में खबरों की कवरेज और प्रसारण के तौर-तरीकों को ही बदल दिया।
  • कतर की छवि हमेशा से अरब जगत के लिए एक समस्या निर्मित करने वाले सदस्य के रूप में रही है। कतर अपने तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों के संयुक्त कार्यकरण के बावजूद भू-राजनीतिक मुद्दों पर कतर हमेशा से अरब जगत से भिन्न मत रखता है।
  • कतर सऊदी अरब के वर्चस्व को स्वीकार नहीं करता है और अपनी नीतियों के संदर्भ में वह कई बार सऊदी अरब के खिलाफ भी अपनी प्रतिक्रिया के चुका है और कतर ने सऊदी अरब के साथ किये गये समझौते को भी खत्म कर दिया।
  • कतर पहला अरब देश था जिसने इजराइल के साथ अपने राजनायिक एवं व्यापारिक संबंधों को स्थापित किया। हालांकि वर्ष 2009 में कतर ने इजराइल के साथ भी व्यापारिक संबंधों को तोड़ दिया था।
  • वर्ष 1995 में कतर के राजा (शाह) बने हमाद बिन खलीफा। इन्होंने सऊदी के साथ के अपने संबंधों पर ईरान को वरीयता दी। सऊदी अरब और ईरान का विवाद पुराना हैं इसीकारण सऊदी अरब ने इस पर प्रतिक्रिया दिखाते हुए वर्ष 2002 में कतर से अपने एम्बेसडर को वापस बुला लिया।
  • कतर यह मानता है कि उसकी संपन्नता का प्रमुख कारण कतर और ईरान की सीमा पर The south Pars/North Dome Field क्षेत्र है जहां से वह गैस का निष्कासन करता है। इसका कुछ हिस्सा ईरान और कुछ हिस्सा कतर के पास है। इसी कारण वह अपने संबंधों को ईरान के साथ मधुर बनाकर रखना चाहता है।
  • वर्ष 2011 में अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप में प्रारंभ हुआ अरब स्प्रिंग मार्च के माह में सऊदी अरब पहुँचा। यहां पर जैसे ही सऊदी शासक के खिलाफ आंदोलन प्रारंभ हुआ कतर के सरकारी फंडिंग प्राप्त अल-जजीरा ने इस आंदोलन को सपोर्ट करना प्रारंभ कर दिया। अल-जजीरा की छवि पहले से ही सऊदी अरब और उसके मित्र राष्ट्रों के खिलाफ रही है।
  • दरअसल अल-जजीरा ने अपनी स्थापना के बाद से ही सऊदी अरब के खिलाफ अपना अभियान चला दिया। इसके अलावा इसने UAE, बहरीन, मिस्र, जैसे देशों के आंतरिक मामलों में न सिर्फ हस्तक्षेप किया बल्कि नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास कई बार किया।
  • सऊदी अरब और उसके समर्थक देशों का मानना रहा है कि यह चैनल और इसके माध्यम से कतर आंतकी संगठनों को प्रमोट करता है। हालांकि इसमें कुछ सच्चाई भी है क्योंकि अलकायदा से लेकर अधिकांश आतंकी संगठनों के इंटरव्यू न सिर्फ इसी चैनल पर हैं, बल्कि इसका कवरेज कुछ ऐसा होता है, जिससे आतंकी संगठनों को सिम्पैथी मिले।
  • सऊदी अरब ईरान को अपना एक दुश्मन मानता आया है और उसे हमेशा रोकने का प्रयास किया है। सऊदी अरब ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने से भी पड़ता है। सऊदी अरब ईरान को रोकने के लिए अमेरिका का भी सहयोग प्राप्त करता आया है।
  • वर्ष 2016 में डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा की थी कि वह ईरान और P5+1 देशों के मध्य हुए समझौते से बाहर होंगे और ईरान पर प्रतिबंध लगायेंगे। सऊदी अरब ने इसका समर्थन किया था।
  • वर्ष 2017 में डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब का दौरा किया तब उन्होंने यहां प्रेस कांफ्रेस और मीटिंग में यह कहा कि सभी देशों (खासकर खाड़ी देशों) को मिलजुल्कर ईरान को अलग-थलग करना होगा, ताकि वह परमाणु हथियार और मिसाइल विकसित न कर सके।
