(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) Cycles4Change चैलेंज (What is "Cycles4Change" Challenge?)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) Cycles4Change चैलेंज (What is "Cycles4Change" Challenge?)



हाल ही में, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 'Cycles4Change चैलेंज' के लिए पंजीकरण की शुरुआत की है। इस चैलेंज के जरिए भारतीय शहरों में साइकिल चालन से जुड़े पहलों को शीघ्र ही लागू करने की दिशा में इन शहरों को बढ़ावा दिया जाना है. चैलेंज को लॉन्च करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ‘भारत सरकार उच्च गुणवत्ता वाली परिवहन प्रणाली विकसित करने में शहरों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

डीएनएस में आज हम Cycles4Change चैलेंज के बारे में जानेंगे और साथ ही समझेंगे इससे जुड़े कुछ दूसरे महत्वपूर्ण पक्षों को भी…….

'Cycles4Change चैलेंज' की शुरुआत आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा 25 जून, 2020 को की गई थी.. इसका प्रमुख मकसद भारतीय शहरों का सतत विकास करना है। भारतीय शहरों में साइकिल चालन को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि शहरों में उस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर हों और सरकारों द्वारा लोगों को प्रेरित करने के लिए इस दिशा में पर्याप्त कदम उठाए जाएं। इसीलिए, केंद्र सरकार ने राज्यों, शहरों और केंद्र शासित प्रदेशों आदि को बढ़ावा देने के लिए 'Cycles4Change चैलेंज' जैसे कदम उठाने की योजना बनाई है। इस चैलेंज में स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत सभी शहर, प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी और 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले देश के सभी शहर भाग ले सकेंगे।

चैलेंज का मकसद शहरों को अपने आम नागरिकों और विशेषज्ञों के साथ जुड़ने में मदद करना है। इससे साइकिल चलाने की आदतों को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण विकसित किया जा सकेगा। इसीलिए इस पहल के तहत शहरों को नागरिक समाज संगठनों (CSOs), विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल में एक बात गौर करने लायक है कि इसके तहत आम नागरिकों का सहयोग लिया जाएगा और यह सहयोग शहरों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

इस चैलेंज का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जाएगा। इसका पहला चरण अक्टूबर, 2020 तक क्रियान्वित किया जाएगा, जबकि दूसरा चरण मई 2021 तक क्रियान्वित किया जाएगा। पहले चरण में, सभी शहर साइकिल चलाने की प्रथा को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी जरूरी रणनीति तैयार करने के लिये जल्दी से जल्दी कदम उठाने के लिए काम करेंगे। इसके बाद दूसरे चरण में कुल 11 शहर चुने जाएंगे और उनसे जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इन योजनाओं में जरूरी सुधार करने के लिये 1 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। साथ ही, इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों से दिशा-निर्देश भी प्रदान किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह चैलेंज आम नागरिकों, विशेषज्ञों, साइक्लिंग समूहों, साइकिलों का निर्माण और उनकी बिक्री करने वाले व्यापारियों आदि को एक इकाई में जोड़ने का एक बेहतरीन कदम साबित होगा। इसके जरिए शहरों में सतत् परिवहन की अवधारणा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह पहल ना केवल शहरों में सक्रिय गतिशीलता को प्रोत्साहित करेगा बल्कि लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रखने में भी काफी कारगर साबित हो सकता है।

हाल ही में, इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसपोर्टेशन एंड डवलपमेंट पॉलिसी यानी ITDP ने कोरोना काल के दौरान साइकिल के इस्तेमाल को लेकर एक सर्वे किया है। इस सर्वे के मुताबिक, लॉकडाउन के पूरी तरह से खत्म होने के बाद दुनिया भर के बड़े शहरों में साइकिल के इस्तेमाल में 50-60 फ़ीसदी की वृद्धि हो सकती है। इस अवसर का लाभ उठाने के मकसद से दुनिया भर के बड़े शहर अपने साइकिल नेटवर्क के विस्तार के बारे में योजना बना रहे हैं,मसलन पेरिस ने अप्रैल महीने में तकरीबन 650 किलोमीटर लंबे साइकिल मार्ग के निर्माण का ऐलान किया था।

तमाम एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय शहरों के लिये भी यह एक बेहतरीन अवसर है। वे साइकिल जैसे स्वच्छ और स्वस्थ परिवहन साधन का इस्तेमाल करने के लिये आम लोगों को प्रोत्साहित कर सकते हैं और इस संबंध में सभी हित धारकों को एक अनुकूल वातावरण का निर्माण करना चाहिए..