(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद (Virtual Petersburg Climate Dialogue)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद (Virtual Petersburg Climate Dialogue)



हाल ही में भारत ने पहले ‘वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ में शिरकत की । इस में भारत की अलावा 30 अन्य देशों ने भी जलवायु में होने वाले बदलावों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की । गौर तलब है की यह ‘पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ का ग्‍यारहवाँ सत्र है। पहले वर्चुअल डायलाग में भारत की और से केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भाग लिया ।

आज की DNS में हम जानेंगे वर्चुअल पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ की बारे में और इसमें किन मुद्दों पर बातचीत हुई और क्या फैसले लिए गए ।

पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद में भारत 30 देशों के साथ संवाद में शामिल हुआ। इस संवाद का मकसद कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद अर्थव्यवस्था और समाज को वापस ढर्रे पर लाने की चुनौती से उबरने के तरीकों पर गौर करना, सामूहिक लचीलेपन को बढ़ावा देना तथा जलवायु में आये बदलावों की मद्देनज़र कार्रवाई को बहाल करने के साथ-साथ खास तौर पर उन लोगों की मदद करना था जो सबसे कमजोर तबके से आते हैं।'

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पूरी दुनिया एकजुट होकर कोविड-19 के टीके की तलाश कर रही है । ऐसे में सभी देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने की लिए ऐसे संसाधनों की तलाश करनी चाहिए जिनका कम से कम असर पर्यावरण पर पड़े । इसके अलावा ये सभी संसाधन आम आदमी की पहुँच में भी होने चाहिए ।

‘पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद’ को साल 2010 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की पहल पर शुरू किया गया था। साल 2009 में हुई कोपेनहेगन जलवायु वार्ता की किसी अंतिम नतीजे पर न पहुँचने की बाद ये फैसला लिया गया था ।तब से लेकर अब तक पीटर्सबर्ग जलवाय संवाद का आयोजन हो रहा है । लेकिन दुनिया में फ़ैली वैश्विक महामारी की मद्देनज़र इस संवाद को पहली बार आभासी मंच से आयोजित किया गया । गौर तलब है की यह पहला वर्चुअल जलवायु संवाद था । इसके अलावा यह पीटरबर्ग जलवायु संवाद का 11 वाँ सत्र था। इस जलवायु संवाद की मेजबानी साल 2010 से ही जर्मनी कर रहा है ।

इस संवाद की सबसे बड़ी खासियत है कि UNFCCC के आने वाले सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाला देश इस डायलाग की सह-मेजबानी करता है। इस बार जर्मनी की सह मेज़बानी करने वाला देश ब्रिटैन था ।गौर तलब है कि ब्रिटेन ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन’ UNFCCC के तहत आगामी कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़- 26 या COP २६ की अध्यक्षता करेगा । पीटर्सबर्ग संवाद में ३० देशों की प्रतिनिधियों और नेताओं ने हिस्सा लिया ।

ऐसे वक़्त में जब पूरी दुनिया एक लाइलाज महामारी से जूझ रही है और कई देशों की अर्थव्यस्था का ढांचा चरमरा गया है इस संवाद की अहमियत और भी ज़्यादा हो जाती है । इस संवाद में UNFCCC के तहत अपनाए गए ‘पेरिस समझौते’ पर साल 2020 के बाद अपनाई जाने वाली रणनीति की तैयारियों पर भी चर्चा हुई ।

भारत ने इस संवाद में अपना पक्ष रखते हुए कहा की पर्यावरणीय तकनीकी और प्रौद्योगिकी तक सभी की खुली पहुँच होनी चाहिए । इसके अलावा इन्हे आम जनता तक किफायती कीमत पर मुहैया कराया जाना चाहिए । इसके अलावा सीबत की इस दौर में विकासशील देशों को तुरंत 1 ट्रिलियन डॉलर का अनुदान देने की योजना तैयार की जानी चाहिए । भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया । इसके साथ ही इस क्षेत्र में नए रोज़गार की मौकों को मुहैया कराये जाने का भी पक्ष रखा ।

पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, पर्यावरण मंत्री ने भारत-जर्मनी द्विपक्षीय वार्ता में भी हिस्सा लिया। जर्मनी का प्रतिनिधित्व वहां के संघीय पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मंत्री स्वेन्जा शुलज़े ने किया । यह वार्ता वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हुई । वार्ता की दौरान जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग सहित तमाम विषयों पर चर्चा की गई।