(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) जीलैंडिया: दुनिया का 8वां महाद्वीप? (Zealandia : World's 8th Continent?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी)  जीलैंडिया: दुनिया का 8वां महाद्वीप? (Zealandia : World's 8th Continent?)



दुनिया में 8 महाद्वीप हैं सुनकर चौंक गए सुनने में भले ही ये बात आशचर्य जनक लगे लेकिन ये सच है..... दक्षिणी प्रशांत महासागर की लहरों में 3500 फ़ीट नीचे छुपा है दुनिया का ये आठवां महाद्वीप... .

आज DNS कार्यक्रम में हम जानेंगे इसी आठवे महाद्वीप की.. ये कहाँ है...और बहुत सी महत्वपूर्ण बातें....

वैज्ञानिको ने इस डूबे हुए महाद्वीप को ज़ी लेंडिया नाम दिया है....विश्व में ज्ञात रूप में सात महाद्वीप हैं जिसमें अन्टार्टिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया,अफ़्रीका, यूरोप, दक्षिणी अमरीका और उत्तरी अमरीका शामिल है...जहाँ वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने न्यूजीलैंड तथा इसके निकट महासागरीय सतह के नीचे एक आठवें महाद्वीप, ज़ीलैंडिया, के अस्तित्व की पुष्टि की थी....हालांकि इस महाद्वीप की खोज वैज्ञानिको ने 2017 में ही कर ली थी लेकिन इसका मानचित्रण न हो पाने की वजह से इसकी चौड़ाई के बारे में सटीक अनुमान नहीं लग पा रहा था….बीते सोमवार को न्यू ज़ीलैण्ड के जी ऍन एस साइंस के शोधकर्ताओं ने घोषणा की की उन्होंने महाद्वीप के रूप और आकार का पता लगा लिया है…

इन शोधकर्ताओं ने मानचित्र को एक वेबसाइट पर डाल दिया है जिससे इसके ज़रिये लोगों को इस महाद्वीप की जानकारी आभासी तौर पर हासिल हो सके.. खोजी दल के अगुवा निक मोर्टिमर और उनके सहयोगियों ने इस महाद्वीप के इर्दगिर्द समुद्र ताल की गहराई इसकी संरचना और जी लेंडिया टेकटोनिक प्लेट की सीमाओं की स्थिति को रेखांकित किया …मानचित्र के ज़रिये कई नयी सूचनाएं प्रकाश में आईं हैं .इन सूचनाओं में महाद्वीप के बनने और लाखों साल पहले इसके पानी में डूबने जैसी जानकारियों को साझा किया गया है…जीलेंडिया का इलाका क्षेत्रफल में तकरीबन 50 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है . यह ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के क्षेत्रफल के आधे भाग के बराबर है .लेकिन इस महाद्वीप का महज़ 6 फीसदी ही समुद्र तल के ऊपर है बाकी भाग समुद्र तल के नीचे डूबा है…..

यही वजह है की वैज्ञानिकों को इसका सर्वेक्षण करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है…..इस मानचित्र के ज़रिये इस डूबे हुए महाद्वीप को समझने में काफी मदद मिली…..मोर्टिमर और उनके दल ने महाद्वीप और इसके आस पास के समुद्र तल का गहनता से अध्ययन किया. इसके आधार पर तैयार किया गया मानचित्र महाद्वीप पर मौजूद पहाड़ों और समुद्र तल तक उठे हुए रिज को बारीकी से दिखाता है….

इसके अलावा इस मानचित्र में समुद्री तट रेखा तटीय सीमा और समुद्र के भीतर पायी जाने वाली संरचनाओं को भी दिखाया गया है.....यह मानचित्र उस वैश्विक पहल का हिस्सा है जिसमे पृथ्वी के पूरे समुद्र तल को 2030 तक मानचित्रित करने की योजना है.....

जी ऍन एस के वैज्ञानिकों ने एक दूसरा नक़्शा भी बनाया है जिसमे पानी के भीतर मौजूद महाद्वीप की बनावट उसकी परत , भूपर्पटी की संरचना और उसकी आयु और इसके बीच स्थित मुख्य दरारों के बारे में बताया गया है....आमतौर पर महाद्वीप की संरचना में भूपर्पटी महासागरों के मुकाबले पुरानी होती है . इस मानचित्र में महासागरीय सतह को नीले जबकि महाद्वीपीय सतह को लाल या पीले रंग से दर्शाया गया है....

ज्वालामुखी को इस मानचित्र में लाल त्रिभुजों के माध्यम से दर्शया गया है....इस मानचित्र में जी लेंडिया महाद्वीप और इसके इर्द गिर्द मौजूद टेकटोनिक प्लेटों को भी दर्शाया गया है... इसके अलावा कौन सी प्लेट किस तरफ जा रही है और किस प्लेट के नीचे कौन सी प्लेट जा रही है इसके बारे में भी बताया गया है...जीलेंडिया महाद्वीप की परिकल्पना महज़ 25 साल पुराणी है हालांकि भूगर्भवेत्ता ब्रूस लुएंदिक ने इस शब्द को साल 1995 में इज़ाद किया था....लुएंदिक ने बताया की जी लेंडिया शब्द शुरुआत में New ज़ीलैण्ड और इसके आसपास के छोटे मोठे द्वीपों के लिए इस्तेमाल किया जाता था .लाखों साल पहले ये भाग गोंडवाना लैंड से अलग हो गया था और धीरे धीरे इसका काफी हिस्सा पानी के नीचे दफ़न हो गया

गौरतलब है की धरती जैसी आज दिखाई देती है वैसी पहले नहीं थी .धरती पर मौजूद महाद्वीप और महासागर पहले यूँ नहीं थे जैसे आज दिखाई देते हैं....हमारी धरती पर पहले एक सुपर कांटिनेंट मौजूद था जिसे पैंजिया के नाम से जाना जाता था . वक़्त के साथ यह विशालकाय महाद्वीप दो भागों में बाँट गया . उत्तर वाला खंड लॉरेशिया कहलाया और इससे यूरोप एशिया और उत्तरी अमेरिका जैसे महाद्वीपों का निर्माण हुआ जबकि दक्षिणी भाग जिसे गोंडवानालैंड कहा गया . इससे दक्षिणी महाद्वीपों का जन्म हुआ ....

धरती के भीतर और बाहर बलों के कारण इन विशाल भू भागों में उथल पुथल चलती रही और इस वजह से जी लेंडिया नामक महाद्वीप तकरीबन 5 करोड़ साल पहले गोंडवाना से अलग होकर समंदर के नीचे चला गया...2017 तक जी लेंडिया को महाद्वीप का दरज़ा नहीं दिया जाता था इसे मेडागास्कर की तरह एक छोटा द्वीप माना जाता था . लेकिन इसमें महाद्वीप का दर्ज़ा पाने की सारी खुबिया मौजूद हैं जैसे स्पष्ट सीमा रेखा , 10 लाख किलोमीटर क्षेत्रफल और समुद्र के परत से मोटी परत....