  • कतर ने इससे अलग अपना मत रखा, जिससे यहां तनाव बढ़ गया।
  • सऊदी अरब, UAE (संयुक्त अरब अमीरात), मिस्र, एवं बहरीन ने यह कहा कि कतर खाड़ी क्षेत्र में तनाव को बढ़ाना चाहता है, वह हिजबुल्लाह, मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे आतंकी संगठनों को प्रमोट करता है। इनका मानना था कि कतर गल्फ को ऑपरेशन काउंसिल (GCC) का सदस्य होते हुए भी अपनी अलग विदेश नीति से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है।
  • इस आधार पर सऊदी अरब, UAE, मिस्र, बहरीन ने कतर के साथ सभी व्यापारिक-राजनैतिक संपर्क तोड़ लिये। बाद में इस पहल में यमन व मालदीव भी शामिल हो गये।
  • इसके तहत कतर इनके स्थल मार्ग, वायुमार्ग और जलमार्ग का उपयोग किसी भी प्रकार के आवागमन के लिए नहीं कर पायेगा।
  • कतर से इन देशों ने 48 घंटे के भीतर अपने डिप्लोमेट वापस बुला लेने के लिए कहा। नागरिकों के लिए यह अवधि 14 दिन की दी गई।
  • किसी भी प्रकार के सामान की आवाजाही पर भी रोक लगा दिया गया ताकि कतर को आवश्यक सामानों की भी कमी हो जाये और वह व्यापार न कर पाये।
  • कतर के सामने शर्त रखी गई कि यदि वह ईरान से अपने डिप्लोमेटिक संबंध तोड़ दें, अल-जजीरा के साथ-साथ उन सभी न्यूज चैनल को वह बंद करे जिसकी फंडिंग कतर करता है, तुर्की के साथ कतर अपने सभी सैनिक सहयोग बंद कर दे, आतंकी संगठनों की फंडिंग रोके और संबंध तोड़े जिसे आतंकी घोषित किया गया हैं तथा कतर में अरब देशा की नीतियों को लागू करे, तो यह देश पुनः कतर के साथ अपने राजनायिक संबंध प्रारंभ कर देंगे।
  • कतर पर लगाये गये प्रतिबंध बहुत कड़े थे और उद्देश्य यह था कि कतर इससे घुटने टेक देगा।
  • कतर ने इन प्रतिबंधों को झेला और झुकने से इनकार कर दिया और ईरान के साथ, अपने रिश्ते को और मजबूत किया। ईरान ने हवाई मार्ग, खाद्य साम्रग्री, व्यापार हर तरह से कतर का सहयोग किया।
  • इन प्रतिबंधों में तुर्की ने भी कतर का बहुत सहयोग किया, जियके वजह से तुर्की के साथ भी कतर के रिश्ते मजबूत हुए।
  • इस तरह कतर पर लगाये गये प्रतिबंधो के पीछे का मुख्य उद्देश्य तो प्राप्त नहीं हो पा रहा था दूसरी ओर ईरान और तुर्की के साथ कतर के रिश्ते मजबूत हुए।
  • कल अर्थात् 4 जनवरी को सऊदी अरब ने घोषणा किया कि वह कतर पर लगाये गये प्रतिबंध को हटाने की घोषणा किया है साथ ही कतर से कहा गया कि कि वह आतंकी संगठनों को फंडिंग नहीं करेगा।
  • अमेरिका इस क्षेत्र में लंबे समय से किसी ऐसे समझौते को करवाने की कोशिश कर रहा था और अब ट्रंप जाते-जाते यह समझौता करवाने में सफल हो गये हैं।
  • दरअसल अमेरिका यहां ईरान को कमजोर करना चाहता है क्योंकि कतर इस समय अनेक सामानों एवं सेवाओं के लिए हर साल कई मिलियन डॉलर देता है, जिससे ईरान मजबूत हो रहा है।
  • दूसरी और सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों की कंपनियों यह चाहती थीं कि कोविड-19 के कारण आये ठहराव को गति देने के लिएकतर से रिश्ते पुनः बहाल करने जरूरी है।
  • हाल ही में ईरान ने यह घोषणा किया था कि उसने 20 प्रतिशत यूरेनियम इनरिच्डमेंट (संबर्द्धन) का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, जिसके कारण खाड़ी के देशों के लिए ईरान सबसे बड़ी चुनौती नजर आ रहा है न कि कतर।