(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पोस्टल बैलेट (Postal Ballot System)


(डेली न्यूज़ स्कैन - DNS हिंदी) पोस्टल बैलेट (Postal Ballot System)


महत्वपूर्ण बिंदु

हाल ही में केंद्र सरकार ने मताधिकार के दायरे को बढाने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर, पोस्टल बैलेट सुविधाओं (Postal Ballot Facilities) के संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किये हैं।पोस्टल बैलेट सुविधा के दायरे में वैसे मतदाता आते है जो किसी विशेष परिस्थितियों के कारण मतदान देने की प्रक्रिया में अनुपस्थित रह जाते हैं.....

आज के डीएनएस में हम जानेंगे पोस्टल बैलेट सुविधा क्या है साथ ही समझेंगे इसके अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को

चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने को लेकर, प्रतिबद्ध सरकार ने, नागरिकों को पोस्टल बैलेट सुविधा देने का फैसला किया है..इस कदम को सार्वभौमिक मतदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है...सरल शब्दों में अगर कहा जाए तो पोस्टल बैलेट सुविधा ऐसे मतदाताओं को प्रदान की जाएगी जो किसी निर्दिष्ट(Specified) सेवा में कार्यरत होने के कारण अथवा दिव्यांग या वरिष्ठ नागरिक होने के कारण मतदान केंद्र तक पहुँचने में असमर्थ होते हैं या किसी करणवश अनुपस्थित रह जाते हैं।पोस्टल बैलेट ऐसे लोगों को डाकपत्र के माध्यम से मताधिकार का प्रयोग करने की सुविधा प्रदान करती है।

इस सन्दर्भ में इस बात को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है कि सरकार ने पोस्टल बैलेट की संकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सबसे पहले अनुपस्थित मतदाता की अवधारणा को परिभाषित किया है ताकि इसे चुनाव प्रक्रिया में स्पष्ट तौर पर शामिल किया जा सके... Conduct of Election Rules, 1961 अनुसार अनुपस्थित मतदाता वे मतदाता हैं जो सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना में उल्लिखित, सेवाओं में कार्यरत हैं अथवा वरिष्ठ नागरिक या दिव्यांग की श्रेणी में आते हैं।इस अधिनियम के अनुसार दिव्यांग उन व्यक्तियों को माना जाएगा जिन्हें मतदाता सूची में दिव्यांग के रूप में दर्शाया गया है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में वो लोग आएँगे जिनकी आयु 80 वर्ष से अधिक है तथा जो ‘अनुपस्थित मतदाता’ की श्रेणी में आते हैं।

पोस्टल बैलेट से मतदान की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सबसे पहले अनुपस्थित मतदाता को आवेदन करना होगा..इसके लिए इन मतदाताओं को 12D फॉर्म भरना होगा..फॉर्म भरने के बाद इसका सत्यापन निर्दिष्ट नोडल अधिकारी द्वारा (विकलांग तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए नहीं) किया जायेगा साथ ही इसे चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पाँच दिन के भीतर रिटर्निंग ऑफिसर के पास भेजना भी होगा।

आपको बता दें कि अनुपस्थित मतदाता के मामले में, पोस्टल बैलेट केंद्र को वापस करना होगा ताकि नियम 27 के, उप-नियम 27F के आधार पर मतदान को दर्ज किया जा सके।

पोस्टल बैलेट की इस सुविधा के विषय में नागरिकों में जागरूकता बढाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग ने स्वीप (Systematic Voter’s Education and Electoral Participation- SVEEP) कार्यक्रम का सहारा लिया है..आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ‘स्वीप’ कार्यक्रम मतदाता जागरूकता तथा मतदाता साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये साल 2009 में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रारंभ किया गया एक कार्यक्रम है। स्वीप कार्यक्रम का लक्ष्य योग्य एवं पात्र मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया के महता से अवगत कराकर उन्हें वोट देने की ओर प्रेरित करना है ताकि सही मायनों में सहभागी लोकतंत्र की स्थापना की जा सके।

भारत का निर्वाचन आयोग स्वीप कार्यक्रम के अंतर्गत मतदाताओं को पोस्टल बैलेट की इस नई पहल से अवगत कराने के लिये व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहा है ताकि मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित न रह जाएँ।

भारत का निर्वाचन आयोग अनुपस्थित मतदाता की सभी श्रेणियों के मतदाताओं के लिये सरल तथा सहज मताधिकार प्रयोग करने की प्रकिया उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। पोस्टल बैलेट की इस पहल से इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि वरिष्ठ नागरिक तथा दिव्यांग व्यक्ति भी अपने मताधिकार का सहज रूप से प्रयोग कर सकेंगे।परन्तु पोस्टल बैलेट की सुविधाओं को स्थापित करने के सन्दर्भ में, आवश्यक बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं का सृजन करना तथा इसके लिए कानूनी रुपरेखा तैयार करना एक चुनौती होगी।